अपराजिता -22

   वह मानव के आने के बाद इतनी हड़बड़ी में अपने ससुराल से निकली कि जलाई हुई कैंडल्स बुझाना भी भूल गई थी। इसीलिए शायद अपने रूम में घुसते ही अथर्व को उसकी तैयारियों का आभास हो गया होगा..।
लेकिन तभी उसके दिमाग में यह बात आई कि कहीं अथर्व से पहले उसका छोटा भाई आरव या उसकी सास  उसके कमरे में घुस जाते तो?
        पता नहीं वह लोग उसके बारे में क्या सोचते? उसकी सास सोचती कैसी बेशर्म लड़की है, खुद ही अपने पति को रिझाने के लिए मरी जा रही है। यह सोचते ही रेशम के कान जलने लगे। उसने बड़ी मुश्किल से अथर्व की तरफ देखा और अपने गले को खखार कर खुद को सवाल पूछने के लिए तैयार करने लगी..
लेकिन उसके कुछ बोलने के पहले अथर्व बोल पड़ा..

” पूछो क्या पूछना चाहती हो..?”

हे भगवान यह आदमी कैसे हर एक बात समझ जाता है? इसे दिमाग पढ़ना तो नहीं आता कहीं?
ऐसा हुआ तब तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी..!

” नहीं मुझे किसी का मन पढ़ना नहीं आता, अब बताओ क्या जानना चाहती हो..!”

अथर्व बड़े मजे से उसे छेड़ रहा था, रेशम ने वहीं रखे पानी के गिलास को उठा लिया…
एक घूंट पानी पीने के बाद उसने अथर्व की तरफ देखा..

” हमारे कमरे में आपके आने से पहले कोई आया था क्या..?”

” अब यह मुझे क्या मालूम..? मम्मी से पूछना पड़ेगा, पूछ लूँ ?”.

“नहीं नहीं… बिल्कुल नहीं.. !”

“क्यूँ ?”

“फिर वो क्या सोचेंगे ? उन्हें लगेगा हम ऐसा क्यों पूछ रहे हैं.. तो..?”

” तुम मुझे बता दो कि तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो..?”

” अरे बस वही… जैसे तैयारियां मैंने की थी, वह सिर्फ आपके देखने के लिए थी! अगर मम्मी जी वहां आ जाती या देख लेती…तो… मेरा मतलब..  क्या सोचेंगी मेरे बारे में..?”

अथर्व रेशम के नजदीक सरक आया…

” क्या सोचेंगी तुम्हारे बारे में..?”

अपनी नशीली सी आवाज में रेशम को देखते हुए उसने पूछा और रेशम पसीना पसीना हो गई..

“सोचेंगी… कितनी निर्लज्ज.. मतलब बेशरम.. बहु.. !”

अटक अटक कर रेशम अपनी बात रख रही थी और उसकी बात सुनकर अथर्व ने एक जोर का ठहाका लगा दिया..

” सोचने दो…  कम से कम किसी की सोच में तो तुम बेशर्म बन जाओ!
चिंता मत करो, तुम चाहो तो मैं उन्हें बता दूंगा कि उनकी बेशरम बहू ने अब तक उनके महा बेशर्म बेटे को एक ढंग की किस तक नहीं दी है.. !”

“छी… कैसे बोलते हैं आप !”

“ओह्ह गॉड!! तुमने वाकई डाक्टरी की है..?  यक़ीन नहीं होता…! कितनी छुईमुई सी हो यार..!
और मैं जैसे ही करीब आता हूं और भी ज्यादा खुद में सिमट जाती हो..
तुम्हारी यहीं अदा मेरी जान निकाल कर ले जाती है, रेशम मत रुको ना अपने मायके में, चलो ना मेरे साथ…!”

सत्यानाश !! फिर से इस आदमी पर प्यार का बुखार चढ़ गया… अब ये पूरी दुनिया भूल कर कुछ ना कुछ ऐसी हरकत ज़रूर करेगा, जिससे वो और शरम से गड़ जायेगी…
मायके में आकर सबके सामने उसे ऐसे छोड़ जाता है, और सिर्फ छेड़कर चुप हो जाए तो अलग बात है..

     अपनी इतनी मदहोश करने वाली आवाज में उसके कानों में घुसकर कह रहा है मायके में मत रुको, साथ चलो। अब यह सुनने के बाद वह क्या कोई पत्थर दिल लड़की होगी तो वह भी धर्म संकट में पड़ जाएगी कि क्या करें ?

एक तरफ मानव और दूसरी तरफ अथर्व ! किसकी बात को माने वह.. ?
उसे अपने भाई पर पूरा भरोसा था अगर वह एक बार जाकर उससे कह देगी कि मजबूरी में उसे ससुराल जाना पड़ेगा तो वह बेचारा कुछ नहीं कहेगा! लेकिन क्या बहाना करके वह मानव से बोलेगी कि उसे जाना है! जबकि उसकी सास खुद उसे रात भर यहां रुकने की परमिशन दे चुकी है…

परेशान सी रेशम ने अपने माथे से पसीना पोछा, और मानव को ढूंढ ही रही थी कि अथर्व ने उसके हाथ पर अपनी हथेली रख दी..

