
अतिथि -77
अमित से बात करने के बाद डिंकी ने पार्थ को गाड़ी कहाँ लेकर जाना है, बता दिया, और पार्थ ने गाड़ी आगे बढ़ा दी…!
कुछ देर बाद वो लोग संजीवनी हॉस्पिटल के पोर्च में थे..
पार्थ के गाड़ी लगाते में डिंकी उतर कर तेज़ी से भागती हुई अंदर की और बढ़ गयी.. उसी के पीछे कान्हा भी भागता चला गया।
अंदर रिसेप्शन पर वो माधव के बारे में पूछ ही रही थी कि अमित तेज़ी से उसी तरफ चला आया..।
“अनुराधा ?” उसकी आवाज़ सुन डिंकी मुड़ गयी..
“अमित..! माधव कहाँ हैं ?”
“आओ मेरे साथ !” वो डिंकी को साथ लिए एक गलियारे में मुड़ गया..
डिंकी चुप चाप अपने आंसू रोकने का प्रयास करती आगे बढ़ती जा रही थी…
अमित ने आगे बढ़ कर एक कमरे का दरवाज़ा खोल दिया! डिंकी तेज़ी से अंदर चली गयी।
अंदर माधव एक बेड पर लेटा छत की तरफ सूनी सूनी नजरो से देख रहा था..
डिंकी उसके पास जाकर खड़ी हो गयी..
“माधव !” डिंकी की आवाज़ सुन माधव चौंक गया !
उसे इस बात कि बिलकुल भी आशा नहीं थी कि डिंकी यहाँ चली आएगी।
“डिंकी! तुम यहां?”
” फिर? आपने किसी और को एक्सपेक्ट किया था?”
” नहीं, लेकिन तुम यहां क्या कर रही हो?”
“यही सवाल तो मैं आपसे करना चाहती हूं। बल्कि, यह सवाल मुझे आपसे पूछना ही चाहिए कि आप यहां क्या कर रहे हैं?”
डिंकी का आत्मविश्वास से भरा यह जवाब माधव को कमजोर कर गया।
वह बुझी बुझी आंखों से नीचे देखने लगा। डिंकी उसी के पलंग के किनारे उसके ठीक सामने बैठ गई। उसने अपने दोनों हाथों में माधव का चेहरा ले लिया।
” जानती हूं, आपसे छोटी हूं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि मेरे पास दिमाग नहीं है। आपके साथ इतने दिन रहकर बहुत कुछ सीखने और समझने को मिला है। मैं क्या थी और मेरा भविष्य क्या हो सकता है, इसे कभी मैं नहीं समझ पाई। अपने उलझे हुए सपनों के पीछे आंखें मूंदे भागती रहती थी। आपने एक-एक कर मेरे उन सपनों के तारों को सुलझा कर रख दिया।
जिन बातों को घर से छुपा कर करती थी, उन बातों को बड़े सलीके से आपने घर वालों के सामने रख दिया। मेरी जिंदगी की हर परेशानी, हर मुश्किल को धीरे-धीरे सुलझाते चले गए।
लेकिन अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी परेशानी को, मुझे बताने की कभी जरूरत ही नहीं समझी?
आपको क्या लगता है कि क्या मुझे कभी कुछ पता चला ही नहीं, या मैं इतनी बेवकूफ थी कि आपके साथ रहते हुए भी कुछ समझ नहीं पाई माधव जी..।”
माधव को डिंकी की कुछ बात समझ में आ रही थी कुछ नहीं, लेकिन उसे इतना समझ में आ गया था कि अब डिंकी से कुछ भी छिपाना व्यर्थ है।
“डिंकी, मैंने बहुत बार कोशिश की, लेकिन तुम्हारे सामने हिम्मत ही नहीं पड़ी कि तुम्हे बता सकूँ.. कि मैं क्या झेल रहा हूँ।
तुम नहीं जानती, मेरे साथ तुम्हारा कोई भविष्य नहीं है.. इसलिए..”
“इसलिए आप शादी के मंडप पर अकेला छोड़ आये मुझे.. ?
