
जीवनसाथी -3 भाग -157
जीवन जैसा सरल दिखता है वैसा चलता नहीं ! हम अक्सर भविष्य के ताने बाने बुनते चलते है, लेकिन ऊपरवाला कहीं दूर बैठा उन्हें उधेड़ता बुनता रहता है !
विक्रम सुबह चार बजे से अपने कमरे में जागा बैठा अपनी दूसरी कॉफी पीता हुआ यही सोच रहा था कि आखिर ये मुरली जो शौर्य बन कर महल दाखिल हो चुका है, आखिर करना क्य़ा चाहता है ?
उसके खुद के भाई विजय का अब तक कोई पता नहीं चल पाया था। लेकिन उसे उस लड़की से इतना तो मालूम हो गया था कि उन सब कैदियों को भारत में ही किसी स्थान पर छिपा कर रखा गया था..
लेकिन क्या इतने बड़े हिंदुस्तान में करोड़ो की भीड़ के बीच कहीं छिपा कर रखें अपने भाई को ढूंढना उसके लिए इतना आसान था..?
उस लड़की से जब मालूम चला था कि उसका भाई ज़िंदा है, अब उस बात को महीनो बीत चुके थे.. पता नहीं आज कि तारीख में वाकई उसका भाई था भी या नहीं..?
विक्रम की आंखे झिलमिलाने लगी थी…।
उसकी ज़िन्दगी आसान कभी नहीं रही, लेकिन उन दोनों भाइयों ने अपनी मेहनत से आसान बनाने की पूरी कोशिश की थी।
इसी सब के बीच ये ह्यूमन ट्रेफिकिंग का दलदल आ गया.. और उसका खुद का भाई इस सब में फंस कर रह गया।
वो भदौरिया और उसके लोगो को छोड़ेगा नहीं..
उन लोगो का ये जानलेवा घृणित काम वो जैसे भी कीमत पर रोक कर रहेगा।
उसे मुरली से बात करना चाहिए, अगर यही महल में बैठे रहे, तो कैसे वो लोग भदौरिया तक पहुँच पाएंगे?
उसने कॉफी ख़त्म की थी कि उसके दरवाज़े पर दस्तक होने लगी… उसने दरवाज़ा खोला सामने शौर्य खड़ा था !
“तुम यहाँ ?”
“अपने प्रिंस से ऐसे तू तड़ाक में कौन बात करता है ?”
विक्रम के चेहरे पर झल्लाहट नजर आने लगी…
“बोलो क्या काम है ?”
“अंदर तो आने दो.. उसे एक तरफ सरका कर शौर्य अंदर चला आया.. ! अंदर आकर उसने अपना मोबाइल खोला और वही टेबल पर रखे एक कागज़ पर पेन से कुछ लिखने लगा
“ये क्या है ?” विक्रम पूछ बैठा
शौर्य ने उसकी बात अनसुनी कर लिखना जारी रखा.. अपना काम पूरा करने के बाद उसने विक्रम की तरफ देखा और वापस बोलने लगा..
“सुनो भदौरिया का कॉल आया था !”
“क्या बोला उसने ?”
“उसने कहा है, हमें उसका काम यहाँ रह कर भी करना होगा !”
“क्या काम है वो ? क्या वो चाहता है कि अब राजमहल के लोगो की बली चढ़ा दे ?”
“हाँ कुछ ऐसा ही..।”
“मतलब?”
“मतलब, वो चाहता है कि महल के बड़े राजकुमार हर्ष अब उसका खिलौना बने !”
“क्या ? तुम्हारा दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया है ? तुम पागल तो नहीं हो गए ?”
विक्रम बौखला गया था। लेकिन शौर्य के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे।
“मैं मानता हूँ कि तुम्हे पैसे का बहुत लालच है, लेकिन साथ ही तुम इतने बड़े जालसाज निकलोगे, मैंने सोचा न था..
अरे जो राजा रानी तुम्हे अपना बेटा मान कर तुम पर जान लुटा रहे, उन्ही की नाक के नीचे से तुम उनके महल को खोखला करने पर तुले हो..?
लानत है तुम पर।”
“लानत बाद में भेजना, ये जो मैंने लिखा है, उसे ध्यान से पढ़ लो.. हमें इसी जगह पर प्रिंस हर्षवर्धन को पहुँचाना होगा !”
विक्रम ने गुस्से में उस कागज़ को बिना देखे ही फाड़ दिया.. उसकी इस हरकत पर शौर्य तिलमिला गया..
