मायानगरी -4




   मायानगरी -4



       वो एक अंधेरा सा कमरा था। कमरे में टीवी फुल वॉल्यूम में चल रहा था और बस टीवी से निकलने वाली रोशनी उस कमरे में फैली हुई थी….
   कमरा बहुत खूबसूरती से सजा था। हर चीज़ अपनी जगह पर मौजूद थी। कमरे में एक तरफ बड़ी सी लकड़ी की अलमीरा में खूब सारे सॉफ्ट टॉयज सजे थे….
    उनमें से एक टेडी बियर नीचे गिरा पड़ा था। बाहर तेज़ बारिश का शोर था और अंदर टीवी पर चलते किसी शो का ।
      इसलिए शायद रसोई से आती सिसकारी की आवाज़ साफ नही सुनाई पड़ रही थी…
  लेकिन बहुत ध्यान से सुनने पर लग रहा था जैसी कोई बच्ची रो रही हो…
   उसी वक्त सीढ़ियों पर किसी के तेजी से चढ़ने की आवाज़ आयी।
   कोई लगभग दौड़ते हुए सीढियां चढ़ कर बाहर के बड़े से दरवाज़े को ठेलते हुए बाहर के ही जूतों के साथ भाग कर रसोई में चला आया…

” ये क्या कर रही हो देविका ? बच्ची है वो उसे छोड़ दो। “

” मेरी भी तो बच्ची है। सिर्फ तुम्हारी तो नही। “

” हाँ तुम्हारी ही है, फिर क्यों उस पर इतना ज़ुल्म कर रही हो। उसे छोड़ दो प्लीज़। तुम जो कहोगी मैं मानने को तैयार हूँ। “

  ” प्रॉमिस करो। गौरी के सर पर हाथ रख कर कसम खाओ पहले ।

  वो आदमी जैसे ही एक कदम आगे बढ़ा उस औरत ने उसे वापस रोक दिया..

“नही तुम वहीं रहो , इधर मत आओ। “

  उस औरत जिसे वो आदमी देविका कह रहा था ने अपनी आठ साल की मासूम सी बच्ची को रसोई गैस के सिलेंडर से बांध रखा था। हाथ में दियासलाई पकड़े वो उस आदमी यानी अपने पति से किसी बात को मनवाने की ज़िद कर रही थी।

   आखिर सामने खड़े पूरी तरह से मज़लूम और बेसहारा से दिखते उस आदमी ने उस औरत के सामने अपने हाथ जोड़ दिए…..

” तुम जो कहोगी मुझे सब मंज़ूर है। लाओ दो मुझे कहाँ रखें हैं तलाक के पेपर्स। “

देविका ने आंखों से पीछे  रखे टेबल की ओर इशारा किया। जयेश टेबल की ओर लड़खड़ाते हुए मुड़ा ही था कि देविका का पैर सिलेंडर से उलझा और वो सामने की ओर गिर पड़ी….
   देविका के गिरते ही सन्तुलन बिगड़ने से सिलेंडर भी अपनी जगह से लड़खड़ा कर गिरने ही वाला था कि उससे बंधी बच्ची ज़ोर से चिल्ला उठी… ” पापा..”

   गर्ल्स हॉस्टल के कमरा नम्बर 10 में अपने बेड पर बैठी गौरी पसीना पसीना हो चुकी थी। वो नींद से जाग चुकी थी… तो अब तक जो चल रहा था वो ?
   हाँ वो सपना ही तो था…. वही सपना जो उस भयानक रात के बाद उससे जैसे चिपक सा गया था…
   ये सपना बचपन से उसका पीछा कर रहा था। अक्सर वो अपने कड़वे बचपन को इसी तरह सपने में देख चौन्क चौन्क कर आधी रात को जाग जाया करती थी, और फिर घंटो उसे नींद नही आती थी…

