अपराजिता -9
अगले दिन कुसुम कुमारी भावना के घर पहुँच गयी….
भावना के पिता सालों पहले बहरीन गए थे काम करने, और तब से वहीँ थे !
बीच बीच में कुछ पैसे भेज दिया करते थे, उन पैसों से माँ बेटी का काम चल जाया करता था..
भावना की माँ बहुत सीधी घरेलु किस्म की महिला थी, लेकिन भावना शिक्षा के प्रति जागरूक और समझदार लड़की थी..
वो अक्सर अपनी माँ की तरफ से अपने पिता को वापस आने की गुहार लगाया करती थी, पर उनका वही नपा तुला सा जवाब आ जाता, की तुम्हारी शादी के लिए रूपये जोड़ रहा हूँ.. तुम्हारी शादी में ही वापसी होगी !
भावना के पिता कोई खुला खज़ाना उन पर नहीं लुटाते थे..
उसकी माँ गाँव कस्बे में नाम बना रहें सोच कर कोई काम नहीं कर पाती थी। इसी से बहुत बार उन दोनों को पैसो की तंगी हो जाया करती थी, ऐसे में बिना कुछ कहे कुसुम भावना की मदद कर दिया करती थी. .
भावना एहसान जताना चाहे तो कुसुम उसे डपट दिया करती थी..

बहुत अच्छा भाग 👌👌👌