दिल से….

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खुशियां आंखें गीली कर जातीं हैं जब कोई ऐसा मौका आये कि किसी ज़मीन से जुड़े शख्स को सिंहासन पर बैठे देखती हूँ……

मेरी नज़रों में ही असल नायक होता है। फल बेचकर 150 रुपये प्रतिदिन कमाने वाले हरिकेला को संतरे को orange कहा जाता है ये मालूम न था। अंग्रेज़ी की ये छोटी सी भाषयी अज्ञानता ने उनके ज्ञान चक्षु खोल दिए। स्वयं की अशिक्षा को मानक मान कर उन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई से अपने गांव के बच्चों के लिए स्कूल खोल दिया।

मेंगलुरु के हरिकेला के एक छोटे से प्रयास ने सफलता रची और आज सरकारी अनुदान और कई प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन के सहयोग से उनका हजब्बा स्कूल सफलता के सोपान छू रहा है।

स्नेह सम्मान से लोग इन्हें अक्षर संत भी कहतें हैं। आपके हाथों में पद्मश्री अवार्ड भी मुस्कुरा रहा है।

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Anamika#komal
Anamika#komal
4 years ago

Great🙏🙏

Rashmi Nigam
Rashmi Nigam
4 years ago

Bahut khoob

Sumanswami
Sumanswami
4 years ago

The Real Heroes 👏👏👏

js
js
4 years ago

जो ख़ुद को छोड़ औरों के लिए सोचते है उनके लिए कोई भी काम मुश्किल नहीं होता।
👏👏

जोला
जोला
4 years ago

बहुत ही अच्छा 🙏

Seema Kwatra
Seema Kwatra
4 years ago

ऐसे लोगो से ही मानवता कायम है

Duhanmukesh
4 years ago

बहुत सुंदर जी

niyatibhardwaj7897
niyatibhardwaj7897
4 years ago

Very nice

Dinesh
Dinesh
4 years ago

He is the one who deserve this type of awrds.🙏🏻🙏🏻🙏🏻

deepsandhya
4 years ago

Very nice👍👏😊