जीवनसाथी -3 भाग -164

जीवनसाथी -3 भाग -164

शौर्य ने उस पर्चे में और भी बहुत कुछ लिखा था, जिसे धनुष ने पढ़ लिया। और अब धनुष को समझ में आ गया था कि शौर्य  क्यों कुछ भी बोल कर बता नहीं पा रहा था..

भदौरिया बहुत बड़ा शैतान था, उस पर उस गुरु जैसे भयंकर आदमी का साथ मिल गया था..
ये दोनों लोग ऐसे थे जो किसी पर भरोसा नहीं करते थे..
जिस वक्त शौर्य कि अदलाबदली चल रही थी, तभी इन लोगो ने शौर्य की गर्दन के पीछे त्वचा पर अंदर की तरफ एक चिप लगा दी थी, जैसी आजकल ज्यादातर बड़े रईस लोग अपने पालतू कुत्तो की गर्दन पर लगवाते हैं। जिससे उनके गुम जाने पर उन्हें ढूंढने में आसानी हो..।

उसी का एडवांस वर्शन शौर्य की गर्दन पर रोपा गया था..
जिसकी वजह से शौर्य कब कहाँ है, किससे क्या बोल रहा है? सब कुछ भदौरिया और गुरु सुन सके..

इस बात को कई बार शौर्य ने इशारो में विक्रम को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन विक्रम कभी शौर्य की बात को गंभीरता से नहीं ले पाया..।

शौर्य ने एक दो बार इसी तरह से पर्चा लिखकर भी विक्रम को बताने की कोशिश की, लेकिन विक्रम ने उस पर्चे को ही नजर अंदाज कर दिया। किसी और के हाथ में ना पड़ जाए, इसलिए शौर्य को उन पर्चों को फाड़ कर फेंकना पड़ गया था।

लेकिन आज धनुष ने एक बार में सब कुछ पढ़कर समझ लिया। वह दोनों वहां खड़े अभी आगे के बारे में सोच रहे थे कि तभी विक्रम भी उन लोगों के पास पहुंच गया।

” तुम दोनों यहां क्या कर रहे हो?

विक्रम ने धनुष और शौर्य को देखा।
शौर्य ने उसे चुप रहने का इशारा किया और विक्रम के हाथ में वही धनुष वाली पर्ची थमा दी।

” मेरा अभी कोई प्रेम पत्र पढ़ने का मूड नहीं है। महल के राजकुमार गायब हुए हैं, और तुम लोग यहां आराम से ठंडी हवा खाने खड़े हुए हो ।”

धनुष ने इशारे से उसे कागज को पढ़ने को कहा और विक्रम उसके कहने पर परचा खोलकर पढ़ने लगा। विक्रम भी जितना ताकतवर था उतना ही दिमाग से भी तेज था। उसमें कमी थी तो धैर्य की।

वह बिल्कुल भी धैर्यवान नहीं था, और जब से उसने अपने भाई विजय को खोया था, तब से उसका धैर्य और भी कम होता चला गया था। उसे परचे को पढ़ते-पढ़ते उसके कदम लड़खड़ाने लगे और उसने कार से टिक कर खुद को संभाल लिया..।

उसे काफी सारी बातें तो मालूम थी लेकिन शौर्य की गर्दन पर लगी चिप वाली बात उसे मालूम नहीं थी।
अब उसे समझ में आ रहा था कि शौर्य का बर्ताव इस कदर बदला हुआ और खराब क्यों हो गया था। उसने शौर्य की तरफ देखा।
उसे उस वक्त शौर्य पर बेहद तरस आ रहा था।

शौर्य ने उसे भी चुप रहने का इशारा किया और अब वह तीनों वहां से निकल कर भदोरिया के मेंशन में जाने के लिए तैयार थे…।

