
अतिथि -74
योगिता स्क्रॉल करती जा रही थी और उस लेखिका से जुडी एक एक बातें उसके सामने आती जा रही थी, उसने वाकई लोगो का दिल जीत रखा था..
लेकिन ऐसा क्या सुनाती थी वो जो लोग उस पर दिलो जान से फ़िदा थे..
योगिता को अंदर ही अंदर जलन सी होने लगी ! एक औरत होकर दूसरी की इतनी तारीफ वो कैसे सहन कर सकती थी? उस पर उसका खुद का शांत शर्मीला पति जो कभी किसी बाहर वाली औरत से बात तक नहीं करता था, अपने मन के उद्गार भर भर कर उस लेखिका पर लुटा रहा था..।
योगिता खुद को ठगा सा महसूस करने लगी !
उसने देखा, उसे दूर से दीपक कार की तरफ आता दिखाई दिया और एक झटके में योगिता ने फोन बंद कर वापस रख दिया !
दीपक पान चबाता हुआ आया और कार का दरवाजा खोल अंदर बैठ गया !
“पान भी खा आये क्या ?”
दीपका ने आंखे फाडे योगिता की तरफ देखा
“तुम्हे भी खाना था क्या ? वो चाय के बाद मैंने वही से ले लिया था !”
योगिता के हाँ नहीं सुनने के पहले ही दीपक ने कार आगे बढ़ा दी..
योगिता मन मसोस कर रहा गयी.. उसे पान का कोई लालच न था, लेकिन पहले की तरह इसरार कर दीपक ने उसे पान नहीं खिलाया ये बात उसे खल गयी..
दीपक एक बार फिर अपने इअरबड्स लगा कर कहानी सुनने लगा..।
अब जब योगिता को मालूम था कि उसका पति किसे सुन रहा है, वो और भी ज्यादा जली भुनी जा रही थी, लेकिन उसके पास और कोई उपाय भी नहीं था..।
कुछ देर में वो लोग विवाह स्थल पर पहुँच गए !
वहाँ बड़ी रौनक थी, वहाँ पहुँच कर योगिता इधर उधर लोगो की भीड़ को देखती आगे बढ़ने लगी..।
उसके औफिस के लोग आ आकर उससे और दीपक से मिलने लगे।
सबसे मुस्कुरा कर मिलती हुई वो डिंकी और माधव तक भी पहुँच गयी, हालाँकि उसे माधव और डिंकी से हद ज्यादा नाराज़गी थी, लेकिन अभी अभी वो जिस सब से उबरी थी इसके बाद रूबी की बात काटने का दुस्साहस नहीं कर पा रही थी, वर्ना वो डिंकी और माधव के संगीत में कभी नहीं आती..।
वो बस रूबी को दिखाने के लिए ही यहाँ आई थी..
उसने साथ लाया हुआ गुलदस्ता डिंकी को थमा दिया..
“बढ़ाई हो अनुराधा ! हमें तो मालूम ही नहीं चला कब तुम दोनों ने ये खिचड़ी पका ली !”
इतने प्रयासों के बावजूद योगिता व्यंग करने से बाज नहीं आई..
“पकती हुई खिचड़ी जब तक सामने से परोसी न जाए तब तक मालूम कहाँ चलता कि कौन पका रहा ?” दीपक ने भी नहले पे दहला मार दिया..
उसने अपनी जेब से एक छोटी सी डिबिया निकाली और डिंकी को थमा दी..
“ये हमारी तरफ से एक छोटा सा तोहफा !”
योगिता आश्चर्य से आंखे फाडे दीपक को देखने लगी.. उसे पता ही नहीं था कि दीपक कोई तोहफा भी लेकर आया है..
डिंकी ने साथ खड़ी मंजरी के हाथ में तोहफा पकड़ा दिया..
“लेकिन तोहफे की क्या ज़रूरत थी, आपका इतनी दूर से आना ही बहुत है !” माधव ने मुस्कुरा कर कहा..
“अरे ज़रूरत कैसे नहीं होगी, वैसे भी कल शायद मैं न आ पाऊँ.. इसलिए सोचा शादी का तोहफा आज ही दे दूँ !”