“देखो विक्रम जो काम हम लोग करने आये हैं, वो तो हमें करना ही होगा वरना.. ।”
“वरना क्या ? मुझे मार डालोगे तुम लोग..? मार डालो..। मैं खुद अपनी ज़िन्दगी से परेशान हो गया हूँ.. जो करने निकला वो आज तक नहीं कर पाया..।”
विक्रम अपनी ही रौ में बहता, बोलता चला गया। लेकिन उसकी बात सुनने के लिए शौर्य वहाँ मौजूद नहीं था।
वो तेज़ी से चल कर कमरे के दूसरी तरफ चला गया।
विक्रम बहुत परेशान था और ये बात शौर्य भी समझता था..
थक कर विक्रम वहीँ एक तरफ बैठ गया..
कुछ देर बाद शौर्य उसके लिए पानी लेकर उसके करीब पहुँच गया।
विक्रम ने शौर्य की तरफ देखा, उसकी आँखों में कुछ अजीब से भाव थे। जो विक्रम की समझ से बाहर थे।
पता नहीं ये लड़का क्या कहना चाहता है, क्या ये कुछ बताना चाहता है?
लेकिन अगर कुछ बताना चाहता है, तो बोलता क्यों नहीं.. हमेशा गलत बातें ही क्यों बोलता है.. ?
लेकिन एक बात है, इसकी ज़बान और आंखे कभी एक सी बात नहीं बोलती..।
ऐसा लगता है जैसे ये जो कुछ बोल रहा, इसकी आंखे उसका उल्टा कह रही हो..।
विक्रम ने शौर्य के कांधे पर हाथ रख दिया..
“एक बात पूछ सकता हूं ? क्या कोई ऐसी बात है, जो तुम कहना चाहते हो ?
“हाँ बस यही कहना चाहता हूँ कि भदौरिया एक खतरनाक आदमी है। और अगर हमने उसका कहा नही किया तो हमारी जान भी जा सकती है।
और हम इतने महान नहीं कि दूसरों के लिए अपनी जान दे दे..।
अब जाकर तो हमें कमाई करने का जरिया मिला है.. उसे छोड़ नहीं सकते..।
आई बात समझ में ?
भदौरिया ने जो काम दिया है, उसे पूरा करना ही है !चाहे आसमान इधर से उधर हो जाए.. ।”
विक्रम ठगा सा शौर्य को देखता रह गया..
शौर्य उठ कर वहाँ से बाहर चला गया..
भोर होने लगी थी, महल के बगीचे में लगे ढेर सारे पेड़ों पर पंछियों की चहचहाट शूरू हो गयी थी..।
रात भर विक्रम को ठीक से नींद नहीं आई थी, और अब शौर्य की बातें सुन उसका चैन भी चला गया था..
शौर्य जाते जाते उसे तैयार होने बोल गया था..
आज महल में सभी कुलदेवी मंदिर जाने की तैयारी में थे !
आज हर्ष को ही वहां विधिवत पूजन करना था.. महल के नियमानुसार शादी की रस्मो के शुरू होने के पहले महलवासी अपनी कुलदेवी के मंदिर में पूजा अर्चना कर विवाह का प्रथम निमंत्रण वहाँ दे कर आगे का कार्य शुरू करते थे..
आज वही निमंत्रण देने का कार्यक्रम था..।
सुबह लगभग महल के सभी लोग तैयार हो चुके थे !
सभी की राजसी गाड़ियां एक कतार में खड़ी थी..।
एक एक कर महल के शाही लोगों का आना शुरू हो गया था, एक एक कर सब अपनी अपनी गाड़ियों में बैठते जा रहे थे…
शौर्य भी अपनी जैकेट को ठीक करते हुए सीढ़ियां उतरने लगा उसके साथ विक्रम भी था..
बांसुरी ने कली को भी साथ ले लिया था !
लेकिन आज के कार्यक्रम में मीठी और इसका परिवार साथ नहीं थे..
महल के नियमानुसार विवाह के पहले दूल्हा या दुल्हन अकेले ही कुलदेवी की पूजा कर के उनके सामने एक चुनरी और कुछ सामान रख कर जाते हैं, इस मनौती के साथ कि विवाह का सारा कार्यक्रम निर्विघ्न सम्पन्न हो।
विवाह के सम्पन्न होने के बाद वही लोग अपने जोड़े में आकर इस चुनरी को कुलदेवी पर चढ़ा कर अपनी मन्नत पूर्ण कर लेते है ..।
इसीलिए आज हर्ष अकेला ही मंदिर जाने वाला था..
आगे पीछे चलती ढेर सारी सिक्युरिटी के साथ महल का शाही समूह आगे बढ़ गया..
हर्ष की गाडी में उसके साथ उसकी सिक्योरिटी और यश बैठ गया था..
कुछ देर बाद ही वो लोग मंदिर पहुँच चुके थे, वहाँ मौजूद पंडितों की सारी तैयारियां थी..
उन लोगो ने रीतियों के अनुसार पूजा शुरू करवा दी..
शौर्य मंदिर से बाहर बैठा दूर पहाड़ियों को देखता हुआ अपने विचारों में खोया हुआ था..
