कुसुम ने आगे बढ़ कर सुजाता को अपने गले से लगा लिया..
” आप से एक बात कहे भाभी!! नीचे देखने वाले दोनों लड़के कितने भी सुंदर हो, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। हम इन दोनों में से किसी से भी शादी नहीं करेंगे।”
सुजाता ने कुसुम को खुद से दूर किया और उसके चेहरे को ध्यान से देखने लगी,
” क्यों नंदरानी? कहीं और कोई छांट रखा है क्या?”
कुसुम धीरे से मुस्कुराने लगी..
उसने धीरे से सुजाता के गाल को चूम लिया।
” हां भाभी!! हम अपने कस्बे में जो नए डॉक्टर साहब आये हैं ना, डाक्टर राजेंदर..।
हम उनसे शादी करेंगे.. और महादेव की कसम हम उन्हीं से शादी करेंगे!”
“हे भगवान.. हमारी नन्द को सद्बुद्धि देना..।
शादी आप जब करेंगी तब करिएगा, अभी तो फिलहाल नीचे चलिए। वरना आपके भाई साहब हमें गोली मार देंगे..।”
मुस्कुरा कर कुसुम अपनी भाभी के साथ नीचे चली आई। नीचे के आंगन में एक तखत पर कुसुम के पिता बैठे हुक्का गुङगुङा रहे थे। उनके पास जमीन पर बैठा नौकर उनके पैरों को दबा रहा था। उनके ठीक सामने की तरफ एक अकेले महाराजा कुर्सी पर चंद्रा बैठा था, और चंद्रा की कुर्सी के ठीक सामने पड़े सोफे पर अखंड और यज्ञ दोनों भाई एक साथ बैठे थे ।
वह दोनों अकेले ही आए थे। सीढी से उतरकर कुसुम अपने बाबू जी के पास पहुंच गई। वह धीरे से हाथ बांधे वहां खड़ी थी कि उसकी मां ने उसे चंद्रा के बगल में लगी एक छोटी कुर्सी पर बैठा दिया।
हालांकि उसकी मां को कुसुम का यह सलवार कुर्ते में सिर्फ उघाङे चले आना, बिल्कुल पसंद नहीं आया। क्योंकि उनके अनुसार यज्ञ और कुसुम की शादी तय हो चुकी थी और फिलहाल अखंड यानी कि कुसुम का जेठ भी अपने छोटे भाई के साथ वहां आया हुआ था।
हालाँकि अखंड ने एक बार भी आंख उठाकर कुसुम की तरफ नहीं देखा। कुसुम की नजर पहले अखंड पर ही पड़ी, और उसके बाद उसने अखंड के बगल में बैठे यज्ञ को देखा और चुपचाप जमीन की तरफ देखने लगी। उसकी मां ने धीरे से उसके कानों के पास आकर उसे बता दिया की नीली कमीज वाला लड़का ही यज्ञ है।
कुसुम ने भी धीरे से गर्दन हिला दी ।
यज्ञ ने कुसुम की तरफ देखा और उसके बाद मुस्कुराकर अपने बड़े भाई की तरफ देखने लगा। अखंड अब भी उस विशाल अट्टालिका में ऊपर बने झरोखो को देख रहा था…
यह हवेली काफी पुरानी थी, और इसमें ऊपर की तरफ छोटी छोटी ढेर सारी खिड़कियां थी…
जिनमे कबूतर बैठे गुटरगूं कर रहें थे..
क्रमशः
