
अतिथि -76
अब तक आपने पढ़ा,
कानपुर में शादी की तैयारियां जोरो से चल रही है, सारे ही लोग वहाँ पहुँच चुके हैं। डिंकी और माधव के संगीत में योगिता भी दीपक के साथ पहुँचती है। जहाँ रास्ते में यात्रा के दौरान उसे दीपक के बारे में मालूम चलता है कि वो किसी लेखिका की कहानियां बड़ी तन्मयता से सुना करता है…।
ये बात योगिता को पसंद नहीं आती, और वो उस लेखिका के बारे में जानकारियां जुटाने में लग जाती है..
अगले दिन बाकी रस्मों के बाद बारात निकासी का वक्त आ चुका है, लेकिन माधव का कहीं पता ठिकाना नहीं है..।
माधव का एक दोस्त घबरा कर डिंकी के पास पहुँच कर उसे सब कुछ बता देता है..
अब तक घर के सारे लोग और बाकी रिश्तेदार भी वहाँ पहुँच चुके हैं..
अब आगे….
योगिता का जी जल रहा था।
दीपक सुबह अपने रोज के वक्त पर दुकान के लिए नहीं निकला था, बल्कि उसने फोन करके दुकान के लड़कों को सब कुछ समझा दिया था। खुद बड़ी देर तक कुछ गुनगुनाते हुए नहाता रहा था। बाहर निकालने के बाद आज उसने नाश्ते की प्लेट भी एक तरफ सरका दी..।
बड़े मन से योगिता ने दीपक के पसंदीदा मूंगलेट बनाए थे, लेकिन दीपक ने उन चीजों की तरफ नजर तक नहीं मारी। बस एक सेब उठाकर खाया, और एक कप चाय पीकर घर से निकल गया।
उसका ग्यारह बजे इतना सज संवर के निकलना योगिता को अंदर तक सुलगा गया। वह समझ गई थी कि दीपक दुकान नहीं जा रहा। दीपक के घर से निकलते ही वह फटाफट नहाने घुस गयी। तैयार होकर घर पर ताला डालकर वह भी दीपक के पीछे दीनदयाल ऑडिटोरियम के लिए निकल गई।
उसे पक्का विश्वास था कि दीपक वहीं जा रहा है….
उसने हड़बड़ी में एक ऑटो पकड़ा और दीनदयाल ऑडिटोरियम की तरफ निकल गई। उसे इतना भी ख्याल नहीं आया कि उसके पास अंदर जाने के लिए कोई टिकट नहीं है। इस वक्त उसके दिमाग पर सिर्फ वह लेखिका चक्कर काट रही थी।
दीनदयाल ऑडिटोरियम पहुंचने के बाद उसने इधर-उधर देखा। बाहर भारी भीड़ थी। गेट से किसी तरह अंदर जाकर वह टिकट काउंटर की तरफ बढ़ गई। टिकट काउंटर बंद हो चुका था। वहां बैठे लड़के ने उसे बता दिया कि टिकट खत्म हो गई है।
लेकिन योगिता को किसी भी कीमत पर अंदर जाना था। वह परेशान हाल इधर से उधर टिकट की तलाश में भटक रही थी। उसने दो-चार लड़कों से धीरे से पूछा भी कि क्या उनके पास एक्स्ट्रा टिकट होगी, लेकिन सभी ने ना में गर्दन हिला दी।
तभी पीछे से एक धीमी से आवाज आई।
” मैडम टिकट लेनी है क्या?”
वह घूम कर पलट गई
” हां, लेनी है।”
” लेकिन कीमत ज्यादा देनी होगी।”
” हां मैं तैयार हूं।”
” तो निकालिए तीन हजार।”
“क्या यह लेखिका इतनी बड़ी है कि उनकी टिकट हजारों-हजार में ब्लैक हो रही है।”
उसके मुंह से बेसाख्ता निकल गया।
” लेखिका बड़ी है कि नहीं, यह नहीं पता। लेकिन आपको देखकर समझ में आ रहा है कि आपको उन लेखिका से बड़ी मोहब्बत है, और आप उन्हें किसी भी कीमत पर सुनना चाहती है।
देखिए हमारे शहर में यह पहला मौका है, जब सुनयना मैडम यहाँ आई हैं..।
आपको सुनना है तो टिकट लीजिये, वर्ना मेरे पास और भी कस्टमर है।”
“भैया पांच सौ के टिकट का तीन हजार कुछ ज्यादा नहीं बता रहे हो?”
” मैडम टिकट के अलग-अलग नमूने मौजूद हैं। यहां मेरे पास यह जो टिकट है यह डेढ़ की है, इसमें आप लेखिका को एकदम करीब से देख पाएंगी। स्टेज पर उनके पास मिलने जा पाएंगी और उनकी ऑटोग्राफ वाली किताब उन्हीं के हाथ से आप खरीद पाएंगी। बताइए इतना कुछ दे रहा हूं आपको और वह भी सिर्फ तीन में।
यहां तो लोग एक दूसरे पर गिर पड़कर उस लेखिका की एक झलक पाने के लिए अंदर घुस रहे हैं। और आप हैं कि बारगेन कर रही हैं।”
” चलो ठीक है, यह लो पैसे।”
योगिता से रुपए बड़ी मुश्किल से निकलते थे। उसका दिल ही जानता था कि अपनी सोच की एक झलक पाने के लिए उसे यह तीन हजार खर्चना कितना भारी पड़ रहा था। उसने रुपए निकाल कर उस आदमी के हाथ में रखें और उससे टिकट ले लिया..।
वह गेट की तरफ बढ़ने लगी कि उस आदमी ने उसे रोक लिया।
” वहां से नहीं मैडम, आपको इधर किनारे वाले एक नंबर गेट से जाना है। टिकट के अनुसार बीच-बीच में बैरिकेट्स लगे हैं।
500 की टिकट वाले सिर्फ सुनयना मैडम को सुन सकते हैं। वह इतने पीछे बैठें हैं कि उन्हें सुनयना मैडम नजर भी नहीं आएंगी शायद।”
इतना भारी इंतजाम सुनकर योगिता आश्चर्य में डूबी जा रही थी। आज के जमाने में भी लेखन के प्रति लोगों का इतना जुनून होता है क्या? आजकल कौन कहानी पढ़ता और सुनता है।
जब इंटरनेट पर वैसे ही इतना कुछ मनोरंजन मौजूद है। आश्चर्य में डूबी वह उस भीड़ को देखते हुए उनके बीच से रास्ता बनाती अंदर चली गई…
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शादी घर में सारे रिश्तेदार बातें बना रहे थे..
