
जीवनसाथी -3 भाग -145
शौर्य विक्रम से सारी बातें जानना चाहता था! वह विक्रम के सामने बैठ गया।
” मैं सब कुछ जानना चाहता हूं विक्रम! सब कुछ।
मैं जानना चाहता हूं कि तुम कौन हो? और तुम्हारा भदौरिया के साथ क्या संबंध है ? तुमने क्यों शौर्य का बॉडीगार्ड बनना चुना? मुझे हर बात सच-सच बता दो.. ।”
“लेकिन इस बात का क्या भरोसा कि मेरी सच्चाई जानने के बाद तुम यह सच्चाई किसी और से नहीं कहोगे?”
” यह तो भरोसे की बात है दोस्त! अगर भरोसा कर सकते हो, तो कर लो। वैसे इतने दिनों से मेरे साथ हो, क्या तुम्हें कभी भी ऐसा लगा है कि मैंने तुम्हारे किसी भी राज को कभी किसी से शेयर किया है।”
” नहीं ऐसा तो नहीं लगा, लेकिन तुम खुद बड़े सस्पीशियस लगते हो। लेकिन फिर भी मैं अब तुम्हें सब कुछ बता देना चाहता हूं…।”
“हम्म! मैं भी सब जानने के लिए तैयार हूँ.. बताओ, सब बता दो..।”
“मैं भदौरिया को तब से जानता हूं, जब मैं इंटर कॉलेज में था। मेरा एक भाई भी था, जो मेरे साथ ही पढा करता था। उसके सपने बहुत ऊंचे थे। वह देश सेवा के लिए यूपीएससी क्रैक करना चाहता था। और इसीलिए वह बचपन से ही बहुत मेहनत कर रहा था। स्कॉलरशिप के दम पर वह एक अच्छे कोचिंग इंस्टिट्यूट में भी दाखिला पा गया था। उसके स्कूल के एकेडमिक्स को देखकर कोचिंग वालों ने आधी फीस पर उसे पढ़ाने का फैसला किया था। वह चाहता था मैं भी उसके साथ पढ़ाई करूं, लेकिन हम दोनों में से किसी एक को काम करना जरूरी था, वरना दूसरा नहीं पढ़ पाता।
अपने भाई की इच्छाओं का सम्मान करते हुए मैंने नौकरी करने को चुना। मैं अपनी पढ़ाई के साथ-साथ काम भी करने लगा। हम दोनों ही बहुत मेहनत कर रहे थे। वैसे भी हमारा इस दुनिया में और कोई नहीं था। एक दिन मेरा भाई कोचिंग से वापस लौट रहा था, मुझसे बात करते हुए ही आ रहा था..।
उस दिन वह बहुत खुश था। कोचिंग का कोई क्रैश कोर्स वाला पेपर हुआ था, मॉक टेस्ट।
और उस मॉक टेस्ट में उसने बहुत ज्यादा नंबर लाए थे। उस कोचिंग इंस्टिट्यूट के एक टीचर ने उस टेस्ट में पूरे मार्क्स लाने वाले को एक हजार का इनाम देने की घोषणा की थी, और वह इनाम मेरे भाई विजय ने जीता था।
विजय लौटते हुए बहुत खुश था। उसने मुझे फोन किया और कहा कि मैं आज खाना ना बनाऊं, वह बाहर से ही कुछ पार्सल करवा कर लेकर आएगा। मैं भी खुशी-खुशी उसका इंतजार करने लगा। लेकिन धीरे-धीरे वक्त बीतता गया, और वह नहीं आया। जब बहुत रात बीती, तब मैंने उसके मोबाइल पर कॉल करना शुरू किया। लेकिन उसका फोन बंद आ रहा था। मुझे समझ में नहीं आया कि वह गया कहां?
