जीवनसाथी -3 भाग -162

धनुष गहरी आँखों से शौर्य को घूर रहा था…
शौर्य की आँखों में हलकी सी घबराहट तैर गयी, लेकिन उसने खुद को संभाल लिया..

उसने अपनी ऊँगली अपने मुहं पर रख कर धनुष को चुप रहने का इशारा किया और गाड़ी को धीमे से आगे बढ़ाने लगा..

धनुष हद से ज्यादा समझदार लड़का था..।
उसका दिमाग जितना लोगो को दिखता था, उससे कहीं ज़्यादा वो अपना दिमाग चलाया करता था..।
उसने सारे सीसीटीवी कैमेरा चेक किये थे..
उसे हर्ष महल से बाहर जाते कहीं नजर नहीं आया था, तभी वो समझ गया था कि हर्ष को असल में महल में ही कहीं छिपा कर रखा गया है।
और अँधेरा घिरने के बाद उसे बाहर ले जाया जायेगा.. लेकिन ये कर कौन सकता है ?

इसी बात पर धनुष की गाडी अटक रही थी।
और इसलिए वो पूरा वक्त सीसीटीवी स्क्रीन पर नजर जमाये बैठा था..

उसकी नजर महल के हर दरवाजे, हर चौखट, पर थी। और तभी किसी ने कैमेरा बंद कर दिया..

धनुष खट से उठा और महल के मुख्य द्वार की तरफ उसने दौड़ लगा दी..
अपने खास लड़को को उसने महल के बाकी के द्वारों पर तैनात रखा था, लेकिन उसे पूरा विश्वास था कि हर्ष को लेकर यहाँ से निकलने वाला कोई महल का ही व्यक्ति होगा..

धनुष को मुख्य द्वार तक आने में वक्त नहीं लगा…
और धनुष के वहां पहुँचने के कुछ ही मिनटों में शौर्य अपनी गाडी लेकर वहां पहुँच गया !

मुख्य द्वार पर मौजूद गार्ड ने शौर्य को नमस्ते किया और गेट खोल दिया, लेकिन गार्ड महल के सुरक्षा नियमों को ध्यान में रखते हुए शौर्य की गाड़ी का सामने से फोटो लेने लगा और उसी समय वो सामने कुछ ज्यादा ही वक्त लगाने लगा.. ।

शौर्य को हड़बड़ी थी, लेकिन गार्ड फोटो नहीं ले पा रहा था, और इसी वजह से शौर्य को बस कुछ मिनट के लिए गाड़ी से उतर कर गार्ड तक जाना पड़ा।

ये महल के रोज़ के सुरक्षा नियम थे।
कोई भी गाड़ी जब भी बाहर जाये, उस गाड़ी का नंबर फोटो के साथ वहां डिजिटली सुरक्षित कर लिया जाता था। और गाड़ी के वापस लौटने पर तस्दीक कर ली जाती थी कि गाड़ी और गाड़ी सवार सकुशल वापस लौट आये हैं..

ये एक सुरक्षा नियम था, इसलिए शौर्य टोक भी नहीं सकता था।
जिस वक्त शौर्य उतर कर गार्ड तक गया, उसी समय उसकी नजर बचा कर धनुष गाड़ी में सवार हो गया था..

अब तक चुप बैठा धनुष शौर्य के कुछ बोलने का इंतज़ार कर रहा था…
शौर्य गाडी धीरे धीरे आगे बढ़ाता रहा, उसने एक तरफ आगे बढ़ने के बाद गाडी रोकी और चुप रहने का इशारा करते हुए धनुष को गाड़ी से उतरने का इशारा कर खुद भी गाड़ी से उतर गया…।

धनुष भी उसके साथ ही उतर गया, लेकिन शौर्य ने चुप रहने कहा था इसलिए धनुष चुप था !

शौर्य ने अपने पास रखी कलम निकाली और एक पेपर पर कुछ लिखने लगा..

उसे सब कुछ लिखने में वक्त लगा, लेकिन जब उसने धनुष के सामने वो परचा रखा तो उसे पूरा पढ़ने के बाद धनुष की आंखे फटी की फटी रह गयी..

