अपराजिता -20

“मतलब ये चंद्रा भैया खुद को यमराज का उत्तराधिकारी घोषित किये बैठे हैं ! अब इन्हें बताना पड़ेगा की यमराज की वसीयत के अकेले हक़दार वो नहीं है.. उसमें आधे से अधिक का हक़दार अनिर्वान भारद्वाज है.. !”

“वाह वाह ! क्या डायलॉग चिपकाया है.. मज़ा ही आ गया.. !”
.
अनिर्वान की बात पर उसी वक्त वहाँ पहुंची एक लड़की ताली बजाने लगी..
उसकी तारीफ सुन कर अनिर्वान के साथ ही बाकी के लोग भी उसे देखने लगे..

“आपकी तारीफ ?”

अनिर्वान के सवाल ओर वो लड़की मुस्कुरा उठी..

“अब मैं खुद अपनी तारीफ करूँ, अच्छा लगता है क्या ?”

बाबूराव फिक्क से हॅंस दिया..
और अनिर्वान के माथे बल पड़ गए.. वो बाबूराव की तरफ थोड़ा सा झुक गया..

“बाबूराव… इंग्लिश मीडियम आई है.. सोच समझ कर बात करना पड़ेगा.. !”

“जी हुज़ूर !”

“मैडम आप हैं कौन और यहाँ कैसे ?” बाबूराव ने पूछा

“मेरा नाम नेहल है, लेकिन मेरे जानने वाले मुझे प्यार से नेहा बुलाते हैं… मैं पत्रकारिता की पढाई कर रहीं हूँ.. मेरे बॉस ने मुझे इस गाँव में सात महीने रह कर गाँव के रहवासियों पर डॉक्यूमेंट्री बनाने का काम सौंपा है.. समझ लीजिये मेरी इंटर्नशिप है.. ! ये मेरा आईडी है !”

उसने अपना आईडी प्रूफ अनिर्वान के सामने बढ़ा दिया..

अनिर्वान ने एक गहरी सी साँस छोड़ी और उसका कार्ड लेकर देखने लगा…

क्रमशः

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