*****

किसी भी मनोरंजक टीवी के रियलिटी शो की तरह यहाँ भी प्रचार प्रसार प्रगति पर था..
वो आदमी जो भदौरिया के साथ मानव व्यापार किया करता था इत्तेफाक से उसका नाम मानव जेरा था !
मानव ने अपना पूरा राज्य बना रखा था..
अरब देशों से लेकर अमेरिका यूरोप चायना जापान से उसके ग्राहक जुड़े थे..
इन रईसों का काम ही यही था..
महीने के बीस बाइस दिन काम करना और बाकी दिन अपना मनोरंजन करना..
इनके मनोरंजन के खौफनाक तरीके इनसे जुड़े लोगो को भी मालूम नहीं थे..

मानव का गेम दो तरीके से खेला जाता था..
एक तरीका था ऑनलाइन यानि लोग सिर्फ स्क्रीन पर ही लोगो को मरते कटते देख सकते थे, दूसरा तरीका था, ऑफलाइन..
जहाँ लोग अपने सामने बस एक कांच की दीवार के परे लोगो को मरते कटते देख कर खुश होते थे..
इस बार इस गेम का अगला चरण खेला जाना था..

उस चरण को खेलने के लिए बोली लगवाई गयी थी। क्यूंकि उसे खेलने के लिए आप स्वयं उस पुरुष या महिला के सामने प्रस्तुत होकर उस पर अपना मनमाना अत्याचार कर सकते हैं..
इसलिए यहाँ बोली लगवा कर सिर्फ दस लोगो का चुनाव किया गया था..
इस बोली में ही मानव ने करोडो कमा लिए थे।

वहां मौजूद लोग इस खेल को खेलने आतुर हुए जा रहे थे..।

जब उन सभी विजेताओं को मानव ने उस विशेष  कमरे में बुलावा भेजा, तो सबकी बांछे खिल गयी, वहां एक ऊँची कुर्सी पर एक सुंदर महिला बैठी थी..
जिस पर ये राक्षस अपनी मनमानी कर सकते थे..
वो सारे लोग वहां पहुँच कर खुश बहुत खुश थे…
उनमे से सबसे पहले एक अधेड़ उम्र का आदमी आगे बढ़ा, उसकी आंखे अंगार बहा रही थी..
उसने वहां रखे मेकअप के सामान में से लिपस्टिक उठायी और उस लड़की के होंठो पर लगाने लगा..
लगाते हुए धीरे धीरे उसके अंदर का गुस्सा बढ़ने लगा और वो लिपस्टिक उसके पूरे चेहरे पर पोतने के बाद भी उसका मन नहीं भरा तो वहां उस लड़की के आजू बाजु खड़े गार्ड्स ने उसे रोका और वापस उसकी कुर्सी तक ले जाकर छोड़ आये..

उस गेम की शर्त यही थी कि सबको सिर्फ चालीस सेकंड का वक्त दिया जायेगा..
उसके बाद एक एक कर लोग आने लगे..
किसी ने उसके कपड़े फाडे किसी ने गलत तरीके से छूने की कोशिश की और तभी उनके बीच से एक अधेड़ गंजा उठ कर आया और वहां रखे ट्रिमर को उठा कर लड़की के सर पर चला दिया..
एक एक कर लड़की के बालों का गुच्छा ज़मीन पर गिरने लगा और वो राक्षस अट्टहास करने लगा..
उसके खुद के बाल नहीं होने से उसे अपने लिए काफी कुछ सुनना पड़ा था, वो अपने जीवन भर की फ़्रस्ट्रेशन उस मासूम लड़की पर उतार कर खुश हो रहा था..।

लड़की शांत खामोश सी बैठी सब कुछ सह रही थी..
ये पूरा सेशन दस मिनट का था, लेकिन इन दस मिनटों में उस लड़की ने सारा नर्क झेल लिया था..

