
जीवनसाथी -3 भाग -151
वह अभी कुछ भी कहने, बोलने बताने की स्थिति में नहीं आ पाई थी।
और बांसुरी लगातार उससे सवाल किये जा रही थी।
उसी वक्त दर्श सीढ़ियां उतरकर उन दोनों के सामने चला आया ।
“आपका स्वागत है हर हाईनेस!”
दर्श हिंदुस्तान में रहते हुए भी अपनी अंग्रेजीयत नहीं छोड़ पाया था। फिलहाल तो वह लंदन में था, और पूरी तबीयत से अपने आप को ब्रिटिश रंग ढंग में ढाल चुका था।
दर्श को पहचानने में फिर बांसुरी को वक्त नहीं लगा। वासुकी के साथ हर वक्त दर्श ही तो रहा करता था। बांसुरी ने दर्श को देखा और अपने हाथ जोड़ दिए।
” सारिका तुम ठीक तो हो?”
दर्श ने सारिका के कंधे पर हाथ रख दिया। सारिका ने अपने आंसू पोछ लिए।
” जी मैं ठीक हूं।”
सारिका और दर्श की बातें सुनकर बांसुरी उन दोनों को निहारने लगी।
” आप दोनों यहाँ क्या कर रहे ?”
बांसुरी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था। उसे ऐसा लग रहा था, जैसे उसके बिछड़े कोई भूले भटके दोस्त उसे मिल गए हैं। वह खुशी से सारिका से बार-बार उस खोई हुई बच्ची के बारे में पूछ रही थी।
“सारिका यह सब छोड़ो, मुझे बताओ ना नेहा की बेटी कहां है? अभी कितनी बड़ी हो गई है वह?
मैं भी क्या पूछ रही हूं, मुझे लग रहा था स्कूल जा रही होगी। लेकिन अब तो कॉलेज पहुंच गई होगी ना? इतने साल बीत गए।
बड़ी हो गई होगी। कैसी दिखती है वह?”
सारिका के होंठ कांपने लगे।
उसने बांसुरी की आंखों की तरफ देखा और उसके ठीक पीछे खड़ी कली की तरफ देखने लगी।
” बिल्कुल आप ही की परछाई है वो ।”
“लेकिन वो है कहाँ ?”
“आपके साथ ही तो है.. आपने उसे पहचाना नहीं ?”
बांसुरी के चेहरे के रंग बदलने लगे। उसके चेहरे पर मुस्कान गहरी होती चली गई। वह चौंक कर पलटी, उसने कली की तरफ देखा।
आज तक उसका ध्यान क्यों नहीं किया था इस बात पर।
कली का चेहरा उससे वाकई बहुत मिलता था। इस बारे में महल में भी कई बार उसे रूपा जया यहां तक की रेखा भी टोक चुके थे।
सबका कहना था शौर्य से ज्यादा कली उसकी बेटी लगती है। और वह हर बार मुस्कुरा कर उन बातों को उड़ा दिया करती थी।
उसे मन ही मन कली बहुत पसंद भी आई थी, और कहीं ना कहीं वह चाहती थी कि कली हमेशा के लिए उसके घर आ जाए।
शौर्य का कली से रिश्ता हो जाए।
लेकिन आज तक वह खुलकर इस बात को कह नहीं पाई थी। उसने मुड़कर कली की तरफ देखा और देखती रह गई।
कली शरमा कर नीचे देखने लगी। उसे समझ ही नहीं आया कि यह सब क्या हो रहा है?
” मुझे पहचानती हो कली?”
