
जीवनसाथी -3 भाग -158
महल के बाहरी बगीचे में एक तरफ बड़ा सा शामियाना टंगा था। हल्दी की रस्म की सारी तैयारियां हो चुकी थी.. महल के खास मेहमान आने लगे थे..
परी का रिश्ता जहाँ लगा था वो परिवार भी बड़े हर्षोल्लास के साथ आज के कार्यक्रम में शामिल होने पहुँच चुका था..।
परी एकदम से कुछ कह भी नहीं पा रही थी और उससे ये सब सहन भी नहीं हो रहा था..।
मुख्य द्वार से शोवन अपनी माँ के साथ भीतर आता दिखाई दिया और परी का दिल जोरो से धड़कने लगा.. पहले जितना ही वो शोवन को अपने इशारो पर नचाया करती थी, अब उतना ही उससे दबने और डरने लगी थी..।
लेकिन जो भी था उसकी नजर शोवन पर से हट नहीं पा रही थी, और शोवन उसकी तरफ देख भी नहीं रहा था..।
वो इधर उधर से नजर बचाते उस तक पहुँच गयी..
उसे अपनी तरफ आता देख पिया, शोवन का हाथ थपथपा कर आगे बढ़ गयी..
शोवन चल ही रहा था कि परी उस तक पहुँच गयी..
“कैसे हो?:
“ठीक हूँ..!”
“लग तो नहीं रहे।”
“तुम्हे क्या?”
“अरे! ऐसे क्यों कह रहे हो? हमें फिक्र नहीं होगी तो और किसे होगी?”
शोवन ने इस बात पर परी की तरफ देखा, उसकी आंखें जल रही थी।
जैसे आंखों से ही वह पूरी दुनिया को भस्म कर देगा।
कुछ देर परी को देखने के बाद नफरत से उसने दूसरी तरफ मुंह मोड़ लिया।
“शोवन प्लीज इतना नाराज मत हो! हम कैसे समझाए, हम इतने सारे लोगों के सामने हिम्मत नहीं कर पाए?”
” अकेले में तो बहुत हिम्मत हो जाती है तुम्हारी। तुम जानती हो, तुमने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा। रात दिन सिर्फ तुम्हारे बारे में सोचता हूं। जाने कितने सपने देख लिए थे तुम्हारे साथ जिंदगी जीने के।
लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो मुंह के बल गिरा हूं। सारे सपने तोड़ दिए तुमने।
खैर, गलती मेरी थी। मुझे पहले ही सोचना चाहिए था कि तुम एक महल की राजकुमारी और मैं एक सिंपल सा डॉक्टर हूं। मेरे साथ तुम्हारी जिंदगी कहीं से भी सरल और सहज नहीं हो सकती। सपने देखने के पहले मुझे सोचना चाहिए था। वैसे इसमें तुम्हारी गलती नहीं है परी। तुम एक प्रिंसेस हो, तुम्हें टाइम पास करने के लिए एक गुड्डा चाहिए था। उस वक्त तुम्हे मैं मिल गया, और अब, जब शादी का समय आया तो तुमने अपने लेवल का,अपनी हैसियत का एक प्रिंस अपने लिए ढूंढ लिया। तुम तो कहीं से भी गलत नहीं हो, प्रैक्टिकली देखा जाए तो तुम ही सही हो।
परी, मैं बस यही कहना चाहता हूं कि अब मुझसे दूर रहो।”
” शोवन तुम हमें गलत समझ रहे हो। हम किसी और से शादी करके कभी खुश नहीं रह सकते। चलो आज हम यह महल, यह घर, यह दुनिया, छोड़कर चले जाते हैं।”
“मेरी जिंदगी में और भी लोग हैं परी। मेरी मॉम हैं, डैड हैं। मेरा भाई है।
इन सबको छोड़कर मैं तुम्हारे लिए यहां से नहीं भाग सकता।”
” प्लीज शोवन हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है।”
” मुझे अब तुम्हारे साथ किसी रास्ते में नहीं चलना।”
” ऐसा मत कहो शोवन, हम तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकते हैं।”
“क्या सच में?”
