
जीवनसाथी -3 भाग -163
गुरु का परिवार राजनीती से जुड़ा था, कपडा कारोबारी थे उसके बाप दादा, पैसो की कमी न थी, बस वही घमंड उसे ले डूबा..
उसके लिए पढाई सिर्फ डिग्री लेने का बहाना मात्र थी। डिग्री पूरी करने के बाद वह अपने पुश्तैनी कारोबार में जुड़ गया। लेकिन कम समय में ज्यादा पैसे कमाने का लालच धीरे-धीरे उसे एक ऐसी दुनिया में ले गया जहां से वापसी संभव नहीं थी। उसने अनैतिक ड्रग्स का कारोबार शुरू किया। कॉलेज के बच्चों में ड्रग्स सप्लाई करने से शुरू हुआ उसका यह काम धीरे-धीरे देश की सीमा पार करने लगा..
पहले जहां उसका काम पहाड़ों पर आने वाले विदेशी टूरिस्ट तक सीमित था। अब देश की सीमा पार करने लगा था। नेपाल और बांग्लादेश की सीमा तक उसका काम बढ़ गया था। और यही से उसे एक दूसरा काम मिल गया…।
वो काम था इलीगल तरीके से लोगों को उठा कर दूसरे गैंग तक पहुँचाने का..
इसी सब के दौरान उसकी मुलाकात भदौरिया से हुई थी …
ये सब कुछ इतना आसान भी नहीं था..
पुलिस, प्रशासन सबकी नजर के नीचे से ये काम पूरा कर ले जाना कठिन था..
इस पूरे काम को करने के लिए एक पूरी लॉबी थी..
ऊपर से नीचे तक लोगो को अपने पाले में लाकर सेटिंग की गयी थी, जिससे अगर कभी किसी बड़े पुलिस अधिकारी तक बात पहुंचे, तो उसी समय मामले को सुलाटाया जा सके..
गुरु अपने काम में पक्का था, वो क्रूर था नृशंस था.. उसे किसी का खून बहाने में पल भर सोचना नहीं पड़ता था..।
पहली बार उसके हाथ से एक गैर इरादतन हत्या हुई थी। जिसमे उसके वकील की सूझबूझ के कारण वो कुछ मुचलके पर ही छूट गया था..।
लेकिन इसके बाद उसका साहस दुस्साहस में बदल गया था..।
उसका हाथ हथियारों पर खुल चुका था..
उसे महंगी गन रखने का शौक भी था.. ये उसका कुछ अजीब ही शौक था !
एक लाइसेंस शुदा गन के अलावा उसके पास और भी कई हथियार थे, जिन्हे वो अपने लिविंग रूम की ग्लास डोर अलमीरा में शान से सजा कर रखता था..।
गुरु शौकीन था खाने पीने का पहनने ओढ़ने का.. लेकिन घर वालो के लाख कहने पर भी आज तलक उसने शादी नहीं की थी..।
इन्हीं सब के दौरान उसकी मुलाकात भदौरिया से हुई, और वो उसके साथ कारोबारी हो गया..
भदौरिया की एक बेटी भी थी, जो विदेश में पढाई के दौरान चरसी हो गयी थी..।
रिहेबिलिटेशन सेंटर में साल भर गुजार के आने के बाद अब उसकी हालत में थोडा सुधार तो था, लेकिन अब भी वो कभी भी अपने पुराने अवतार में लौट सकती थी..
भदौरिया चाहता था गुरु की उसी से शादी हो जाये..
इसीलिए वो गुरु को अपने करीब रखता था, लेकिन देखते देखते वक्त बीत गया और गुरु और रनिशा की शादी नहीं हो पायी..
हर बार जब शादी की बात आगे बढ़ती कोई न कोई पन्गा पड़ ही जाता..
पहले एक बार जब शादी की तारिख तय हुई, उस तिथि पर गुरु के दादा नहीं रहे। अगली बार दादी चली गयी। उसके बाद, एक बार गुरु किसी मुआमले में जेल जाते जाते बचा। इसलिए उसे कुछ समय के लिए छिपना पड़ा..
और फिर गुरु के माता-पिता एक सड़क दुर्घटना में मारे गए..
इस सबके बाद जैसे-तैसे दो तीन साल पहले गुरु और रनिशा की शादी हुई, लेकिन शादी के बाद से ही रनिशा वापस अपने पुराने रंग में डूब गयी..
उसकी चरसी मित्रमंडली गुरु के सजे संवरे घर की शोभा बढ़ाने लगी..
