
राजा साहब भी महल पहुँच चुके थे…
एक एक कर सारी रस्मे पूरी होती चली गयी थी..
मंडप सज चुका था, सभी तरफ उत्साह था।
किसी के पास ठहरने का वक्त ही कहाँ था..?
हर कोई किसी न किसी काम में उलझा था।
कोई मतलब के काम तो कोई बिना मतलब, बिना ज़रूरत के काम में, लेकिन हर कोई व्यस्त ज़रूर था..
मीठी अपने कमरे में तैयार हो रही थी..।
पता नहीं क्यों, लेकिन आज उसका दिल थोड़ा घबरा रहा था..।
रह रह कर आंखे भीगने को आतुर हुई जा रही थी.. उसकी खुद की समझ से परे था कि आखिर इतने शुभ समय पर उसकी आंखे क्यों भीगने को तत्पर हुई जा रही थी..।
उसके कमरे में उसकी माँ भी यहाँ से वहाँ कभी कोई सामान रख रही थी, कभी कुछ निकाल रही थी। और इसी सब में अपने आंसू छिपाने का प्रयास भी कर रही थी..।
उसी वक्त किसी काम से प्रेम वहां चला आया….
उसने मीठी की तरफ देखा ही नहीं, वो एक अलमारी से अपने काम का सामान लेकर बाहर निकलने लगा कि मीठी ने उसे टोक दिया..
“पापा.. !”
“हम्म.. !”
अब भी प्रेम की, मीठी की तरफ देखने की हिम्मत नहीं हो रही थी।
उसकी छोटी सी गुड़िया आज दुल्हन बनी बैठी थी।
प्रेम बहुत देर से अपनी भवनाओ को दबाये बैठा था..
उसे पता था अब मीठी किसी और के घर की बहु बन जाएगी।
अब उस पर, उसका पहले जैसा हक नहीं होगा..।
अब उसका घर, मीठी की हंसी से वैसे गुलजार नहीं रह पायेगा जैसे हमेशा हुआ करता था..।
मीठी के चले जाने से जो खालीपन आने वाला था, उसकी कोई भरपाई नहीं थी।
सुबह से जाने कितनी बार यही सोच सोच कर उसका कलेजा मुहं को आ रहा था, लेकिन उसने अपने आंसू ज़ब्त कर रखे थे!
निरमा इस बात को समझती थी !
वो खुद एक माँ थी, और आज तलक वो ही हमेशा प्रेम की भावनाओ को संभालती आयी थी।
उसके आंसू बड़ी मुश्किल से निकलते थे, लेकिन दुनिया के सामने पत्थर की तरह पूरी कठोरता से खड़ा रहने वाला प्रेम अक्सर घर के एकांत में पिघलते ग्लेशियर सा बह जाया करता था।
कभी प्रताप की याद में, कभी राजा साहब की कुशलता के लिए तो कभी किसी और कारण से, रोते सिसकते प्रेम को, हमेशा निरमा ने ही अपनी बाँहों में संभाला था।
आज भी मीठी यही सोच रही थी कि उसके पापा बिखर जायेंगे…
वो अपनी माँ को पहले ही इस बात के लिए बोल कर तैयार रखना चाहती थी..।
तभी उसकी पार्लर वाली ने उसे एक बार खड़े होकर अपना फाइनल लुक देखने को कहा और मीठी के खड़े होते ही, बाहर से “फोटोग्राफर आ गए हैं” की पुकार मचने लगी…।
मीठी की सहायिका फोटोग्राफर्स को अंदर ले आयी..
मीठी ने सबसे पहले अपने पिता की तरफ देखा, अपनी आँखों के आंसू छिपाते हुए प्रेम मीठी के पास चला आया।
दोनों बाप बेटी के हर एंगल से फोटो लेने के बाद उन लोगो ने माँ को बुलाने कहा।
प्रेम ने तुरंत इधर उधर नजर दौड़ाई, निरमा वहां नहीं थी।
प्रेम बालकनी में निकल गया।
बालकनी में एक तरफ बैठी निरमा अपने हाथो में अपना चेहरा टिकाये गुमसुम सी बैठी थी।
जैसे ही प्रेम ने जाकर उसके कंधे पर हाथ रखा, वो भरभरा कर टूट गयी..
उसके आंसू बाँध तोड़ कर बह चले..
प्रेम ने उसे बाहों में समेट लिया।
“ये तो एक दिन होना ही था निरमा !”
“हम्म.. लेकिन मै मीठी के बिना क्या करुँगी ?”
“अरे दूर थोड़े न जा रही, यही हमारी नज़रों के सामने ही तो रहेगी.. जब चाहो छत पर चढ़ कर मीठी की ससुराल देख सकती हो..
और फिर उसकी सास बन भी कौन रही है, तुम्हारी सहेली, बांसुरी !”
“बांसुरी उसकी काकी सास बन रही, उसकी सास से तो मुझे भी डर लगता है। और फिर मेरी मीठी बहुत कोमल है ज़रा सी बात भी दिल पर ले लेती है !”
