
अतिथि -75
दीपक जिस शर्मीले स्वभाव का था उसे शादी से लेकर आज तक कभी योगिता ने कुछ भी गुनगुनाते नहीं सुना था। आज पहली बार दीपक बाथरूम से कोई गीत गुनगुनाते हुए निकला था। योगिता को एक के बाद एक झटके मिल रहे थे। उसे समझ में आने लगा था कि उसके पति की जिंदगी में रूमानियत घुल चुकी है…
इतने सालों की शादी में शुरुआती दिनों में दीपक उस पर भी बहुत मोहब्बत लुटाया करता था। लेकिन वह अक्सर उसके प्यार को झटक दिया करती थी। कभी योगिता ने अपनी तरफ से दीपक को मान सम्मान दिया ही नहीं। लेकिन दीपक उसे खुश रखने का भरसक प्रयास करता था। दीपक अपनी तरफ से कभी कोई कमी नहीं छोड़ा करता था। लेकिन योगिता का स्वभाव ही ऐसा था कि उसने दीपक को कभी तरजीह दी ही नहीं..।
लेकिन अब जब उसे लग रहा था दीपक उसके हाथ से निकला जा रहा, तब उसकी सांसे अटकने लगी थी…।
दीपक के पीछे वो भी बाहर निकल आई।
दीपक किसी को मेसेज कर रहा था, वो पूरी तरह से खुद में मगन था। उसका ध्यान योगिता पर था ही नहीं।
योगिता ने इधर उधर से झांक कर देखने की कोशिश की लेकिन देख नहीं पायी..।
दबे पांव वो वापस लौट गयी !
पलंग पर अपना किनारा पकड़ कर वो चादर मुहँ तक ताने लेट गयी, लेकिन उसके कान दरवाज़े पर ही लगे थे..
दीपक कभी इतनी देर तक जागा नहीं करता था। बल्कि वो तो दुकान बढ़ा कर आने के बाद मस्त खा पीकर थोड़ी देर टीवी देखने के बाद ही नाक बजा बजा कर सो जाया करता था।
अब अचानक इस बैल जैसे आदमी को क्या हो गया था?
क्य़ा वाकई दीपक को किसी और से प्यार हो गया था… ?
करवट बदलते बदलते जाने कब उसकी आंखे लग गयी, उसे पता ही नही चला।
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विवाह भवन में सुबह कुछ जल्दी ही हो गयी थी…
ढेर सारी रस्मे एक ही दिन में निबटानी थी।
घर परिवार छोड़ कर गोलोक वासी हो चुके पुरखो को न्योतना था, तेल हल्दी के बाद सुहागिल जीमा कर उनका आशीर्वाद दुल्हन की झोली में डलवाना था..
एक एक कर सारे रिवाज पूरे होते चले गए..।
दो आत्माओ के मिलन, गृहस्थ आश्रम में प्रवेश का ये संस्कार अब अपने चरम पर पहुँच चुका था, सारे पूजा पाठ सम्पन्न हो चुके थे..
शाम ढल चुकी थी, सितारों भरा शामियाना जगमगा रहा था..
हवाओं में सितार सा बज रहा था..
हर तरफ खुशबु थी, राग रंग था, और भीड़ का मजमा दूल्हे का इंतज़ार कर रहा था..
बारात निकलने वाली थी….
सभी लोग इधर से उधर भागते दौड़ते हुए तैयारियों में लगे थे..
घोड़ी को बस नेग के लिए लाया गया था..
उसे तिलक कर चने खिलाये जा रहे थे.. बाराती महिलाये अपनी पसंद के गाने धुमाल वाले को बताने में मग्न थी जिससे उनके लिए सिलसिलेवार गाने यूँ बजाये जाये जिससे उनके डाँस में कोई विघ्न न हो !
घोड़ी के ठीक पीछे ही बग्घी सजी खड़ी थी.. अब सिर्फ दूल्हे का इंतज़ार था।
सुलोचना हाथ में पूजा की थाली लिए माधव का इंतज़ार कर रही थी। उसने माधव के दोस्त आकाश को उसे बुलाने के लिए भेज दिया..।
आकाश माधव को कॉल लगाने लगा..।
पूरी रिंग जाने के बावजूद किसी ने कॉल नहीं उठाया… भीड़भाड़ और शोरगुल के कारण वो सुन नहीं पाया होगा ये सोच कर आकाश तेजी से अंदर की तरफ बढ़ गया।
भवन में अंदर जाकर उसने सीधा लिफ्ट में प्रवेश किया और दूसरे माले पर पहुंच गया। माधव का कमरा उसी माले में था। आकाश तेजी से माधव के कमरे की तरफ बढ़ गया। बीच-बीच में वह अपने दूसरे दोस्त को बारात के बारे में जानकारी भी देता जा रहा था।
माधव के कमरे के ठीक बाहर पहुंचकर उसने दरवाजे पर दस्तक दी। लेकिन दस्तक सुनने के बाद भी अंदर से कोई नहीं आया। तब आकाश ने दरवाजे का हैंडल पकड़ कर उसे जरा अंदर किया, उसके आश्चर्य की सीमा नहीं रही, कमरे का दरवाजा खुला हुआ था।
दरवाजे को ठेल कर वह भीतर चला गया। लेकिन भीतर कमरे में माधव मौजूद नहीं था। पलंग पर उसकी शादी वाली शेरवानी जरूर रखी हुई थी। आकाश को लगा माधव अब तक तैयार नहीं हुआ है।
वह उसे आवाज देते हुए बाथरूम की तरफ भागा, लेकिन बाथरूम का दरवाजा भी खुला हुआ था। और माधव वहां भी मौजूद नहीं था। वह वापस दौड़कर कमरे की बालकनी में चला गया। उसे लगा कहीं बालकनी में बैठकर माधव सिगरेट ना फूंक रहा हो। लेकिन उसका यह सोचना भी गलत साबित हुआ। वह वापस आया और उसने शेरवानी उठाकर इधर-उधर देखना शुरू किया। माधव कहीं नजर नहीं आ रहा था। वह शेरवानी हाथ में लिए सीधे डिंकी के कमरे की तरफ भाग खड़ा हुआ…।
क्रमशः

पहली बार किसी मर्द को इतनी ईमानदारी से रिश्ता निभाते देखा है, नहीं तो हर बार औरत ही पीसी है ऐसे माहौल मे😊।
शादी की हर रस्म बहुत ही खूबसूरती से निभाई जा रही है पर ये माधव… 😳ये माधव कहाँ गायब हो गया 😳।
Kya hua. Bhut din se story ka next part nhi aaya. Sb theek h na
बहुत अच्छा भाग 👌👌👌
अब अंत समय माधव को किसने उठवा लिया मां और कितना खेलेगी जिंदगी से माधव की
अतिथि के part जीवनसाथी के भाग में??
Madhav kahan chala gya 😮😮.ager usne ab apne kadam pichhe liye toh dinki tut jayegi aur uska pariwar bahut beizzat hoga 😓😓😓
😥😥😥😥😥😥😥😥😥😥😥😥😥
Ab madhav kaha chala gya kahi usko sar dard to nhi hone laga fir se
बहुत सुन्दर रचना 🌹🌹
Nice part
One request
Pls subscribe me
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