अतिथि-66

अतिथि -66

डिंकी दादी के पास बैठी रही..
उसने जाने से पहले डिंकी को भी चलने के लिए कहा था लेकिन डिंकी का मन दादी के पास बैठने का था। उसे दादी की बातें बड़ी प्यारी लग रही थी, डिंकी की इच्छा का सम्मान करते हुए माधव उसे दादी के पास ही छोड़ गया।
दादी ने डिंकी के सामने एक बड़ा सा लस्सी का ग्लास रख दिया

“नहीं दादी इतनी सारी लस्सी तो नहीं पी पाऊंगी ।”

“इतनी सारी? इतनी तो हम दिन में दो से तीन बार पी लेते हैं, तुम आजकल की लड़कियों का पेट इतना जरा सा हो गया है कुछ खा ही नहीं पाते।”

डिंकी ने एक गिलास मंगवा कर आधे से ज्यादा लस्सी निकाल दी। माधव कि दादी मुस्कुरा कर रह गयी,

“अभी हमारा कान्हा होता तो पूरा गिलास गटक जाता !”

माधव की दादी डिंकी की तरफ गहरी नजरों से देखने लगी।

“तुम्हारे चेहरे से ही लग रहा है बिटिया कि तुम बहुत समझदार हो, हमारे कान्हा का बहुत अच्छे से ध्यान रखोगी.. बेचारा हमेशा से प्यार को तरसता आया है..!”

“प्यार को तरसते आये हैं,  लेकिन क्यों ?”

“हम जानते हैं,  उसने तुम्हें कुछ नहीं बताया होगा!
सुलक्षणा उसकी सगी माँ नहीं है !”

“मैं जानती हूं दादी, वह उनकी सगी मां नहीं है!”

दादी चौंक कर डिंकी की तरफ देखने लगी।

“क्या यह बात सुलक्षणा ने तुम्हें बताई?”

“नहीं माधव जी ने!”

” यह बात सच है कि सुलक्षणा माधव की सौतेली मां है..।
माधव की मां विभा बड़ी प्यारी थी..। हमारी पसंद से हम उसे बहु बना कर लाये थे, सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था। लेकिन जाने किसकी नजर लग गई… उस समय माधव बहुत छोटा था। जब विभा को एक गंभीर बीमारी ने जकड लिया। हम गांव के लोग तो समझ भी नहीं पाए, उसके दिमाग में कोई गांठ हुई थी..। डॉक्टरों ने जाँच के बाद ही कह दिया कि ये रोग लाइलाज है, उनके पास इसकी कोई दवा नहीं, फिर भी केदार कहाँ कहाँ नहीं भटका होगा। पर ईश्वर ने जिसकी जितनी सांसे लिखी है, उतनी ही तो मिलेंगी न..
  आखिर अपनी बीमारी से हार कर एक दिन वो हम सब को छोड़ क़र चली गयी।
    सुलक्षणा विभा के ही दूर के चाचा की लड़की थी। हमारे घर अक्सर आया जाया करती थी। जब केदार और विभा कानपुर में रहते थे, तब भी वो कुछ समय उनके साथ रही थी, उसने बीएड की पढाई वहीँ रह कर की थी..।

विभा के जाने के बाद इसी सुलक्षणा की बुआ ने हमसे बात की, हमारी भी मति मारी गई थी, जो हम लोगों ने केदार का उजड़ा घर देख कर हाँ कह दिया और  केदार को दूसरी शादी करने के लिए मना लिया..।

सुलक्षणा पढ़ी-लिखी समझदार थी, नौकरीपेशा थी। हम लोगों को लगा वह केदार और माधव को अच्छे से संभाल लेगी। लेकिन किसी के चेहरे पर नहीं लिखा होता कि वो क्या है.. ?
बिटिया तुम भी सोच रही होगी कि हम कौन सी बात निकाल कर बैठ गए.. छोडो ये सब, बस यही ध्यान रखना कि हमारा माधव बड़ा सीधा है.. !

दादी ने पान की एक गिलौरी डिंकी की तरफ बढ़ा दी..

“नहीं दादी मैं पान नहीं खाती.. अच्छा सुनिए, क्या मैं आपसे एक सवाल पूछ सकती हूँ..?”

“हाँ पूछो..”

“मुझसे सुलक्षणा आंटी ने कहा था कि
    … कि माधव को कुछ मानसिक परेशानी है। मतलब वो खुद ही से कहानियां बुनता रहता है, और दूसरों को भी सुनाता है… क्या ये सच है ?”

डिंकी की बात सुन दादी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई..

“हाँ, ये गलत नहीं कहा उसने !”

डिंकी स्तब्ध होकर दादी की बात सुन रही थी, उसके दिमाग में विचार घुमड़ने लगे..