बांसुरी ने उससे पूछा।
कली को इस सवाल का मतलब समझ नहीं आया। वह तो बांसुरी को शौर्य की मां के तौर पर अच्छे से जानती पहचानती थी। फिर इस वक्त इस सवाल का क्या औचित्य है? वह बिना जवाब दिए बांसुरी की तरफ देखती रही।
बांसुरी धीरे से उसके पास पहुंच गई।
” कितनी ठंडक पहुंच रही है मेरे दिल को। आज इतने सालों बाद उस बच्ची को देख रही हूं, जिसे अपने साथ नहीं रख पाने का गम मुझे अब तक सालता आया था।
जानती हो कली, मैं चाहती थी कि तुम्हें अपने साथ अपने महल में ले चलूं। शौर्य के साथ तुम्हारी भी परवरिश करूं, लेकिन मुझे ऐसा करने की इजाजत नहीं मिली। सब ने कहा कि तुम्हारे पिता से तुम्हें छीन कर मैं उनके साथ और भी ज्यादा ज्यादती कर बैठूंगी और बस इसीलिए तुम्हें खुद से दूर करके मुझे जाना पड़ा! तुम एक साल की होने तक मेरी गोद में पली हो, तो मैं क्या बताऊं कि तुम मेरे लिए क्या हो..?”
“हां कली, तुम अक्सर पूछा करती थी ना तुम्हारा नाम किसने रखा है, यही है वह, जिन्होंने अपनी सांसे देकर तुम्हारी सांसे जिंदा रखी।
तुम एक दिन की थी, जब उनकी गोद में आई थी और तब से तुम्हारे साल भर की होने तक इन्होंने कभी तुम्हें खुद से जुदा नहीं किया।
देहरादून के उस बंगले में इनकी और तुम्हारी ढेर सारी यादें मौजूद है।”
सारिका आज किसी वेगवती बांध टूटी नदी सी बहती चली जा रही थी। आज उसे आंखें दिखा कर रोकने वाला दर्श भी चुपचाप हाथ बांधे सब सुन रहा था। वह भी समझ गया था कि अब कली से कुछ भी छुपाना नामुमकिन है।
” देहरादून, इसका मतलब मैं इंडिया में पैदा हुई हूं ?”
कली ने सारिका और बांसुरी से एक साथ सवाल किया।
बांसूरी ने आश्चर्य से सारिका की तरफ देखा और मुस्कुरा कर हामी भर दी। सारिका को अब अपनी भूल समझ में आई कि आज तक उन लोगों ने कली से यह सारी ही बातें छुपा रखी थी। कली को तो यही पता था कि वह कभी इंडिया गई ही नहीं और इसीलिए उसके इंडिया जाने की जिद पर उसके पिता नाराज भी हो रहे थे…।
लेकिन आज मोह में फंस कर खुद को भुला बैठी सारिका सब कुछ बोल गयी थी..
उसका खुद का कितना मन करता था, वापस अपने देश लौट जाने का, उन गलियों में उन हवाओं में वहाँ के पानी में जो सब था, वो यहाँ रूपये खर्च कर के भी मिल नहीं सकता था !
वो जाने कितनी बार दर्श के सामने अपनी इच्छा दुहरा चुकी थी, लेकिन दर्श हर बार कोई नया बहाना बना कर उसे मना कर दिया करता था! और अब उसने इन सब से समझौता कर लिया था.. वो मान गयी थी कि अब वो कभी इण्डिया नहीं जा पायेगी !
“हमारा तो खुद बहुत मन करता है, एक बार भारत घूम आये। लेकिन यहाँ इन सब को छोड़ कर जाये भी तो कैसे और अब वहाँ कोई है भी तो नहीं !”
सारिका अपनी रौ में बोलती चली गयी..
“कैसे कोई नहीं है ? हमारे साथ चलो ! “
बांसुरी सारिका का हाथ पकड़ कर पुलक उठी..
“सच कह रही हूँ मैं.. अभी मौका भी बड़ा शुभ है.. हमारे महल के सबसे बड़े राजकुमार हर्ष की शादी है.. उसी शादी में शामिल होने चलो..
क्यों कली, चलोगी न ?”
कली पसोपेश में पड़ी बांसुरी को देखने लगी..
बांसुरी ने मुस्कुरा कर दर्श की तरफ देखा..
