मायानगरी -20

मायानगरी -20

  पार्टी प्रमुख के द्वारा टिकट आबंटन पहले ही हो चुका था, और उसके बाद एक मंत्री की मृत्यु हो चुकी थी। जिसके बाद उसके बेटे को टिकट देने की घोषणा की जाने वाली थी, लेकिन उसके पहले ही उसके बेटे को स्वयं अपने पिता की हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने के शक के आधार पर पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया।
और इस सबसे चरित्र राणा के चरित्र पर प्रश्नवाचक चिन्ह लग गया था?
तरह-तरह की बातें होने लगी थी।

पार्टी सुप्रीमो ने सबरवाल जी को तुरंत ही मिलने के लिए बुला लिया था, और उन्हें रातों रात दिल्ली के लिए रवाना होना पड़ा था।

वहां पर उनकी पार्टी सुप्रीमो से जो भी बातचीत हुई, उसके बाद उन्हें वापस लौटकर अपने निर्णय पर  पुनर्विचार करना था, वह वापस चले आए थे… ।

उनकी पार्टी के कार्यालय में सुबह से ही लोगों की भीड़ इकट्ठा होनी शुरू हो गई थी। चुनाव के लिए बहुत कम समय बच गया था, और सभी अपनी-अपनी तैयारी में जुट गए थे। केवल एक सीट ऐसी थी जिसके लिए अब तक कोई नाम फाइनल नहीं हो पाया था..।

ढेर सारे कार्यकर्ताओं और चुने हुए उम्मीदवारों के बीच सबरवाल जी मंच पर चले आए। उनके साथ ही दिल्ली से आए हुए पार्टी प्रमुख भी शामिल थे। पार्टी प्रमुख ने सबके सामने अपने हाथ में रखी पर्ची खोली और सब की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए उन्होंने भुवन सबरवाल का नाम अगली टिकट के लिए फाइनल कर दिया। कार्यकर्ताओं में उल्लास की लहर दौड़ गई।

जोर से तालियां बजाते हुए सभी ने उनके निर्णय का समर्थन किया। पार्टी प्रमुख ने अपने दोनों हाथ ऊंचे कर उन तालियों का समर्थन किया और तेज कदमों से सीढ़ियां उतरकर वहां से बाहर चले गये।

कार्यकर्ताओं ने भुवन को अपने कंधों पर बैठा लिया। बड़े जोश के साथ उस पूरे पार्टी कार्यालय परिसर का चक्कर लगाया गया, आपस में मिठाइयां बांटी गई, एक दूसरे को गले लगाकर सब ने बधाई दी और इस तरह से भुवन को आखिरकार टिकट मिला गया।
लेकिन यह सब इतना भी आसान नहीं था। अभी तो भुवन को सिर्फ टिकट मिली थी, इस टिकट पर उसका जीतना अब भी बाकी था…।

भुवन पूरी तरह से चुनाव की तैयारियों में डूब गया था। इस बीच लीना ने अपने काम के लिए दो से तीन मर्तबा भुवन को फोन लगाया। लेकिन भुवन इस कदर व्यस्त था कि वह लीना से नहीं मिल पाया। दूसरी तरफ लीना अपने काम में पूरी शिद्दत के साथ लगी हुई थी। उसे पता करना था कि आखिर सज्जन राणा के साथ क्या हुआ? और उसके साथ जिसने भी यह किया, वह कौन था?

वह चरित्र राणा, सुमित्र राणा और अमर कुमार से जुड़ी एक-एक खबर पर गौर करने लगी। उसने ढेर सारी तफ्तीश की और उसके पास जो भी सबूत इकट्ठे हुए उससे यह साबित हो गया कि सज्जन राणा की मौत के पीछे ना उसके दोनों बेटों का हाथ था, और ना ही अमर कुमार का।

लेकिन इस सब में उनके परिवार के नाम को बहुत भारी बट्टा लगा था। हालांकि लीना एक पुलिस ऑफिसर थी, और किसी भी केस में तफ्तीश को पूरा करना उसकी जिम्मेदारी थी, इसलिए उस पर उनके परिवार ने किसी तरह का कोई इल्जाम नहीं लगाया। लेकिन लीना अब भी इस गुत्थी को सुलझाने में लगी हुई थी।

चरित्र राणा अपने भाई के साथ अपने घर वापस आ चुका था, लेकिन अब उसने जिद पकड़ ली थी कि, उसे चुनाव लड़ना ही है।

उसने सबरवाल जी की विरोधी पार्टी को ज्वाइन कर लिया।

वैसे भी सज्जन राणा की मौत के बाद उनके नाम पर ढेर सारे सहानुभूतिपूर्वक वोट मिलने ही थे, इसलिए विरोधी पार्टी ने चरित्र राणा को हाथों हाथ लिया।

