जीवनसाथी -3 भाग -153

जीवनसाथी -3 भाग -153

  बांसुरी के सवाल पर वासुकी स्तब्ध बैठा कभी कली कभी सारिका को देखता रह गया..!

वासुकी ने कभी सारिका से ऊंची आवाज में बात नहीं की थी, बावजूद सारिका के मन में वासुकी के लिए जबरदस्त आदर के साथ ही एक डर की भावना भी थी। वासुकी ने जो कह दिया वह उसके लिए पत्थर की लकीर थी, और वह जानती थी कि वासुकी कभी नहीं चाहता की कली इंडिया जाए।
  वासुकी कभी नहीं चाहता था कि राज परिवार के साथ कली का कभी भी मिलना जुलना हो, और जिस बात से वह कली को इतने सालों तक बचाता आया था, आज वही बात सामने खड़ी थी। सारिका का बांसुरी के साथ इंडिया जाने का मन तो था, लेकिन वह यह भी जानती थी कि वासुकी को इस बात से कितनी तकलीफ होगी।

इसलिए बात संभालने के उद्देश्य से वही बीच में बोल पड़ी।

” नहीं रानी साहिबा, हम और कली आपके साथ नहीं जा पाएंगे। फिर यहां इस घर को कौन संभालेगा ? और फिर कली के भी तो इम्तिहान आने वाले हैं।”

बांसुरी ने सारिका की तरफ देखा और फिर कली की तरफ देखकर अपना सवाल पूछ लिया।

” क्या तुम्हारा इम्तहान है कली ?”

कली अचानक इस बात का कोई जवाब नहीं दे पाई। उसके मुंह से सच निकल गया।

” नहीं अभी तो एक सेमेस्टर का एग्जाम दे चुकी हूं। अभी इम्तिहान में वक्त है।”

बांसुरी ने तफसील से सारिका की तरफ देखा।

” सिर्फ पंद्रह दिन की बात है। मैं कौन सा तुम दोनों को हमेशा के लिए अपने साथ ले जा रही हूं। पंद्रह दिन बाद मैं खुद तुम दोनों को छोड़ने आ जाऊंगी, और जानती हूं इस बात पर मिस्टर वासुकी को कोई आपत्ति नहीं होगी।”

बांसुरी वापस वासुकी की तरफ घूम गई।

” मिस्टर वासुकी, मैं भी एक बेटे की मां हूं। मैं भी समझती हूं कि हम माता-पिता अपने बच्चों के लिए कितने पजेसिव होते हैं। मेरा भी एक ही बेटा है, और मेरी जान बसती है उसमें। सच कहूं तो वहां रहते हुए भी जब वह शाम को देर से घर लौटता था, तब मेरे दिल की धड़कनें बढ़ने लगती थी। मेरा बस चलता तो मैं कभी उसे अपनी आंखों के सामने से ओझल ना होने दूं। लेकिन साहब ने भी मुझे समझाया कि बच्चों को ऐसे अपने पल्लू में बांधकर नहीं रखा जा सकता। अगर हम उनके पंखों को विस्तार नहीं देंगे, उनकी उड़ानों को सीमाओं में तय कर देंगे, तो वह कैसे उस असीमित आकाश को देख पाएंगे, समझ पाएंगे, और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ पाएंगे?
बताइए भला?

        मैं जानती हूं, एक बेटी के लिए एक पिता का प्यार क्या होता है? क्योंकि मैं भी एक बेटी हूं, और मेरे पिता आज भी रोज मुझसे ऐसे हाल-चाल पूछते हैं, जैसे मैं अब भी उनकी छोटी सी बच्ची हूं। यकीन मानिए हमारे महल में आपकी बेटी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। मैं उसे अपनी बेटी बना कर लेकर जा रही हूं। आशा करती हूं आप मेरी बात समझेंगे, लेकिन मैं किसी भी तरह का कोई दबाव आप पर नहीं डालना चाहती।

    अगर आपका मन राजी नहीं है, तो मैं कली को नहीं लेकर जाउंगी।”

इतना कहकर बांसुरी अपनी जगह से उठ गयी..

उसने वापस सभी को नमस्कार किया और बाहर जाने के लिए मुड़ गई।

कली का मन जाने कैसा तो हो गया। उसे लगा भाग कर बांसुरी को रोक ले। वासुकी की जबान वैसे भी बांसुरी के सामने पत्थर हो जाया करती थी, जम जाती थी। उससे कुछ कहा ही नहीं जा रहा था।

सारिका को भी बांसुरी का यूं चले जाना अच्छा नहीं लग रहा था। दर्श अपनी जगह पर खड़ा हो गया।

“रानी साहब जरा रुके तो, आप ऐसे कैसे चली जाएंगी। चलिए हम आपको छोड़ने चलते हैं।”

” नहीं आपको कष्ट उठाने की जरूरत नहीं, मैं अपने ड्राइवर के साथ आई हूं.. ।”

बांसुरी ने मुस्कुरा कर दर्श की बात का जवाब दिया और वापस मुङने को थी, कि वासुकी की आवाज वहां गूंज गई..