आपको क्या लगा आपका ऐसा करने से या ऐसा बोलने से मैं नाराज हो जाऊंगी, मेरा इगो हर्ट हो जाएगा, और मैं आपसे शादी से इनकार करके अपने घर चली जाऊंगी? अपने फ्यूचर पर ध्यान दूंगी और अपना करियर बनाने लगूंगी?
माधव यकीन मानिए इतने दिनों में जितना आपको देखा और समझा है, मैं अच्छे से जानती हूं कि आप मुझे बीच रास्ते पर अकेला छोड़कर जाने वालों में से नहीं है। हां एक बात के लिए आपसे नाराजगी जरूर है कि आपने अपनी बीमारी के बारे में मुझे कुछ नहीं कहा, बल्कि कई बार यह कोशिश जरूर की, कि किसी न किसी बहाने मैं आपसे दूर चली जाऊँ और अपना भविष्य कहीं और देख लूं। लेकिन आप इतने दिनों में मुझे ठीक से शायद समझ नहीं पाए, आपकी बीमारी के बारे में तो शुरू से ही जान चुकी थी मैं..।”
माधव को डिंकी कि ये बात सुन कर झटका सा लगा..
“कैसे ? तुम कैसे जानती थी ?”
डिंकी हलके से मुस्कुरा उठी..
“एक बार आपने मुझसे अपनी बीमारी के बारे में बताना शुरू किया था, याद है आपको ? लेकिन फिर कुछ सोच कर आप बिना बोले ही रह गए थे..
उस दिन मन मे खटका सा लगा, मैं सारी रात सो नहीं पायी..।
हर वक्त यही ख्याल दिल में चलता रहा कि आखिर कौन सी बात थी, जो आप मुझसे कहना चाहते थे। लेकिन कह नहीं पाए और तब अगले दिन मैंने अमित जी को कॉल किया। मैं जानती थी, आपसे जुड़ी ऐसी कोई बात नहीं हो सकती जो इन्हे न पता हो..।
लेकिन उस वक्त तक आपने शायद इन्हे भी कुछ नहीं बताया था, ये भी मेरी मदद नहीं कर पाए..।
उसके बाद मैंने आपको मिलने बुलाया था..
इत्तेफाक से वहीं आपके डॉक्टर का कॉल आ गया और आप मेरे सामने आधी अधूरी बात कर वहाँ से उठ कर दूसरी तरफ चले गए..
तभी मुझे लगा कोई ऐसी बात तो है, जो आप मुझसे छिपा रहे..।
जब आप वापस लौट कर आये तब बहुत परेशान नजर आ रहे थे। मैंने आपसे कहा भी कि आप एक बार अच्छे से अपने चेहरे पर पानी के छींटे मार लीजिए और आप उठकर वॉशरूम की तरफ चले गए। मैंने आपका फोन खोला और देखा कि किसी डॉक्टर नारायण का कॉल था।
मैंने तुरंत उनका नंबर अपने फोन पर सेव कर लिया। घर पहुंच कर मैंने उन्हें कॉल किया, सिर्फ यह जानने के लिए कि वह कौन है, और कहां से बात कर रहे हैं?