दीपक एक के बाद एक बम फ़ोड़ रहा था.. योगिता आश्चर्य से उसे देख रही थी, वो तो कल पहनने के लिए भी कपड़े निकाल आई थी.. उसे लगा था, कम से कम इस लॉन्ग ड्राइव के बहाने उसे दीपक के साथ ज्यादा से ज्यादा रहने और बात करने का मौका मिलेगा, लेकिन कल के लिए तो दीपक ने स्वयं मना कर दिया..
और उसे पहले से कुछ बताया भी नहीं.. पता नहीं ये तोहफा भी कब ले आया..
डिंकी और माधव से मिल कर वो दोनों दूसरी तरफ बढ़ गए.. दीपक को कुछ अपनी पहचान वाले दिखे और वो योगिता को छोड़ उधर बढ़ गया !
योगिता भी अपनी उपस्थिति बताने के लिए रूबी और बाकी लोगो की तरफ बढ़ गयी, लेकिन उसके मन की कुलबुलाहट कम नहीं हुई..
खाना खाते समय वो दीपक के पास चली आई..
“क्या तोहफा दिया है डिंकी को ? मुझे तो बताया तक नहीं.. !”
“हम्म !”
“अरे मैं पूछ रही हूँ कि क्या दिया ?”
दीपक ने अजीब सी नजरों से योगिता की तरफ देखा..
“तुम्हारी इज्जत बनाये रखने के लिए दिन रात प्रयासरत हूँ, और क्या करूँ बताओ ? तुम्हारे दिमाग में तो ख्याल आया नहीं था कि कोई तोहफा ले लिया जाए.. अब अगर मैंने सोचा तो उस पर भी तुम जवाब सवाल कर रही हो !”
योगिता एकदम से इस बाए पर कुछ नहीं कह पायी और चुप रह गयी..
कुछ देर वहाँ रुकने के बाद जब वो लोग निकलने लगे तब रूबी ने योगिता से यूँ ही पूछ लिया..
“कल शादी मे तो आओगे न तुम लोग ?”
“हाँ.. ज़रूर !” योगिता अभी और कुछ कहती कि दीपक बोल पड़ा..
” नहीं, कल मेरा तो आना मुश्किल होगा, अगर इनका आने का मन हुआ तो ये अपनी सुविधानुसार देख लेंगी कैसे आना है..”
दीपक का इतना खरा बोलना योगिता को चुभ गया, लेकिन वो सब के सामने कोई बवाल नहीं खड़ा करना चाहती थी इसलिए चुप लगा गयी..
लेकिन गाडी में बैठते ही वो दीपक पर बिफर पड़ी..
“देख रही हूँ बात बात पर बेइज्जती करने पर तुले हुए हैं आप, और कह रहे कि हमारी इज्जत रखने के लिए प्रयासरत है…।
अरे अगर कल आपको नहीं आना तो न आइये, ये बोलने की क्या ज़रूरत कि ये अपना खुद इंतज़ाम देख लेगी।
एक हसबैंड वाइफ के बीच ऐसा होता है क्या कि एक जाना चाहे तो आ जाये दूसरा न आये वो भी इतना दूर..।”
“और भी बहुत सी बातें है जो एक हस्बैंड वाइफ के बीच नहीं होती, लेकिन हमारे बीच हुई है.. मैंने उनके लिए कुछ कहा?”
“तो कहो न.. क्यों नहीं कहते..।
मैं थक गयी हूँ इस चुप्पी से, मेरा दम घुट रहा, मन कर रहा रोड पर ही उतर जाऊं! चले जाओ तुम मुझे अकेले छोड़ कर, नहीं जाना मुझे तुम्हारे साथ..।”
दीपक ने गाड़ी रोक दी और योगिता की तरफ का दरवाजा खोल दिया।
योगिता आश्चर्य से थमी दीपक को देखती रह गयी….
उसने दरवाजा खोल दिया था, लेकिन योगिता को समझ में आ गया कि अगर वो आज उतर गयी तो दीपक उसे हमेशा के लिए छोड़ जायेगा..।
वो चुपचाप अपनी जगह बैठी रही और दीपक ने दरवाजा वापस बंद कर गाड़ी आगे बढ़ा दी।
उन दोनों को घर पहुँचते रात हो गयी थी, दीपक ने एक बार अपनी बेटी को कॉल किया और उससे बात करने के बाद फ्रेश होने बाथरूम में घुस गया..
