अपराजिता -12
सुबह के दस बज रहें थे…
ठाकुर चंद्रभान सिंह तोमर अपने बरामदे के एक तरफ बने ऑफ़िस में ज़मीन से जुड़ा कोई मसला देख रहे थे…
उसी समय कॉलेज जाने के लिए भावना कुसुम को लेने चली आयी..
कुसुम अपने नाना घर से एक दिन पहले ही वापस आई थी.. उसके नाना घर में उसके मामा की लड़की की शादी थी, जिसमे शामिल होने उसे महीने भर के लिए नाना घर जाना पड़ गया था..
हालाँकि उसका इतना लम्बा वहाँ रहने का मन नहीं था, लेकिन घर वालों की ज़िद के आगे उसकी एक ना चली…
घर पर उसकी माँ को मायके जाने कम ही मिला करता था। लेकिन जब से उनके बेटे यानी चंद्रभान का ब्याह हुआ था, तब से बहू के आने के बाद उन्हें थोड़ा बहुत घर से फुर्सत मिलने लग गई थी। और इसीलिए जब उनके भाई की बेटी की शादी लगी तो वह बड़े उत्साह में अपने पति से इजाजत लेकर पूरे 1 महीने के लिए अपने मायके चली गई थी। और अपने साथ ही वह अपनी बेटी कुसुम को भी ले गई थी…।
