अपराजिता -22
रेशम का मन फ़ूल सा हल्का हो गया था… उसने अपने भाई के कंधे पर हाथ रखा और उससे बातें करते हुए मायके की तरफ बढ़ गयी..
उसे लगा था मम्मी पापा की एनिवर्सरी बस वहीं चारों मनाने वाले हैं, लेकिन यहाँ तो मानव ने अच्छी खासी भीड़ जमा कर रखी थी.. तो ये सरप्राइज था उसके लिए..!
ग्रैंड पार्टी !!
” मानव यह तो अच्छी खासी भीड़ जमा कर रखी है तूने तो यह था सरप्राइज..?”
“और क्या.. ? तुझे याद नहीं है, मम्मी पापा की 25वीं एनिवर्सरी हम नहीं मना पाए थे। उसी साल नानू की डेथ हो गई थी ना। तो मम्मी का मन नहीं किया था ।
इसलिए वो एनिवर्सरी पोस्टपोन हो गई थी। उसके अगले साल भी हम किसी कारण प्लान की हुई एनिवर्सरी नहीं मना पाए थे। तो इसलिए इस साल मैंने सोचा कि मम्मी पापा की ग्रैंड एनिवर्सरी सेलिब्रेशन करते हैं..! नीचे मैं मेहमानों को देख रहा हूं तू फटाफट अपने कमरे में जाकर रेडी हो जा..!”
” और मम्मी पापा कहां है?”
मानव रेशम अभी घर के दरवाजे पर ही थे और वहां से झांक कर रेशम को अपनी मां नजर नहीं आई, इसलिए उसने मानव से सवाल पूछ लिया..
” उन दोनों के लिए भी सरप्राइज है। उन्हें शाम को मैंने टैक्सी बुक करके पहाड़ी वाले मंदिर दर्शनों के लिए भेज दिया है। बस अब वह भी वापस लौटते ही होंगे..!”