“मत सोचो इतना ! मीठी जैसी भी है उसके पूरक हर्षवर्धन बन रहे हैं.. जानता हूँ, वो मीठी की आंख में कभी आंसू नहीं आने देंगे !
और इसके बाद भी कभी मीठी दुखी लगी तो तुम अपना असली रूप दिखा देना !”
इतने भावुक क्षणों में भी प्रेम का ये मजाक निरमा के चेहरे पर हलकी सी मुस्कान ले आया, उसने बनावटी गुस्से से घूर कर प्रेम की तरफ देखा और उसी वक्त मीठी ने अपने मोबाइल पर और फोटोग्राफर ने कैमरा में ये अभूतपूर्व क्षण कैद कर लिया..।
*****
बारात निकलने की तैयारी जोरो पर थी..।
दूल्हे के कमरे में फोटोग्राफर, दूल्हे के जूतों, उसके जोड़े, पगड़ी सबकी अलग अलग एंगल से फोटो उतार रहे थे..
आजकल के एस्थेटिक्स के नाम पर कमरे में मौजूद तमाम चीजों की फोटो वो उतार चुके थे..।
आधे घंटे से ज्यादा बीत चुका था, लेकिन दूल्हा बाथरूम से बाहर ही नहीं आ रहा था..।
उस शाही कमरे की साजसज्जा में खोए वो दोनों लड़के संकोच में घर के राजकुमार को आवाज़ भी नहीं दे पा रहे थे …
ऐसे ही कुछ और वक्त बीत गया..
आखिर उन लड़को में से एक कमरे के ठीक बाहर खड़े हर्ष के सहायक के पास पहुँच गया, और उससे उसने हर्ष के बारे में पूछ लिया..
हर्ष का वो सहायक उसका बॉडीगार्ड भी था और साए की तरह हर्ष के साथ रहता था..
वो उस लड़के की बात सुन कमरे के अंदर चला आया..
इस वक्त हर्ष के बाकी सारे भाई भी तैयार हो रहे थे..
हर्ष के बाथरूम के अंदर पहुँच कर उसने सब तरफ नजर दौड़ा दी, लेकिन हर्ष अंदर कहीं भी नहीं था..।
हर्ष के उस विशालकाय बाथरूम में एक तरफ सोना बाथ के लिए भी जगह थी..।
उस कमरे को खोल कर बॉडीगार्ड वहां भी झांक आया.. लेकिन उसके कुवंर सा वहां भी मौजूद नहीं थे..
बाथरूम के विशालकाय दरवाज़े सभी अंदर से बंद ही थे.. इसका मतलब यहाँ से निकल कर राजकुमार कहीं नहीं गए थे।
वो खुद कमरे के बाहर हर वक्त मौजूद था। कमरे के बाहर हर्ष को जाते उसने नहीं देखा था, तो फिर हर्ष अचानक कमरे से कहां गायब हो सकते थे…।
उसकी समझ से बाहर था..
उसने तुरंत धनुष को फ़ोन लगाया और अगले ही पल धनुष वहाँ मौजूद था….
” ठीक से याद करो मोहन तुमने हर्ष को कहीं आते जाते देखा?”
“नहीं सर.. मै हर वक्त यही मौजूद था !”
“हर्ष के कमरे में दो एग्जिट है, हो सकता है बाथरूम वाले एग्जिट से वो निकल गए हों..।
तुमने कॉल तो किया होगा न ?”
“सर उनका फ़ोन बंद आ रहा, इसलिए आपको कॉल किया मैंने….।
जब कमरे में वो नही मिले, तब मैंने सबसे पहले उन्ही का नंबर मिलाया था..
उसके बाद आपको लगाया.. ।”
धनुष कमरे का जायज़ा भी लेता जा रहा था। उसने एक एक कर अपने पूरे ग्रुप को कॉल लगा दिया..
यश, परी, शौर्य, शोवन किसी को हर्ष के बारे में कुछ मालूम नहीं था..।
सबसे बाद में धनुष ने मीठी का नंबर भी मिला लिया..
मीठी ने फ़ोन उठाया।
धनुष ने बात को घुमा कर मीठी से जानना चाहा कि क्या हर्ष उसके साथ है, लेकिन मीठी के न बोलने पर अब धनुष जरा सोच में पड़ गया… ।
“फेरो में ज़्याद वक्त बचा नहीं है ऐसे में हर्ष कहाँ जा सकते हैं ?”
दिमाग के घोड़े दौड़ाता धनुष सीधे शौर्य के कमरे की तरफ बढ़ गया !
क्रमशः

Wow superb episode
Interesting part
👌👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏👏
The scene changes now
Maam, eagerly waiting for the next part..
😳🤔Harsh gayab hai…..
Harsh kidnap ho gaya 😱😱😱.ab mithi ka kya hoga 😓😓😓.Harsh toh mil hi jayega par ilzaam mithi pe aayega
Nice part
अच्छा पार्ट👍
Nyc part 👌