    आज भी वो समझ गयी कि अब उसे नींद नही आनी है…. उसने अपने बिस्तर के बाजू में रखी टेबल पर पड़ा लैम्प जला लिया और गाइनेकोलॉजी की किताब खोल कर पढ़ने बैठ गयी।
    यही रात दिन की पढ़ाई ही तो उसके टॉपर होने का कारण थी। लोग परीक्षाओं में आगे बढ़ने के लिए पढ़ते थे और वो खुद से जंग लड़ने के लिए पढ़ती थी।
पढ़ते पढ़ते ही भोर हो गयी थी….  खिड़की से आती रोशनी देख उसने खुद के लिए चाय चढ़ाई और मुहँ हाथ धोने वॉशरूम में चली गयी….
    चाय लिए  बालकनी में खड़ी गौरी की नज़र बाहर कैम्पस में जॉगिंग करते मृत्युंजय पर पड़ गयी… वो उसे देख ही रही थी कि उसने भी उसे देख लिया और हाथ के इशारे से बाहर बुलाने लगा।
   हाँ में सर हिला कर वो बाहर चली गयी….

” ये क्या जॉगिंग वाला ट्रैक सूट क्यों नही पहना। नाइट सूट में ही बाहर चली आयीं।”

  अब गौरी को होश आया कि वो जैसे खिड़की पर खड़ी थी, वैसे ही बाहर चली आयी थी…

” वो ध्यान ही नही रहा सर ! आज जॉगिंग करने का मूड भी नही है। “

  जय को समझ में आ गया था कि गौरी ने आज फिर वही सपना देखा है।
   जय यानी मृत्यंजय उपाध्याय अभी मेडिकल कॉलेज में हाउस सर्जन शिप समाप्त करने के बाद  मनोरोग में पीजी कर रहा था। फिर भी जूनियर्स में वो हाउस सर्जन के पद से ही जाना जाता था।
   गौरी और मृत्युंजय की मुलाकात भी इत्तेफाक से हुई थी…. दोनो के बीच अफेयर जैसी बात फिलहाल नही थी लेकिन मेडिकल कॉलेज ऐसी जगह होती हैं जहाँ बिना आग के ही धुंआ उड़ता है।
   लोग बस धुंआ देख बात उड़ा देते हैं ये जाने बिना की धुँआ सिर्फ आग का ही नही  सिगरेट का भी हो सकता है…..

    मृत्युंजय गौरी का सिर्फ ट्रीटमेंट कर रहा था जिसके कारण गौरी को अक्सर मृत्युंजय की ओ पी डी जाना होता था और बस वहीं से दोनो के बीच कुछ चक्कर चल रहा है कि लहर सारे कॉलेज में बह चली। गौरी से तो किसी ने नही पूछा लेकिन जय को अक्सर उसके दोस्त इस बात पर छेड़ जाते और वो चुपचाप मुस्कुरा कर रह जाता……
   
     ऐसे ही थोड़े न मेडिकल कॉलेज अपने कांडो को लेकर बदनाम था…


*****

    फर्स्ट ईयर की पहली क्लास सेमिनार हॉल में लगी थी। सारे जूनियर्स कतार में बैठे प्रोफेसर का इंतेज़ार कर रहे थे कि धड़धड़ाते हुए सीनियर लड़कियों की टोली अंदर चली आयी….
   आते ही दरवाज़ा बंद कर दिया गया….

   सामने मंच पर कुछ सीनियर्स सवार हुई तो कुछ जूनियर्स के आगे पीछे कहीं न कहीं व्यवस्थित हो गईं…

  सारे जूनियर्स सांस रोके थर्ड बटन हो चुके थे।

” क्यों भई कौन है वो श्रीदेवी जिसने कॉलेज में पहले ही दिन कांड कर दिया ? “

  एक सिनीयर की तेज कड़कती आवाज़ पर भी सब चुप खड़े थे। ऐसा सन्नाटा पसरा था कि सुई भी गिरे तो टन्न की आवाज़ हो…

” काहे भाया सांप सूंघ गया ? ये जब से आमिर ताऊ ने बताया है कि म्हारी छोरियां छोरों से कम है के? तब से इस बात को मेडिकल की छोरियों ने कुछ ज्यादा ही सिरियसली ले लिया है!”