“हां हम सच कह रहे।”
” कर सकती हो, तो ठीक है। ये दवा उस लड़के की गिलास में मिला दो।
पिएगा और मुश्किल से एक मिनट के अंदर अस्पताल पहुंचाने की नौबत आ जाएगी, वहां आगे का काम मैं देख लूंगा..।”
शोवन ने अपनी जेब से निकाल कर जो छोटी सी शीशी परी के हाथ में रखी, उसे देखकर परी ठिठक पड़ी।
शोवन हल्के से मुस्करा उठा।
” जहर है! लेकिन यह उसकी जान नहीं लेगा। तुम उसे पिलाओ तो सही! अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी तुम्हारी, उसके आगे का मैं देख लूंगा।”
परी के हाथ कांपने लगे।
वह शोवन को प्यार बहुत करती थी, लेकिन इस प्यार के लिए वह किसी और की जान नहीं ले सकती थी।
” तुम ही तो कह रही थी ना, कि तुम मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो। तो करके दिखाओ।
मैंने तुम्हें तो पीने नहीं बोला, उसे पिलाना है। फिर इतना क्या सोच रही हो? चिंता मत करो, इस जहर से वह मरेगा नहीं। बस उसकी हालत मरने जैसी हो जाएगी,
जो तुमसे शादी कर सके।
उसके शरीर में ऐसे कुछ बदलाव आ जाएंगे कि वह बीमार पड़ जाएगा, बहुत बीमार।
कुछ समय के लिए शायद चल फिर भी ना सके, और ऐसे में तुम्हारा परिवार यह शादी जरूर तोड़ देगा। तब तुम मुझसे शादी की बात कह सकती हो। हमारी शादी हो जाएगी।
साल दो साल बाद वह भी नॉर्मल हो जाएगा। इसलिए इतना ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है।
मैं डॉक्टर हूं, यमराज नहीं! जो किसी की जान ले लूं।”
शोवन की बात सुनकर परी का दिल घबराने लगा था। उसे नहीं पता था कि शोवन ऐसा भी कर सकता है। लेकिन इस वक्त उसे शोवन के सामने उसके प्रति अपना प्यार साबित करना था, और इसलिए वह धीमे-धीमे कदम रखते हुए आगे बढ़ने लगी।
दूर एक टेबल पर तरह-तरह के खाने पीने की चीजे सजी हुई थी। धीरे-धीरे कदम बढाती हुई परी वहाँ तक पहुंच गई ।
शोवन भी उसके पीछे लंबे-लंबे डग भरता हुआ पहुंच गया।
परी ने इधर-उधर देखा और लोगों की नजर बचाकर उस शीशी को खोला और एक गिलास में पलट दिया।
शोवन उसके ठीक पीछे खड़ा था। परी ने वह गिलास उठाया और अपने मुंह से लगाने जा रही थी कि शोवन ने उसका हाथ पकड़ लिया।
” क्यों पी रही हो? उसे पिलाने में तुम्हें तकलीफ हो रही है?”
परी की आंखों में आंसू छलक आये।
“हम अपने प्यार के लिए किसी और की जान नहीं ले सकते। जैसा तुमने बताया इसे पीकर हम मरेंगे नहीं, सिर्फ हॉस्पिटल में भर्ती होंगे ,और हमारे शरीर में कुछ ऐसे बदलाव आएंगे, कि साल,दो साल तक हम ठीक से चल फिर भी नहीं पाएंगे।
हमारी तबीयत खराब हो जाएगी, और इस बहाने हमारी शादी टूट जाएगी।
वह लोग दो साल तक हमारे लिए रुकने वाले नहीं है। वह कहीं ना कहीं अपने बेटे की शादी कर ही देंगे, और तब, जब हम ठीक हो जाएंगे, तुम हमारा हाथ थाम लेना।”
शोवन के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई।
” और मान लो अगर इन दो सालों में मेरा मन बदल गया तो?”
