
जीवनसाथी -3 भाग -165
भदौरिया और गुरु बड़ी शिद्दत से शौर्य का इंतज़ार कर रहे थे।
शौर्य ने अपनी कुछ शर्ते भदौरिया के मुँह पर फेंक कर मारी थी, जिन्हे मानना भदौरिया की मज़बूरी हो चुकी थी..
भदौरिया जितना ही कपटी था, गुरु उतना ही चालाक..
वो दोनों बेचैनी से शौर्य की राह देख रहे थे, तभी उन्हें दूर से शौर्य की गाड़ी आती नजर आयी..।
भदौरिया एक मजबूत सिक्युरिटी के बीच अपने एयरप्लेन के साथ खड़ा था..
शौर्य एक निश्चित दूरी पर रुका, और गाड़ी से उत्तर गया..
भदौरिया के गार्ड्स उस तक पहुँच गए।
भदौरिया ने शौर्य की बात मान कर उसके लिए तीन एंट्री पास का इंतज़ाम करवा लिया था..
शौर्य और विक्रम गाड़ी से उतर कर खड़े थे।
भदौरिया के गार्ड्स शौर्य तक पहुंचे और उन दोनों की तलाशी लेने लगे..
उन लोगो को तलाशी मे कोई भी ऐसी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली जिसके कारण कुछ भी गलत होने की संभावना बनती।
शौर्य और विक्रम के मोबाइल फ़ोन भी उन लोगो ने अपने पास रख लिए और यही तो शौर्य चाहता था।
गाडी की पिछली सीट पर एक बड़ा सा बॉक्स रखा था, जिसमे शौर्य के अनुसार हर्ष था..।
उस बॉक्स को हल्का सा खोल कर गार्ड्स ने इस बात की तसल्ली कर ली और यहाँ से हाथ हिला कर सब ठीक है का इशारा दे दिया।
गार्ड्स को शौर्य और विक्रम के साथ बॉक्स को साथ लाने का इशारा कर, भदौरिया और गुरु मुड़ गए। और अपने क्राफ्ट की तरफ बढ़ने लगे..।
उन दोनों के मुड़ते ही विक्रम ने अपनी तरफ खड़े गार्ड और शौर्य ने अपनी तरफ खड़े गार्ड्स के घुटने के पीछे वार किया और वो दोनों ही गिर पड़े..।
उनके गिरने से पहले ही पूरी फुर्ती से बॉक्स के अंदर से धनुष का हाथ बाहर आया और उन दोनों गार्ड्स की बाजुओं में सिडेटिव का इंजेक्शन घोप दिया गया।
दोनों लड़के कुछ समझ पाते, तब तक में वो दोनों गाड़ी के अंदर बेहोशी की हालात में धकेल दिए गए थे..।
ये सब कार की ओट में इतनी सफाई से हो गया कि एयर क्राफ्ट में बैठे पायलट को भी कुछ नजर नहीं आया।
बॉक्स के भीतर मौजूद धनुष और यश एक झटके में बाहर निकल आए।
दोनों ने बिलकुल उन्ही गार्ड्स की तरह कपड़े पहन रखे थे..।
उन दोनों ने उन गार्ड्स की कैप और उनका मास्क अपने चेहरे पर लगाया और गाड़ी से बॉक्स निकाल कर शौर्य और विक्रम के साथ आगे बढ़ गए।
उन गार्ड्स के बेहोश शरीर अब कार के भीतर मौजूद थे, और उनके सारे हथियार धनुष और यश के पास थे..
विजयराघवगढ़ रियासत के राजकुमार अब एक ऐसे युद्ध के लिए निकल चुके थे, जहाँ से वापसी का मार्ग सम्भव था या नहीं, ये तो नहीं मालूम लेकिन उन्हें इस मार्ग से हटाने के लिए दुश्मन को अब अपना पूरा जोर लगाना था..
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इधर इस सब के तीन दिन पहले सात समंदर पार बैठे वासुकी की कली से बात ही नहीं हो पा रही थी..।
किसी न किसी वजह से कली का फ़ोन नहीं लग पा रहा था और अब वासुकी का दिमाग उबलने लगा था..।
उसकी अपनी बेटी से लगभग हफ्ते भर से बात नहीं हो पायी थी। और कोई ऐसा परिचय सूत्र हाथ नहीं लग रहा था, जिससे वो कली का हाल जान सके..।
सारिका के फ़ोन का भी वही हाल था..
महल के कार्यक्रमों मे व्यस्त होकर वो अपने फ़ोन का ध्यान भी नहीं रख पा रही थी..