तभी धीमी गति से चलती हुई कली उस तक पहुँच गयी..
“यहाँ क्यों बैठे हो.. अंदर नहीं चलोगे ?”
“तुम जाओ न.. मैं कुछ देर में आता हूँ !” शौर्य ने कली की तरफ देखे बिना ही उसे जवाब दिया !
“तुम इतना बदल क्यों गए हो ? आखिर क्या हो गया है तुम्हे ?”
“मैं नहीं बदला, जैसा था वैसा ही हूँ.. पता नहीं तुम्हे ऐसा क्यों लगता है ?”
“सिर्फ मुझे नहीं, हर किसी को ये लगने लगा है कि तुम बदल गए हो ! क्यों ऐसा कर रहे हो शौर्य.. आखिर मेरी गलती क्या है, जो तुम मेरे साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हो?”
“मुझे समझ में नहीं आ रहा तुम क्या बोल रही हो ?”
“ठीक है, मैं आखिरी बार तुमसे पूछ रही हूँ.. अगर तुम मेरे साथ पहले जैसे नॉर्मल नहीं हुए, तो मैं तुमसे अब कभी बात नहीं करुँगी..।”
“जैसी तुम्हारी मर्जी..!”
अपने दिल पर पत्थर रख कर शौर्य पत्थर ही बना रहा..
और कुछ देर उसका इंतज़ार करने के बाद आँखों में आंसू लिए कली भीतर चली गयी..
शौर्य उसके जाने के बाद वापस पलटा और जाती हुई कली को अपलक निहारता रहा..
उसकी आँखों से अनजाने ही एक आंसू ढुलक आया..
ढेर सारी रस्मों रवायतों के साथ पूजा सम्पन्न हुई। और रियासत में बहने वाली नदी के जल से राजकुअंर हर्षवर्धन का अभिषेक किया गया..।
पावन अग्नि में आहुतियां डाल कर हवन सम्पन्न हुआ, और मौली कलावा हर्ष के हाथ में बांध कर पंडित जी ने उसके हाथ से माता की चुनरी और नारियल कुलदेवी की प्रतिमा के सामने रखें चांदी के थाल में रखवा दिया।
पंडित जी से आशीर्वाद लेने के बाद एक एक कर हर्ष ने वहाँ मौजूद अपने सभी बड़ो का आशीर्वाद लिया और फिर सभी महावासी वापसी के लिए निकल गए।
कल महल में महल के राजकुमार की हल्दी की रस्म शुरू होनी थी..
सभी के चेहरों पर उल्लास था…
एक एक कर सभी अपनी गाड़ियों में बैठे और महल की तरफ निकल गए..
शौर्य के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे, लेकिन विक्रम के चेहरे पर घबराहट नजर आ रही थी। उसे मालूम था शौर्य आगे क्या करने वाला है, और दिक़्क़त इस बात की थी कि वो उसे रोक भी नहीं सकता था..।
क्रमशः

Wow superb episode of
😱😱😱😱😴😴😴
सही कहा आपने डॉक्टर साहिबा…हम सच मे भविष्य को. लेकर कितना कुछ सोचते हैं, कितनी ही योजनाए बनाते हैं पर ईश्वर हमारी योजनाओं के बुने ताने बाने अपने हिसाब से सही करता है पर सच कह रही हूँ कभी कभी ईश्वर से भी गलती हो ही जाती बस एक फंदा गलत हुआ और सारी बुनाई गलत।
और क्या ऐसे कौन तू तडाक से बात करता अपने प्रिन्स से 😂मुझे भी बहुत गुस्सा आता जब आपको कोई तू कहकर बुलाता है, आप भी तो हमारी रानी साहिबा ही हो, डॉक्टर साहिबा… 😘।
शौर्य शायद बिक्रम की मदद करने के लिए ये सब कर रहा है और भदौरिया जैसे आदमी की जड़ तक पहुंचना इतना आसान भी तो नहीं है।
दूसरी तरफ महल मे शादी की रस्मे शुरू होने वाली है लेकिन शौर्य पहले हो कोई धमाका कर देगा 😳। देखते हैं आगे क्या होता है इंतजार रहेगा अगले भाग का 😊🙏🏻।
Ab kya karega shaurya.
Nice… Lekin
Kafi Dino baad arre Dino baad nhi mahine baad Jeevansathi 3 pdhne ko mila..thanks a lot Aparna.. umeed krte hn ki baki parts k liye ap hme itna lmba intzar nhin karvayngi
Vikram ko padh lena chahiye tha shorya ne jo likha tha ho sakta usne wo likha ho jo wo bol ke nhi bta sakta tha
👌👌👌👌👌👌
❤️❤️❤️❤️
कहानी का बहुत ही बढ़िया भाग है
पढ़ कर बहुत अच्छा लगा