अपराजिता -8

अपराजिता – 8

रेशम और अथर्व को एक बार फिर गठजोड़ कर पूजा में बैठा दिया गया…
लेकिन पूजा में मन किसका लग रहा था..
आज रेशम ने ध्यान से घर को देखा था.. बड़े से हॉल में सोफे एक तरफ को कर के पूजा की व्यवस्था की गयी थी..
घर की साज सज्जा उसी के घर की तरह थी….. घर के ज्यादातर मर्द पीछे लगे सोफों पर ही बैठे थे, उन दोनों को घेर कर औरतें ही बैठी थी… पंडित जी के कुछ भी मांगने जांचने पर मौसी ही दौड़ रहीं थी..!
और अथर्व इन सब से बेखबर रेशम को देखने उसे छेड़ने में मग्न था..।
अपनी कुहनी वो धीरे से उसकी कमर पर फिरा रहा था.. पहली बार उसके ऐसा करते ही रेशम चिहुंक गयी.. उसने अथर्व की तरफ देखा और अथर्व अनजान सा बन उसे देखने लगा..

” क्या हुआ ? कुछ चाहिए ?”

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Seema Kashyap
Seema Kashyap
1 year ago

Nice part

ritakumariverma23
2 years ago

बहुत बेहतरीन भाग 👌👌👌👌👌👌👌