जीवनसाथी-3 भाग -159

जीवनसाथी -3 भाग -159

इतिहास गवाह है सदियों से कोई भी महल बिना किसी षड्यंत्र से अछूता नहीं रहा!

महलों के निर्माण में ईट गारों  से ज्यादा षड्यंत्र का तीखा सीमेंट घुला होता है…
कभी यह षड्यंत्र बाहर वाले रचते हैं, तो कभी घर वाले। लेकिन ज्यादातर इसके रचनाकार महल के गरीबी ही हुआ करते हैं। उन्हीं के हाथों से बुनकर यह जाल धीरे-धीरे ऐसे आगे बढ़ता है कि महल की नीव हिला कर रख देता है।

राजनीति का करवट एक बार फिर उल्टी दिशा में बैठ गया था।
राजा अजातशत्रु अपनी बनाई राजनीतिक पार्टी के साथ अभी अकेले ही खड़े थे। उनकी विरोधी दोनों पार्टियों ने आपस में हाथ मिला लिया था।

चुनाव सर पर थे और ऐसे में दो महत्वपूर्ण विरोधी पार्टियों का राजा साहब के खिलाफ खड़े होने के लिए हाथ मिला लेना अच्छा संकेत नहीं था.. ।

यह दोनों राजनीतिक पार्टियां सदियों से भारत वर्ष पर हुकूमत करती आई थी। ऐसे में जब समर के जोड़-तोड़ से राजा साहब ने अपने अकेले के बलबूते पर अपनी पार्टी को जीत दिलाई थी, और दूसरी महत्वपूर्ण पार्टी जिसे सरकार बनानी थी के साथ हाथ मिलाने से मना कर दिया था, उस वक्त उस पार्टी के महामहिम को गहरी चोट लगी थी।

    जिस चोट को वह आज तक नहीं भूले थे।

उसके बाद से वह राजा साहब के सामने भले ही उनके कितने भी बड़े हिमायती बन जाये लेकिन वह मन ही मन राजा साहब के खिलाफ सुलगने लगे थे…
कुछ राजा साहब का चुंबकीय व्यक्तित्व, कुछ उनका मधुर और मितभाषी स्वभाव, उन्हें हर जगह कुछ अलग ही प्रतिबिम्बित करता आया था.. !
इस वजह से भी उनके विरोधी उनके सामने खुल कर अपना विरोध जता नहीं पाते थे।

उस वक्त केंद्र में राजा साहब की पार्टी भले ही परचम ना लहरा पाई हो, लेकिन अपने राज्य में राजा साहब ने धाक जमा दी थी..।
अपने क्षेत्र में राजा साहब की एकतरफा शानदार जीत के कारण विरोधी विजेता पार्टी को राजा साहब के क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाने के लिए राजा साहब की मिन्नतें करनी पड़ी थी, और उनसे हाथ मिलाना पड़ा था!

   समर की कूटनीति यहां काम कर गई, और उसने राजा साहब को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखकर सामने वाली पार्टी को किंकर्तव्यविमूढ़ करके रख दिया था।

और कोई रास्ता ना देख उस पार्टी को समर की इस शर्त को कबूल करना पड़ा था और इस तरह राजा साहब मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हुए थे। उसके बाद से वह और उनके लोग लगातार अपने क्षेत्र के लिए, अपने शहर के लिए, अपने राज्य के लिए काम करते चले आ रहे थे।

लेकिन जहां एक तरफ अच्छे काम करने वाले लोग हैं, वही उनका विरोध करने वाले और उनके अच्छे कामों की परछाई को उनके पीछे-पीछे चलते हुए भी मिटाने वाले लोग भी मौजूद है। उनके साथ जुड़ी पार्टी एक तरह से उनके साथ रहते हुए उनकी जड़ें खोदने का काम कर रही थी।

उनके लोगों ने धीरे-धीरे राजा साहब की पार्टी के लोगों को अपनी तरफ करना शुरू कर दिया था। राजा साहब ईमानदार थे, न्याय प्रिय थे, लेकिन उनकी पार्टी में हर एक उन्हीं के जैसा हो, यह संभव नहीं था।

बहुत से ऐसे लोग भी थे जिन्होंने धन और पद प्रतिष्ठा के लाभ के लिए इस पार्टी को ज्वाइन किया था। ऐसे लोगों को चुन चुन कर विरोधी पार्टी के नेता एक से बढ़कर एक प्रलोभन देकर अपनी तरफ करते जा रहे थे, और इसके बारे में राजा साहब को असल में कुछ भी मालूम नहीं था…।

राजा साहब अपनी व्यस्तताओं के बीच अपने परिवार को भी समय देना चाहते थे।

हर्ष की शादी सर पर सवार थी और वह अभी अपने ऑफिस में बैठे समर के साथ किसी महत्वपूर्ण मीटिंग को लेने में व्यस्त थे। समर ने ही जल्दी-जल्दी काम निपटाने के बाद उनके पास आकर धीरे से उन्हें महल चलने के लिए कहा। राजा साहब ने हाथ में बंधी घड़ी देखी और अपनी जगह से उठकर खड़े हो गए।

उन्होंने सामने मौजूद सभी कार्यकर्ताओं, नेताओं के सामने हाथ जोड़कर बड़ी विनम्रता से अपनी तीन दिन की छुट्टी की अर्जी लगा दी।

” हमारे बेटे हर्ष की शादी, हमारे महल का यह एक महत्वपूर्ण आयोजन है। हर्ष की जनरेशन में यह पहली शादी है, और इसलिए इसमें हमारा हर वक्त मौजूद रहना बहुत जरूरी है।”