“अब क्या आपकी इजाजत लेनी पड़ेगी मुझे, इन दोनों को अपने साथ लेकर जाने के लिए ?”
दर्श एकदम से कट कर रह गया, शर्मिंदा होकर उसने सर नीचे झुका लिया…
“ये कैसी बात है हुकुम ! आपकी जैसी आज्ञा, लेकिन अनिर भी आ जाता तो… “
कहते हुए दर्श चुप रह गया..
बांसुरी ने आगे बढ़ कर कली का हाथ थाम लिया..
“तो फिर बात पक्की रही, तुम दोनों अपना सामान पैक कर लेना, हम लोग कल वापस जा रहे हैं, तुम्हे भी साथ ले चलेंगे.. हर्ष की शादी तक अब वही हमारे साथ रहना.. “
वो वापस दर्श की तरफ घूम गयी..
“चिंता मत कीजिये, कली जैसी आपकी बेटी वैसे ही मेरी भी है। हर्ष की शादी के बाद मैं खुद इसे वापस छोड़ने आ जाउंगी !”
“कहाँ जा रही है कली ?”
हवा में एक गंभीर गहरी सी आवाज़ गूंज गयी…. सीढ़ियों में सबसे ऊपर खड़े वासुकी ने पूछा और एक साथ सबकी नज़ारे उस तरफ उठ गयी..
क्रमशः
जीवनसाथी -3 भाग -151
वह अभी कुछ भी कहने, बोलने बताने की स्थिति में नहीं आ पाई थी।
और बांसुरी लगातार उससे सवाल किये जा रही थी।
उसी वक्त दर्श सीढ़ियां उतरकर उन दोनों के सामने चला आया ।
“आपका स्वागत है हर हाईनेस!”
दर्श हिंदुस्तान में रहते हुए भी अपनी अंग्रेजीयत नहीं छोड़ पाया था। फिलहाल तो वह लंदन में था, और पूरी तबीयत से अपने आप को ब्रिटिश रंग ढंग में ढाल चुका था।
दर्श को पहचानने में फिर बांसुरी को वक्त नहीं लगा। वासुकी के साथ हर वक्त दर्श ही तो रहा करता था। बांसुरी ने दर्श को देखा और अपने हाथ जोड़ दिए।
” सारिका तुम ठीक तो हो?”
दर्श ने सारिका के कंधे पर हाथ रख दिया। सारिका ने अपने आंसू पोछ लिए।
” जी मैं ठीक हूं।”
सारिका और दर्श की बातें सुनकर बांसुरी उन दोनों को निहारने लगी।
” आप दोनों यहाँ क्या कर रहे ?”
बांसुरी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था। उसे ऐसा लग रहा था, जैसे उसके बिछड़े कोई भूले भटके दोस्त उसे मिल गए हैं। वह खुशी से सारिका से बार-बार उस खोई हुई बच्ची के बारे में पूछ रही थी।
“सारिका यह सब छोड़ो, मुझे बताओ ना नेहा की बेटी कहां है? अभी कितनी बड़ी हो गई है वह?
मैं भी क्या पूछ रही हूं, मुझे लग रहा था स्कूल जा रही होगी। लेकिन अब तो कॉलेज पहुंच गई होगी ना? इतने साल बीत गए।
बड़ी हो गई होगी। कैसी दिखती है वह?”
सारिका के होंठ कांपने लगे।
उसने बांसुरी की आंखों की तरफ देखा और उसके ठीक पीछे खड़ी कली की तरफ देखने लगी।
” बिल्कुल आप ही की परछाई है वो ।”
“लेकिन वो है कहाँ ?”
“आपके साथ ही तो है.. आपने उसे पहचाना नहीं ?”