” टेंशन मत लो रेशम!! तुम्हें आज रात नहीं लेकर जाऊंगा। जब इतना पेशेंस रखा है तो, एक रात और रुक जाऊंगा।
तुम आराम से अपने मम्मी पापा की एनिवर्सरी के बाद उन्हें वक्त दो और चाहो तो कल भी यही रुक जाओ..!”

रेशम ने गहरी सी सांस भरी, और अथर्व की तरफ आभार भरी नजरों से देखने लगी..

“थैंक यू !”

” अरे पागल बच्चा, इसमें थैंक यू की क्या बात है यार? तुम बीवी हो मेरी.. अब से तुम्हारी हर रात पर मेरा हक है..। पूरी जिंदगी हमें एक दूसरे की बाहों में ही बिताना है। तो एक आध रात अगर तुम अपने मायके रुक भी जाती हो तो, यह कोई बहुत बड़ा एहसान नहीं है ।
यह जिंदगी है बाबू, और हमें एक दूसरे को समझ कर और एक दूसरे के परिवार को साथ लेकर ही चलना है। समझ रही हो ना।
तुम्हें यहां रुकने की इजाजत देकर मैं कोई एहसान नहीं कर रहा हूं तुम पर। क्योंकि तुम्हारी जिंदगी जितनी मेरी है, उससे कहीं ज्यादा तुम्हारी है। और हम कितने भी करीब आ जाए, लेकिन एक छोटा सा स्पेस हर एक रिश्ते में होना बेहद जरूरी है। और यकीन रखो मैं तुम्हारे उस पर्सनल स्पेस में कभी आघात नहीं करूंगा।”

क्या था यह लड़का? यह रोज अपनी एक नई अदा से उसे लुभाता चला जाता था। आज की उसकी बातें सुनकर तो वाकई लग रहा था कि इसके पैर छूकर अपनी मांग भर लूं।

अथर्व की बातें सुनकर रेशम की पलके भीगने लगी कि तभी अथर्व  ने वापस उसे टोक दिया।

“रेशु…. आई लव यू… !”

रेशम का दिल किया अपने इस पागल प्रेमी को बाहों में भर लें… उसे इतनी कस के गले से लगा ले कि, फिर कोई उन्हें अलग ना कर पाए..
वो अपनी भरी हुई आँखों से अथर्व को देखने लगी..

“ऐसी आँखों से मुझे मत देखो रेशम.. यूँ लग रहा है आमंत्रण दे रहीं हो.. !”

“किस बात का !”

पूछते ही अपने बौड़म से सवाल पर वो खुद झेंप गयी…
उफ़ वो क्यूँ ऐसे बिना सोचे कुछ भी बोल जाती है… और बाद में बस झेंपने शरमा जाने के अलावा कुछ नहीं बचता..

रेशम के सवाल पर अथर्व मुस्कुरा उठा..

“उफ़.. पागल कर दोगी तुम मुझे… अगर तुम्हारे पास दो घड़ी बैठा तो फिर मैं तुम्हें अपने साथ ले ही जाऊंगा… !”

मुस्कुरा कर अथर्व वहाँ से उठा और मानव के पास चला गया..

रेशम वहीँ बैठी अपने लुभावने से पति को देखती रह गयी..

पार्टी ख़त्म होने पर एक एक कर सारे मेहमान चले गए..
अथर्व भी अपने माता पिता के साथ चला गया.. ।

रेशम और मानव ने अब अपना लाया हुआ तोहफा अपनी माँ और पापा को दिखाया..
इन दोनों की आंखें भी ख़ुशी से झिलमिला गयी…

वो सुंदर सी शाम एक खूबसूरत सी याद में तब्दील होकर ढ़ल गयी…

रेशम की शादी का एल्बम भी आ गया था…।
देर रात तक वो चारों लोग बैठे शादी का अल्बम देखते रहे…।इसके साथ ही बीच बीच में रेशम मेहमानों के दिये तोहफे खोल खोल कर मानव को चिढ़ाती भी रही..

“मानव देख… इतने सारे गिफ्ट मिल गए है कि तेरी शादी में रिटर्न गिफ्ट के लिए मम्मी को कुछ भी खरीदने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। देख यह ग्लास सेट हो गया, यह टीपॉट हो गया। एक तो मिल्टन का वॉटर बॉटल भी मिला है।  एक से एक बेहतरीन तोहफ़े तो है भाई, बस अब तू एक लड़की ढूंढ ले, बाकी तेरी शादी की सारी तैयारी तो हमने कर ही ली  है..!”