राजा साहब की बात सुनकर वहां बैठे सभी मुस्कुरा उठे। उनमें से एक नेताजी बोल पड़े ।

“राजा साहब हम सब आपके बांदे हैं, आपकी आज्ञा शिरोधार्य है। आपको हमसे अवकाश लेने की आवश्यकता नहीं है। आप जब चाहे तब अपने व्यक्तिगत कामों के लिए जा सकते हैं ।”

समर एक तरफ खड़ा मुस्कुरा रहा था। वह फट से बोल पड़ा।

” यह आप जानते हैं, और मैं जानता हूं। लेकिन राजा साहब तो निराले ही हैं। उनके लिए उनका कार्य सबसे महत्वपूर्ण है। अभी भी वह अपने व्यक्तिगत कार्य में जाने से पहले हम सभी से इजाजत ले रहे हैं ,यह  उनका बड़प्पन है।”

समर ने भी अपने हाथ जोड़ दिये और एक हाथ आगे फैला कर राजा साहब को चलने का इशारा कर दिया राजा साहब बड़ी विनम्रता से सबसे आज्ञा लेकर निकल पड़े..

****

महल में जोर-शोर से हल्दी की रस्में शुरू हो गई थी। हर कोई उल्लास में डूबा हुआ था, दूल्हे को हल्दी चढ़ाई जा रही थी..।

महल की औरतें एक एक कर दूल्हे को हल्दी लगाती जा रही थी..।
पास खड़ी फू साहब बीच बीच में अपनी नियमावली की जुगाली भी करती जा रही थी..

ये ऐसा ही होना चाहिए !
ये ऐसा नहीं करना है !
शाम के पहले ये नेग होना है..
सुबह तक ये रस्म पूरी होनी है !

रूपा जितना ही फूफू साहब का मान रख रही थी, फूफू साहब उतना ही घोड़े पर सवार थी !

वर की चढ़ी हल्दी को वधु के लिए भेज दिया गया, उसके बाद मीठी की भी हल्दी की रस्म शुरू हो गयी थी..

दोनों पक्ष एक ही जगह पर इकट्ठे हो चुके थे, हल्दी की रस्म के बाद बाकी रस्मे थी।
शौर्य हर जगह मौजूद था ! और विक्रम बिलकुल परछाई की तरह उससे लग के खड़ा था..।

कली दूर बैठी सारी रस्मो के बीच शौर्य को भी देख लिया करती थी..
एक सहायिका हल्दी की थाली लिए कली तक चली आयी..

“आइये आप भी हल्दी की रस्म पूरी कर लीजिये !”

कली उस चांदी की थाली को साथ लिए मीठी की तरफ बढ़ गयी..

मीठी को ज़रा सा लगाने के बाद वो हटने ही वाली थी की मीठी की सहेलियों ने कली को भी साथ खिंच लिया..
हल्दी की थाली में हाथ डुबा डुबा कर वो सब एक दूसरे को लगाने लगी…
कली के दोनों हाथ हल्दी से सन गए थे।

वो पलट कर अपने हाथ धोने जा रही थी कि ठीक सामने शौर्य आ गया और उसके हल्दी पुते हाथों की छाप शौर्य की कमीज पर पड़ गयी..।

कली ने शौर्य की तरफ देखा, लेकिन शौर्य बिलकुल निर्लिप्त भाव से वहां से चला गया..
कली मन मार कर रह गयी…

हल्दी की रस्म के बाद फूलों की होली शुरू हो गयी थी.. पूल साइड चल रही इस पार्टी में सभी एक दूसरे पर रंगीन पानी की फुहारें डाल रहे थे.. एकतरफ गाने चल रहे थे….

मौसम भीगा हुआ सा था, मीठी और हर्ष एक दूसरे में मगन थे..
परी का मन तो नहीं लग रहा था, लेकिन बेमन से सही वो सब में शामिल थी.. ।

उसी समय अपनी माँ की जिद पर शोवन भी उस पार्टी में चला आया..।

शोवन को देख कर खिल उठने वाली परी उसे देख और भी ज्यादा गुमसुम हो गयी..।

क्रमशः

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Radhika Porwal
Radhika Porwal
10 days ago

Wow superb

Sonu
Sonu
1 month ago

Very nice part

Hetal shah
Hetal shah
2 months ago

Nice part.Raja Saheb aise he hain.shuru se.tabhi toh jab aate hain pade bina nahi rah sakate…

Seema Kawatra
Seema Kawatra
2 months ago

राजा साहब को बनाने के बाद भगवान ने वी साँचा छुपा दिया होगा….. घोर कलयुग में सतयुग का बंदा बन गया उनसे

हर्ष मीठी के जीवन की नई शुरुवात मंगलमय रहे 🙏🏻

शौर्य कहाँ खोया है…इतने बड़े स्कैम को कैसे सामने लायेगा वह

परी अपने पेरेंट्स के सामने शोवन का साथ ना दे पाई और शोवन अपनी मम्मी की बात झूठी नहीं कर सकता

बेहतरीन पार्ट

Kalpana
Kalpana
2 months ago

App jivansathi ki kahani continue kiu nahi karti hai

Rani Bhagat
Rani Bhagat
2 months ago

Aap jivansathi ka paath kyon nahin de rahe hain continue kijiye please story

Alpa Singhal
Alpa Singhal
2 months ago

Very nice part

Mukesh Duhan
Mukesh Duhan
2 months ago

Nice ji

Jyoti
Jyoti
2 months ago

Very nyc part after a long wait👌
Waiting for next part

Ashok Garg
Ashok Garg
2 months ago

Very nice part of the story and very interesting and very good 💯💯💯💯💯💯😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊💯💯💯💯