परी गहरी आंखों से शोवन को देखती रही।
” तो हम यह मान लेंगे कि तुम्हें धोखा देने की सजा हमें मिली है। हमने सबके सामने तुम्हारा साथ नहीं दिया, उस बात की सजा भी तो हमें मिलनी चाहिए ना। तुम्हे अपना मुकद्दर मानकर तुम्हारा नाम जपते हुए अपनी पूरी जिंदगी बिता देंगे।”
“बातें बहुत बड़ी-बड़ी करना सीख गई हो, फिर फैसला क्यों नहीं ले पाई…?”
शोवन की बात का परी के पास कोई जवाब नहीं था..
शोवन ने परी के हाथ से वो ग्लास छीन कर टेबल पर रख दिया..
और तेज़ कदमो से दूसरी तरफ बढ़ गया, परी भी उसके पीछे बढ़ गयी..
“शोवन सुनो तो सही..।”
“क्या सुनना बाकी है अब.. ? तुम किसी से कहने की हिम्मत नहीं रखती, मैं अकेले सबसे कब तक लड़ूँ? अब तो मॉम ने भी मना क़र दिया है..।
उन्होंने साफ़ कह दिया है कि महल की तरफ मैं अब देखूं भी नहीं..।
और उनकी बात मैं नहीं टाल सकता !”
“ठीक है, हमारी एक बात तो सुन लो..।
बस हर्ष भाई की शादी तक का वेट कर लो…
उसके बाद हम रानी माँ से बात करेंगे..।
उनकी बात हमारे मॉम डैड भी नही टाल सकते और अगर एक बार उन्होंने हाँ कर दी, तब सब सही हो जायेगा..।”
“रानी माँ से बात करने की जगह अगर तुम छोटी रानी बांसुरी हुकुम से बात करो, तो ज्यादा कुछ हो सकता है..। “
“ठीक है, उन्ही से बात कर लेंगे लेकिन अभी तो ये नाराज़ी छोडो..।”
“किस बात की नाराज़ी..?
अब पहले जैसे हम साथ न घूम सकते, न बात कर सकते, तो फिर मुझे जाने दो मेरे दोस्तों के पास..।”
शोवन ने परी का हाथ झटका और वहां से दूर चला गया।
परी निर्निमेश नेत्रों से नाराज शोवन को जाते हुए देखती रही।
उन दोनों को यह भान भी नहीं था कि उनके छोड़े हुए गिलास को कौन उठाने वाला है।
कुछ देर बाद शौर्य के इशारे पर एक वेटर उस गिलास को ट्रे में रखकर हर्ष की तरफ बढ़ गया।
शौर्य के पास खड़ा विक्रम बुझी बुझी आंखों से शौर्य की तरफ देख रहा था, लेकिन उसके पास इस वक्त कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं थी, वह खुद इस जाल में बुरी तरह फंस चुका था ।
क्रमशः

Wow superb
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻
चलो आज बहुत दिनों बाद और उस मसले के बाद परी और शोवन आमने सामने तो हुए पर शोवन तो पूरा ही बदल गया, परी बेचारी भी क्या करेगी अब ☹️।
वो गिलास शौर्य ने किसको भिजवाया 🤔🤔।
इंतज़ार… इंतज़ार…. इंतज़ार…. 🥰
Nice part.Shoven ki di dawa ka glass aise table par nahi chhodana tha.para nahi koun pi le aur hospital pahunch jaye……
👌👌👌👌👍👍👍👍👍vo paani kisne piya ..ye to pata hi nahi chala🤔🤔
Bahut achaa
Hello mam
Aapki story jeewan saathi ke sare seasons bahut acchhe hai aur story bhi bahut acchi hai but aap jis speed se story ko complete kar rahi hai muze lagta hai ki story ko complete hone mein 4 se 5 saal lag jayega.
Story ko likhne ka kya matlab yadi aage koi pade hi na ya wo apna padne mein interest hi khatam kar de
Pls think about it and complete the story at earliest as we are really wanted to read your stories ❤️
Bzhut badhiya..but suspicious …ab tension ho gyi ki kahin harsh Shovan ki layi dava na p le …fir meethi ka kya hoga..aur ab Shaurya k bare mei bhi jo raaz ha vo khol dijiye Aparna g
Badhiya part
Aap hmesha end m suspense create kr deti ho ji.waiting for next part 👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏👏👏
नहीं ऐसा नहीं करना…..