*****

महल से कोसों दूर भदौरिया का खास आदमी गुरु अपने ऑफिस में बैठा एक मीटिंग ले रहा था..।

गुरु एक मंझोली उम्र का लम्बा तगड़ा आदमी था..
उसके माथे पर दाहिनी आँख के पास एक लम्बा सा कट का निशान था, जो पुराना होने के बावजूद अब भी अपनी गहराई का आभास करा जाता था..।
गुरु बात बात में अपने उस कट के निशान को सहला लिया करता था..
शुरुवात में शायद दर्द के कारण ऐसा करता रहा होगा, लेकिन अब उसे ऐसा करने की आदत हो गयी थी..।

गुरु का भी एक इतिहास था !

और ऐसे लोगो के इतिहास में राजा साहब, प्रेम या समर शामिल न हो ये नामुमकिन था !

ये उस समय की बात थी जब राजा साहब कुछ समय के लिए बनारस विश्वविद्यालय के छात्र थे !
वहां छात्र संघ के चुनाव होने थे.. साथ पढ़ने वाले लड़के लड़कियां अजातशत्रु के पीछे पड़े थे कि उन्हें भी ये चुनाव लड़ना चाहिए, लेकिन वो ऐसा बिलकुल नहीं करना चाहते थे..।

उस समय अपने महल के प्रोटोकॉल से तंग राजा अपनी सिक्युरिटी साथ नहीं रखना चाहता था, इसलिए उनके पिता ने प्रेम को संग भेज दिया था..
लेकिन अक्सर प्रेम को भी राजा वापस भेज दिया करता था..

उस वक्त काफी दिनों बाद प्रेम की वापसी हुई थी।
वो अपने मिजाज के मुताबिक चुप ही रहा करता था..
उसे दो दिन वहां रह कर, वहां का जायजा लेकर वापस ही लौटना था..।

वापस लौटने के ठीक एक दिन पहले शाम के वक्त राजा के कुछ दोस्त उसे साथ लेकर घूमने निकल गए थे..

गंगा के किनारे अस्सी घाट पर वो सब लोग साथ बैठे बातें कर रहे थे..
उन लोगो से जरा हट कर प्रेम भी बैठा था।

राजा के कॉलेज में एक लड़की थी, जो राजा को बहुत पसंद किया करती थी.. ।
गुरु और उसके कुछ दोस्तों ने उस लड़की को राजा ने चिट्ठी दी है ये बोल कर एक झूठा प्रेमपत्र दे दिया..
जिसमे उस लड़की को प्रोपोज़ करने के साथ ही राजा ने उसे शाम में घाट पर मिलने भी बुलाया था..।

वो लड़की तयशुदा वक्त पर घाट पहुँच गयी, वहां राजा पहले ही अपने दोस्तों के साथ बैठा था..
वह लड़की राजा के पास पहुंची और उसने अपने दिल की बात राजा से कह दी। राजा यह सब सुनकर अचानक हड़बड़ा गया। उसे समझ में नहीं आया कि क्या हो रहा है।
और लड़की को ऐसा लग रहा था जैसे राजा इन सभी लोगों के सामने उसे अपने दिल की बात कहना चाहता है।
जब राजा ने उस लड़की के प्रपोजल को धीरे से नकार दिया, तो वह लड़की इसे मजाक समझ कर हंसने लगी।

उसके हंसने पर राजा के दोस्त भी जोर से हंसने लगे। और उस लड़की का मजाक सा बना दिया।

राजा उन लोगों को रोकने लगा और बार-बार यह कहने लगा कि उस लड़की को जरूर कुछ गलतफहमी हुई है। तब जाकर उसे यह एहसास हुआ कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है…।

वह लड़की तेजी से पलटी और वहां से वापस भाग गई। लेकिन उसके बहते आंसू और लरजते शब्द राजा के दिल में बिंध कर रह गये।
उसे लगा लड़की कहीं कोई गलत कदम ना उठा ले। और इसलिए वह भी उसके पीछे भागने लगा। लेकिन तब तक वह लड़की बहुत दूर जा चुकी थी।

उसने बहुत ऊंचाई पर जाकर पानी में छलांग लगा दी। राजा का एक दोस्त उस लड़की से पूर्व परिचित था। वह घबरा कर चिल्ला उठा कि उसे तैरना नहीं आता।

उस लड़की के पीछे प्रेम और दो एक लड़के और पानी में कूद गए। प्रेम ने उस लड़की को बचा लिया और उसे किनारे पर ले आया, लेकिन इस सारी अफरा तफरी में परेशान होकर वह लड़की बेहोश हो गई थी।