ये सब इस गेम का प्रो वर्शन था..
जो इसी लड़की के प्रयोग के साथ शुरू हुआ था और अब ये नामचीन रईस अपने सामने ऐसी ही अवस्था में विजयराघवगढ़ रियासत के राजकुमार को देखना चाहते थे..

****

मानव की भदौरिया से बात हो चुकी थी..
और भदौरिया की बात अब शौर्य से हो रही थी..

धनुष और विक्रम को चुप रहने का इशारा कर शौर्य ने भदौरिया का फ़ोन मिला लिया..

“कहाँ पहुंचे हो..?  अब तक यहाँ आये नहीं तुम ?”

“पहुँच ही रहे हैं ?”

“कोई और तो नहीं है साथ ?”

“विक्रम ?”

“उसे क्यों रखा ?”

“उसे बताना पड़ा क्यूंकि हर्ष को महल से बाहर निकालना मेरे अकेले के बस का नहीं था..
और वैसे भी विक्रम तो तुम्हारा ही आदमी है.. ।”

“हाँ विक्रम मेरा ही लड़का है, लेकिन यहाँ सिर्फ दो लोगो का एंट्री पास है.. गुरु की सिक्युरिटी जानते तो हो..
चलो मैं कुछ करता हूँ..।”

“सुनो भदौरिया.. एक बात कहनी है।”

“बोलो ।”

“मेरी एक शर्त है।”

“हैं? तुम शर्त रखने वाले कौन होते हो?”

“तुम जो भी समझो, लेकिन अगर मैरी शर्त नहीं मानी तो मैं सीधा पुलिस स्टेशन चला जाऊंगा..।”

“ओफ्फो अब क्या शर्त है तुम्हारी ?”

“मैंने तुम्हारी बहुत बड़ी डिमांड पूरी की है, इसके बदले तुम्हे मेरी बात माननी होगी।”

“क्या.. बोलो तो सही।”

“मैं हर्ष को तुम्हारे पास नहीं छोडूंगा.. मैं इसे उसी को दूंगा जो असल में तुमसे ये कारोबार करता है..
छोटा मोटा काम बहुत हो गया, अब बड़ा कुछ करना है ।”

“पगला गया है क्या तू ?”

“ठीक है तो वापस जा रहा हूँ.. जवाब दे देना अपने मालिक को..।”

“अबे वो कोई मेरा मालिक नहीं है। बिज़नेस करता हूँ उसके साथ..।
और तू इतना लालच क्यों कर रहा.. क्या हो गया है तुझे?”

“छोटे मोटे काम कर के थक गया हूँ.. अब मुझे उसी के साथ जुड़ कर काम करना है जो मुझे पैसो के साथ नाम भी दे पाए..।”

“नाम तो उसका खुद का नहीं है..तूने कभी सुना है किसी मानव जेरा का नाम..?”
कौन सा नाम बनाना चाहता है बेवकूफ..यहाँ सब दबे छुपे ही रहते है ।”

“तुम और तुम जैसे जैकडो लोग उसका नाम जानते हैं.. बस मुझे भी उतनी ही पहचान चाहिए और ढेर सारी दौलत, जिससे मैं भी रईसों की ज़िन्दगी जी सकूँ !”
“तुम जल्दी से बताओ वर्ना, मैं गाड़ी घूमा लूंगा।”

भदौरिया गुरु के साथ बैठा था.. गुरु ने इशारे से गर्दन हाँ में हिला दी और भदौरिया ने शौर्य को कहाँ पहुंचना है ये बता कर फ़ोन काट दिया..

