अपराजिता -20
कुसुम तो दीपक पर धूल उड़ाती उड़ गयी, लेकिन दीपक ख़ून का घूंट पीकर पचा जाने वालों में से नहीं था..।
वो खड़ा हुआ और अपने चेहरे और कमीज़ की धूल झाड़ कर अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गया..
उसने गाड़ी निकाली और चंद्रा भैय्या के ऑफ़िस की तरफ गाडी भगा दी…
चंद्रा भैया अपने ऑफ़िस में नहीं थे..
घर पर मालूम चला कि पंचायत ऑफ़िस में कोई काम अटका पड़ा था, जिसके लिए चंद्रा भैया खा पीकर पंचायत ऑफिस की तरफ निकल गए थे। दीपक भी उसी तरफ बढ़ गया। पंचायत ऑफ़िस के सामने पहुंच कर उसने अपनी गाड़ी खड़ी की, और अंदर दाखिल हो गया। चंद्र भैया कुछ लोगों के साथ बैठे कुछ सलाह मशवरा में लगे हुए थे.. ।
दीपक उनके पैर छूकर एक तरफ खड़ा हो गया। उन्होंने हल्का सा गर्दन हिला कर आशीर्वाद देने का इशारा किया और वापस अपनी बातों में लग गए..
किन्हीं दो परिवारों के बीच का मसला था। दो अलग-अलग परिवार थे, जिनके घर के लड़का और लड़की एक दूजे से ब्याहे गए थे। लड़की को ससुराल में कुछ कष्ट महसूस हो रहा था और जिसके लिए वह अपना ससुराल छोड़कर मायके आ गई थी..।
ससुराल वालों के अनुसार उन्होंने लड़की को मनाने की कोशिश की, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं थी। और इसीलिए मामला सरपंच तक पहुंच गया था। सरपंच के पद पर चंद्रा भैया ही थे…।
बस उसी मसले को सुनने सुलझाने में वो लगे थे..
दीपक से इंतजार नहीं किया जा रहा था और चंद्रा भैया बड़े आराम से मसले को सुनते हुए सुलझा रहे थे। दीपक बेचैनी में इधर से उधर टहल रहा था और यह बात चंद्रा भैया की आंखों से बच नहीं पाई।
मामला निपटाने के बाद उन्होंने यह फैसला सुना दिया कि शादी के बाद लड़की का घर उसका ससुराल ही है तो अगर लड़की बिना पति और ससुराल वालों की मर्जी के अपने मायके आकर रह रही है तो इस पर पूरी तरह से कसूरवार लड़की और उसके घर वाले हैं। इसलिए अगर लड़की अपने पति के साथ अपने घर वापस नहीं लौटी तो उसके मायके वालों पर जुर्माना करके उनका दाना पानी गांव से रोक दिया जाएगा।
