उसे समझा समझा कर जब परिवार थक गया, तब सबने सर्वसम्मति से यज्ञ के लिए लड़की देखना शुरू कर दिया था..।
गाँव के पंडित भोलाराम जो रिश्ते में भावना के फूफा लगते थे यज्ञ के लिए कुछ बढ़िया रिश्ते लेकर आये थे..
इंद्रभान की कोठी के अहाते में इंद्रभान बैठे हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे की पंडित भोलाराम चले आये..
अपना कीमती झोला उन्होंने अपने कंधे से टांग रखा था..
इंद्रभान ने उन्हें देख कर उन्हें बैठने का इशारा किया और हाथ औपचारिकता भर के लिए उनके पैरों की तरफ बढ़ा कर अपने माथे से लगा लिए..
उन्होने पैर छुए नहीं लेकिन इशारों से जता दिया कि इतने बड़े ठाकुर होकर भी वो बाम्हनो का सम्मान करने से नहीं चूकते..
सिर्फ इसी बात पर भोलाराम फ़ूल कर कुप्पा हो गए…
“का खबर लाये हैं पंडित जी ?”
“ठाकुर साहब बढ़िया बढ़िया दुइ तीन रिस्ता लाये हैं.. लड़कियां सुंदर है, ऊँचे खानदान से हैं..
इतना कह कर पंडित जी ने पहली तस्वीर निकाल कर ठाकुर जी के सामने रख दी..
पीली साड़ी में और पीली सी नज़र आती दुबली कमज़ोर सी खड़ी लड़की मनहारी गाँव के ठाकुरों की इकलौती कन्या रत्न थी…
तस्वीर देख ठाकुर साहब के माथे बल पड़ गए..
“ऊहूं… लड़की कुछ ज्यादा ही दुबरी नहीं लग रहीं ?”
“शहर से पढ़ कर आई है ना हुज़ूर.. अब घर से बाहर खाना वाना कहाँ घर जैसा मिलता है ! ब्याह के बाद बढ़िया आप के घर का माखन मिसरी खायेगी बदन सही ढ़ल जायेगा.. !”
पंडित जी ने चिरौरी की लेकिन ठाकुर साहब के माथे बल पड़ गए..
“शहर रह कर पढ़ी है ?”
ये सवाल जलते हुए तीर सा पंडित जी के हृदय में चुभा…
“जी हुज़ूर.. !”
इंद्रभान ने सख्ती से गर्दन ना में हिला दी..
“मतलब लड़की मैली हो चुकी… आजकल के लड़के लड़कियों का कोई भरोसा है भला ? छी.. कुछ और दिखाइए.. !”
पंडित जी गाँव के रहने वाले ज़रूर थे पर उन्हें शिक्षा का महत्व पता था.. उन्हें उस लड़की का ये अपमान पसंद तो नहीं आया लेकिन जंगल में रह कर शेर से बैर नहीं कर सकते थे…
अगली तस्वीर इंजीनियरिंग करी लड़की की थी जो फ़िलहाल शहर में मोटे पैकेज पर नौकरी कर रही थी, लेकिन इंद्रभान के खोखले विचार जानने के बाद पंडित जी ने उस तस्वीर को नीचे छिपा दिया..
और कोई तस्वीर है या नहीं देखने के चक्कर में उनके हाथ एक तस्वीर लग ही गयी..
चेहरें पर मुस्कान लिए उन्होने वो तस्वीर निकाल कर इंद्रभान के सामने रख दी…
“ये देखिये ठाकुर साहब… ये कन्या रत्न आपके मुआफ़िक है !”
इंद्रभान ने देखा… तस्वीर में दो लड़कियां खड़ी थी..
एक गोरी सी दुबली सी साधारण कद काठी की मासूम सी शक्ल वाली लड़की थी.. आँखों पर काले फ्रेम का चश्मा चढ़ा था.. शक्ल से ही लड़की पढ़ने लिखने वाली नज़र आ रहीं थी.. उसके ठीक बगल में उसके कंधे पर हाथ टिकाये उससे कुछ लम्बी लड़की खड़ी थी..
पीली बंधेज की छोटी सी कुर्ती के साथ नीला लहरिया पटियाला सलवार पहने खड़ी लड़की के लम्बे बाल कमर तक लहरा रहें थे..
आँखों पर गहरे काजल की रेखा बोलती आँखों को और मुखर कर रही थी..
लड़की का चम्पई रंग खिल कर दिख रहा था…..
पंडित जी ने उसी लड़की पर ऊँगली धर दी और इंद्रभान भी उस तस्वीर को पल भर देख पंडित जी को देखने लगे..
उनका इशारा समझ पंडित जी ने उस लड़की की जानकारी देनी शुरू कर दी..

बहुत अच्छा भाग 👌👌👌