उसे बेहोश देख राजा को और भी बुरा लगने लगा। उसे लगा जैसे सारी गलती उसी की है। लड़की को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां कुछ प्राथमिक चिकित्सा के थोड़ी देर बाद उसकी छुट्टी कर दी गई। लड़की राजा से कोई बात नहीं करना चाहती थी। उसकी तरफ देख भी नहीं रही थी। लेकिन राजा के लिए यह जानना बहुत जरूरी था कि बिना उसके बढ़ावा दिए अचानक यह लड़की क्यों उसके लिए इतनी भावुक हो गई..।

राजा की लाचारगी बस प्रेम ही समझ पा रहा था। उसने इधर उधर पता किया और उसे गुरु की सारी सच्चाई पता चल गयी।

उसने गुरु को मिलने बुलाया और बातों ही बातो में जब हंसी मजाक में गुरु ने सारी सच्चाई कबूल कर ली, तब प्रेम ने उसका वो हाल किया की गुरु ने सोचा भी नहीं था..।

राजा ने जब सुना कि प्रेम किसी की धुनाई कर रहा है राजा भी वहां पहुँच गया..।

उसने जाते ही प्रेम को ऐसा करने से रोक दिया..
प्रेम के गुस्से को अगर कोई रोक सकता था तो वो राजा ही था..।

राजा के रोकने पर प्रेम एक तरफ ठहर गया..
गुरु राजा की तरफ देख रहा था।
राजा उस तक आया और गुरु के चेहरे की तरफ देख उसने बस इतना कहा..

“किसी लड़की के चरित्र के साथ कभी खिलवाड़ मत करना वर्ना ज़िंदगी भर पछताओगे..।”

गुरु ने हंस कर राजा के कंधे पर हाथ रखा औऱ  लड़की को लेकर एक भद्दी सी बात कह दी..  और राजा ने उसका हाथ पकड़ कर मरोड़ दिया!

हाथ मरोड़कर  राजा ने उसे खुद से दूर करने के लिए धक्का दिया और गुरु ज़मीन पर यूँ गिरा कि उसी का कुछ समय पहले गिरा चाकू जो नीचे पड़ी लकड़ी में फंस गया था उसके माथे और आँखों के बीच एक लम्बा कट बना गया..।

नफरत से उसे देख कर प्रेम राजा के पास आया और उसे अपने साथ ले गया..।

इस सब के अगले ही दिन राजा ने प्रेम को महल वापस भेज दिया था..
राजा नहीं चाहता था कि वहां कोई भी जाने कि वो राजकुमार है.. वो वहां एक साधारण आदमी बन कर रहना चाहता था।

गुरु भी तब तक इस बात को नहीं जानता था और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज़ कर दी..।

वो लड़की जिसे अब तक गुरु ने बरगलाया था, वो भी राजा के खिलाफ गुरु के साथ हो गयी.. और इन्ही सब से बचने के लिए रातो रात राजा को बनारस से रायपुर आना पड़ा था..।

यहाँ किसी दोस्त की शादी भी थी, उसने सोचा शादी अटेंड कर के यही से चुपचाप मुंबई चला जायेगा..

और फिर मुंबई जाते समय राजा की मुलाकात बांसुरी से हो गयी थी..

इसके बाद राजा ये सारे ज़ख्म भूलता चला गया था…
लेकिन गुरु अब भी कुछ नहीं भूला था…

क्रमशः

4.9 24 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

35 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Archana Singh
Archana Singh
16 hours ago

Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

Sushma
Sushma
1 day ago

Age ke part jaldi de plz👍🏾👍🏾👍🏾👍🏾💘😘

Sushma
Sushma
1 day ago

Nice part

Radhika Porwal
Radhika Porwal
16 days ago

Wow superb

Jagriti
Jagriti
27 days ago

Nice part 👌💖💖
Please post soon next part 🙏

Nishu
Nishu
1 month ago

Mam waiting bht lambi ho jaati hai

Sonu
Sonu
1 month ago

Very nice part

Aruna
Aruna
1 month ago

👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏

Vinod Kumar Bansal
Vinod Kumar Bansal
1 month ago

बहुत सुंदर रचना 🌹🌹

Ritu Jain
Ritu Jain
1 month ago

Very nice part.pls ma’am part jaldi post kijiye. Atithi kab padhenge