
जीवनसाथी -3 भाग -156
शौर्य के टोकते ही कली थम गयी लेकिन एकदम से कुछ कह नहीं पायी..
“अब खड़ी क्या हो, चलो वहाँ, जहाँ सब हैं !”
शौर्य ने कली से कहा और पलटने लगा कि कली ने उसका हाथ थाम लिया।
“मुझसे भाग क्यों रहे हो ?”
“तुमसे ? मैं क्यों भागूंगा भला ?”
“ये तो तुम ही जानते हो ? मैंने कोई गलती कर दी ? ऐसा क्या हो गया हमारे बीच, जो तुम इतने रुड हो गए हो ?”
“कहाँ रुड हुआ हूँ.. मैं तो ऐसा ही हूँ !”
“नहीं हो ऐसे.. तुम बदल गए हो.. पूरी तरह बदल गए हो.. कभी कभी तो लगता है तुम्हारी जगह कोई तुम्हारा हमशक्ल आ गया है !”
“क्या बकवास कर रही हो ? पागल हो गयी हो तुम !”
“हाँ पागल ही हो गयी हूँ.. और ये तुम्हारे अलावा सबको नजर आ रहा है ! तुमने मुझसे ढंग से बात करनी बंद कर दी है.. मेरे मेसेज का जवाब नहीं देते, मेरे कॉल्स उठाते नहीं हो.. आखिर हो क्या गया है तुम्हे ?”
“तुम्हे लगा न मैं बदल गया हूँ, तो हाँ मैं बदल गया हूँ !”
“क्यों बदल गए हो ? यही तो पूछ रही हूँ।”
“मेरी मर्जी..! मेरा जब जैसा रहने का जी चाहेगा, वैसा रहूँगा.. तुम होती कौन हो मुझसे सवाल करने वाली ?”
कली खोयी खोयी आँखों से बदले हुए शौर्य को देख रही थी..
ये क्या हो गया था उसे.. कैसे समझाऊं ?
वो कुछ कहने जा रही थी कि शौर्य का फ़ोन घनघनाने लगा..
शौर्य ने फ़ोन की तरफ देखा और उठा कर दूसरी तरफ चला गया..
दूसरी तरफ भदौरिया था !
“आखिर महल में पहुँच गए तुम ?”
“हाँ !”
“तुम्हे क्या लगा था, तुम प्रिंस बन कर मुझे चकमा दे दोगे ? तुम्हारी सारी हरकत अपनी आँखों से देखी है मैंने ? तुम्हे क्या लगा रहा तुम मुझे धोखा दे कर ज़िंदा बच जाओगे !?”
“मैंने तुम्हे कोई धोखा नहीं दिया है !”
“मेरे इवेंट पे पुलिस को बुलाना, मेरे प्रोडक्ट्स लांच पर किसी औरत को पैसे देकर बैठाना और उसे वही एलर्जी हो जाना, और इस सब में पुलिस का आकर मुझे पकड़ लेना, ये सब क्या है ?”
“ध्यान से देखिये और सोचिये मैंने तो आपकी मदद ही की है !”
“मुझे पागल समझते हो तुम ? मुझे फंसा के बच नहीं पाओगे तुम ? “
“जानता हूँ, इसलिए तो कह रहा हूँ कि मैं आपको कैसे फंसा सकता हूँ एक बार सोच के देखिये..।
उल्टा मैंने तो आपकी मदद ही की.. जब उस बच्ची ने वो प्रोडक्ट लगाया, तब उसे एक एलर्जिक रिएक्शन हुआ !और मैंने उस एलर्जी की दवा.. “
“यही तो तुम्हारी चाल थी, तुम्हे पहले से कैसे मालूम था कि एलर्जी हो सकती है? और तुमने इंजेक्शन साथ ही रखा हुआ था !”
“मुझे समझ में नहीं आ रहा आप इतने बड़े बिज़नेस मैन बने कैसे ?”
“तुम कहना क्या चाहते हो ?”
“अरे आपको वो तो नजर आया, जो सामने हो रहा था, लेकिन वो नहीं दिखा जो इसके पीछे था !”
“पहेलियाँ मत बुझाओ, साफ साफ बताओ !”
“मैं आपकी ही तरफ से था हुज़ूर।
आपके प्रोडक्ट्स की कमी मुझे मालूम थी, इसलिए एहतियात के तौर पर मैंने वो इंजेक्शंस रखें थे…।
आपको उस वक्त पुलिस पकड़ कर ले गयी, लेकिन आप छूटे तो हमारे ही कारण है…।
मैंने सारे पेपर्स तैयार कर के आपके पीए को सौंप दिए थे, जिसमे स्पष्ट लिखा था कि आप अपनी प्रोडक्ट के बारे में जानते हैं, और वह प्रोडक्ट्स सेंसिटिव है। किसी विशेष तरह की त्वचा पर उनका प्रभाव अलग तरीके से हो सकता है, इसलिए आपने बचाव के तौर पर कुछ दवाइयां भी साथ रखी हुई है। उस महिला की बेटी की त्वचा एक विशेष तरह की एलर्जी से ग्रस्त है, जिसके कारण उसे आपका प्रोडक्ट सूट नहीं किया, और एलर्जिक रिएक्शन हुआ, उसे रिएक्शन से बचाने के लिए आपकी टीम ने उसे तुरंत इंजेक्शन दिया और उसे बचा लिया गया !”
