
अतिथि -69
जब जीवन किसी नए मोड पर मुड़ता है, तब आगे दूर दूर तक कुछ भी साफ़ नजर नहीं आता.. नए रास्ते पर आगे बढ़ने की ख़ुशी भी होती है, और अंदर ही अंदर एक भय भी होता है कि जाने आगे सब कैसा होगा..?
लेकिन इस शंका, इस भय के साथ एक उम्मीद की किरण भी साथ चलती है कि ऊपर वाला हमारे साथ है, सब अच्छा ही होगा..।
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नीचे गाडी लग चुकी थी, शादी में ले जाया जाने वाला सामान एक एक कर उस गाड़ी में रखवाया जा रहा था..।
डिंकी के छोटे मामा इस काम में लगे हुए थे !
डिंकी के ताऊ जी अपनी गाडी में बैठे हॉर्न दे रहे थे.. ऊपर घर पर बेहद अफ़रातफ़रीह मची थी। डिंकी अपने कमरे में थी, उसकी दोनों सहेलियां उसका छुटपुट सामान उसके हैण्ड बैग में धरती जा रही थी, कि तभी अपनी रेशमी साड़ी संभाले डिंकी की ताई उसके कमरे में चली आई..
उन्होंने हाथ में एक रेशमी पोटली सी पकड़ रखी थी..
“ला डिंकी तेरे हाथ में ये बांध दूँ !”
“ये क्या है बड़ी मम्मी ?”
“हींग की पोटली है बेटी, हमारे तरफ कहते हैं होने वाली दुल्हन को नजर जल्दी लग जाती है। बस उसी नजर से बचाने के लिए ये बांध दी जाती है..।
और फिर अभी हमें लम्बा रास्ता तय करना है..। रास्ते की हवाएं अलाये बलायें, उनसे भी तुझे बचाना है ना ?”
डिंकी ने अपनी बांह आगे कर दी.. उसकी ताई ने उसके बाजू पर उस रेशमी छोटी सी पोटली को बांध दिया।
अपनी आँख में लगा काजल निकाल कर डिंकी के माथे पर एक किनारे छोटा सा गोल निशान भी बना दिया.
“पार्थ भैया कब पहुंचेंगे बड़ी मम्मी ?”
“वो सीधे वही कानपुर पहुँच जायेगा.. उसकी फ्लाइट आज शाम की है.. हम लोग यहाँ से जब तक पहुंचे, तब तक में आ जायेगा !”
डिंकी की ताई ने उसकी दोनों सहेलियों को फटाफट डिंकी का सामान नीचे ले चलने को कहा और कमरे से बाहर चली गयी..
“तेरी ताई बड़ी स्मार्ट है डिंकी, और ये पार्थ भैया कौन हैं ?”
“इन्ही के बेटे हैं.. मुझसे सिर्फ चार साल बड़े हैं, और अभी यूपीएससी क्वालिफाय कर लिया उन्होंने।
अभी मसूरी ट्रेनिंग में हैं..।
बडी मुश्किल से दो दिन की छुट्टी लेकर आ पा रहे हैं !”
“अरे वाह यार.. तेरी ताई जी बड़ी लकी हैं, इतना होनहार बेटा मिला है उन्हें !”
” लकी तो हैं, लेकिन ताई जी ने मेहनत भी बहुत की है। बड़े पापा का तो बिजनेस है, वह सारा टाइम उसी में व्यस्त रहते हैं। बड़ी मम्मी ने ही पार्थ भैया को पढ़ाया है। भैया का तो बचपन में मन भी नहीं लगता था पढ़ने में।
हमेशा पढ़ाई से भागते थे। लेकिन एक समय आया जब उनमें अपने आप समझदारी विकसित हो गई। जब उन्होंने 11वीं क्लास में आर्ट्स लिया था, तब हमारे पूरे परिवार ने यहां तक कि मेरे पापा ने भी इस बात का विरोध किया था, और बड़े पापा से कहा कि भैया को मैथ्स दिलवाइए। मैथ्स लेकर कुछ ढंग का कर लेगा, पर बड़े पापा ने कहा उसे जो करना है करने दो।
आर्ट्स लेने के बाद पार्थ भैया का पढ़ाई को लेकर नज़रिया ही बदल गया। पहले वह जितना पढ़ाई से भागते थे, उतना ही किताबों में घुसे रहने लगे। पता नहीं अचानक कैसे उन पर यूपीएससी का भूत सवार हो गया। सेकंड ईयर में थे, तब से पढ़ाई शुरू कर दी। फाइनल इयर कंप्लीट होने के बाद उन्होंने अपना पहला एग्जाम दिया, और पहली बार में प्रीलिम्स क्लियर किया।
उनका सिलेक्शन फर्स्ट अटेम्प्ट में हुआ है। और यह बहुत बड़ी बात है।
चलो अब हम बातों में लगे रहेंगे तो बड़ी मम्मी आकर डांटेंगी, फटाफट निकलो..।
सुषमा और गरिमा ने अपने अपने बैग उठाये और तीनो लड़कियाँ हंसती खेलती बाहर निकल रही थी कि चिंटू चला आया..
“ए डिंकी.. रुको !”
उसने सिर्फ डिंकी को रुकने कहा, लेकिन उसकी बाकी दोनों सहेलियां भी रुक गई ।
“नहीं आप दोनों जाइये। हमें सिर्फ डिंकी से बात करनी है।”
डिंकी भी अपने प्यारे से छुटके भाई को पकड़ कर कमरे के अंदर चली आई। पलंग पर बैठकर उसने चिंटू को अपने सामने खड़ा कर लिया।
“हां,अब बोल क्या काम है तुझे?”
“तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लेकर आए हैं।”
” अच्छा तू मेरे लिए गिफ्ट लेकर आया है? लेकिन गिफ्ट क्यों?”
” तुम्हारी शादी है ना, सब कोई तुम्हें गिफ्ट दे रहे हैं, तो मैंने सोचा मैं भी दे दूं।”
“तो अपने जीजू को देता ना? मुझे देने की क्या जरूरत?”
” नहीं गिफ्ट सिर्फ तुम्हारे लिए है।”
” चल दिखा, क्या है ?”
चिंटू ने अपने हाथों को सामने किया और डिंकी के हाथ में एक गिफ्ट पकड़ा दिया..
“क्या है ये?”
“खुद देख लो ।”..
शरमा कर चिंटू चुपचाप खड़ा रहा, डिंकी ने उस पैकेट को फटाफट फाड़ कर जल्दी से खोल लिया..।
उसमे एक तस्वीर थी।
तस्वीर पिछली दिवाली की थी, जब घर के लोग सज संवर के पूजा के लिए आ गए थे, उसी वक्त उनकी ताई का बेटा यानि उनका बड़ा भाई पार्थ मिठाई और कुछ पटाखे लिए घर आ गया था।
उसी ने चारों की एक साथ फोटो निकालने की ज़िद की..।
चिंटू तब भी मटरगश्ती में लगा था, सुबह से जो कपड़े पहने घूम रहा था, वही अब भी पहन रखे थे..।
डिंकी ने उसके सर पर टपली बजायी और पार्थ से दो मिनट का वक्त मांग कर चिंटू का कान पकड़ कर खींचते हुए कमरे में ले गयी थी।
उसका जबरन मुहं धुलवा कर उसने उसे एक सुंदर सा गुलाबी कुरता पहना दिया था..।
ये कुरता भी वो ही चिंटू के लिए लायी थी..।
बालो को तमीज से सेट कर के वो उसे अपने साथ बाहर ले आयी।
मुहं बनाता बिगाड़ता चिंटू उसे चिढ़ाते हुए उसके बगल में ही बैठ गया था..।
ऊपर सोफे पर उनके माता पिता बैठे थे और उनके ठीक सामने ज़मीन पर डिंकी और चिंटू..
जैसे ही पार्थ ने रेडी कहा और सब मुस्कुराये उसी समय चिंटू ने डिंकी के बाल पकड़ कर खीँच दिए और झुंझलाई सी डिंकी का फोटो बिगड़ गया था।
लेकिन पार्थ चिंटू से बहुत प्यार करता था। बस इसीलिए उसने उस फोटो को डिलीट नहीं किया था।
डिंकी बोल बोल कर हार गई, लेकिन पार्थ ने इस शर्त पर कि वह इस फोटो को फैमिली व्हाट्सएप्प ग्रुप में नहीं भेजेगा ,लेकिन डिलीट भी नहीं करेगा, यह कह कर मना लिया था।
दिवाली हंसते खेलते गुजर गई थी। आज उस तस्वीर को फ्रेम में सजा हुआ अपने हाथों में देखकर डिंकी को चिंटू पर नाराजगी नहीं बल्कि प्यार आने लगा था।
आज वही फोटो कितनी प्यारी नजर आ रही थी। मम्मी पापा दोनों, उन दोनों के कंधों पर हाथ रख मुस्कुरा रहे थे। चिंटू पूरी बत्तीसी दिखाते हुए हंस रहा था। और वह झुंझलाई हुई सी अपने बालों को सही कर रही थी।
लेकिन तस्वीर बड़ी मनमोहक थी। डिंकी की आंखों से दो बूंद आंसू निकल कर उस तस्वीर पर गिर गए। उसने चिंटू को इशारे से बुलाया। चिंटू ने मना कर दिया। डिंकी ने खींच कर उसे अपने पास बुलाया और अपने सीने से लगा लिया..।
“तेरी बहुत याद आएगी छुटके.. मम्मी पापा का ध्यान रखना और मस्ती मत करना..।”
“हम्म.. ।”
एक छोटा सा हम्म चिंटू की रुलाई में कहीं दब कर रह गया…
क्रमशः

Yahi toh yaadein hoti hai jo sasural jane pe bahut yaad aati hai 🥰🥰🥰🥰🥰
बहुत अच्छा भाग 😊
अब तो बहुत मज़ा आएगा डिंकी और माधव की शादी की रस्मो मे हम भी शामिल होंगे, कहने को ये एक कहानी है पर जब पढ़ती हूँ तो हर एक चरित्र मे डूब जाती हूँ। आज हींग की पोटली वाला वो ताई जी का प्यार 😊👌🏻। कभी कभी ऐसा लगता है आपको अपनी संस्कृति से बहुत लगाव है तभी तो हर रस्म बहुत बारीकी से पता है और हम तक पहुंचाते हो। पार्थ से मिलते है अगले भाग मे 😊।
खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻
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Very nyc part 👌
Nice part
Awesome 👌👌👌👌👌👌👌👌
Beautiful part
😊😊😊🤩🤩🤩🤩🤩
So beautiful part 🥰🥰♥️🥰 bansuri ka shadi time yad aa gya
वाह
Emotional part