“रुकिए मैडम !”

वासुकी की आवाज़ इतनी सर्द थी कि चौंक कर बांसुरी पलट गयी..

“कली और सारिका को अपना सामान तो रख लेने दीजिये !”

वासुकी के इतना कहते ही कली ख़ुशी से वासुकी के गले जा लगी.. सारिका ने भी छिप कर अपने आंसू पोंछ लिए..

“जाओ तुम दोनों फटाफट अपनी तैयारी कर लो !”

वासुकी के आदेश पर सारिका एक दो हेल्पर्स को साथ लेकर अपनी और कली की पैकिंग करने चली गयी..

बांसुरी ने गार्डन घूमने की इच्छा जताई और वासुकी को बांसुरी को साथ लेकर अपनी पुष्पवाटिका में जाना पड़ा..

लंदन जैसी जगह में भी वासुकी ने इतना शानदार बगीचा बना रखा था कि देखने वालों की आंखे चुंधिया जाएँ.. ।

बारहमासी उगने वाले हथेली बराबर गुलाब, अजेलिया मेपल की कतारों के बीच कहीं कहीं सफ़ेद और बैंगनी रंगो के आर्किड मुस्कुरा रहे थे..।

एक पूरी कतार में बोगेनविलिया लगा था, जो सिलसिलेवार अलग अलग रंगो के मिश्रण में ऐसे लग रहा था जैसे अलग अलग यूनिफार्म में सजे बच्चों कि पंकितयाँ हों… ।

करडामाइन, फिलीपेंडुला, जेरेनियम, लिली, रोडगरसिया हवा में इधर से उधर झूमते जैसे आने वाले अतिथियों का स्वागत कर रहे थे..
बांसुरी को वो उद्यान बड़ा प्यारा लग रहा था !

वहाँ घूमते हुए अचानक उसकी नजर कोठी के ऊपरी तरफ बनी खुली बालकनी पर चली गयी..
लम्बी चौड़ी बालकनी में भी एक तरफ ढेरो फूलदार पौधे लगे थे..।
दूसरी तरफ शानदार गजिबो बना हुआ था..।
जहाँ आरामदायक सोफे लगे हुए थे..
लेकिन इस सारी सुघड़ सरंचना में एक तरफ एक पोल से लटका हुआ पुराना सा विंड चायम बिलकुल मखमल में लगे टाट के पैबंद सा लग रहा था..

एकदम पुराना सा दिखता वो विंडचाइम अपना असली रंगरूप जाने कब से खो चुका था..
बांसुरी कुछ देर टकटकी लगये उसे देखती रही..
वासुकी ने बांसुरी को उस तरफ देखते पाया और फिर अपना गला साफ़ कर उसके बारे में बताने लगा..

“ये मेरी पत्नी ने मुझे शादी के पहले दिया था, तबसे आज तक ये मेरे साथ ही है..
उस जगह पर इसलिए  लगाया है कि मैं सुबह और शाम वहाँ कुछ देर के लिए ज़रूर बैठता हूँ..
यूँ लगता है उसके साथ बैठा हूँ !”

बांसुरी का दिल भर आया..
उसे अपना वो समय याद आ गया जब वो और राजा साहब कुछ समय के लिए अलग हुए थे..
वह जुदाई तो फिर भी कुछ समय की थी, लेकिन फिर भी कितनी प्राणांतक थी। उस समय को याद कर अब भी बांसुरी के रोंगटे खड़े हो जाते  कि कैसे उसने अपने राजा साहब के बिना वह साल निकाले थे..।

उनकी जुदाई तो फिर भी अस्थाई थी, उसे पता था कि एक न एक दिन राजा साहब उसे मना कर अपने साथ ले जाएंगे  लेकिन वासुकी के जीवन में यह जो कमी है, यह कभी नहीं भर सकती, और इसका कोई उपाय भी नहीं।

      भारी कदमों से कली को विदा करने के लिए वासुकी बांसुरी के साथ उसकी गाड़ी की तरफ बढ़ गया.. ।

कली खुश तो थी, लेकिन अपने पिता को छोड़ कर जाने में उसे भी तकलीफ हो रही थी..।

अपने मन पर कितना भी काबू कर ले उसे रोना आ रहा था। यूँ लग रहा था जैसे वो विदा होकर हमेशा हमेशा के लिए चली जा रही है..।

उसने भरी भरी आँखों से अपने डैडा कि तरफ देखा, वासुकी जानबूझ कर जैसे उससे नजर नहीं मिला रहा था..
वो खुद अपने आंसू ऐसे सबके सामने बहने नहीं देना चाहता था..।

कली गाड़ी में बैठने से पहले वासुकी के गले से लग गयी..