अमर कुमार  भी परेशान था, क्योंकि वह भी इस बात को समझता था कि चरित्र और सुमित्र, सज्जन राणा की मौत के जिम्मेदार नहीं थे। वह खुद दिव्या से मिलकर यही जानने की कोशिश कर रहा था कि आखिर वह कौन है जो इन सब के पीछे का कारण है…।

जिस ड्राइवर ने उस दिन सज्जन राणा की गाड़ी चलाई थी वह अचानक ही गायब हो गया था…।
लीना उसे पकड़ना चाहती थी, लेकिन दो बार उसका पता ठिकाना मिलने पर भी लीना उसे नहीं पकड़ पाई थी..।

इस बात को महीनो बीत गए..
वो चुनाव जिसके लिए इतना परपंच रचा गया था, वो हो भी गया और नतीजों की घड़ी आ गयी !

थकी हारी सी लीना पूरे दिन ऑफिस में काम निपटाने के बाद शाम को अपने घर पहुंच गई।

फ्लैट का दरवाजा खोलते समय उसका ध्यान दरवाजे के नीचे पड़े किसी लिफाफे पर गया। उसने लिफाफा उठा लिया। वह दरवाजा खोलकर अंदर चली आई। बोतल में से पानी पीने के बाद वह सोफे पर थक कर गिर पड़ी।

कुछ देर के लिए अपने आप को सहेजने के बाद वह उठी और अपने लिए चाय चढ़ाने चली गई। हाथ मुंह धोकर चाय का प्याला लिए वह वापस बाहर वाले कमरे में चली आई। लिफाफा अब भी टेबल पर पड़ा हुआ था। उसने वह लिफाफा उठा लिया। लिफाफा खोलने पर अंदर उसके नाम की एक पर्ची थी। उसने पर्ची खोली उस पर आड़े तेढे अक्षरों में कुछ चार-पांच पंक्तियां लिखी हुई थी..

“मंत्री जी की गाड़ी चलाने के लिए हमें ड्राइवर ढूंढ कर लाने कहा गया था, हम ने अपने एक परिचित लड़के को जो स्कूल की गाड़ी चलाता था, यह काम सौंप दिया था। वह लड़का कुछ भी नहीं जानता, उसे बस थोड़े पैसों के लिए यह काम सौंपा गया था। अगर आप सच्चाई जानना चाहती हैं तो इस नंबर पर फोन कीजिएगा।”
इतने सब के बाद एक नंबर लिखा हुआ था।

लीना सोच में पड़ गई। उसे ज्ञात था कि मंत्री जी की गाड़ी चलाने वाला स्कूल वैन का ड्राइवर था, जो सुमित्र के बच्चों को लाया ले जाया करता था। और उसे दो-चार दिन के लिए सुमित्र ने ही हायर किया था। उसकी पूछताछ में भी उसने कोई भी ऐसी बात नहीं बताई थी जो मंत्री जी के एक्सीडेंट से जुड़ी हो, और फिर लीना ने उसे भेज दिया था।
और उसके बाद से वह गायब हो गया था।

तो फिर इन सब के पीछे कौन था?

लीना ने तुरंत अपना फोन उठाया और उस नंबर को डायल कर दिया। दूसरी तरफ से पहली बार में फोन नहीं उठाया गया। लीना ने दोबारा वह नंबर डायल किया और इस बार एक ही रिंग में फोन उठा लिया गया..

“कौन हो तुम और सज्जन राणा की मौत के बारे में क्या जानते हो? मुझे सब कुछ जानना है!”

“मैडम आप सब कुछ जान भी गई, तो भी आपका कोई फायदा नहीं होना, क्योंकि वह आदमी ही इसी लायक था.!”

” यह तय करने वाले तुम कौन होते हो? तुम मुझे सब कुछ सच-सच बता सकते हो?
बताओ तुमसे कहां मिलने आना है?”

” मैडम आपको कहीं मिलने आने की जरूरत नहीं है। आपकी सोसाइटी में एक गार्डन है, छोटे बच्चों के खेलने का।
उस गार्डन में एक लाल रंग की फिसल पट्टी है। उसके  बगल में एक बेंच लगी है। आप वहां पहुंच जाइए। वहां आपको आपके सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे।”

लीना ने फोन काटा नहीं और तुरंत घर से बाहर निकल आई।

“लेकिन तुम बोल कौन रहे हो ?”

“मैडम आप जो जानना चाहती हैं, उसकी सच्चाई हम आपको बता दे रहे हैं। इससे ज्यादा जानने की आपको जरूरत नहीं।”

” तुम जो भी बता रहे हो, क्या उसके सबूत भी साथ होंगे.. ?”

अबकी बार लीना की बात हवा में ही गूंज कर रह गयी !
सामने वाले ने फ़ोन रख दिया था !