गुरु ने हेलीकॉप्टर तैयार रखा था, उसी जगह के लिए शौर्य की गाडी आगे बढ़ गयी.. ।

क्रमशः

पिछले भाग में किसी पाठिका ने कमेंट किया कहानी एकदम टीवी सीरियल की तरह लम्बी होती जा रही है, तो, पहले तो उनका शुक्रिया कि मुझे टीवी सीरियल लिखने के काबिल समझा उन्होंने।
दूसरा ये कि मैं तो जीवनसाथी का प्रथम सीजन लिख कर ही खुश थी, आप सभी की डिमांड पर दूसरा सीजन लिखा, मेरा ऐसा कोई प्लान नहीं था..।

तीसरा सीजन भी आप सबकी डिमांड पर ही लिखा है.. लेकिन तीनो सीजन में राजा साहब बांसुरी के अलावा आपस में कोई समानता नहीं है। यानि हर बार की विषयवस्तु अलग रखी। जिससे आपका मनोरंजन हो..।
उसके बाद आप लोगो में से कुछ लोग कितना ओछा कमेंट कर जाते हैं..

प्रतिलिपि पर लिखना छोड़ा, वहां पढ़ते तो आप लोगो को रोज़ नया एपिसोड पढ़ने के लिए पैसे देने पड़ते, मैंने मेरी कहानी निशुल्क दी हैं फिर भी कुछ पाठक ऐसे धौंस जमाते हैं कि मैं गुलाम हूँ..
पढ़ना न पढ़ना आपके हाथ है.. कहानी लंबी लग रही या पसंद नहीं आ रही तो आपने कौन सा मेरा कर्ज खाया है जो पढ़ना जरुरी ही हो..
इस ब्लॉग पर बस मैं लिखती हूँ। किसी अन्य लेखक से मेरी कोई प्रतियोगिता नहीं है, इसलिए मन मुताबिक लिखती हूँ.. सुकून के लिए लिखती हूँ..।

हाँ ये जरूर है कि आजकल महीने में एक भाग आ पा रहा है उसके लिए वाकई दिल से माफ़ी मांगती हूँ..
कुछ पारिवारिक कारण कुछ मेरी अस्पताल की व्यस्तता के कारण ऐसा हो रहा..
वादा नहीं है लेकिन कोशिश जरूर रहेगी कि समय पर कहानी लिख कर इस सीजन को ख़त्म करूँ और इसके बाद ये सीजन अब आगे नहीं बढ़ेगा..

जल्दी मिलते हैं अगले भाग के साथ.. ।

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Chanda Thakur
Chanda Thakur
14 days ago

Jeevansathi ek aisi kahani hai jo season 3 mein bhi interesting hai, kabhi bojhil nahi hui, aur hamein ise padhte rehna hai, haan parts late aa rahe hain aajkal lekin lekhak bhi ek insaan hai uski apni bhi life hai toh is tarah pressurized karna galat hai, aap likhiye mam, hum wait karenge parts ka, jeevansathi sirf ek kahani nahi hai ek safar hai Raja aur bansuri ka jise hamne unke sath anubhav kiya hai, aaj ka part interesting hai, thanks Aparna ji 🌹🙏🌹

Sushila kumawat
Sushila kumawat
18 days ago

ऐसे मनोविकारों वाले लोगों का क्या ही किया जा सकता है

Sonu
Sonu
23 days ago

Very nice part

Kamlesh kumari
Kamlesh kumari
25 days ago

Next part

Seema Srivastava
Seema Srivastava
26 days ago

Very beautiful

Poonam upadhyay
Poonam upadhyay
27 days ago

Kahani ka to besabri se intejar rahata hai, bahut sundar

Aruna
Aruna
1 month ago

Kuchh to log kahenge,logo ka kaam hai kahna, chhodo bekar ki baato ko,hum sath aapke hai na 🥰🥰🥰🥰👍👍👌👌

Aruna
Aruna
1 month ago

👌👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏👏

Dhara Kundaliya
Dhara Kundaliya
1 month ago

Super se bhi upar wali story ❤️ awesome part 💓 superb story 😍 bahut bahut bahut bahut bahut bahut bahut bahut hi behtrin story ❤️ eagerly waiting for new part 💓

Deepali
Deepali
1 month ago

Lagta hai ab bhadauria aur guru ka time poora hone vala hai