“मैं जल्दी वापस आ जाउंगी डैडा !”

“हम्म !” उसके बाल सहला कर वासुकी ने कहा और वो धीमे से अलग होकर गाड़ी में बैठ गयी…

बांसुरी के बैठते ही गाड़ी वहाँ से बाहर निकल गयी..
अपने इतने बड़े महल के गेट पर वासुकी और दर्श अकेले खड़े रह गए..

वासुकी धीर गंभीर कदमो से वापस महल की तरफ मुड़ गया…

“दर्श !”  उसने बस इतना ही कहा और..

“समझ गया अनिर !” दर्श ने जवाब दिया और तेज़ी से आगे बढ़ गया..

कुछ देर में बांसुरी की गाड़ी शौर्य के घर के पोर्टिको में खड़ी थी..
बांसुरी ने वहाँ पहुँचने के पहले ही घर पर अपने राजा साहब को बता दिया था कि वो कली और सारिका को साथ लेकर आ रही है, लेकिन शौर्य बस से उसकी बात नहीं हो पायी थी..।

***

विक्रम और शौर्य की सारी तैयारी हो चली थी, विक्रम अब भी किसी काम में व्यस्त था और शौर्य भदौरिया के बारे में जानकारी इकट्ठी कर रहा था कि तभी बाहर अचानक से आवाज़े आनी शुरू हो गयी..।

“लगता है माँ आ गयीं ? शौर्य ने विक्रम से कहा और विक्रम ने उसे घूर कर देखा..

“अकेले में माँ कहने की ज़रूरत नहीं, रानी साहब ही कहा करो !”

“तुम अपने काम से काम रखो, समझे ?” शौर्य ने उसे फटकार लगा दी, लेकिन आजकल विक्रम भी शौर्य का जरा ज्यादा ही मुहं लगा हो गया था..

“यही तो तुम्हे समझा रहा हूँ.. असली नहीं हो, न बनने का प्रयास करो !”

“तुम दोनों किन बातों में लगे हो, अब तक चलने की तैयारी पूरी नहीं हुई.. ?”

अचानक कमरे में बांसुरी चली आई..
उसे देख वो दोनों चौंक कर खड़े हो गए..

“मॉम मेरी पूरी तैयारी हो गयी है.. ।”

“अरे वाह.. अच्छा मेरे साथ बाहर आओ.. एक सरप्राइज है तुम्हारे लिए.. “

“कैसा सरप्राइज मॉम?”

“आओ तो सही..
वो शौर्य का हाथ पकड़ कर उसे बाहर ले गयी..

बाहर खड़ी कली को देख शौर्य आश्चर्यचकित रह गया, कली भी शौर्य को इतने समय बाद देख चुपचाप खड़ी देखती रह गयी…

क्रमशः

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Archana Singh
Archana Singh
6 hours ago

Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

Manu Verma
Manu Verma
6 months ago

सुन्दर भाग 😊👌🏻👌🏻, पता था वासुकी कभी बांसुरी को ना नहीं कर पाएगा, आज भी वासुकी, बांसुरी की उतनी ही इज्जत करता है जितनी पहले करता था। वासुकी ने कली को बेशक बांसुरी के साथ भेज दिया पर उनके पीछे ना जाए ऐसा हो ही नहीं सकता,अब देखते है कहानी क्या मोड़ लेती है।

Shanu singla
Shanu singla
6 months ago

💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫

Nisha
Nisha
6 months ago

Sab thik hi hai bas ek sawal pareshan kiye hue hai ki asli rajkumar kahan hain 🤔🤔😥😥

Jagriti
Jagriti
7 months ago

Wonderful episode 👌👌

Jyoti
Jyoti
7 months ago

Very nyc part 👌

Neeta ahirwar
Neeta ahirwar
7 months ago

अब शादी का इंतजार है

Seema Srivastava
Seema Srivastava
7 months ago

Very beautiful

Radhika Porwal
Radhika Porwal
7 months ago

Wow superb episode
Pata nahi ab age kya hoga
Or kya neha jinda hai kyoki mahal ke ek hisse n kisi ko bhi Jane ki ijazat nahi hai or waha doctor bhi rahte hai

Vandana attri
Vandana attri
7 months ago

So beautiful ❤️❤️❤️❤️❤️ kitna lamba intjaar ho jata he mushkil ho jata he bs esa lgta he kb ye sari uljhi huyi guthhiya suljhe kb raja sahab vapas neha ko vasuki ko sompenge……. awesome ❤️❤️❤️❤️❤️❤️ always love to this story……