अपराजिता -10

पूर्वा ने मुस्कुरा कर समोसा उठा लिया..
रेशम की माँ एक गहरे हरे रंग की जामदानी साड़ी लें  आई.. मेहरून चौड़े बॉर्डर वाली साड़ी वाकई खूबसूरत थी..

“रेशु इसे पहन लेना.. सुंदर लगेगी !”

रेशन ने साड़ी देखी और तभी उसे अथर्व की बात याद आ गयी..

“मम्मी मैंने तो वो पीच वाली सोची थी.. !”

उसकी माँ ने साड़ी उठा कर देखी..

“हाँ ठीक है ये भी.. अब देख ले जो पहनना पसंद हो.. ! पर ये रंग बहुत हल्का नहीं है ?”

“इस पर तो सब अच्छा लगता है आंटी !”
पूर्वा रेशम को तैयार करने में मदद करने लगी..

कुछ देर में ही वो सारे लोग रघु के संगीत में पहुँच गए.. रेशम की नज़र इधर उधर अथर्व को ही ढूँढ रहीं थी..
उसकी माँ अपनी जेठानी के पास पहुँच गयीं..
सभी रिश्तेदार आकर रेशम से मिलने लगे.. घर परिवार की औरतों की नजर रेशम के चेहरे से सरक कर उसकी गर्दन पर पड़े मोटे मोटे हार पर टिक रही थी।
किसी की झुमको पर टिकी थी। सारी की सारी औरतें रेशम के ससुराल से आए गहनों को आंखों ही आंखों में तौल रही थी! रेशम सबसे मुस्कुराकर बातचीत करती व्यस्त थी, लेकिन जब भी उसकी किसी बादामी रंग की शर्ट पहने लड़के पर नजर पड़ती दिल बार बार धक से रह जाता !
  लेकिन जैसे ही वह लड़का सामने मुड़ता रेशम समझ जाती कि वह अथर्व नहीं है !

पूर्वा भी रेशम के साथ वहां आ गई थी।
मानव इधर-उधर की तैयारियां देखने में व्यस्त हो गया था।
पूर्वा और रेशम एक तरफ बैठने जा रही थी कि तभी पीछे से आकर किसी ने रेशम को पुकारा और वो एकदम से चौंक गयी..

उसने पलट कर देखा उसके सामने अथर्व खड़ा था..
जैसा कि रेशम ने सोचा था वैसा ही अथर्व ने बादामी रंग की ही कमीज पहनी हुई थी। ऊपर से सलेटी रंग के वेस्ट कोट में वह बहुत जम रहा था। रेशम कुछ पल के लिए उसे देखती रह गई..।
अथर्व ने जब रेशम को खुद को ऐसे अपलक देखते पाया तो अपनी एक आँख धीरे से दबा दी..

” देख लेना। मन भर कर देख भी लेना.. वैसे भी तुम्हारा ही हूं ,पूरा का पूरा..!”

उसके मजाक पर रेशम झेंप गई। पर अथर्व मुस्कुराकर रेशम के बगल से होते हुए आगे बढ़ गया। रेशम भी धीरे से सकुचा कर उसके पीछे बढ़ चली।
उसने पूर्वा का हाथ बहुत जोर से पकड़ रखा था…

” इतनी ज़ोर से मेरा हाथ क्यों दबा रही है….. जा ना जिसका हाथ पकड़ने के लिए इतनी देर से बेकरार हो रही थी, उसी का पकड़ ले..!”

“बद्तमीज़ लड़की.. !”

रेशम ने पूर्वा को धीरे से फटकार लगाई और उसे अपने साथ लिए अथर्व के पीछे बढ गई। अथर्व ने जाकर रेशम के माता-पिता के पैर छुए और मानव के सामने उसने हाथ जोड़ दिए। मानव ने आगे बढ़कर उसे गले से लगा लिया..।

” आइए आपको रघु से मिलवाता हूँ। “

मानव अथर्व को लेकर अपने ताऊ जी के बेटे से मिलवाने चला गया और रेशम वही खड़ी रह गई..।
कुछ देर में ही स्टेज पर संगीत का कार्यक्रम शुरू होने वाला था।
   उद्घोषिका माइक हाथ में लिए अपनी उद्घोषणा शुरू कर चुकी थी…।
रेशम पूर्वा के साथ सबसे अगली पंक्ति में बैठ गई।
कुछ देर बाद ही उसके ठीक पीछे की कुर्सी पर आकर अथर्व बैठ गया। अथर्व थोड़ा सामने रेशम की तरफ झुका और उसके कंधे के पास पहुंचकर उसने धीरे से रेशम के कान में उसका नाम गुनगुना दिया..

“रेशम.. !”

“हम्म.. ।”
वह एक बार फिर चौंक गई। अथर्व उसके बहुत करीब था… और उसकी इतनी करीबी रेशम को बेहाल कर रही थी..