“केदार पहले तो नहीं मान रहा था, उसे यही चिंता थी कि सौतेली मां माधव का ध्यान रख पाएगी या नहीं? हम लोगों ने बहुत जोर जबरदस्ती कर आखिर उसे मना लिया और सुलक्षणा हमारे घर की बहू बनकर आ गई ।
  हमें लगा कि केदार को थोड़े वक्त की जरूरत है, इसलिए उन दोनों को छोड़कर केदार के पिता माधव को अपने साथ गांव ले आए। हमारा कन्हैया हमारे पास पलने लगा। हम उसे पलकों पर रख कर पाल रहे थे, ऐसा तो नहीं था। लेकिन यह बात थी कि वह इस गांव में इस घर में अपने मन का मौजी था..।
हमें बराबर इस बात का ध्यान रहता था कि उसने अभी-अभी अपनी मां को खोया है, इसके साथ ही हमने उसे उसके पिता से भी दूर कर दिया था। इसलिए हम दोनों ही उसका कुछ विशेष ख्याल रखा करते थे। इसके बावजूद वह नन्हा सा बच्चा बिगड़ा नहीं था, बल्कि कुछ ज्यादा ही समझदार हो गया था।

उसे जो भाता, हम वही खाने में बनाते। उसे अपने दादाजी के साथ खेतों में घूमना पसंद था, नहर किनारे जाना पसंद था, इसलिए उसे किसी भी काम से हम नहीं टोका करते थे।
हम दोनों के प्राण बसते थे माधव में।
धीरे-धीरे समय बीतने लगा, लेकिन जाने सुलक्षणा को ऐसा क्या लगा जो वह इस बात की जिद पर अङ गई कि वह माधव को अपने साथ ले जाएगी। हमने उसे समझाने की कोशिश की, कि माधव यही रह लेगा।

        माधव के रहने से हमारा भी मन लगा रहता है, लेकिन वह माधव की पढ़ाई की बात लेकर अङ गई। शुरू में हमें लगा कि वह माधव की शिक्षा को लेकर चिंतित थी। माधव शहर नहीं जाना चाहता था। जिस दिन पहली बार केदार और सुलक्षणा माधव को अपने साथ लेकर गए,  वह वहां जाकर बीमार पड़ गया।

हफ्ते भर बाद केदार बीमार माधव को गोद में लिए हमारे दरवाजे पर खड़ा था। हमारी गोद में उसे सौंपते हुए कहा “बहुत बिगाड़ रखा है मां तुमने इस लड़के को। इतना जिद्दी हो गया कि दो दिन तक उसने खाया पिया नहीं, और अपनी हालत ऐसी बना ली। अब इसे और उसकी तबीयत को तुम ही संभालो।”

   केदार गुस्से में माधव को पटक कर चला गया। केदार के जाते ही, माधव एकदम से स्वस्थ हो गया। हमें लगा की चलो ठीक है बला टली। लेकिन फिर अगले हफ्ते सुलक्षणा और केदार माधव को लेने चले आए।

सुलक्षणा ने केदार के पिता के सामने ऐसी ऐसी दलीलें दी कि वह भी अपनी नई बहू के सामने हार गये।
     उन्हें लगा सुलक्षणा माधव की पढ़ाई को लेकर चिंतित थी, और उन्होंने चुपचाप कह दिया कि “तुम अपने लाड प्यार की आंखें जरा मूंदे रखो, माधव जिसका लड़का है उसी के साथ उसे जाने दो..”
और अपने कलेजे पर पत्थर रख कर हमने माधव को वापस कानपुर भेज दिया..।

पता नहीं सुलक्षणा को माधव से किस बात की नाराज़गी थी.. वो बेचारा बेज़ुबान सिर्फ प्यार का भूखा था।
उस समय उसकी उम्र ही क्या थी.. जैसा वह अपने दादा-दादी के घर रहा करता था, वैसा ही कानपुर में रहना चाहता था। उसे कुछ भी खाने का मन हो, जैसे वह हमारा पल्लू पकड़ कर झूल जाता था, वैसे ही सुलक्षणा से चिपका करता था, लेकिन उसे नहीं पता था कि सुलक्षणा उन औरतों में से नहीं जो इस तरह की बातों को बढ़ावा दे।
वह अपना पल्ला झटक उसे दूर कर देती थी..।

घर का ताजा और गरम खाना वह अपने पति को परोसती थी। केदार को लगता था कि शायद माधव को भी यही खाना दिया जा रहा है, लेकिन अक्सर पिछले दिन की बासी बची रोटियां और सब्जी माधव के हिस्से आती थी।
    पता नहीं क्यों ऐसा करती थी वह।
अगर आधी कटोरी ताजा सब्जी माधव को परोस देती तो उसकी गिरस्थी में जाने कौन सी आग लग जाती?

    लेकिन उसके सिर पर कुछ अलग ही फितूर सवार था। उसे माधव को अपने पास भी रखना था और उसे प्यार भी नहीं करना था।
   आठ साल के बच्चे में आखिर कितनी बुद्धि होती है, लेकिन फिर भी सुलक्षणा के स्वभाव के कारण माधव धीरे-धीरे शांत होता चला गया….

क्रमशः

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Nisha
Nisha
6 months ago

Sauteli ma ne apna rang dikha diya aur kya

Jyoti
Jyoti
7 months ago

Nyc part 👌

Shanu singla
Shanu singla
7 months ago

💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫

Jagriti
Jagriti
7 months ago

क्या सच है ये बात

Gouri sarwa
Gouri sarwa
7 months ago

🥺🥺🥺🥺🥺🥺🥺🥺🥺🥺🥺😳😳😳😳😳😳😳😳😳

Manu Verma
Manu Verma
7 months ago

बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻💐💐💐

Kalpana
Kalpana
7 months ago

Nice part

Anu
Anu
7 months ago

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं हम सब की प्यारी लेखिका अपर्णा जी🥳🎂🍫🍫🎁🎁🎉🎉🥰❤️

Vinod Kumar Bansal
Vinod Kumar Bansal
7 months ago

बहुत सुन्दर रचना 🌹🌹

Chandrika Boghara
Chandrika Boghara
7 months ago

Bahut badhiya