जीवनसाथी-3 भाग -152

जीवनसाथी -3 भाग -152

अब तक आपने पढ़ा, शौर्य को लेने के लिए बांसुरी लंदन आ चुकी है, जहाँ उसकी मुलाकात इत्तेफाक से कली से होती है, वो कली के साथ उसके घर चली जाती है..।

कली के घर पर उसकी मुलाकात सारिका और दर्श से होती है, और एक एक कर सारी पुरानी बातें बाहर आने लगती है..।

कली को समझ में आ जाता है कि वो क्यों बांसुरी की तरफ एक आकर्षण महसूस किया करती थी, बांसुरी भी पूरी तरह से भावुक हो जाती है..।

वो कली को अपने साथ हर्ष की शादी में इण्डिया लेकर जाना चाहती है..
वहाँ सभी बांसुरी को देख कर खुश हैं और तभी वासुकी वहाँ चला आता है.. !

कहाँ जा रही है कली ?”

हवा में एक गंभीर गहरी सी आवाज़ गूंज गयी…. सीढ़ियों में सबसे ऊपर खड़े वासुकी ने पूछा और एक साथ सबकी नज़रे उस तरफ उठ गयी..

बांसुरी ने देखा, सीढ़ियों पर वासुकी खड़ा था।
बिलकुल वही मुद्रा, वही चाल ढाल, वहीँ आंखे और वही गहरी सी आवाज़..।

“मैडम आप रहने दीजिये, हो सके तो उस पार्टी में मत जाइये !”
“मैडम, वो रास्ता आपके जाने के लिए सही नहीं है !”
“मैडम आप अगर कल वाली मीटिंग टाल कर दे तो अच्छा होगा !”

वासुकी की कही बातें बांसुरी के कानो में गूंजने लगी.. ये आदमी उसके सामने चुप ही रहता था, उसने आज तक  गिनी चुनी बातें ही कहीं थी, जो आज भी बाँसुरी के जेहन में मौजूद थी, क्यूंकि वो जानती थी, वासुकी कोई ऐसा वैसा आदमी नहीं था..।

राजा साहब के साथ काम करने वाले उनके लिए पूरी तरह ईमानदार और सत्यनिष्ठ रहे है, लेकिन अनिरुद्ध वासुकी की बात ही अलग थी। उसने तो राजा साहब और उनके परिवार के लिए अपने परिवार की आहुति दे दी थी…
वासुकी का अलग ही स्थान था..।
बांसुरी ने वासुकी की तरफ देखा और अपने दोनों हाथ जोड़ दिए..

श्रद्धा से वासुकी की पलकें झुक गयी !

उसे खुद के सामने बांसुरी का हाथ जोड़ना अच्छा नहीं लगा, उसने खुद अपने हाथ जोड़ दिए..

धीर गंभीर कदमों से चल कर वो नीचे चला आया..
इतने सालों बाद भी, अब भी बांसुरी की आँखों में देखने का उसका साहस नहीं हो पा रहा था..।

वो तो आज भी बिलकुल वैसी ही थी। जैसी बीस साल पहले।
उम्र और समय ने जैसे उसे छुआ ही नहीं था !
वक्त जैसे उसके चेहरे पर असर डालना ही भूल गया था…
जाने किस अमृतकुंड से स्नान कर के निकली थी कि आज तलक उसका न एक भी बाल सफ़ेद हुआ था, न आँखों के पास एक भी लकीर खींची थी..।

आज भी मुस्कुराने पर वैसे ही उसके दांये गाल पर वैसा ही मनोहारी गड्ढा पड़ता था,और दायीं भौंह के ऊपर एक हल्की सी शिकन पड़ती थी..।

कुछ भी तो नहीं बदला था !
उसके सामने खड़े रहने पर वो सारे मौसम वापस चले आये थे, जिनके साथ उसने बांसुरी को देखा था..।

उसे वो सब याद आ रहा था। हलकी हलकी सी बारिश में कलेक्टर महोदया का लोगों से मिलना, और उसका बाहर मौजूद कार में बैठ कर उसे निहारना…
भीनी भीनी सी गीले पत्तों की खुशबू में मिली महंगी सी रूम फ्रेशनर और महंगी शराब की महक के बीच बड़े लोगों की उस पार्टी में बांसुरी का अनजाने ही उसके करीब से गुजर कर निकल जाना और उसका दिल धड़क कर रह जाना..।

और उसके वापस पलटते ही एक अपनी ही ऊंची हील्स से जूझती लड़की से टकरा जाना…।
सब कुछ जैसे उसकी आँखों में फिल्म सा चलने लगा था..

जो याद बांसुरी से शुरू हो रही थी, वो घूम कर नेहा पर जा कर अटकने लगी थी..।
वो ऊंची हील्स वाली घुंघराले बालों और बड़ी बड़ी आँखों वाली लड़की फिर उसके घर ही नहीं उसके जीवन पर भी छाती चली गयी थी..।

उसने कितना रोका था, लेकिन वो अपनी ज़िद में मनमानी करने से कब बाज आती थी.. ?
काश उसकी बात सुन कर घर से न निकलती तो आज वो साथ होती..
वासुकी की आँखों में आंसू झिलमिला कर गुम हो गए, लेकिन उसकी आँखों को सिंदूरी कर गए..।

“आप तो बिलकुल वैसे के वैसे दिख रहे हैं मिस्टर वासुकी.. कोई चेंज नहीं आया..।
कली को देख कर लगता नहीं कि आप इतनी बड़ी बेटी के पिता हैं.. उसके बड़े भाई ही लगते हैं आप !”