” यहाँ कहां सबसे सामने बैठ गई हो? सबसे पीछे की कुर्सी में जाकर बैठो..।”

अथर्व इतना बोल कर पीछे सरक गया। रेशम ने धीरे से “क्यों?” बोला और बोलते हुए मुड़कर उसकी तरफ देख लिया।
अथर्व ने उसे एक बार फिर पीछे जाने का इशारा कर दिया और बिल्कुल ऐसे बैठ गया जैसे उसे रेशम से कोई लेना-देना ही नहीं है।
  रेशम चुपचाप उठकर पूर्वा को साथ लिए पीछे की तरफ जाने लगी…

” तु क्या कर रही है आंटी! मुझे सामने बैठना है यार.. सारे डांस सामने से दिखेंगे, पीछे से कुछ नहीं दिखाई देगा !”

पूर्वा के ठीक पीछे ही अथर्व भी चल रहा था, उसने भी धीरे से अपनी फुलझड़ी छोड़ दी..

” पीछे से किसी को कुछ नहीं दिखेगा, इसीलिए तो पीछे बुलवाया है..!”

वह चुपचाप बोल कर एक कुर्सी में बैठ गया। रेशम और पूर्वा पहुंचे, तब तक अथर्व पहले ही कुर्सी खींचकर बैठ चुका था। उसके ठीक बगल में पूर्वा बैठने जा रही थी कि अथर्व ने उसके लिए अपनी बगल की बगल वाली कुर्सी पीछे कर दी। पूर्वा ने उसे घूर कर देखा और उस कुर्सी पर बैठ गई..

” कमरे में भी तो यही आपके साथ होगी, कम से कम यहां तो हमें अपने साथ बैठने देते जीजू..!”

” मेरे साथ बैठने का फायदा सिर्फ तुम्हारी सहेली को मिलेगा, तुम बैठ भी जाओगी तो तुम्हारा कोई फायदा नहीं होना है.. !”

अथर्व की उटपटांग बातों में रस ढूंढती पूर्वा ज़ोर से हॅंस पड़ी और रेशम पानी पानी हो गयी..।

उसी वक्त स्टेज पर डांस परफॉर्मेंस की घोषणा हुई और रघु की मौसेरी बहन स्टेज पर चली आई..

उसने मुझे छुआ भी नहीं,ऐसा वैसा कुछ हुआ भी नहीं
नजर थी पैनी, हुई बेचैनी,आँखों आँखों में शैतानी हो गई
सैयां ने देखा ऐसे,मैं पानी-पानी हो गई…

उधर उसका डांस शुरू हुआ और जाने क्यूँ गीत के बोलों पर ही रेशम शरमा गयी..
रेशम को खुद पर झेंप सी होने लगी थी। वो बात बात पर  इस कदर शर्माना नहीं चाहती थी, लेकिन जाने क्यों अथर्व के सामने पङते ही उसका दिमाग सुन्न हो जा रहा था।
   उसने शादी होने के 1 दिन पहले तक भी कभी नहीं सोचा था कि एक अनजान सा कुछ कुछ जाना पहचाना सा यह लड़का उसके दिल दिमाग पर इस कदर कब्जा कर लेगा कि उसके मन के भाव भी उसके अपने नहीं रह जाएंगे।
     वह अपनी शरम पर काबू करना चाहती थी, लेकिन नहीं कर पा रही थी और इसी बात पर उसे खीझ हो रही थी…।

अपनी खीझ को दूर करने वह पूरे आत्मविश्वास के साथ सतर बैठी डांस देखने लगी.. सारे लोग झूम झूम कर तालियां पीट रहें थे और वो अपने मन में चलते द्वन्द में खोयी जैसे किसी और ही संसार में थी..।
उसके दिमाग में उस वक्त सिर्फ यह बात चल रही थी कि उसे अथर्व के सामने किसी भी कीमत पर शर्माना नहीं है। और उसके ठीक बगल में बैठा वो उसके दिमाग में चल रही एक एक बात को समझ पा रहा था।
वह बड़ी मुश्किल से अपने हंसी रोके हुए था।
अथर्व ने अपना एक हाथ उठाया और रेशम के कंधे पर रखने जा रहा था कि रेशम चौक कर उसे देखने लगी। अथर्व ने उसे देखकर आंखों के इशारे से ही क्या हुआ पूछ लिया और इस बात के लिए सामान्य बना रहना है यह सोचकर रेशम ने मुस्कुराकर कुछ नहीं कहा और सामने देखने लगी।
लेकिन उसके दिल की धुकधुकी वापस शुरू हो गई थी। उसे लगा कहीं अथर्व ने उसके कंधे पर हाथ रख दिया और दूर खड़े मानव या उसके मम्मी पापा में से किसी ने देख लिया तो वह क्या सोचेंगे..?
अथर्व भी रेशम की झिझक समझ रहा था और इसीलिए उसे रेशम को परेशान करने में मजा आ रहा था उसने उसके कंधे पर हाथ नहीं रखा..।

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Maya
Maya
2 years ago

Nice story

Shruti jindal
Shruti jindal
2 years ago
Reply to  Maya

nice story

Duhanmukesh
2 years ago

Nice ji

Rameshwar Dhiwar
Rameshwar Dhiwar
2 years ago

madam aap pratilip ko chhot kar aapne site pe likhna chalu kar diya nice

Aparna Mishra
2 years ago

जी ब्लॉग पर काम शुरू जार दिया हैं.. कोशिश हैं सोमवार से कहानियों के भाग ब्लॉग पर देने शुरू कर दूँ..