उन्होंने जब अपने हॉस्पिटल का पता दिया तो मैं वहां पहुंच गई। हॉस्पिटल रिसेप्शन पर पूछताछ करने पर डॉक्टर नारायण का पता तो मिल गया, लेकिन उन्होंने प्राइवेसी पॉलिसी का हवाला देकर आपके बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। लेकिन इस बात से मुझे इतना तो समझ आ ही गया था कि आपके साथ कोई मेडिकल इशू है, और जिसके कारण आप मुझसे दूर हो जाना चाहते हैं…।
उस अस्पताल से निकलते समय रिसेप्शन पर बैठी लड़की को जाने क्यों मुझ पर तरस आ गया। उसने मुझे बुलाकर पूछा कि मैं इतनी पूछताछ क्यों कर रही हूं। और तब मैं उसे लड़की के सामने कमजोर पड़ गई। मेरे आंसू देखकर वह पिघल गई और उसने मुझे कहा कि वह मुझे आपके बारे में कोई जानकारी नहीं दे सकती लेकिन इतना जरूर बता सकती है कि आप किस किस दिन पर डॉक्टर साहब से मिलने आते हैं। मेरे लिए यही बहुत बड़ी बात थी।
आप जब भी अपनी ट्रीटमेंट या सलाह के लिए डॉक्टर से मिलने आते थे, मैं भी चुपके से पहुंची जाती थी। और आखिर एक दिन मेरे हाथ आपकी फाइल लगी गई।
आप डॉक्टर से मिलकर बाहर निकले थे कि आपको किसी टेस्ट के लिए वापस बुलाया गया, आप फाइल बाहर बेंच पर ही छोड़ कर चले गए थे, और मैंने उस फाइल को पढ़ लिया। मुझे पता चल गया कि आपके दिमाग में कुछ गांठे बनने लगी है, और शायद उसका इलाज इतना आसान भी नहीं।
मुझे सब कुछ समझ में आ गया था,आपके व्यवहार में इतना परिवर्तन क्यों आने लगा था। और तभी मैंने यह तय कर लिया कि जिंदगी के इस कठिन दौर में आपका साथ कभी नहीं छोडूंगी। मैं तो इस इंतजार में थी कि आप किस दिन खुद आगे बढ़कर मुझे अपनी तकलीफ के बारे में बताएंगे। लेकिन आपने कुछ नहीं बताया। जब आप मुझे अपनी दादी से मिलवाने लेकर जा रहे थे, उस वक्त भी मुझे लगा था कि शायद वहां आप मुझे सब कुछ बता देंगे। वहां से लौटने के बाद मेरे ख्यालों को और भी ज्यादा मजबूती मिल गई थी। मैंने तय कर लिया था कि किसी भी कीमत पर आपसे अलग नहीं होंगी।
शादी की तैयारियाँ जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी, मेरे दिल में एक हल्का सा डर सा उठने लगा था। मुझे लगने लगा था कि पता नहीं आप शादी के पहले कोई ऐसा कदम न उठा ले,और हुआ भी वही..।
लेकिन अब भी मुझे आप पर यक़ीन तो था, आप शादी के मंडप पर मुझे अकेली छोड़ कर नहीं जा सकते…।
इसीलिए जब वहाँ सारे ही लोग आपको ढूंढने लगे तब मैंने अमित जी को ही कॉल किया। मुझे मालूम था इन्हे सब सच पता होगा और इन्होने इस बार मुझे सब सच बता दिया..।”
“और क्या था वो सच.. ?”
अब तक चुप खड़ा पार्थ पूछा बैठा..
“पार्थ भैया, कल संगीत के बाद इनकी तबियत बिगड़ गयी थी। लेकिन आज सुबह के रिचुअल्स निभाने के लिए इन्होने आराम नहीं किया, और लगातार खुद को झोंके रखा, जिसके कारण बहुत ज्यादा स्ट्रेस होने से ये बेहोश हो गए थे..
पार्थ आंखे फाड़े अनुराधा और माधव को देख रहा था..।”
उसके लिए अनुराधा आज तक उसकी छोटी गुड़िया थी जो आज इतनी बड़ी, इतनी समझदार हो गयी थी, कि अपने निर्णय बिना किसी झिझक के ले सकती थी..
“कोई मुझे पूरी बात बताएगा भी..?”
उसके बाद माधव ने अपनी बीमारी से लेकर उसके बचने, ठीक होने की सारी सम्भावनाये पार्थ को बता दी..
“अब तुम बताओ पार्थ! ऐसे में मेरा यह सोचना कि डिंकी मुझसे शादी ना करें, कहीं से भी गलत है? मेरी जिंदगी का कोई भरोसा नहीं है, आज मैं यहां हूं पता नहीं कल रहूं ना रहूं। और तब मेरे पीछे डिंकी का क्या होगा..?”