   अब जूनियर्स की सांसो की आवाज़ भी आनी बंद हो गयी थी….

” क्या हुआ? मैं पागल लग रही हूँ तुम लोगों को जो किसी के मुहँ से जवाब नही फूट रहा। अरे बको न कौन थी भई सलीम की अनारकली जो पहले ही दिन जाकर इंजीनियरिंग के लड़के को प्रोपोज़ कर आई? “

   रंगोली के आजू बाजू खड़े लोगों ने धीरे से उसकी तरफ उंगली से इशारा कर दिया….

” ओहो तो आप हैं वो मधुबाला! आइये ज़रा सामने, हम भी तो दीदार करें।
   भई शक्ल से तो सीधी सूदी दिख रही है फिर कैसे इत्ता बड़ा कांड कर आई।
  एक तो प्रोपोज़ कर दिया वो भी इंजीनियरिंग वाले बंदे को। कमाल है यार! अब वो बंदा तुझे ढूंढता यहाँ हनीमून मनाने आ गया न तो हमारे पास आकर रोने मन बैठ जाना।”

एक ने अपनी बात पूरी भी नहीं कि की दूसरी पट से बोल पड़ी…..

” यार और कोई नहीं मिला तुझे।  प्रपोज ही करना था तो अपने कॉलेज के किसी बंदे को कर देती। मिला भी तो इंजिस!
    लानत है यार लानत!  तुझे पता भी है सबसे घटिया बंदे पढ़ते इंजीनियरिंग कॉलेज में….
   फर्स्ट ईयर से क्या-क्या कांड नहीं करते हैं। रोंगटे खड़े हो जाएंगे अगर हम उनकी रैगिंग के किस्से तुम सबको  सुना दे तो ।
   आई बात समझ में?  हम तो पहले दिन से ही लड़कियों को आगाह कर देते हैं कि भैया एक बार को चलती ट्रेन में भले चढ़ जाना लेकिन इंजीनियरिंग कॉलेज के लड़कों के सामने मत पड़ना। यह इतने गए बीते होते हैं ना कि तू सोच भी नहीं सकती।
   लड़कों की सबसे घटिया जमात इन्हीं कॉलेज में इकट्ठा होती है ।
    फर्स्ट ईयर से इन्हें रैगिंग में सुट्टा मारना और दारु पीना सिखाया जाता है। यह होती है इनकी आगे की ट्रेनिंग। समझ रही है सेकंड ईयर थर्ड ईयर तक पहुंचते-पहुंचते   तो बंदा बिल्कुल ही पुरखा हो जाता है । गांजा हशीश चरस डोप क्या नहीं ट्राई करते हैं ये लोग।
  यह साले इतने स्लेविश होते हैं इतने स्लेविश होते हैं कि इनकी कमिनाई पर पूरा ग्रंथ लिख डालो। आई बात समझ में ? तो बेटा तुझे इतनी बड़ी माया नगरी में इंजीनियरिंग के अलावा और कोई बंदा ही नहीं दिखा।
आंखें ठीक तो है ना तेरी चश्मा वश्मा तो नहीं चढ़ा रखा।”

” अबे ये भी तो हो सकता है कि ये उसी की बंदी हो। दोनों की पहले ही डिंग डाँग चल रही हो। सीनियर्स ने रैंग किया तो चली गयी अपने पिया जी को बताने। ”

  रंगोली की सांस अटकी पड़ी थी और ये सीनियर उसे और डराये जा रही थी….

” नो मैम ! ऐसी कोई बात नही है। मैं तो यहाँ किसी को नही जानती। “.

” तो इतनी होशियारी मारने की क्या ज़रूरत थी?
पहले दिन आकर हमने रूल्स बताए नही और तुम लोग कूद पड़ीं। अरे क्या ज़रूरत थी सीनियर लड़को को रैगिंग देने की। हमारा कॉलेज एन्टीरैगिंग है इतना भी नही पता? “

“जाने दे सुचित्रा , हमें क्या ? हम तो इन नौनिहालों को बचाना चाहतें हैं और ये लोग है कि वो ऋषि एंड टीम के सामने सरेंडर कर गयीं।
  क्यों ऋषि खुराना ने रैंग किया है ना? “

  तभी एक जूनियर ने धीमे से गुनगुना कर कोई दूसरा नाम पुकार लिया…

” नो मैंम। अधिराज सर ने!”

