अपराजिता -11

अथर्व ज़ोर से हंसने लगा और रेशम अपनी झेंप छुपाने खिड़की से बाहर देखने लगी….

जल्दी ही वो लोग पार्टी में वापस पहुँच गए..
कुछ देर में सबसे मिल कर अथर्व वापस लौट गया…
रेशम का मन था की वो थोड़ा और रुक जाये लेकिन अगली सुबह उसे अस्पताल भी जाना था.. इसलिए वो चला गया…


इंद्रभान के घर पर पड़ी तस्वीर घर की दादी के हाथ लग गयी..
पंडित भोलानाथ से असल में भावना की माँ ने भावना के लिए लड़का देखने कहा था..
वो अकेली ही उसका पालन पोषण कर रहीं थी..। इसलिए अब वो चाहती थी की समय रहते इस एक ज़िम्मेदारी से भी मुक्ति पा लें..

उन्हें मालूम था भावना उन्हें छोड़ कर जाने को किसी सूरत में तैयार नहीं होगी..
इसीलिए उससे बिना पूछे ही उन्होंने उसके कमरे में रखी उसकी तस्वीर निकाल कर अपने नन्दोई यानी पंडित जी को दे दी थी… |

ये और बात थी कि तस्वीर ब्राम्हण घर में भावना के लिए दिखाई जाने की जगह बड़े ठाकुर के घर पहुँच गयी थी..।
उस दिन इंद्रभान की नाराज़गी से बचने के लिए ही भोलाराम जी ने तस्वीर उन्हें दिखा दी थी..
उन्हें नहीं लगा था कि हर बात पर मीनमेख निकालने वाला ये परिवार इतनी आसानी से उस तस्वीर को पसंद कर लेगा..।

कुसुम सुंदर थी लेकिन उसकी आँखों में गंभीरता की जगह चंचलता थी, जो आज के ज़माने के लड़कों को तो बांध सकती थी लेकिन पूर्वाग्रहों से ग्रस्त लड़के के माता पिता को शायद ही संतुष्ट कर पाती..।
लेकिन जाने कैसे इंद्रभान को यहीं लड़की भा गयी थी..।

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