“कल क्या होगा यह सोच के हम अपना आज क्यों खराब कर रहे हैं? आप जिस दिन मेरे घर पर पहली बार अतिथि बनकर आए थे, उसी दिन आपके साथ मेरा भाग्य जुड़ गया था। और अब, आप मेरे जीवन के, और मेरे, सब कुछ हो चुके हैं।
कल क्या होगा, यह सोचकर मैं अपना आज नहीं बिगाड़ सकती। और इसलिए आपसे भी यही कहूंगी की सब कुछ वक्त पर छोड़ दीजिए..।
जिनके हिस्से जितनी सांसे लिखी है, उतनी ही मिलेंगी। अगर आप मुझे जिंदगी के रास्ते में बीच में छोड़ कर चले भी गए तो, आपकी यादें रहेंगी मेरे साथ। और कहीं मैं आपको छोड़कर चली गई तो मेरी यादों के सहारे आप जी लेना..।”
माधव की आंखे झिलमिलाने लगी थी..
“ये कैसी बात बोल रही हो, मरे तुम्हारे दुशमन.. तुम्हारी तो ज़िन्दगी अभी शुरू हुई है..
और इसे अभी बहुत आगे तक जाना है !
और मेरा आशीर्वाद तुम दोनों के साथ हमेशा ही है और रहेगा.. अब चले !”
पार्थ के इस सवाल पर वो दोनों मुस्करा उठे …
पार्थ ने आगे बढ़ क़र माधव को गले से लगा लिया..
“आप हमारे पाहुन है, मेहमान जी ! आपके स्वागत में वहाँ सब पलक पांवड़े बिछाए बैठे हैं… चलिए अब देर मत कीजिये !”
उन दोनों को साथ लिए पार्थ विवाह भवन की तरफ बढ़ चला.. उन सब को एक साथ देख कर सबके चेहरे पर मुस्कान लौट आई..
मेहमान जी आ गए की फुसफुसाहट उनके भी कानों तक पहुँचने लगी..
माधव ने मुस्कुरा कर डिंकी की तरफ देखा और उसका इतनी देर से थाम रखा हाथ छोड़ दिया..
“हाथ क्यों छोड़ दिया.. ?” डिंकी ने उलाहना सा दिया..
“विवाह वेदी पर थामना ही है, हमेशा हमेशा के लिए ! सुनो अपने इस अतिथि को अब जाने तो नहीं दोगी न ?”
“नहीं.. अब ये अतिथि मुझे छोड़ कर कभी, कहीं नहीं जा सकता !”
शुभ मंगलाचरण की ध्वनि में दो आत्माएं एक सूत्र में बंधने के लिए आगे बढ़ गयीं…
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किसी तरह भीड़ में अपनी जगह बनाती योगिता आगे बढ़ती गयी… उसने अपनी टिकट पर लिखी कुर्सी का नंबर ढूंढा और बैठ गयी.. ।
उसका ध्यान इस बात पर भी था कि उसका पति उसे देख न ले। उसने अपना चेहरा दुपट्टे से ढक रखा था।
भीड़ भाड़ बढती ही जा रही थी..
एयरकंडीशंड हॉल में भी लोगो की भीड़ से गर्मी बढ़ने लगी थी..।
उमस से बेहाल योगिता यही सोच रही थी कि आखिर क्या है इस लेखिका में जो लोग इस कदर बेचैन हुए जा रहे हैं? तभी एक शांत शीतल कर्णप्रिय आवाज उसके कानों तक पहुँचने लगी..
“नमस्कार दोस्तोँ.. आपके शहर में पहली बार आना हुआ है मेरा.. !