” ओह्ह तो अधिराज के हत्थे चढ़े हो बेटा। मतलब अब तक ऋषि के साथ इंट्रो नही हुआ । ऋषि खुराना से बच के रहना, हम लोग एन्टीरैगिंग वाली हैं ना इसलिए पहले से खबरदार कर रहीं हैं। बाद में मत कहियो की मैडम ने बचाया नही। “

” मैम प्लीज़ हेल्प कर दीजिए। कैसे बचना है ऋषि सर से। “

   ” देखो भई मैं बहुत बड़े दिल वाली हूँ। परमार्थ में बहुत विश्वास है मेरा। बिना किसी स्वार्थ के बता रही हूँ। आज के आज फटाफट शाम में सारी गर्ल्स हमारे कमरों में आकर असाइनमेंट ले जाना और हफ्ते भर में लिख कर हमें वापस दे देना । “

“पर मैंम उससे हम सर लोगों की रैगिंग से कैसे बचेंगे?”

” अबे बता रहीं हूँ ना ज़रा सांस ले लूँ।”

” जी मैंम!”

  “एंड यू बॉयज, तुम लोगों के हॉस्टल में फर्स्ट फ्लोर के कमरा नम्बर 5 में अध्यक्ष का कमरा है। अध्यक्ष मतलब स्टूडेंट्स यूनियन मेडिकोज का अध्यक्ष।
   उसके पास तुम सारे लड़के पहुंच जाना। घर से जो भी खाना खज़ाना लेकर आये हो ना जैसे लड्डू चकली , निमकी .. सारी चीज़ें अध्यक्ष को पहुंचा देना। ये उनसे मिलने की फीस है। बस उसके बाद अध्यक्ष सर सब संभाल लेंगे। ”

” चल शर्मिला आज के लिए बहुत ज्ञान हो गया…”

” अरे हां मुमताज ! तूने सही कहा , चल अब निकलें वरना कहीं चतुर्वेदी आ गया न तो लेने के देने पड़ जाएंगे। “

  सारी की सारी सीनियर्स जैसे आयीं थी वैसे ही बाहर निकल गईं….

   उनके जाते ही जूनियर लड़के शाम को अध्यक्ष से मिलने जाने के मनसूबे तैयार करने लगे।

******

  सीपी सर की अगुआई में अभिमन्यु , अधीर और बाकी लोग सीईओ यानी निरमा से मिलने निकल गए।
  अभिमन्यु ने 400 की जगह 499 हस्ताक्षर तैयार कर लिए थे जिनमें कुछ नकली तो कुछ असली भी थे।

” अबे 499 का क्या फंडा है बे? या तो 400 रखता या 500,। 450 भी चल जाता । पर ये कुछ आधा अधूरा सा नही लगता। “

“सर जी यही तो फंडा है। जैसे मॉल और बड़े ब्रांड्स अपनी ब्रांडिंग करते हैं ना 499 लिख कर। देखने वाले का फोकस 4 पर ही जाता है दिमाग में आता है 400 कि रेंज का सामान है जबकि असल रेट तो 500 है। बस वहीं बात यहाँ लागू होगी।
  निरमा मैडम जब 499 देखेंगी तो उनके दिमाग मे  400 की रेंज आएगी और वो आसानी से सारे हस्ताक्षर मान जाएंगी।
   हम 10 लोग 500 के साइन लेकर जाते तो वो बिना पढ़े ही फाड़ के फेंक देती। इसलिए ऐसा किया। और जब उनकी टीम काउंटिंग में जाएगी तब 500 हस्ताक्षर एक बड़ा पैमाना बन जायेगा हमारी बात को प्रूव करने का। “

” अरे वाह अभिमन्यु। तुम तो यार बहुत ही बेकार सा ज्ञान दे डाले। चलो अब वहीं देखा जाएगा , क्या होता है?