वो फ़ोन को तेजी से अपनी जेब में डाल कर सीढ़ियां उतरती चली गयी..
वो प्ले ग्राउंड की तरफ भागती हुई बढ़ चली !

   वहाँ एक तरफ झूले लगे हुए थे! वह उसी तरफ बढ़ गई! वहां दूर से ही उसे वह बेंच नजर आ गई। वह उस तक पहुंची और ठिठक कर खड़ी हो गई। उसके सामने एक डायरी पड़ी हुई थी। उसने उस डायरी को उठा लिया…।

उस डायरी को खोलने पर वह अंदर से खोखली थी। उस डायरी को काटकर अंदर गहरा खाली स्थान बनाया गया था। जहां एक पेन ड्राइव रखा हुआ था।

इधर-उधर देखकर लीना ने उस डायरी को बंद किया और वापस अपने फ्लैट की तरफ बढ़ गई। फ्लैट में पहुंचकर उसने तुरंत पेन ड्राइव को अपने लैपटॉप से लगाया और ध्यान से देखने लगी। कुछ एक धुंधली तस्वीरों के साथ ही कुछ वॉइस रिकॉर्डिंग थी। उन आवाजों को वह पहचानने की कोशिश करने लगी…

“देखो यह सब बिल्कुल ऐसा नजर आना चाहिए जैसे कि सब कुछ बहुत स्वाभाविक है..।
बिलकुल ऐसा दिखे जैसे महज एक एक्सीडेंट है ! समझ रहे हो न हमारी बात !
इससे ज्यादा हम कुछ नहीं कहेंगे..।”

सिर्फ यही पंक्तियां थीं, जिन्हें वह बार-बार सुन रही थी। उसे यह आवाज बहुत पहचानी सी लग रही थी। जैसे इस आवाज को उसने काफी करीब से सुना है। लेकिन ज्यादा बार नहीं सुन पाने के कारण वह इस आवाज को पहचान नहीं पा रही थी।

कुछ भी साफ और स्पष्ट नहीं था। यहां तक की यह सारी साजिश किसी को जान से मार देने की चल रही है, यह भी बातचीत स्पष्ट नहीं थी ।फिर भी लीना जानती थी कि केस कौन सा है, इसलिए उसने अंदाजा लगा लिया था।

लेकिन अब भी यह आवाज उसके दिल दिमाग को परेशान किये दे रही थी। तस्वीर भी बहुत धुंधली थी। इसलिए उसे साफ समझ में नहीं आ रहा था।

तस्वीरों में सफेद कुर्ते पायजामे में एक मध्यम आयु वर्ग का प्रौढ़ आदमी पीछे से नजर आ रहा था। वह बार-बार अपने दिमाग पर जोर दे रही थी, लेकिन ना वह तस्वीरों को पहचान पा रही थी, और ना ही इस आवाज को।

लेकिन यह गंभीर सी आवाज, यह बोलने का तरीका, यह सब उसका सुना हुआ था, और रह रहकर यह उसके दिमाग में उथल-पुथल मचा रहा था।
जब से वह इस मर्डर केस को सॉल्व करने के लिए काम कर रही थी, उसने रात दिन एक कर दिया था। अपने घर परिवार से भी मिलने नहीं जा पाई थी और देखते ही देखते महीने बीत चुके थे। और आज जाकर उसके सामने यह राज खुला था कि सज्जन राणा की मौत के पीछे उसका परिवार नहीं बल्कि कोई और है ।
लेकिन यह कोई और कौन था ?सोचते सोचते वह रसोई में वापस अपने लिए चाय बनाने चली गई। चाय का कप पकड़े वह खिड़की पर खड़ी रही।

दूर-दूर तक उसकी निगाहें और उसके दिमाग के घोड़े दौड़ रहे थे, लेकिन फिर भी उसे कुछ याद नहीं आ रहा था।

उसका कुछ खाने पीने का मन नहीं हुआ। वह ऐसे ही पलंग पर लेट गई। अपने चेहरे पर एक हाथ रखे वह छत पर चलते पंखे को निहार रही थी। शायद कोई क्लू मिल जाए। तस्वीर में दिखाई देता वह आदमी कौन है? इतना ऊंचा पूरा आदमी उसने कहां देखा है ? उस तस्वीर में जो दूसरा लड़का दिखाई दे रहा था, उसका भी चेहरा बहुत स्पष्ट नही था। लेकिन उसे भी लीना ने कहीं तो देखा था।

इसके अलावा वह दोनों जिस बगीचे में खड़े थे, उसे बगीचे में मौजूद वह झूला भी उसने कहीं देखा था।