अब गुरु भदौरिया के साथ ह्यूमन ट्रेफिकिंग के उस व्यापार में शामिल हो चुका था, जहाँ इंसान की कीमत एक चाबी वाले गुड्डे से ज्यादा न थी..
इन लोगो का व्यापार विदेशियों के साथ था..
गुरु अपने स्तर पर गरीब गुमनाम लोगो को उठा कर भदौरिया तक पहुंचा दिया करता था। जहाँ से भदौरिया उन्हें एक दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाया करता था..
वो व्यक्ति एक बड़ा ऑनलाइन गेम शो चलाता था..
जहाँ पर उस गेम को देखने वाले लोग बिडिंग कर के अपने पसंदीदा इंसान को चुनते थे..
जिसकी बोली ज्यादा ऊँची लगती, उसके लिए उसके पसंदीदा इंसान को केमेरा स्क्रीन पर ले आया जाता था..।
जहाँ वो बोली लगाने वाला अपनी मर्ज़ी से उस इंसान के साथ किसी भी तरह की ज्यादती कर सकता था..
नाखुनो से खरोंचना, बालो को एक एक कर उखाड़ना, नाखुनो को खींचना, करेंट देना, चाकू से उसके हाथो पैरो पर अपना नाम लिखवाना जैसे खूंखार और जानलेवा काम इस खेल में किये जाते थे..
औरतो और लड़कियॉं के साथ इससे भी भयानक काम होता था..
ये सब देखने वालों के लिए हर एक स्टेप को देखने की एक रकम तय होती थी..।
हर स्टेप के लिए इन्हे एक ऊँची रकम देनी होती थी। जिसके बाद इनके लिए अगला राउंड खोला जाता था..।
इस गेम में भाग लेने वाले फितूरी और सनकी किस्म के लोग थे, जिनके पास पैसा तो बेशुमार था लेकिन इस पैसे को कमाने की दौड़ में वह लोग अपने संबंधों अपनी भावनाओं को पूरी तरह खर्च कर चुके थे। शायद इसलिए अब उनके पास सिर्फ पैसा ही बचा रह गया था। और उनकी अतृप्त वासनाओं से उपजा यह घृणित खेल उन्हें एक अजीब सी लिजलिजी मानसिक संतुष्टि प्रदान करता था। इस खेल के हिस्सेदार कहीं ना कहीं मानसिक रोगी थे, जो अपने पैसों के दम पर दूसरों को तकलीफ देकर खुश और संतुष्ट हुआ करते थे..।
बाहरी रूप से देखा जाए तो अपने जीवन में यह खुश और संतुष्ट थे, लेकिन इनका मानसिक एकाकीपन इन्हें दूसरों को प्रताड़ित करके संतुष्टि देता था..।
एक तरह का अजीब चक्रव्यूह था। इस गेम की एक शर्त यह भी थी कि जिस इंसान को प्रताड़ित किया जाएगा उसे जितना लंबा हो सके जिंदा रखना होगा, और वह इंसान जितना प्रताड़ना सह सके, गेम का प्राइज उतना ही बढ़ता जायेगा..।
जब से ये गेम शुरू हुआ था, तभी से इस गेम को चलाने वाला अपने अंदर काम करने वालों से ऐसे लोगों को पकड़ कर लाने बोला करता, जिनका कोई आगे पीछे न हो। जिससे ऐसे गरीब लोगों के गायब होने पर कोई पुलिस केस न बन सके। अब तक यही होता आया था। गुरु भदौरिया के जरिए गरीब और बेनाम लोगों को सप्लाई करता था, लेकिन अब गेम अपने अगले पड़ाव पर पहुंच चुका था।
वहां गेम खेलने वाले लोग अब अपने सामने रईस और सिलेब्रिटीज को प्रताड़ित होते देखना चाहते थे। इसी कड़ी में फिल्म इंडस्ट्री का एक चरित्र अभिनेता शामिल हुआ।
कुछ समय पहले वह अचानक शहर से गायब हो गया था। जिसके बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता चला था। यह चरित्र अभिनेता 20 साल पहले फिल्म इंडस्ट्री का एक नामी गिरामी नाम था। लेकिन अब समय के साथ उसे काम मिलना भी लगभग बंद हो चुका था। सुबह के समय जब वह मरीन ड्राइव पर टहल रहा था, तब उसे दो लड़के ऑटोग्राफ लेने के बहाने बुलाकर कार तक ले गए, और अगवा कर लिया।
इस शो का पहला सेलिब्रिटी विक्टिम वही बना था। जिस दिन इस चरित्र अभिनेता के साथ गेम शुरू हुआ, गेम में बोलियां बहुत ऊंची ऊंची चढ़ने लगी। करीबन दो-तीन लोगों की प्रताड़ना से होने वाली कमाई अकेले इस चरित्र अभिनेता ने पूरी कर दी थी।
इसके बाद गेम खिलवाने वालों के दिमाग में यह बात आई कि अगर प्रसिद्ध नामचीन लोगों के साथ यह गेम खेला जाए तो कमाई एक बार में 4 से 5 फीसदी बढ़ सकती है, और उसने भदौरिया के सामने अपनी इस नाजायज मांग को भी परोस दिया..