  सारे लड़के निरमा के चेम्बर के बाहर खड़े थे। अंदर निरमा किसी मीटिंग में थी।
   लगभग घंटे भर बाद कमरे के अंदर से फैकल्टी मेंबर बाहर निकल आये।
  उनके बाहर आते ही निरमा ने पियोन से कह कर उन लड़कों को बुलवा भेजा…

“बैठिये आप लोग। “

  सामने रखी कुर्सियों पर सबके बैठते ही निरमा ने अपने सामने रखी फाइल को धीरे से बंद कर एक किनारे कर दिया..

   सारे लड़के उसे ही देख रहे थे। निरमा ने बीच में बैठे सीपी से इशारे से ही सवाल कर लिया…

” कहिये क्या तकलीफ है आप लोगों की?”

  सीपी ने साथ रखा पर्चा उसके सामने कर दिया… आंखों पर चश्मा सही करते हुए निरमा उनके द्वारा प्रस्तुत किये आवेदन को पढ़ने लगी। पढ़ते हुए उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ कर चली गयी..
  

” ओके । तो आप लोग चाहतें है सारे कैम्पस में बेरियर लगवा दिए जाएं।”

  ” नही मैम । नॉट बैरियर । पर लोगों का यहाँ वहाँ टहलना बंद हो जाये। “

“देखो वो तो ऐसा है की अगर आप सब अपनी अपनी क्लास में मन लगा कर पढ़ेंगे तो बाहर निरर्थक टहलने का किसी को वक्त ही कहाँ मिलेगा? “

” जी मैंम हम तो शिद्दत से पढ़ते ही है लेकिन आर्ट्स एंड स्पोर्ट्स कॉलेज के लड़के हमारे कैम्पस में खूब चक्कर लगातें हैं मैम।
  उन लोगो का चक्कर मेडिकल में भी खूब लगता है।”

“और आप लोग अपने ही कैम्पस में रहतें हैं? “

निरमा के सवाल पर सभी ने राजा बेटा बन कर हां में सर हिला दिया..

” गुड। लेकिन जब आप लोग अपने कैम्पस से निकलते नही तो ये कैसे पता चला कि वो लोग मेडिकल के भी चक्कर लगातें हैं।”

“मैडम ये सब तो पता चल ही जाता है।”

” अच्छा ! कैसे लेकिन? मैं तो देखो सारे कैम्पस में घूम सकती हूँ पर जब तक आप लोग न बताएं मुझे ये सब पता ही नही चलता। खैर…
   आप लोग अपनी पढ़ाई के लिए इतने कटिबद्ध है कि बाहर से आने वाले बच्चों के कारण डिस्टरबेंस फील करते हैं इससे आपको असुविधा हो रही है। ये बात सही नही है। अब ऐसे में मुझे कोई निर्णय तो लेना ही पड़ेगा।
  मैं ऐसा करती हूँ कल ही इंजीनियरिंग कैम्पस की बाउंड्री वाल को ऊंचा करवा देती हूँ। और आपका गेट परमानेंट लॉक करवा देती हूँ।
  वैसे भी आपके कॉलेज कैम्पस में ही आपकी फैकल्टी का भी हाउसिंग है, और आप लोगो का होस्टल भी।
  तो मेन गेट लॉक करवा देते हैं। न आप लोग बाहर आ सकेंगे न बाहर से कोई अंदर जा सकेगा।  
  इज़ इट ओके?”

“नो मैंम ! बिना बाहर निकले तो काम नही बनेगा। और बाउंड्री ऊंची हो गयी तो हवा कैसे आएगी? “

अभिमन्यु की बात सुन निरमा को ज़ोर से हंसी आ गई..