बांसुरी के चेहरे के रंग बदलने लगे। उसके चेहरे पर मुस्कान गहरी होती चली गई। वह चौंक कर पलटी, उसने कली की तरफ देखा।
आज तक उसका ध्यान क्यों नहीं किया था इस बात पर।
कली का चेहरा उससे वाकई बहुत मिलता था। इस बारे में महल में भी कई बार उसे रूपा जया यहां तक की रेखा भी टोक चुके थे।
सबका कहना था शौर्य से ज्यादा कली उसकी बेटी लगती है। और वह हर बार मुस्कुरा कर उन बातों को उड़ा दिया करती थी।
उसे मन ही मन कली बहुत पसंद भी आई थी, और कहीं ना कहीं वह चाहती थी कि कली हमेशा के लिए उसके घर आ जाए।
शौर्य का कली से रिश्ता हो जाए।
लेकिन आज तक वह खुलकर इस बात को कह नहीं पाई थी। उसने मुड़कर कली की तरफ देखा और देखती रह गई।
कली शरमा कर नीचे देखने लगी। उसे समझ ही नहीं आया कि यह सब क्या हो रहा है?
” मुझे पहचानती हो कली?”
बांसुरी ने उससे पूछा।
कली को इस सवाल का मतलब समझ नहीं आया। वह तो बांसुरी को शौर्य की मां के तौर पर अच्छे से जानती पहचानती थी। फिर इस वक्त इस सवाल का क्या औचित्य है? वह बिना जवाब दिए बांसुरी की तरफ देखती रही।
बांसुरी धीरे से उसके पास पहुंच गई।
” कितनी ठंडक पहुंच रही है मेरे दिल को। आज इतने सालों बाद उस बच्ची को देख रही हूं, जिसे अपने साथ नहीं रख पाने का गम मुझे अब तक सालता आया था।
जानती हो कली, मैं चाहती थी कि तुम्हें अपने साथ अपने महल में ले चलूं। शौर्य के साथ तुम्हारी भी परवरिश करूं, लेकिन मुझे ऐसा करने की इजाजत नहीं मिली। सब ने कहा कि तुम्हारे पिता से तुम्हें छीन कर मैं उनके साथ और भी ज्यादा ज्यादती कर बैठूंगी और बस इसीलिए तुम्हें खुद से दूर करके मुझे जाना पड़ा! तुम एक साल की होने तक मेरी गोद में पली हो, तो मैं क्या बताऊं कि तुम मेरे लिए क्या हो..?”
“हां कली, तुम अक्सर पूछा करती थी ना तुम्हारा नाम किसने रखा है, यही है वह, जिन्होंने अपनी सांसे देकर तुम्हारी सांसे जिंदा रखी।
तुम एक दिन की थी, जब उनकी गोद में आई थी और तब से तुम्हारे साल भर की होने तक इन्होंने कभी तुम्हें खुद से जुदा नहीं किया।
देहरादून के उस बंगले में इनकी और तुम्हारी ढेर सारी यादें मौजूद है।”
सारिका आज किसी वेगवती बांध टूटी नदी सी बहती चली जा रही थी। आज उसे आंखें दिखा कर रोकने वाला दर्श भी चुपचाप हाथ बांधे सब सुन रहा था। वह भी समझ गया था कि अब कली से कुछ भी छुपाना नामुमकिन है।
” देहरादून, इसका मतलब मैं इंडिया में पैदा हुई हूं ?”
कली ने सारिका और बांसुरी से एक साथ सवाल किया।
बांसूरी ने आश्चर्य से सारिका की तरफ देखा और मुस्कुरा कर हामी भर दी। सारिका को अब अपनी भूल समझ में आई कि आज तक उन लोगों ने कली से यह सारी ही बातें छुपा रखी थी। कली को तो यही पता था कि वह कभी इंडिया गई ही नहीं और इसीलिए उसके इंडिया जाने की जिद पर उसके पिता नाराज भी हो रहे थे…।
लेकिन आज मोह में फंस कर खुद को भुला बैठी सारिका सब कुछ बोल गयी थी..
उसका खुद का कितना मन करता था, वापस अपने देश लौट जाने का, उन गलियों में उन हवाओं में वहाँ के पानी में जो सब था, वो यहाँ रूपये खर्च कर के भी मिल नहीं सकता था !