उसके वॉशरूम में जाते ही योगिता उसका फोन उठा कर देखने लगी..
उस लेखिका का पेज खोलते ही योगिता की आंखे आश्चर्य से खुली रह गयी..
अगले दिन शहर के प्रसिद्ध दीनदयाल ऑडिटोरियम में वो लेखिका खुद आने वाली थी..
उसका लाइव सेशन था..
वो अपनी कुछ कहानियां वहाँ ओपन माइक में सुनाने वाली थी..
योगिता ने फटाफट दीपक के मोबाइल के मेसेज बॉक्स को चेक किया और उसे जिस बात की संभावना थी उसका सबूत उसके हाथ लग गया।
उस कार्यक्रम की टिकट दीपक ने पहले ही खरीद रखी थी..
तो इसका मतलब कल दीपक उस लेखिका से पहली बार रूबरू होने वाला था.. पहली बार मिलने जा रहा था.. ।
दीपक जितने धीर गंभीर स्वभाव का था, उसका किसी औरत के प्रति आकर्षण कभी भी सिर्फ ऊपरी नहीं हो सकता था..।
अगर वो उस लेखिका को लगातार सुन रहा था, मतलब दीपक के ह्रदय में कहीं गहरे वो समायी हुई थी..।
उससे मिलने जाना, उसे पहली बार देखना, दीपक के लिए एक अद्भुत ही आनंद का विषय हो सकता था..
आखिर वो भी तो एक पराये मर्द पर बुरी तरह से रीझि थी, तो क्या उसका पति किसी परायी नार पर रीझ नहीं सकता?
सोच सोच कर उसका खून जलने लगा..।
तभी बाथरूम के दरवाजे पर खड़क हुई और योगिता ने उसका फोन दूर फेंक दिया..
दीपका टॉवेल से अपने गीले बालों को पोंछता हुआ कुछ गुनगुनाते हुए कमरे में दाखिल हो गया..।
उसने आते ही इधर उधर नजर दौड़ाना शुरू कर दिया। उसे तकिये पर अपना फोन नजर आ गया।
उसने फ़ोने उठाया और गुनगुनाता हुआ बाहर निकल गया..
“तुमसे मिलने की तमन्ना है प्यार का इरादा है, और एक वादा है जानम, जो कभी हम मिले तो ज़माना देखेगा अपना प्यार
ओ मेरे यार.. ।”
क्रमशः
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अब भी शायद खुद को गलत नहीं मान रही है बुरा लग रहा है जिसकी दौलत पर मौज उड़ा रही थी अब उसका एक लेखिका के शो पर जाना भी बुरा लगा और दीपक के पीछे वहां पहुंचेगी लेकिन अपना भूल गई जब हर समय खरी खोटी सुनाना टाइम नहीं देना दीपक और बेटी को
Dipak ko us lekhika se judte dekhkar use jalan aur taklif ho rahi hai kabhi khud ko dekha hai usne ki usne kya kiya hai 😡😡 .jaisa kiya uska fal mil raha hai
Deepak acha badla le raha hai yogita se, Beautiful part
Nice
Waiting for next part ❤️❤️❤️
👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
योगिता की इतनी बड़ी गलती करने पर भी अगर दीपक ने योगिता को नहीं छोड़ा है तो दीपक वैसा नहीं है जैसा योगिया उसके बारे मे सोच रही पर योगिता खुद गलत है तो उसे दीपक भी वैसा लग रहा या फिर दीपक योगिता को सबक सिखाने के लिए ऐसा कर रहा 🤔कुछ भी हो उस लेखिका को मै भी मिलना चाहती हूँ जिसकी तारीफ हमारी लेखिका मतलब आपने इतनी भर भरकर की है कि एक पल के लिए मुझे लगा हमारी डॉक्टरनी को क्या हो गया क्या उनकी तारीफ करने वाले कम है जो अपनी ही तारीफ कर रही 😊।
मै इंतजार कर रही हूँ अगले भाग का 😊🙏🏻।
👌👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏
Very nice part
Beautiful part 🥰🥰♥️🥰🥰