” फिर ? बोलो क्या करना चाहिए। “

” आप मेडिकल और हमारा कैम्पस ओपन रखिये बस आर्ट्स वालो का यहाँ  आना बंद करवा दीजिये।”

” नो ये तो पॉसिबल नही है। अगर खुले रहेंगे तो सारे खुले रहेंगे और अगर बंद किया तो सभी को बंद करवा दूँगी।
   एक बात और! मैं रोज़ रोज़ नए नियम अप्लाई करने में यकीन नही रखती। अगर एक बार निर्णय ले लिया तब फिर आप लोग मुझे मेरे निर्णय बदलने के लिए नही कह पाएंगे।
  इसलिए अभी एक हफ्ते के लिए सभी कैम्पस में कर्फ्यू कर लेते हैं।
कोई अपने कैम्पस से बाहर कहीं नही जाएगा। अगर ये ट्रायल सफल हुआ तो यही कार्यप्रणाली आगे अपनायी जाएगी वरना देखा जाएगा।
  पर इस एक हफ्ते की समयावधि में आप लोग ये इंश्योर कर लेना कि आप में से कोई किसी और कैम्पस में न दिखे वरना मैं फिर उसे सीधा रेस्टीकेट ही करूँगी।”

  निरमा की बातों को मंज़ूर कर वो लोग खड़े हो गए। निरमा को नमस्ते कर सभी बाहर निकल गए..

” यार ये तो पूरी डॉन है। पहले कैसे स्माइल देकर मीठी मीठी बातें कर एकदम से छुरी मार दी।मतलब हद है , अब आप इंजीनियरिंग वालों को भी  रूल्स बताएंगे। “

” सीपी भाई उनके लिए तो हम सब बराबर ही हैं। वो कौन सा इंजिस से खौफ खाएंगी। खैर चलो एक हफ्ते का ही सही कर्फ्यू तो लगा । अब देखते है वो जूनियर विधायक कैसे हमारे कैम्पस में फटकता है…..
   साला एक हफ्ते नही आएगा तो खुद यहाँ का रास्ता भूल जाएगा….”

  निरमा के ऑफिस से बाहर निकले वो लोग अपने कैम्पस की ओर बढ़ रहे थे कि अभिमन्यु ने अधीर को धीरे से पीछे खींच लिया…

” क्या हुआ? “

” यार आज मंगल है? “

” हाँ तो । तुम्हारा तो सब मंगल ही है। “

” अबे आज मंगलवार है तो आज के दिन मैं थोड़ा पुण्य कमा लेता हूँ न। मैं फटाफट यूनिवर्सिटी के मन्दिर से दर्शन कर के आता हूँ। तू कहाँ मिलेगा? “

” अबे और कहाँ, वहीं मिलूंगा अड्डे पे।

” चल ठीक है मैं  आता हूँ। इन गँवारू लोगो से कुछ मत कहना मैं कहाँ गया। “

” हाँ मेरे शाहरुख तू जा। जी ले अपनी ज़िंदगी। बस कोई नई सिमरन मत पटा कर आना। “

  अपने बालों पर हाथ फिराते हंसते गुनगुनाते अभिमन्यु यूनिवर्सिटी के अंदर की तरफ बने मंदिर की ओर चल पड़ा।
   बाहर जूते खोल वो फटाफट मंदिर में दाखिल हो गया…
   भगवान की मूर्ति के सामने आंखे बंद कर हाथ जोड़े वो मन ही मन में उनसे बातें करता रहा। होंठ धीमे से कुछ बुदबुदा रहे थे और उसने धीमे से आंखें खोल लीं। उसके ठीक सामने खड़ी लड़की ने भी शायद उसी वक्त आंखें खोली और पंडित जी के कहने पर नीचे झुक कर उसने सिंदूर उठा कर अपने माथे पर छोटा सा तिलक करने के बाद अपने साथ खड़ी अपनी सहेली को तिलक करने मुहँ पीछे घुमाया और ठीक सामने पड़ गए अभिमन्यु  के माथे पर तिलक की लंबी रेखा खींच दी।
    इतनी जल्दी ये सब हुआ कि वो लड़की और अभिमन्यु दोनो ही कुछ नही समझ पाये…

