अपराजिता -22

एक बात तो तय थी, अगर चंद्रा भैया को कुसुम के अलावा किसी और से राजेंद्र के बारे में पता चलेगा तो चंद्रा भैया उसे गांव से उठाकर बाहर फेंकने में एक पल की भी देरी नहीं करेंगे।
इसलिए कुसुम यह चाहती थी कि राजेंद्र से एक बार बात हो जाए उसके बाद वह खुद चंद्रा के सामने बैठ कर उसे सारी हकीकत बता देगी। वह जानती थी चंद्रा खुद पर गौरवान्वित पुरुष है …!
उसे अपने राजपूत होने की एक अलग से अकड़ है।

वह अपनी शान में रहता था, बावजूद वह अपनी बहन से बेहद प्यार भी करता था और कुसुम जानती थी कि भले ही गांव भर में वह जात-पात बिरादरी के नाम पर कितने भी अत्याचार कर ले, अपनी बहन के सामने वह सिर्फ एक प्रेमिल बड़ा भाई था। और वह जरूर उसके सामने झुक जाएगा।
इसलिए वह अपने बाबू जी से पहले अपने भैया से यह बात करना चाहती थी, क्योंकि उसे पता था उसके बाबूजी पुराने जमाने के,अक्खड़ और जिद्दी बुजुर्ग थे। और उन्हें समझाने का काम सिर्फ और सिर्फ चंद्रा ही कर सकता था…।

कुसुम अभी सोच ही रही थी कि उसके दरवाजे पर उसकी भाभी ने दस्तक देनी शुरू कर दी। खीझकर कुसुम ने दरवाजा खोल दिया।

” हाय राम राजकुमारी जी अभी तक तैयार नहीं भई? नीचे आपके दूल्हा बाबू आकर बैठे हैं ,चलिए मिल लीजिए..।”

तैयार तो बैठे हैं और कितना तैयार हो ? आंखों में काजल ठूंस लिया है, होठों पर लाल खुनी लिपस्टिक मल ली है, बाल भी भूतनी से खोल कर बिखेर लिए है , परफ्यूम के पूरे कुंड से नहा कर निकल आये हैं, और क्या करना बचा है भाभी..?”

“साड़ी पहनना बाकी है नंदरानी, या सलवार कुर्ते में ही आप अपने होने वाले दूल्हा के सामने चली जाएंगी.. ?
अरे ठकुराइन है जरा तो नाक की लाज रख लीजिये, फटाफट लाइए हम आपको साड़ी पहना देते हैं..!”

“एक ठो बात बताइए भाभी? जब आपको चंद्रा भैया देखने आए थे, तब क्या सच में आप भी साड़ी पहन कर जाना चाहती थी उनके सामने, या कुर्ता ही पहनना चाहती थी..?”

कुसुम की बात पर सुजाता सोचने लगी, उसे अपना समय याद आ गया। उस समय वह भी तो साड़ी नहीं पहनना चाहती थी, लेकिन उसकी मां और उसकी भाभी ने जिद करके उसे साड़ी पहना दी। उसने कुसुम की तरफ देखा, कुसुम को सुजाता के चेहरे के बदलते रंग देखकर अपना जवाब मिल गया था। कुसुम मुस्कुरा उठी।

“एक बात कहे भाभी, जब भी किसी लड़की की दिखाई होती है ना और लड़के वाले उसे देखने आते हैं तो हर लड़की उन्हीं कपड़ों में अपने होने वाले ससुराल वालों के सामने जाना चाहती है, जिन कपड़ों में वह उनके साथ पूरी जिंदगी गुजारना चाहती हैं। वह एक तरह से अपने मन की इस बात को इशारों में अपने होने वाले पति को समझाना चाहती हैं कि वह लंबी चौड़ी साड़ी, सिर के पल्ले और मोटे मोटे सोने के गहनों में लदना नहीं चाहती। बल्कि आरामदायक सलवार कुर्ते के साथ बालों को बांधकर छोटी सी बिंदी लगाकर अपने होने वाले पति के साथ एक आरामदायक जिंदगी चाहती है।
लेकिन इस बात को कभी भी लड़की के ही घरवाले नहीं समझते। वह खुद उस पर दबाव डालते हैं, उस चीज को करने का जो लड़की खुद नहीं करना चाहती।
आप सोचिए एक लड़के और लड़की को शादी के बाद इतनी जिंदगी बितानी होती है, बावजूद उन दोनों के ही माता-पिता उन पर अपनी ख्वाहिशों को इस कदर लाद देते हैं कि लड़का लड़की उन ख्वाहिशों के नीचे दब कर अपनी ख्वाहिशों के मरने का मातम मनाने लगते हैं। और इसी मातम में डूबे अपनी जिंदगी की खुशियों को ढूंढने की जगह एक दूसरे पर तोहमत लगाने लगते हैं।
और यहीं से अपेक्षाएं और अपेक्षाओं का दौर शुरू हो जाता है ।
अरे जिन्हें अपनी जिंदगी जीनी है, उन्हें अपने हिसाब से कदम बढ़ाने तो दो। उन्हें मौका तो दो, अपने छोटे-छोटे सपनों को फूल बनकर विकसित होने का। उनके सपनों की खुशबू में उन्हें जीने तो दो। लेकिन नहीं, ससुराल हो या मायका लड़की के कंधों पर सब इतनी सारी जिम्मेदारी लाद देते हैं कि, वह कसमसा कर रह जाती है। इसीलिए तो लड़कियां शादी से इतना भागती हैं…।”

गहरी सी सांस लेकर सुजाता वही पलंग पर बैठ गई।

” बोल तो आप बहुत सही रही है नंदरानी जी, लेकिन हम लड़कियों की किस्मत भी तो यही है। वक्त पर शादी ना हो तो हम भले अपने माता-पिता पर बोझ हो या ना हो आसपास के लोग ही ताना मार मार कर जीवन दुभर कर देते हैं।
हम भी तो पढ़ना चाहती थी, इतना शौक था हमें कि हम किसी अस्पताल में नर्स का काम करें।
घर पर जब हमारे बाबूजी ने सुना तो कहते हैं कि दूसरों का गू मूत उठाओगी शर्म नहीं आएगी? और बस महीना भर के अंदर हमारे लिए रिश्ता ढूंढा गया और आपके भाई से फेरे करवा दिए गए।


पता नहीं घर वालों को ऐसा लगता है लड़की अगर अपना सपना बता भी दे तो, वह सोचने लगते हैं कहीं लड़की अपना सपना पूरा करने के लिए घर से भाग ना जाए?
खैर, हम दुआ करेंगे कि हमारे ननंद के साथ ऐसा ना हो। वैसे देखने सुनने में दोनों लड़के बहुत अच्छे हैं। हमें तो बड़ा भाई ज्यादा पसंद आ रहा है, पर सुना है कि उसने ब्रह्मचारी रहने की कसम खा रखी है। छोटे वाले के लिए रिश्ता आया है आपका। देखने सुनने में तो लग रहा है कि लड़का समझदार होगा। अब बाकी सब महादेव की मर्जी…।”

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