” हां चुहिया.. क्यों नहीं ? तेरे ससुराल में तो तेरे मुंह से बोल नहीं फूटता है..। वहां देख कर तो कोई पहचान नहीं सकता कि, यह वही लड़ाकू विमान है जो मायके में हर जगह तबाही मचाये रखता था..।
बताओ कौन बोलेगा कि यह वही महा बिगड़ैल लड़की है, जो अपने मां-बाप की भी नहीं सुनती और हर बात पर टप से झूठ बोलती है…
वहां ससुराल में तो यह साक्षात लक्ष्मी देवी बन जाती है!”

“हाँ फिर… मत सता मेरी लाड़ो को.. यही तो अंतर होता है मायके और ससुराल में। ससुराल कितना भी प्यारा हो लेकिन लड़की अपने असली रूप रंग में अपने मायके में ही रहती है। ससुराल में वह कितनी भी आजाद हो लेकिन एक हल्की सी औपचारिकता की रेखा हमेशा उसे घेरे ही रहती है। और जब तक लड़की का अपना घर बन पाता है तब तक बाल बच्चे पति इन सब की सेवा में अपना लड़कपन पता नहीं कहां भूल जाती है। लेकिन किसी भी उम्र में वह मायके आए, अपनी मां के गले में बाहें डाले वह हमेशा बचपन वाली वही चिरैया बन जाती है जो आंगन में इधर से उधर फुदकती है… समझा पगले..!”

रेशम की मां ने रेशम का ही पक्ष लिया और मानव ने हंसकर अपनी मां के गले में बाहें डाल दी।

एक कबूतर ज़ोर से पंख फड़फड़ाये उड़ा और अचानक अखंड कुछ साल पीछे की अपनी यादोे में चला गया..

” वाह मम्मी!! आज पहली बार तुमने मुझसे ऊपर अपनी बेटी को रख दिया। वरना आज तक तो मैं तुम्हारा राजा बेटा था और यह तुम्हारी शैतान बेटी..।”

रेशम की मां ने हंसकर अपने दोनों बच्चों को अपने सीने से लगा लिया…।

अगले दिन सुबह मानव ने ऑफिस जाते समय उसे उसके ससुराल छोड़ देने की बात कही थी। लेकिन रेशम का सुबह-सुबह ससुराल जाने का मन नहीं था। वैसे भी उस वक्त अथर्व घर पर मौजूद नहीं होता था। इसलिए उसने अपनी मां से कह कर अपनी सासू मां को मैसेज करवा दिया था कि वह शाम तक लौटेगी..।

उस दिन रेशम अपनी मां के गले में बांहें डाले उन्हीं के पास थक कर सो गई..

******

सुबह से कुसुम कुमारी पर उसकी मां और भाभी कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो रही थी, उसकी मां बेसन और मलाई को घोलकर कटोरी में लिए उस के सामने खड़ी थी..

” ऐ बिटिया जे बेसन लगाकर नहा लो,बढ़िया रंग चमक जाएगा..।”

” अम्मा… बेसन लगाने से हमारा रंग नहीं चमकेगा, हम साँवले हैं, और साँवले ही रहेंगे,समझी।।
      हमें तो हमारा यही रंग बड़ा प्यारा लगता है। और बहुत चमकीला भी लगता है। और हम एक राज की बात बताएं, लड़कों को ना यही सांवला रंग ज्यादा भाता है उन्हें बहुत ज्यादा गोरी लड़कियां पसंद नहीं आती…।”

” कैसी कैसी बातें करने लग गई हो, तुम्हारे कमरे में जो टीवी लगा है ना,उसे उठाकर फेंक देंगे बाहर!  आजकल दिनभर टीवी पर उठ पटांग देखती हो, और वही सब तुम्हारे दिमाग में चलता रहता है..।”

” उटपटांग देखने के लिए हमारे पास मोबाइल है अम्मा और उसमें इंटरनेट भी है..।
अब तुम जाओ और यह बेसन भी अपने साथ ले जाओ…
और सुनो इससे तुम नहा लेना!
वैसे भी तुम इतनी गोरी हो ना कि बेसन तुमसे छू कर थोड़ा और गोरिया जाएगा..।”

” चुप कर पगलिया, और जा तैयार हो जा..!”

कुसुम की अम्मा नीचे चली गई और कुसुम ने अपने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया…।
पिछली रात से वो सिर्फ इसी सोच में गुम थी की यज्ञ को कैसे टाला जाए। यज्ञ के सामने अगर वो अपने डाक साब की बात बता दे तो यज्ञ को टाला जा सकता था।
लेकिन यह करना इतना आसान नहीं था ।
यज्ञ भी ठाकुर था और उसकी भी अपनी आन बान शान थी। वह इस तरह से किसी लड़की से नापसंदगी सहन कर पाएगा या नहीं, यह सोचना कुसुम के लिए मुश्किल हो रहा था। कहीं यज्ञ को सब कुछ बता देने पर ऐसा ना हो कि यज्ञ चंद्रा भैया से सब कुछ बोल दे ।

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