वो जाने कितनी बार दर्श के सामने अपनी इच्छा दुहरा चुकी थी, लेकिन दर्श हर बार कोई नया बहाना बना कर उसे मना कर दिया करता था! और अब उसने इन सब से समझौता कर लिया था.. वो मान गयी थी कि अब वो कभी इण्डिया नहीं जा पायेगी !
“हमारा तो खुद बहुत मन करता है, एक बार भारत घूम आये। लेकिन यहाँ इन सब को छोड़ कर जाये भी तो कैसे और अब वहाँ कोई है भी तो नहीं !”
सारिका अपनी रौ में बोलती चली गयी..
“कैसे कोई नहीं है ? हमारे साथ चलो ! “
बांसुरी सारिका का हाथ पकड़ कर पुलक उठी..
“सच कह रही हूँ मैं.. अभी मौका भी बड़ा शुभ है.. हमारे महल के सबसे बड़े राजकुमार हर्ष की शादी है.. उसी शादी में शामिल होने चलो..
क्यों कली, चलोगी न ?”
कली पसोपेश में पड़ी बांसुरी को देखने लगी..
बांसुरी ने मुस्कुरा कर दर्श की तरफ देखा..
“अब क्या आपकी इजाजत लेनी पड़ेगी मुझे, इन दोनों को अपने साथ लेकर जाने के लिए ?”
दर्श एकदम से कट कर रह गया, शर्मिंदा होकर उसने सर नीचे झुका लिया…
“ये कैसी बात है हुकुम ! आपकी जैसी आज्ञा, लेकिन अनिर भी आ जाता तो… “
कहते हुए दर्श चुप रह गया..
बांसुरी ने आगे बढ़ कर कली का हाथ थाम लिया..
“तो फिर बात पक्की रही, तुम दोनों अपना सामान पैक कर लेना, हम लोग कल वापस जा रहे हैं, तुम्हे भी साथ ले चलेंगे.. हर्ष की शादी तक अब वही हमारे साथ रहना.. “
वो वापस दर्श की तरफ घूम गयी..
“चिंता मत कीजिये, कली जैसी आपकी बेटी वैसे ही मेरी भी है। हर्ष की शादी के बाद मैं खुद इसे वापस छोड़ने आ जाउंगी !”
“कहाँ जा रही है कली ?”
हवा में एक गंभीर गहरी सी आवाज़ गूंज गयी…. सीढ़ियों में सबसे ऊपर खड़े वासुकी ने पूछा और एक साथ सबकी नज़ारे उस तरफ उठ गयी..
क्रमशः

Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
Mam 157 se age ke part dijiye plz
💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫
Next part please
Hi..ma’am jitne badhiya apki likhi stories hoti hn usse kahin jyada late apke likhe gye parts upload hote hn..please next or rest of parts jldi bhejiye
Lekhikaji namskar pichhle 16 din se part nahin dala din mein do baar check krti hun pls thoda reham kro please agla part jldi de do🙏
Madam 20 din to bhut zyada hote hain
काफी समय से माया नगरी का नया भाग पढ़ने को नहीं मिला है मैडम…..
Mam bahut hi Sundar h ye kahani
Par apne 15o or 151 ko 2 2baar de diya apne👍👍👍👍👍🏿👍🏿👍🏿👍🏿⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐🥰🤗🤗🤗👍🏾👍🏾👍🏾👍🏾👍🏾☝️☝️☝️☝️plz mam part jaldi dena
Kali ne socha hi nhi kabhi ki use palne wali ma basuri hogi.basuri bhale hi ye jaankar khush hai aur kali ko mahal le jana chahti hai par anir use le jane nahi dega.wo bita hua waqt wapas nahi dekhna chahta
Mam
Aapke 1-1 भाग के लिए कितना इंतजार रहता है
वैसे ये कहानी बहुत लम्बी जाने वाली है