“तुम सच बोल रहे हो ?”
“आपको मानना ही होगा बॉस, क्यूंकि मैं सच बोल रहा हूँ…।
मैंने एक और पेपर भी रेडी रखा था कि आपके कॉम्पिटिशन ने जानबूझ कर उस औरत और बच्ची को वहाँ बैठाया और आपके ख़िलाफ़ खड़ा करने के लिए उन्हें तगडे नोट भी दिए।
देखिये मैं अपने काम में ईमानदार हूँ और यही मेरी विशेषता है..।
आपको शायद अभी न समझ आये, लेकिन मैं अपना काम पूरा किये बिना किसी प्रोजेक्ट को कभी छोड़ता भी नहीं हूँ !”
“तो अब तक वहाँ क्या कर रहे हो ? अपने काम पर भी लग जाओ !”
“कर ही रहा हूँ !”
“लग तो नहीं रहा.. तुम हमारे काम को भूल कर बाकी सब काम में लगे हुए हो !
तुमसे जो कहा था वो सब ख़तम कर के वहाँ से निकलो !”
“आपने जो कहा है, वो इतना आसान भी नहीं है.. ये राजमहल है, यहाँ से कुछ भी बाहर निकाल पाना इतना भी आसान नहीं।”
“क्या निकालना है शौर्य ?”
इतनी देर से दूर खड़ी शौर्य का इंतज़ार करती कली थक कर उसके करीब चली आई..
“कुछ नहीं.. तुम यहाँ कैसे?”
“तुम्हारा इंतजार कर के थक गयी थी..।”
“तो तुम उधर हर्ष भाई और बाकी दोस्तों की तरफ बढ़ो मैं आता हूँ..।”
“नहीं.. मैं रुकूंगी.. मुझे तुमसे कुछ बात करनी है..।”
“अब और क्या बचा ? अब भी बात करनी है ? जाओ न, मुझे कुछ काम है.. तुम जाओ कुछ खाओ पीओ !”
“तुम मुझे अवॉइड कर रहे हो न.. ठीक है, अब मैं भी न कुछ खाउंगी न पियूँगी !”
पैर पटक कर कली वहाँ से चली गयी..
एक गहरी सी साँस भर कर शौर्य ने अपने फ़ोन की तरफ देखा, फ़ोन अब भी नहीं कटा था..
वो वापस भदौरिया से बातचीत में लग गया..
कली गुमसुम सी मीठी के साथ बैठी थी.. उन सब दोस्तों का हंसी मजाक चल रहा था..
उनके खाने की टेबल पर तरह तरह की चीजे ला लाकर रखी जा रही थी..।
वो लोग खाने और बातें करने में लगे थे..
बहुत से तरह के पेय पदार्थ भी वहाँ सजे पड़े थे। लेकिन कली का ध्यान किसी तरफ भी नहीं था। उसके मन पर क्या बीत रही थी, ये बस वो ही जानती थी।
मुहब्बत बहुत ख़राब होती है, जिसे हो जाये उसे और किसी का ख्याल ही नहीं रहता, और जिसका ख्याल दिल दिमाग पर छाया रहता, उस बंदे को इस बात का कोई ख्याल नहीं रहता..।
मीठी ने उसके सामने स्नैक्स की प्लेट रख दी, पर कली ने उस तरफ देखा भी नहीं..
दूर खड़ा शौर्य इस बात को समझ गया था, उसने विक्रम के हाथ से जूस का गिलास कली के लिए भिजवाया..
विक्रम कली के पास पहुँच गया..
” लिटिल मास्टर ने भेजा है, आपके लिए !”
“नहीं चाहिए !”
“अरे, लेकिन उन्होंने आपके लिए ही भेजा है।”
“तो क्या करूँ.. मुझे नहीं पीना.. जिसने भेजा है उसे ही पिला दो !” तुनक क़र कली दूसरी तरफ पलट कर बैठ गयी..
किसी ने उसके कांधे पर हाथ धरा और वो एकदम से उबल पड़ी..
“कहा न नहीं पीना.. क्यों ज़बरदस्ती कर रहे? जाओ अपने लिटिल मास्टर को ही पिला दो..।”
ये कहते हुए उसने हाथ झटक दिया और गुस्से में पलट गयी.. देखा तो सामने शौर्य खड़ा था !