मैंने तुरंत इसकी कोचिंग इंस्टिट्यूट पर फोन किया। लेकिन वहां उस वक्त फोन उठाने के लिए कोई नहीं था। आधी रात बीत चुकी थी, मुझे पता था सारे लोग अपने-अपने घर जा चुके होंगे। मैं उसकी तलाश में निकल गया।
लेकिन पूरे शहर की खाक छानने के बावजूद मुझे वह कहीं नहीं मिला। मैं परेशान होकर दूसरे दिन पुलिस स्टेशन गया।
एक गरीब और लाचार लड़के की मदद कोई नहीं करता। पुलिस ने भी रिपोर्ट लिखने से मना कर दिया, और मुझे भेज दिया। मैं परेशान होकर इधर-उधर उसे तलाशता रहा। हफ्ता बीत गया, लेकिन ना मेरे भाई के फोन का पता चला और ना उसकी कोई खोज खबर मिली। मैंने उसके पोस्टर्स प्रिंट करवाए और जगह-जगह लगाने लगा। अखबार में न्यूज़ दी। उसकी कोचिंग वालों से भी मिलकर बात की, उसके पोस्टर्स बांटे कि कहीं से तो कोई खबर मिले।
लगभग महीने भर बाद मेरे पास एक फोन आया।
एक लड़की का फोन था। उसने कहा कि वह मुझसे मिलना चाहती है। वह मेरे भाई के बारे में कुछ बताना चाहती है। मैं तुरंत इसकी बताई जगह पर पहुंच गया। लड़की बहुत ज्यादा घबराई हुई थी। उसने अपना पूरा चेहरा ढक रखा था। उसने मुझसे ज्यादा कुछ नहीं कहा, बस एक खत मेरी तरफ बढ़ा दिया।
मैं उससे उसका नाम, पता, ठिकाना कुछ भी पूछ पाता उसके पहले ही वह तेजी से वहां से निकल गई। मैंने उस लड़की का चेहरा तक नहीं देखा था कि मैं उसे ढूंढ सकूं। मैं उसके पीछे भागा, लेकिन तब तक वह उन अंधेरी गलियों में खो चुकी थी, जहां से वह आई थी। मैंने उसका खत खोला और पढ़ने लगा…
“मैं नहीं जानती आपका कौन हैं, क्या है? मैं यह भी नहीं जानती कि आपका भाई कौन था? लेकिन मैंने उसे देखा था। और एक ऐसी जगह देखा था जिसके बारे में आपको बताना बहुत जरूरी है। मैं वहाँ आपके भाई के साथ ही थी और आज अगर मैं बाहर निकल कर ज़िंदा हूँ तो वो भी आपके भाई के ही कारण !
कुछ लोग हैं यहां, जो बहुत गलत काम कर रहे हैं! ये पूरी एक गैंग है, जिसमे इस देश से बाहर के लोग भी शामिल है !
यह गैंग, लोगों को किडनैप करती है, उठाकर ले जाती है!
और फिर उन्हें टॉर्चर करते हुए अलग-अलग तरह के वीडियो बनाते हैं ये लोग !
इनका एक बहुत बड़ा गैंग है! ये लोग ऑनलाइन इन गेम्स को दिखाते हैं!
मैं ठीक से आपको स्पष्ट नहीं कर सकती। इनका काम यही है।
यह लोग लोगों को किडनैप करने के बाद अपनी बनाई हुई जगह पर कैद करके रखते हैं। उसके बाद यह उन लोगों को तरह-तरह के फिजिकल और मेंटल टार्चर देते हैं। और इन सब चीजों को शूट करते हैं। यह सारी चीज यह लोग लाइव टेलीकास्ट करते हैं।
किसी इंसान को किस तरह से टॉर्चर किया जाए इस बात पर ऑनलाइन बोली लगाई जाती है। जिसकी बोली सबसे महंगी होती है, उसके टॉर्चर करने के तरीके को इन लोगों के ऊपर इंप्लीमेंट किया जाता है। ऐसे में बहुत बार लोगों की जान भी चली जाती है..।
ये सब कुछ बहुत खतरनाक है।
मैं इन लोगो के चंगुल में फंस चुकी हूँ। इसलिए ये सब जान पायी.. मैं बहुत मुश्किल से जान बचा कर यहाँ से निकली हूँ..।
आपके भाई को भी वहीँ देखा था मैंने..