आप में से कई लोग मुझसे परिचित है, और कई नहीं। मेरा नाम सुनैना है। और मैं कहानियां सुनाती हूं। मेरी ज्यादातर कहानियां मेरी खुद की लिखी हुई होती हैं। बल्कि यह कहूं कि मेरे आपबीती या मेरे आस-पास के लोगों की आप बीती सुनाती हूं, तो वह गलत नहीं होगा। आज फिर मैं आपके लिए एक कहानी लेकर आई हूं, जो मेरी खुद की सहेली की कहानी है..।
जब भी मैं किसी की कहानी लिखती हूं, तो उससे इजाजत जरूर लेती हूं ,लेकिन इस बार मैं माया की कहानी लिखने के लिए उससे इजाजत नहीं ले पाई। क्योंकि उससे इजाजत ले सकूं इसके पहले ही वह हम सब को छोड़कर दूर चली गई।
मैंने कभी नहीं सोचा था कि उस जैसी मेहनती और जुझारू लड़की को मौत इतनी आसानी से और इतनी जल्दी हम सब से दूर ले जाएगी..।
आंखे जाने से पहले मैंने उसे देखा था, और उसकी वो सुंदर छवि मेरे दिल दिमाग में ऐसी बस गयी कि मैं उसका वो चेहरा कभी नहीं भूल सकती..
लोग मुझसे शिकायत करते हैं कि मैं सिर्फ प्रेम कहानी लिखती हूं। उन लोगों को कहना चाहती हूं कि अगर आपके जीवन में प्रेम ना हो तो आप जिंदा रह ही नहीं सकते। अगर एक मां अपने बच्चों को प्यार ना करें तो क्या वह बच्चा अपने पहले दिन से जीवन की इस कङी रणभूमि में खुद को संभाल पाएगा? अगर एक पति अपनी पत्नी से प्रेम न करे, अगर एक भाई अपने भाई से प्रेम न करे, अगर बच्चे अपने बूढ़े माता-पिता से प्रेम न करे, तो क्या यह सृष्टि चल पाएगी? नहीं! इसलिए प्रेम के यह विभिन्न रूप ही तो है जो इस सृष्टि को, इस प्रकृति को आगे बढ़ाते हैं। तो फिर मैं प्रेम क्यों ना लिखूं, और वह भी इस कहानी में तो जो प्रेम मैंने लिखा है वह अद्भुत है..।
मोहित और माया की प्रेम कहानी तो इतनी अलौकिक है कि लगता है जैसे यह कोई दो इंसान नहीं आसमानी दुनिया के लोग हैं। जब प्रेम में पाने की आशाएं व्यर्थ हो जाती हैं, उस वक्त भी अगर प्रेम मौजूद है, उसकी सांसें टूटी नहीं है, तो समझ लीजिए उस प्रेम से ज्यादा मजबूत कुछ भी नहीं…।
ये कहानी बताती है कि प्रेम पाना नहीं बल्कि एक दूसरे के लिए खुद को पूरी तरह से भुला देना है..।
जैसे ही सुनयना ने बोलना शुरू किया उस पूरे हॉल में सन्नाटा पसर गया.. सुई गिरने तक की आवाज़ अब सुनाई दे सकती थी..
अब वहाँ सिर्फ सुनयना बोल रही थी और बाकी सब साँस रोके सुन रहे थे..
योगिता भी उस जादुई आवाज़ की गहराई में डूबने लगी थी..
तो आज मैं आपको सुनाने जा रही हूँ मोहित और माया की कहानी…
” मोहमाया “
क्रमशः

बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻
वो कहते भी है ना, अंत भला तो सब भला, डिंकी और माधव इतने उतार चढ़ाव के बाद आखिर मंजिल तक पहुंच ही गए, शादी मुबारक़ दोनों को 🙌🏻🙌🏻👩❤️👨।
मोहमाया…. इंतजार है…।
Super se bhi uper ,moh Maya kab aarhi hai?
Supper pert 🥰🥰🥰👍🏻👍🏻👍🏻💖💖💖💥
Beautiful part ❤️❤️❤️
Beautiful part mam….bs aap gayab mt ho jaya kijiye…..aap smjh nhi skti kitna intjaar rehta he aapki stories ka…. jivansathi or mayanagri bhi jldi se de
बहुत सुन्दर रचना 🌹🌹
👌👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏👏
👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🥲🥲🥲🥲🥲🥲🥲🥲🥲🥲🥲🥲🥲🥲🥲🥲🥲🥲🤍🤍🤍🤍🤍🤍🤍🤍🤍🤍🤍🤍🤍🤍🤍🤍🤍🤍⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️
🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰
Beautiful part