उस वक्त वहाँ और कोई नहीं था, कुछ देर पहले ही मीठी और हर्ष डाँस फ्लोर पर दोस्तों के बहुत बुलाने पर चले गए थे..
वहाँ कली अकेली बैठी रह गयी थी, और अब शौर्य वहाँ आ गया था..।
“क्या हुआ.. बहुत नाराज़ हो मुझसे ?”
“यही तो मैं तुमसे पूछ रही कि ऐसा क्या हुआ जो तुम मुझसे नाराज़ हो गए ! वर्ना पहले तो तुम ऐसे नहीं थे.. आखिर तुम्हे हुआ क्या है ?
साफ साफ बता दो शौर्य, वर्ना मैं सोच सोच कर पागल हो जाउंगी।
अगर तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई और लड़की है, तो मुझे कोई गिला नहीं। मैं चुपचाप तुम्हारी ज़िन्दगी से दूर चली जाउंगी..।”
“और अगर ऐसा कुछ नहीं हुआ तो ?”
“तो फिर मैं..
कहते कहते कली एकदम से झेंप कर चुप हो गयी.. ये क्या कहने जा रही थी वो..
ऐसे भी कोई बेकरार हुआ जाता है क्या?
वो क्यों कहे अपने दिल की बात.. जो कहना है प्रिंस ही कहे !
वो एकदम से चुप हो गयी और शौर्य के चेहरे पर हलकी सी मुस्कान चली आई..
बड़ी अदा से उसने कली के सामने हाथ फैला कर उसके साथ डाँस का प्रस्ताव रखा, और कली उसका हाथ थामे डाँस फ्लोर पर आ गयी।
यहाँ इस वक्त महल के बड़े लोग मौजूद नहीं थे, सारे बच्चे अपनी ख़ुशी में झूम रहे थे..
वहीँ सबसे किनारे की एक टेबल पर परी अकेली बैठी थी…
उसने शोवन के साथ जो किया था उसके बाद से उस लड़के ने महल का रुख ही छोड़ दिया था !
धनुष भी कुछ दिन तक महल से दूर रहा लेकिन फिर वो वापस चला आया..
हर्ष का धनुष के बिना काम न चलना था !
और धनुष अपने काम का पक्का था !
लेकिन शोवन नहीं लौटा, उसने खुद को अपने काम में पूरी तरह से डूबा दिया था !
अब न वो परी के कॉल्स उठाता था, और न मेसेज का जवाब दे रहा था !
शोवन अब एक अलग ही दुनिया में जा बसा था !
क्रमशः

Wow superb episode
समझ ही नहीं आ रहा ये शौर्य है या उसका हमशक्ल 😳एक पल लगता है ये ही अपना शौर्य है और दूसरे ही पल कुछ ऐसा हो जाता कि लगता ये पक्का उसका हमशक्ल है पर कुछ भी कहो इसआँख मिचोली के खेल मे मजा बहुत आ रहा, आपको भी मज़ा आ रहा होगा ना, डॉक्टर साहिबा.. 🤔अपने पाठकों को नचाने मे 🤔🤔😂।
शोवन बेशक परी को गलत समझे पर परी भी अपनी जगह ठीक है, परी एकदम से हड़बड़ा गई थी, शोवन ने मौका भी तो नहीं दिया उसे सम्भलने का।
बहुत दिनों बाद आप दर्शन देती है डॉक्टर साहिबा…. 😊बहुत से लोग भूल भी गए है शोवन और परी के बीच हुआ क्या था इसलिए कह रही हूँ जल्दी जल्दी कहानी पोस्ट किया कीजिए 😊।
खूबसूरत भाग 😊👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻❤️।
क्या बात कली
पहल प्रिंस ही करेगा
लिटिल मास्टर कभी हमारा प्यारा शौर्य लगता है तो कभी बहरूपिया
बिक्रम क्या सच में शौर्य को बदल सकता हैं
नहीं कभी नहीं
प्रेम बाबू की टीम इतनी कमजोर नहीं
परी जो उस वक्त की माँग थी वो तुमने शोवन का दिल दुखा कर किया
पर अब हिम्मत करके दोनों के भविष्य के लिए अपने घर वालो को सच बताना चाहिए
Pari aur shovan ki story kya thi bhul gayi mai to …kya kiya pari ne shovan k sath
बहुत सुंदर भाग 👌
लेकिन समयांतराल अधिक है तो कहानी भूल जाती है। कृपया रेगुलर भाग दीजिए 🙏
बहुत ही प्यारा भाग
बहुत अच्छा लगा लेकिन इतने लंबे अंतराल के बाद कड़ियों को जोड़ना बहुत कठिन।
Superb 👌
Very nice part of the story and very interesting and very good 💯💯💯💯💯😊😊
Very nice 👌 part