अपराजिता -13

तभी दरवाज़े पर खटका सा हुआ..

“टीशर्ट छोडो, मुझे ही गले से लगा लो… !”

अथर्व की आवाज़ कान में पड़ते ही रेशम ने डर से आंखें बंद कर ली और अथर्व ने पीछे से आकर उसे बाँहों में भर लिया…
उसके कंधे पर अपनी हल्की हल्की सी दाढ़ी चुभाता हुआ वो वापस उसे अपनी बातों से छेड़ने लगा..

“बहुत मिस किया ना मुझे… सॉरी रेशु, इमरजेंसी केस आ गया था, इसी से भैया की शादी में नहीं आ पाया, वैसे मुझे मालूम है की तुमने बहुत बिजलियाँ गिराईं हैं… !”

“कैसे ?” कांपते हुए ही सही रेशम के गले से आवाज़ निकली..

“मेरा जासूस तुम्हारी फोटो खींच कर भेज रहा था.. तुम तो डांस भी बढ़िया करती हो !”

सत्यानाश !! उसका ध्यान इस बात पर क्यूँ नहीं गया की आरव वहाँ अपने मम्मी पापा से पहले ही पहुँच गया था….
वो घर भर के अपने कज़न भाई बहनों के साथ डीजे में झूम रहीं थी तभी आरव ने उसकी तस्वीरें ली होंगी..

हालाँकि वो दस मिनट में ही अपने ससुराल वालों के आने से पहले ही वहाँ से उतर गयी थी, पर वही दस मिनट जानलेवा हो गए..

“तुम्हारी एक और खूबी ने मुझे तुम्हारा फैन बना दिया.. तुम तो डांस भी शरमा शरमा कर रहीं थी… !”

रेशम धीरे से अथर्व की बाँहों से निकल गयी,उसे अथर्व ने अपनी तरफ घूमा लिया..
अथर्व का चेहरा देखते ही रेशम चौंक गयी..
उफ़ कितना थका सा दिख रहा था वो, तो क्या इसका मतलब वो दो दिन से अस्पताल में ही था..

“आप तो बहुत थके हुए लग रहें ? क्या हॉस्पिटल में ही.. !”

“हाँ एक बच्चे का पोइज़निंग केस था.. माँ बाप के डांट देने पर उसने कीटनाशक पी लिया था….
शादी वाले दिन ये ही केस तो आया था, बस उस केस के आने के बाद तो,उसका स्टमक वाश करने के बाद रात भर हम उसे एंटीडोट देते रहें.. पल पल में उसकी पुतलियां चेक करना, इसका पल्स बीपी सब बेलेंस करने में सुबह हो गयी…
सुबह उसकी हालत कुछ सुधरती सी लगी, मैं वापस आने वाला था की फिर वो अनस्टेबल हो गया..
बस पूरा दिन वहीं निकल गया..
अब जाकर बच्चा थोड़ा स्थिर हो पाया है.. !”

“ओह्ह.. खतरे से तो बाहर है ना.. ? उम्र क्या थी बच्चे की ?”
.”पंद्रह सोलह साल का बच्चा था ! हाँ खतरे से बाहर अभी फ़िलहाल तो है ,लेकिन रिफ्लक्स उलटे हुए तो कुछ कहाँ नहीं जा सकता… ।
परसों रात के बाद से सोया नहीं हूँ.. अब तो आंखें खुली रहने से मना कर रहीं.. !”

“ओह्ह आप आराम कीजिये, मैं आपके लिए चाय ले आती हूँ !”

ये क्या हो रहा है मुझे ? मैं तो वाकई अपनी मम्मी जैसी बातें करने लगी.. चार दिन पहले जिसे जानती भी नहीं थी उसके कष्ट से इतनी पीड़ा हो रही की लग रहा कैसे क्या करूँ की इस इंसान की थकान उतार सकूँ.. !

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