उसका और मेरा चैंबर एक ही था, हमे टॉर्चर रूम में बारी बारी से ले जाया जाता था.. जब हम बाकी लोगों के साथ रूम में होते थे, तब हमारी बातचीत होती थी। और उस वक्त उसने तुम्हारे बारे में मुझे बताया था। तुम्हारे भाई के गले में एक चेन थी जिसमें पड़े लॉकेट में तुम्हारी तस्वीर थी।
इसीलिए मैं तुम्हें पहचान पाई।
तुम्हारा भाई बहुत ब्रेव है, और वह अकेला था जिसने हिम्मत नहीं हारी थी। उसी ने वहां से भागने की तरकीब बनाई थी।
उसने बहुत मेहनत करके उस चैंबर रूम से निकलने का एक तरीका ढूंढ निकाला था। लेकिन वह अकेला नहीं भागना चाहता था। हम जितने लोग उस रूम में थे, सबको साथ लेकर निकलना चाहता था, पर वह ऐसा नहीं कर पाया…।
उसने खुद से पहले रूम के बाकी लोगों को निकालना चाहा। लेकिन उस दिन चैंबर रूम में मेरे और उसके अलावा दो और लोग थे। उन दो लोगों के साथ-साथ मैं भी वहां से निकल भागने में कामयाब हो गई। लेकिन तुम्हारा भाई जब तक निकल पाता, तब तक वह डोर क्लोज हो गया।
जहां से हम निकले थे हमारे चैंबर रूम के बाथरूम से होकर वह रास्ता निकला था। हम वहां से निकलकर टैंक के सहारे बाहर निकले। वह एक कैनाल में जाकर मिलती थी, और बस उसी के थ्रू हम बाहर चले आए लेकिन वह नहीं आ पाया…।
मैं नहीं जानती कि हमारे भगाने के बाद उसके साथ उन्होंने क्या किया, लेकिन जितना तुम्हारे भाई को जाना है इतना तो समझ ही गई हूं कि वह उन लोगों का फेवरेट खिलौना है।
उसे वह लोग इतनी आसानी से मारेंगे नहीं। मेरी बात का गलत मतलब मत निकलना, मैं भगवान से यही प्रार्थना करती हूं कि तुम्हारा भाई जहां भी रहे सुरक्षित रहे।
उसने मुझे मेरी जिंदगी वापस की है। इसलिए मेरा फर्ज बनता था कि मैं कैसे भी तुम्हें ढूंढ निकालूं। उसने अपना शहर, अपना पता, और तुम्हारा नाम सब कुछ बताया था।
मैं जब से बाहर निकली, तुम्हें ढूंढ रही थी। और जैसे ही तुम्हारे बारे में पता चला तुम्हें फोन लगा दिया..।
अभी भी मेरे अंदर इतना डर मौजूद है कि पता नहीं कहां वह लोग मिल जाए, और मुझे वापस पकड़ कर ले जाएं। बस इसी डर के कारण मैं ये शहर ये देश ही छोड़ कर जा रही हूँ..
इस खत में तुम्हें वो लिंक लिख कर दे रही हूँ, जिन में ये लोग इन गेम्स को खेलते हैं और बोली लगायी जाती है..!
ये सब कुछ डार्कवेब में होता है.. सामान्य इंटरनेट पर ये सब नहीं ढूंढ पाओगे !
इसमें वो सब लोग भी शामिल है, जो दिन के उजाले में साफ़ सुथरा बिजनेस चलाते हैं.. और उनमे से एक नाम इसी शहर के बिजनेसमैन भदौरिया का है !”
शौर्य, विक्रम की बातें सुनकर सदमे में आ गया।
” यह क्या कह रहे हो विक्रम ? क्या यह सच है?”
” हां शौर्य, यह सच है, इन लोगों की बड़ी अजीब सी दुनिया होती है। यह लोग डार्क वेब के जरिए यह सारे काम करते हैं, और इसीलिए इन लोगों को पकड़ना बहुत मुश्किल होता है। उस लड़की ने इस खत के साथ ही मुझे एक पेन ड्राइव भी दी थी, जिसके सहारे मैं उस डार्क वेब की दुनिया में उतर सकूं..।”
“फिर.. तुमने क्या किया.?”
” उन लोगों को ढूंढने के लिए मुझे किसी भी तरीके से उनके गैंग में शामिल होना था। लेकिन यह मेरे लिए इतना आसान नहीं था। मैंने रात दिन एक करके डार्क वेब और ह्यूमन ट्रैफिकिंग और इस तरह के फेटल गेम्स से रिलेटेड सारी चीजें ढूंढ़नी शुरू की। मैंने इसके लिए थोड़ी पढ़ाई भी की, कुछ एडवांस कोर्स भी किया, और जल्द ही मुझे डार्क वेब की दुनिया समझ में आने लगी…।”
विक्रम की बातें शौर्य को खौफजदा करने लगी थी… ।
लेकिन वो साँस रोके उसकी बात सुन रहा था !