बांसुरी मुस्कुरा कर बोल गयी और वासुकी झेंप कर ज़मीन कुरदने लगा, दर्श के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गयी..।

“सरु कुछ चाय पानी, कुछ तो लाओ.. रानी साहिबा की आवभगत भी करना भूल गयीं तुम ?”

दर्श के टोकने पर वहाँ मौजूद हर कोई जैसे एक नशे से बाहर निकला, सारिका ने हलके से अपने माथे पर हाथ मारा और “हम अभी आये” कहती हुई रसोई की तरफ भाग गयी..
कली को बांसुरी ने इशारे से अपने पास बुला कर बैठा लिया..
वासुकी चुपचाप हाथ बांधे खड़ा था..

“आप भी बैठिये न मिस्टर वासुकी, अरे आप ही का घर है, इतना तकल्लुफ न करे !”

वासुकी अब भी बांसुरी के सामने बैठने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। उसकी हालत समझ कर दर्श ने उसकी बांह थामी और उसे खीँच कर बैठा दिया..

वासुकी का गला सूख रहा था, लेकिन अपने ही घर में शेर सा दहाड़ने वाला वासुकी आज गूंगा हुआ बैठा था, सारिका ने उसके सामने पानी का गिलास बढ़ा दिया..
उसने गिलास लिया और एक साँस में सारा पानी पी गया..

बांसुरी पानी का गिलास पकड़ कर सारिका की तरफ देखने लगी..

“तुम भी बैठो सारिका, मुझे तुमसे बहुत सी बातें करनी हैं.. चाय वाय कुछ नहीं चाहिए !”

सारिका ने मुस्कुरा कर हाँ में गर्दन हिला दी, और बांसुरी के पास ही बैठ गयी। वो रसोई में मौजूद सहयकों को सब समझा कर आ गयी थी, कुछ देर में ही सहायक एक टेबल को लुढ़काते हुए वहाँ चले आये.. उस पर रखी अलग अलग ट्रे में ढेर सारी अलग अलग चीजें मौजूद थी.. उन सभी चीजों को वो एक एक कर टेबल पर सजा कर रखने लगे..

इसी बीच एक ड़ेढ़ होशियार सहायक वासुकी के सेलर से एक पुरानी महंगी सी शराब की बोतल निकाल लाया..।

वासुकी पीता नहीं था, लेकिन उसके काम से जुडी मीटिंग्स में जुड़ने वाले बड़े बड़े अफसरों नेताओं मंत्रियों के लिए उसे हर तरह का इंतज़ाम रखना उसकी मज़बूरी थी.. ।
फिर वो विदेश में रह रहा था, जहाँ शारब पीना वहाँ के मौसम के हिसाब से लक्जरी या शौक नहीं ज़रूरत थी..।

उसके बड़े बड़े मेहमानों के सामने यही वेटर ज्यादातर शराब पेश किया करता था, बस उसी अभ्यास से इसने वही काम किया और वासुकी ने मन ही मन अपना माथा पीट लिया..।

वासुकी की आँखों के बदलते रंग देख दर्श समझ गया और उसने तुरंत शराब की बोतले वापस भेज कर चाय के लिए बोल दिया..।

अलग अलग तरह के देशी विदेशी नाश्ते से वो टेबल भर गयी थी, लेकिन बांसुरी का पूरा ध्यान तो अब भी सिर्फ कली और सारिका पर ही था..

उसने कली पर से अपना ध्यान हटा कर वासुकी की तरफ देखा और अपना प्रश्न पूछ ही लिया..

“तो मिस्टर वासुकी, क्या मैं कली और सारिका को अपने साथ कुछ दिनों के लिए इण्डिया ले जा सकती हूँ ?”

वासुकी स्तब्ध सा कभी कली कभी सारिका को देखता रह गया..

क्रमशः

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Archana Singh
Archana Singh
2 days ago

Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

Shanu singla
Shanu singla
6 months ago

💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫

Nisha
Nisha
7 months ago

Wo kali ko jane dega?

Jagriti
Jagriti
7 months ago

Superb

Jyoti
Jyoti
7 months ago

Very nyc part 👌

Manu Verma
Manu Verma
7 months ago

बड़ी शिद्दत से इंतजार था कब बांसुरी और वासुकी आमने सामने होंगे। समय कितना भी गुजर गया हो पर वासुकी और बांसुरी आज भी वैसे ही है, वासुकी आज बांसुरी के सामने अपनी नजरें ऊँची नहीं करता वो आज भी रानी साहिबा की उतनी ही इज़्ज़त करता है जितनी वो सालों पहले किया करता था और वो कितना भी दबँग हो पर बांसुरी को ना करने की हिम्मत उसमे आज भी नहीं है।और डॉक्टर साहिबा… बहुत खूबसूरती से आपने 19-20 साल का वो समय दोहरा दिया, जैसे आज ही की बात हो ऐसा लगा, लाजवाब 👌🏻।
बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻🙏🏻।

Pinki Arora
Pinki Arora
7 months ago

Beautiful part

Gouri sarwa
Gouri sarwa
7 months ago

❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗 bahot hi pyara or khoobsurat part 💞

SAloni
SAloni
7 months ago

कितने अद्भुत तरीके से आप हर चीज का विवरण देती है। बहुत खूबसूरत भाग ♥️

Raj kumar Ram
Raj kumar Ram
7 months ago

Nice part of your story