अचानक उसके दिमाग की बत्ती जली और वह उठकर सीधे बाहर वाले कमरे में चली आई ।
उसने उस डायरी से वह तस्वीर निकाली और वापस बड़े ध्यान से देखने लगी। उस झूले के ठीक पीछे एक बहुत कलात्मक सा चंपा का पेड़ था। जिसमें सफेद सफेद फूल लगे थे।

और तुरंत उसे याद आ गयी वह शाम, जिस दिन वह भुवन को अपने साथ बाहर पूछताछ के लिए ले जाने लेने आई थी। वह दोनों इस चंपा के पेड़ के पास से होकर गुजरे थे, और भुवन ने लपक कर एक फूल तोड़ लिया था।

हां यह पेड़ वही था। ठीक इसके सामने यह झूला था। इस झूले के पास से गुजरते हुए उसने मुस्कुरा कर भुवन से पूछा भी था।

” कभी इस झूले पर बैठने का अवकाश मिलता है?”

और भुवन ने अपने मनोहारी अंदाज में कंधे उचका दिए थे, और वह मुस्कुरा कर आगे बढ़ गई थी।

लीना उस फोटो को ध्यान से देखने लगी। उसके चेहरे पर चिंताजनक भाव चले आए। उसने तुरंत अपनी गाड़ी की चाबी और सर्विस रिवाल्वर निकाली और फ्लैट पर ताला डालकर बाहर निकल गयी…

क्रमशः

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Jyoti rana
Jyoti rana
3 months ago

Please koi btaye ki Mayanagari 2 ka Aparna ma’am ne end kar diya ha ya usei bnd kar diya ha ya fir pending ha ki kabhi na kabhi to poori karengi..sch mei ye bahut na insafi ha

Jyoti rana
Jyoti rana
3 months ago

Dear Aparna please btayien ki agar apne jeevansathi3 ke parts upload kar diye to Mayanagri kyu nahin..apki likhi stories ka badi besbri se intzar rehta ha…hme inki adat dalva ke apne ise kyu chhod diya…please koi to response dijiye..4 months ho rhe hn ab to

Jyoti rana
Jyoti rana
4 months ago

One month ke baad maine bdi umeed se ankahe kisse ko open kiya ki ab to shyad 4 or 5 parts to mayanagari ke upload ho chuke honge lekin again very very disappointing…aap ho lahan aparna.. kya problem ho gyi ha ki hmse itni doori bna li ha

Jyoti rana
Jyoti rana
5 months ago

Dear Aparana bahut muss kar rhe hn apko apki likhi kahaniyo ke sath..smjh nhi a rha ha ki ap achanak se kyu khamosh go gyin hn..2 mahine se apki kisi bhi story ka kou bhi part upload nhi hua ha…hme tension ho gyi ha ki ap aisa kyu kar rhe hn…koi problem mei hn ap apke circumstances favorable nhi hn ki ap parts upload kar skein..but kucch to pta hme bhi hona chahiye na..itna haq to hmara bnta ha na ap par ki ap hme apni well being ki information dein..please btayein ki kya vjah ha..jo ap hmse itna dooor ho gye ho

Jagriti
Jagriti
5 months ago

मतलब अब भुवन को कोई फसा रहा है लेकिन क्यों

Jyoti rana
Jyoti rana
5 months ago

Kya apne mayanagari bnd kar diya ha…aisa ho nhi skta….pkka ap kahin bda jyda bsy hn vrna 1 month tak koi bhi mayanagri ka agla part nhi aya ha… vaise lgta to yhi ha ki Mr.sabharwal hi iss murder mei involve hn mgr vo bechare bhuvan ko fnsa kar verdant ka rasta bnane ki teyari kar rh hn..please maam bhuvan k sth aosa gnda khel matt khelein…uski imandari aur agyakari Hine ka usei aisa sila na dein…vrna story ka mza chla jayega..vaise hi ek month se oopr ho gya ha….to mza to kirkira pehle se hi ho rha ha

Nisha
Nisha
6 months ago

To kya bhuwan aur uske bade papa ne ye…😥😥😥😥

Manu Verma
Manu Verma
6 months ago

तो क्या सभरवाल परिवार का कोई सदस्य इस मर्डर मे इन्वॉल्व है 🤔हाय डॉक्टरनी… कितना घूमती तो आप यार 😇आप एक बहुत खतरनाक लेखिका हो 😲पर मज़ा ही आ जाता पढ़कर 😘😘।
लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻

Jyoti
Jyoti
6 months ago

Nyc part 👌

Gouri sarwa
Gouri sarwa
6 months ago

😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳 bhuwan…… Baapre pata nahi kya hoga

Aap part thik se deti hi nahi hai, kisi bhi kahani ka… Or jb deti h to bahot gap hota h agar 2 kahaniyan aage piche chale to bhi thik h, lekin aap h ki kahani ki lay bigad deti hai