“लेकिन इस सबमे भदौरिया की राजा साहब से दुश्मनी कब और कैसे हुई ?”
“वो भी तुम्हे बतात हूँ, लेकिन पहले मेरी कहानी तो पूरी कर लेने दो !”
“हाँ ठीक है !” शौर्य एक बार फिर ध्यान से उसकी बात सुनने लगा !
*****
बांसुरी राजा के साथ झील के किनारे बैठी थी.. उनकी सिक्युरिटी के लोग आसपास फैले हुए थे..!
बांसुरी बड़े ध्यान से झील को देख रही थी..
“क्या सोच रही हो हुकुम ?” राजा ने पूछ लिया
“ऊँहुँ.. कुछ भी तो नहीं !”
राजा मुस्कुरा उठा..
“तुम्हारी आंखे देख कर सब समझ जाता हूँ, फिर भी झूठ बोलने से बाज नहीं आती हो..।”
बांसुरी मुस्कुरा उठी..
. “शौर्य के बारे में सोच रही थी.. जरा बदला बदला सा नहीं लग रहा आपको ?”
“हम्म.. लग तो रहा है, लेकिन अब ज़रा ज़िम्मेदार सा होने लगा है.. है न ?”
“हाँ जरा सा नहीं कुछ ज़्यादा ही जिम्मेदार लग रहा.. देखिये ने कैसे एक बार में साथ चलने को राजी हो गया, वरना पहले तो कभी मेरी बात एक बार में मान जाये ऐसा नहीं किया उसने.. मिन्नतें करवाता है ये लड़का !”
“चलो अच्छी बात है, मेरी तो सुनता नहीं कम से कम तुम्हारी तो एक बार में मान गया !”
“हाँ उस बात की ख़ुशी भी है, लेकिन उसका हर बात पे मुझसे उलझना ही तो मुझे अच्छा लगता था.. आज तो ये मेरी हर बात आँख मूंद के मान गया.. !”
“अजब मुश्किल है.. बेटा तुम्हारी बात सुन रहा फिर भी संतुष्ट नहीं.. सही कहते है लोग औरत के मन को जानना टेढ़ी खीर है !”
बांसुरी ने राजा की बांह थाम ली और उसके कंधे से लग कर बैठ गयी…
उन लोगो से कुछ दूर झील के किनारे कली और उसकी दोनों सहेलियां भी पहुँच चुकी थी..
उनमे से निशा बोल पड़ी..
‘”कली उधर देख तो जरा, लगता है कोई विशेष महत्वपूर्ण आदमी है.. तभी इतनी सिक्युरिटी लगा रखी है !”
कली उस तरफ देखने लगी..
इतने सारे भारतीय चेहरे देख उसका दिल धक से रह गया..
कहीं शौर्य के माता पिता तो नहीं है ?
अपनी ही सोच पर वो संकुचित हो गयी.. अब भी क्यों वो उसके बारे में सोच सोच कर अपना खून जला रही है.. उसे तो उससे कोई लेना देना ही नहीं है..
उसने स्पष्ट कर दिया है कि वो उसके बारे में कुछ नहीं सोचता, फिर वो ही अकेली क्यों उसके लिए घुली जा रही है..
“हुंह.. कोई भी हो, हमे क्या ?” कहने को कह तो गयी, लेकिन अब उसका मन वहाँ लग नहीं रहा था..
मन ही मन वो ये भी प्रार्थना किये जा रही थी कि काश यहाँ शौर्य चला आये..
लेकिन शौर्य तो कहीं और ही व्यस्त था !
क्रमशः

Kya vikram apne bhai ko dhund nahi paya? Bahut dino baad basuri aur raja sath hain achha lag raha hai 🥰🥰🥰
Wow superb episode
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐💐💐💐👏🏻👏🏻👏🏻
💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫
😶😶😶😶🤨🤨🤨🤨😵💫😵💫
पहले तो लेखिकाजी दिल से धन्यवाद कि आपने सुध ली हमारी और हमारी कहानी की अपने इतनी लेट पार्ट डाले हैं पर क्या करें छोड़ने की हिम्मत ही नहीं होती रोज़ दिन में एक दो बार चेक कर लेती हूं
पर कुछ भी कहो कहानी हमेशा से नई और बढ़िया लगती है 👌💯
👌👌👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏👏
Nice n good n Shandaar and Fantastic part
Nice part 👍😍👌
Bhut late late parts dete ho ap humari favorite story ke