” आपके लिए बालूशाही लेकर आए हैं, यह खा लीजिए दर्द कुछ कम महसूस होगा..!”
” अच्छा!! तो आपके गांव में दर्द कम करने के लिए इस देसी दवाई का उपयोग किया जाता है, तो फिर टांके लगाते समय आपको भी एक बालूशाही हाथ में पकड़ा देना था। इसे खाती रहती तो आपको पता ही नहीं चलता कि कब टांके लग गए!”
राजेंद्र की बात सुन भावना हंस दी और कुसुम का मुंह लटक गया..
” हमें वाकई बहुत बुरा लग रहा है, हमारी वजह से आपको चोट लग गई…!”
” कोई बात नहीं मैं तो खुद डॉक्टर हूं। अपना इलाज भी कर लूंगा…!”
” वह तो सही है लेकिन आपके घर पर कोई देखेगा तो क्या सोचेगा…?”
कुसुम का सवाल सुनकर भावना समझ गई कि कुसुम किस लिए यह पूछताछ कर रही है? उसने धीरे से कुसुम की तरफ देखा और उसे आगे कुछ भी ना बोलने का इशारा किया ।लेकिन अगर किसी की सुनी ही ले तो वह कुसुम कुमारी कैसे हो..?
” मतलब..?”
राजेंद्र के सवाल पर कुसुम मुस्कुरा उठी मतलब यह कि अभी आप अस्पताल बंद करके अपने घर जाएंगे तब वहां आपके घर के सदस्य जब आपके हाथ की हालत देखेंगे तो आपसे पूछेंगे ना यह चोट कहां से लगी…!”
” पूछेगा तो तब ना जब घर पर कोई होगा..?”
“मतलब.. ?”
“मतलब बस बूढ़े बाबा हैं.. उन्हें भी कम नज़र आता है… ।”
“और कोई…. कुसुम अभी और ज्यादा पूछताछ करती की उसी वक्त राजेंद्र की उम्र का ही लड़का हंसते खिलखिलाते डिस्पेंसरी में घुसा और राजेंद्र के गले से लटककर लगभग झूल गया…

Nice story
nice story
Nice ji
madam aap pratilip ko chhot kar aapne site pe likhna chalu kar diya nice
जी ब्लॉग पर काम शुरू जार दिया हैं.. कोशिश हैं सोमवार से कहानियों के भाग ब्लॉग पर देने शुरू कर दूँ..