भदौरिया इस बात से सकते में था, क्योंकि उसे मालूम था भारत में सिलेब्रिटीज को उठाना इतना भी आसान नहीं है.. इस चरित्र अभिनेता के उठाए जाने के बाद भी पुलिस बहुत तेजी से उसकी तलाश में लगी हुई थी! जब एक पुराने चरित्र अभिनेता के लिए इतनी खोजबीन की जा सकती थी तो बाकियों का क्या ?
लेकिन इस बार उस पर किसी बड़े राजनेता को उठाये जाने का दबाव बनाया जा रहा था..
भदौरिया ने आज तक उस आदमी कक देखा नहीं था जिसके लिए वो लोगो को सप्लाय किया करता था, वो आदमी भदौरिया से विडिओ कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये ही बात किया करता था..
उसकी आवाज़ भी बदली हुई सी आती थी..
वो हमेशा एक हल्के मास्क के पीछे अपना चेहरा छुपाये रहा करता था..
लेकिन भदौरिया को इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता था, उसे बस मिलने वाले बेशुमार पैसो से मतलब था…
भदौरिया के सामने जब उस आदमी ने इस बार अपने पसंदीदा राजनेता का फोटो रखा तो भदौरिया हड़बड़ा गया..
फोटो राजा अजातशत्रु का था!
भदौरिया ने पूछा भी कि इस राजनेता को वो क्यों बुलाना चाहता है इससे उसकी कौन सी दुश्मनी है..
इस बात पर वो आदमी जोर से हंसने लगा..
उसका कहना था, ये अभी सबसे ज्यादा नामचीन है इसलिए इसे वो अपने गेम का हिस्सा बनाना चाहता है, लेकिन वो जानता है कि इसे यहाँ तक लाना नामुमकिन है.. लेकिन अगर इसका बेटा भी यहाँ तक आ गया तो गेम एकदम से बूस्ट कर जायेगा..
अब तक भदौरिया को जितनी रकम दी जा रही थी, उसका पंद्रह गुना देने का वादा उस आदमी ने किया और भदौरिया की आँखें चमक गयी..
उसने अपना ये प्लान गुरु को बताया और वो दोनों महल की निगरानी में लग गए..
भदौरिया ने ये सब शौर्य को भी बता दिया..
“तो वो लोग मुझे मारना चाहते है, तुम पागल हो क्या ?” शौर्य ने तुनक कर कहा..
“नहीं, तुम्हें नहीं.. मैं चाहता हूँ तुम महल के राजकुमार को यहाँ ले आओ !”
“राजकुमार हर्षवर्धन को ?”
“हाँ.. उसके लिए भी हमे मुहँमांगी रकम मिलेगी.. इस बार तुम्हें मैं डबल रुपया दूंगा !”
“ठीक है !”
शौर्य ने हामी भर दी थी.. और नियत समय पर उसने काम को अंजाम दे ही दिया !
क्रमशः

Wow superb episode
Aisa lagta hai ki yah game ko khatm karne ke liye Raja Prem aur Samar ka plan hai
Omg ese logo ke saath bhi ese karna wala koi hona chiye
Nyc part
❤️❤️❤️❤️
क्यो हमारी जान सुखाई हुई है
ये शौर्य हमारा है नकली नही
ये हर्षवर्धन को कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकता
ऐसे वीभत्स काम करने वालो को सरे आम गोली मारनी चाहिए
Nice part 👌👌👌👌👌👌
Ye toh bahut lambi chaudi planning thi jise nakli shaurya ne pura kiya.ye toh achha hua ki wo pakda gya warna harsh ka pata lagana muskil ho jata 😱😱😱😱.aise khel khelne walon ko kadi saza milni chahiye
👌👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏
बहुत सुंदर रचना 🌹🌹
बहुत ही भयानक क्रूर है ये सब। पता नहीं इंसान की हैवानियत क्या कर गुजरे कहा नहीं जा सकता 🙄🥺
Nice