” आई एम सॉरी , आई एम सॉरी । मैंने तो झनक समझ कर तिलक आपको लगा दिया। “

” नो इट्स ऑलराइट । एब्सोल्यूटली ऑलराइट ! “

  अभिमन्यु तिलक पोंछने ही जा रहा था कि पंडित जी ने टोक लगा दी…

” अरे बेटा इतनी जल्दी मंदिर का लगा तिलक नही पोंछते। घर जाकर मुहँ धोओगे तो चेहरा साफ हो ही जायेगा…”

  हाँ में सर हिला कर उसने पंचामृत के लिए हाथ बढ़ा दिया।।उसके बाजू से ही  उस लड़की ने भी हाथ आगे कर दिया…
  अब तक में अभिमन्यु उस लड़की को पहचान चुका था।
   ये वही उस दिन वाली लड़की ही थी।
उस दिन तो लंबे लंबे बाल लहराती सुंदर सी कॉलेज फर्स्ट ईयर की लगती ये लड़की आज किसी शिशु मंदिर की गयरहवीं की छात्रा लग रही थी।
  नीला कुरता,सफेद सलवार, सफेद थ्री पिन की हुई चुन्नी पर ऊपर की ओर लाल रिबन से बंधी दो चोटियां।
   पर जो भी हो प्यारी बहुत लग रही थी।

  अभिमन्यु उसे देखता उसके पीछे मंदिर की सीढ़ियां उतर गया। वो अंतिम सीढ़ियों पर खोले अपने जूते पहन रही थी..

” हेलो ! माइसेल्फ अभिमन्यु … अभिमन्यु मिश्रा इंजीनियरिंग मैक फिफ्थ सेम। ”

  उस लड़की ने अपनी बड़ी बड़ी आंखें ऊपर कर उसे देखा , और सर नीचे किये जाने के लिए मुड़ गयी…

” अरे इत्ती घनघोर बेइज्जती । अपना नाम तो बताती जाओ यार। इतनी भी कर्टसी नही है? “

” रंगोली नाम है उसका और मैं हूँ झनक। मेडिकल फर्स्ट ईयर।
   हो गया इंट्रो अब हम लोग जाएं?”

  पानी पीकर आयी झनक ने अभिमन्यु की बात सुन ली थी। उसने रंगोली का हाथ पकड़ा और उसे खिंचती अपने साथ लिए आगे बढ़ गयी…

” रंगोली पहचाना इस लड़के को? “

  रंगोली के ना में सर हिलाते ही झनक हँसने लगी…

” अरे तेरा पति है ये। वही बंदा है जिसे तूने उस दिन प्रोपोज़ किया था।”

  झनक की बात सुन रंगोली का दिल धक से रह गया। कहीं सीनियर्स की कही बातें सच न हो जाएं। उसके मज़ाक को कहीं इसने सीरियसली ले लिया तो?
  उसका तो जीना दूभर हो जाएगा। पहले ही लड़कों को देख कर उसकी सिटी पिट्टी गुम हो जाती थी, और यहाँ तो उसने खुद आगे बढ़ कर कुल्हाड़ी में अपना पांव दे मारा था।
   उसने धीमे से पीछे मुड़ कर देखा वो वहीं हाथ बांधे खड़ा अपनी गहरी आंखों से उसे ही देख रहा था….

क्रमशः



aparna….
   

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rashmidahiya123
rashmidahiya123
4 years ago

Ma’am 5th part ??? Please……….

Vijaykumarpareek
4 years ago

अच्छा है

Sriak72
Sriak72
4 years ago

Nirma shows corporate intellectuality. But this game of teri bhabhi” being interpreted with a new version in the story.

Advsarika
Advsarika
4 years ago

Nirma ki trick kya mast thi. Sab student ko ek sath dharasayi kr diya… Bechare kya soch kr aaye the kya ho gaya🤣🤣.. Manana padega mam. U r awesome.. Mrityunjay and gauri ka bahut hi achcha likha apne

chahal
chahal
4 years ago

“तेरा पति है !” 😂😂😂… सच कहूं तो ऐसे दोस्त ही टांका भिड़ाते हैं और ना भी बनने वालों की जोड़ी बना डालते हैं। भई निरमा ने बहुत प्रभावित किया हमें अपने पद और सूझबूझ के साथ। ❣️❣️