दूल्हे के पिता आश्चर्य में डूबे बार बार डिंकी के पिता को अपनी तरफ से सफाई दे रहे थे।
उनका माधव कभी ऐसा नहीं कर सकता। सबकुछ उसी की मर्जी से तो हो रहा था, फिर वो सब छोड़ कर कहीं कैसे चला गया..?
सुलोचना की हालत बहुत ख़राब थी। वो एक कुर्सी पर खुद को समेटे बैठी डिंकी के भविष्य के बारे में सोच सोच कर परेशान हुई जा रही थी..।
और उन सब के बीच सुलक्षणा वापस अपने रंग में उतर आई थी।
“बस यही एक कमी माधव में सबसे खराब है। लड़का बड़ा ज़हीन है, पढाई लिखाई में बेहतर है, लेकिन जहाँ कोई ज़िम्मेदारी वाली बात आई, यूँ ही पलट जाता है। ये आज का नहीं है, पहले भी स्कूल कॉलेज में यही करता आया है।
किसी प्रतियोगिता के लिए जी जान से जुट कर तैयारी करेगा ज़रूर, लेकिन जब इम्तिहान का वक्त आया चुपचाप वहाँ से सरक गया।
अरे कई बार तो अपने स्कूल कॉलेज के इम्तिहान के वक्त भी बीमारी का नाटक कर के एग्जाम ही नहीं दिए उसने।
उसे डर की बीमारी है। तरह तरह की बातें बनाएगा बस, लेकिन जब खुद को साबित करने का मौका आया तब चुपचाप भाग लिए।
यही तो करता आया है शुरू से..
हमें तो पहले ही लगा था.. और देखो वही हो गया..।”
“मम्मा बस.. भैया होंगे यही कहीं.. मैं देख कर आता हूँ !”
सुलोचना के बेटे कान्हा को अपने माधव भैया से बड़ा लगाव था।
उसे सुलोचना की ये बातें पसंद नहीं आ रही थी, वो वहाँ से निकलने को था कि डिंकी की आवाज़ वहाँ गूंज गयी..
“रुकिए कान्हा, मैं भी आपके साथ चलूंगी.. मुझे शायद पता है, वो कहाँ होंगे इस वक्त !”
कान्हा ने डिंकी को देखा और हाँ में गर्दन हिला दी..
डिंकी के साथ ही पार्थ भी आगे बढ़ा गया..
वो तीनो ही वहाँ से निकल गए..।
एकबारगी सुलोचना ने डिंकी को रोकने का सोचा लेकिन फिर चुप बैठ गयी।
डिंकी का ध्यान इस बात पर गया था कि माधव का सबसे करीबी दोस्त अमित वहाँ नजर नहीं आ रहा था।
डिंकी ने तुरन्त अमित को फोन लगा दिया.. अब तक में पार्थ गाड़ी निकाल कर ले आया था, कान्हा के साथ डिंकी गाड़ी में बैठ गयी…
अमित ने पहली रिंग में ही फोन उठा लिया..
“कहाँ है आप अमित जी ?”
डिंकी की घबराई सी आवाज़ से अमित सब समझ गया..
उसने डिंकी को बताया कि वो कहाँ है, और डिंकी ने पार्थ को वहीँ गाडी ले चलने को कह दिया।
क्रमशः

Madhav dr ke pass gya hai sayad par ye galat hai use dinki se nahi chhupana tha sab pareshan hain aur badnami toh ladki walon ki hi hogi na 😓😓
👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏
जीवनसाथी और मायानगरी भी continue kriye n kab se esi ke part aa rhe 🥴
Itne dino baad part aaya, wo bhi aisa laga jaise padha hi nhi.., main samjhti aapke pass samay ki kami h, sb trf dekhna padta h, kitne kitne din ho jate hai, aap kisi bhi kahani ka part thik se nahi de pati.., thoda lamba break le lijiye…, baad me dedijiya kahani., kahaniyan apne lay me chalti rahe to achha lagta hai, is tarah padhne me maja nahi aayega bahot bahot din ho jate hai 👍🏻 ⭐
Badhiya
Beautiful part 🥰🥰♥️🥰🥰 mam jldi se part diy kijiye…..or jivan sathi pr bhi vichar vimarsh kre plz …hm intjaar krte he
Very interesting part
Superb 👌
Bas itna chhota……. Intjar kar kar k thak gay the…… Madhav jarur hospital me hoga
अपर्णा जी डिन्की की शादी करवा दीजिए बिना किसी विघ्न बाधा के।ये अच्छा ही है कि उसको माधव की बीमारी पता चल जायेगी तो अच्छे से केयर कर पायेगी।