वैसे भी वो फोन से ज्यादा जुडी थी भी नहीं..।
लंदन मे रहते कभी ऐसे फ़ोन की ज्यादा ज़रूरत पड़ती नहीं थी.. आज के ज़माने की होकर भी वो ज़रा पुराने चलन की ही थी।
उसकी उस आदत से वासुकी और दर्श परिचित थे, तभी दर्श ने उसे बार बार अपने फ़ोन का ध्यान रखने कहा भी था लेकिन सरु तो सरु ही थी..।
बस इसीलिए वासुकी अब वहां रुकने को तैयार नहीं था..।
उसने दर्श से तैयारी करने को कहा और अगले ही दिन की टिकट का बंदोबस्त करने बोल कर अपनी तैयारियां करने निकल गया था..।
दर्श ने अगले दिन की दो टिकट्स इन्डिया के लिए बुक की, और वो दोनों भी हिंदुस्तान आने के लिए वहां से निकल पड़े..।
यहाँ दिल्ली उतर कर उन लोगो को अभी लंबा सफर तय करना था..।
लेकिन वो दोनों ही इस बात से पूरी तरह अनजान थे कि महल में आखिर चल क्या रहा है..।
महल की खुशियों को जाने किसकी नजर लगी थी..।
वासुकी और दर्श जिस वक्त विजयराघवगढ़ रियासत के रास्ते पर थे उसी वक्त के आसपास हर्ष महल से अचानक गायब हो गया था।
महल में हर कोई परेशान था, रूपा का रो रोकर बुरा हाल था..।
बांसुरी सर थाम के बैठी थी। उसके खुद के आंसू नहीं रुक रहे थे। फिर भी वो अपने आप को संभाले हुए रूपा को सम्भालने का प्रयास कर रही थी।
युवराज, राजा साहब सभी परेशान थे…।
युवराज रूपा लोगो के साथ थे, और राजा साहब प्रेम और समर के साथ समर के ऑफिस में बैठे आगे की रणनीति तय कर रहे थे।
समर ने भी महल से निकलती शौर्य की गाड़ी को देख लिया था, और वो प्रेम के साथ अपनी टीम लेकर निकलने ही वाला था कि राजा साहब ने भी साथ चलने की बात कह दी।
हालाँकि समर और प्रेम ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन न उन्हें मानना था और न वो माने..
और इस तरह वो लोग भी अपनी गाड़ियों में वहां से शौर्य की गाड़ी का पीछा करते हुए निकल गए।
शौर्य के व्यवहार से परेशान कली अब रो रोकर भी थक चुकी थी..।
उसे आभास सा होने लगा था कि शौर्य कोई बड़ी बात उससे छुपा रहा है..।
और ये जानने के लिए उसके पास यही तरीका था कि वो शौर्य का पीछा करे, और जानने की कोशिश करे कि आखिर वो कर क्या रहा है..।
बस इसीलिए उस सुबह जिस दिन से हर्ष गायब हुआ था, वो शौर्य पर बराबर नजर रखे हुए थी..।
और जैसे ही रात के दूसरे पहर में शौर्य महल से बाहर निकला, वो भी एक गाडी में वहां से बाहर निकल गयी…।
क्रमशः
दिल से….
पहले अक्सर कहानी के बाद मैं एक कॉलम लिखती थी “दिल से “, आज बड़े दिनों बाद लिख रही हूँ..
कहानी पूरी फ़िल्मी हो गयी है और अब अपने अंत की तरफ बढ़ भी रही है..
इस कहानी ने बहुत समय लिया मेरा भी और आपका भी..
मैं नहीं चाहती थी ये इतना समय ले लेकिन पता नहीं क्यों इसने ले लिया…!
पहला सीजन सौ एपिसोड के आसपास था, दूसरा उससे थोड़ा ज्यादा और तीसरा डेढ़ सौ के पार चला गया..
कोई आदर्श नॉवेल उतना लंबा नहीं होना चाहिए क्यूंकि इससे लिखने वाले का उत्साह और पढ़ने वाले का धैर्य चूकने लगता है..
एक ही रस की कहानी लिखते हुए लेखक भी बोर हो जाते हैं, शायद इसीलिए इस कहानी को आगे बढ़ने में वक्त लगने लगा है !
लेकिन लिखना शुरू किया है तो खत्म करना भी मेरी ज़िम्मेदारी है! हालाँकि कहानी की लम्बाई की वजह से मैं इसे जल्दी समाप्त कर रही ऐसा कुछ नहीं है..
कहानी जैसी सोची थी वैसे ही आगे बढ़ी और वैसे ही समाप्त होने वाली है..
अगले दो तीन एपिसोड निर्णायक होंगे और कहानी को एक सुंदर लय के साथ आगे बढ़ाने वाले होंगे..
इसे ख़त्म करने के बाद प्लेटोनिक के सारे भाग यहाँ पब्लिश करुँगी क्यूंकि बहुत से पाठक fb पर नहीं पढ़ पाते हैं और फिर प्लेटोनिक और than q 2 much (नयी कहानी ) यहाँ आएगी..
aparna..

Mam
Padne me man lag jata h me chk karti rahti hu agla part kb padne milega
Ma’am aage ki kahani kab aayegi ,
👌👌👌👌
Best story
👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏👏
Aise lagta hai partekhatm hi na ho
Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
Thank you mam for the part , main fb pr stories padhti hu
बहुत दिनों बाद भाग आया ,दो भाग के बीच गैप लंबा होने पर कहां का तारतम्य टूट जाता है और क्या चल रहा है ये समझने के लिए पुराने पार्ट्स पढ़ने पड़ते हैं। तो इस तरह से शौर्य, विक्रम ,धनुष और यश ,हर्ष की आड़ में भदौरिया और उसका साथी जोकि dark web में मौत के खेल का धंधा करता है ,की लंका को समाप्त करने के लिए निकल चुके हैं और उसके पीछे पीछे राजा अजातशत्रु,समर और प्रेम के साथ साथ कली भी अपनी गाड़ी में निकल चुकी है। इधर वासुकी भी दर्श के साथ अपनी लाड़ली से मिलने रियासत में आ चुका है ,लगता है ये सब एक साथ ही वहां पर पहुंचेंगे।
Very beautiful