अतिथि -58

अतिथि -58

      माधव ने अपने मन का सवाल डिंकी से पूछ लिया था, लेकिन उसका दिल अब भी जोरों से धड़क रहा था।
    जाने डिंकी का क्या जवाब होगा? डिंकी यह सुनकर थोड़ा गहरी सोच में डूब गई। वह अपने दोनों हाथों की उंगलियों को एक दूसरे में उलझा कर उनसे खेल रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे अपने मन की उलझन को खोलने की कोशिश कर रही हो।

“क्या हुआ डिंकी तुम तो बहुत परेशान हो गई।”

“नहीं माधव, मैं यह सोच रही थी कि आपके उस दोस्त को इतना सोचना क्यों पड़ रहा है?”

“सोचना तो पड़ेगा ही डिंकी, आखिर दोनों की जिंदगी का सवाल है।”

” वह तो है, लेकिन जब कुणाल को रौशनी से प्यार हुआ होगा, तब रौशनी की तरफ से भी कोई तो ऐसी बात रही होगी ना, जिसके कारण कुणाल उस पर विश्वास कर पाया और अपने प्रेम में एक तरफा ही सही आगे बढ़ पाया। अब अगर उसके जीवन में इतनी बड़ी मुश्किल आई है, तब उसे रौशनी से पूछने के लिए किसी सेकंड थॉट की जरूरत ही नहीं होनी चाहिए। क्योंकि अगर उसे वाकई रौशनी से प्यार हुआ था, तो कहीं ना कहीं रौशनी को भी तो कुणाल से प्यार रहा होगा, और जहां सच में दो लोगों के बीच प्यार है, वहां तो किसी शक या संकोच का सवाल ही नहीं उठता।”

” मतलब?”

“मतलब यह माधव जी कि कुणाल को जैसे ही अपनी बीमारी के बारे में पता चला, उसे सबसे पहले रौशनी से ही बात करनी चाहिए थी। बल्कि रौशनी से बात कर लेता, तो शायद उसकी बीमारी आधी हो जाती। मुझे तो यही लगता है कि उसे तुरंत रौशनी को सब कुछ बता देना चाहिए। मुझे पूरा विश्वास है कि, रोशनी से बात करके कुणाल को ज्यादा बैटर फील होगा।”

माधव के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई।

“लेकिन डिंकी, पूरी दुनिया तुम्हारी तरह सीधी और मासूम नहीं है ना, हो सकता है रौशनी वैसा ना सोचती हो, जैसे तुम सोचती हो।”

” इसका भी उपाय है। अगर रौशनी ऐसा नहीं सोचती जैसा मैं सोचती हूं, तो फिर उनके बीच प्यार है ही नहीं। और तब कुणाल को कुछ और सोचने की जरूरत ही नहीं है। उसे तुरंत रौशनी से अलग हो जाना चाहिए।
   मेरा मतलब है उसे किसी तरह की कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। देखिए माधव जी, बहुत सिंपल सी बात है, अभी उन दोनों की शादी नहीं हुई, इसलिए कुणाल इतना सोच रहा है। अगर वो दोनों शादीशुदा होते तब भी क्या कुणाल अपनी बीमारी के बारे में बताने से पहले इतना सोचता?”

माधव मुस्कुराते हुए जमीन की तरफ देखने लगा।

” आप मुस्कुरा क्यों रहे हैं? बताइए?”

” नहीं कुछ नहीं, तुम बोलो, क्या बोल रही थी?”

“मैं यह कह रही थी कि यह जो हुआ है, इसका उल्टा भी तो हो सकता था ना। यानी रौशनी बीमार पड़ती और उसे कुणाल से कहना पड़ता। तब क्या रौशनी दोबारा सोचती?
    बल्कि उल्टा वह तो अपने टेस्ट के लिए भी कुणाल के साथ ही हॉस्पिटल जाती और उन दोनों को साथ-साथ रौशनी की हालत का पता चलता।  इस सब में कुणाल बायस क्यों हो रहा है?
रौशनी को उसके हक से दूर क्यों रख रहा है? प्यार का मतलब यह तो नहीं ना कि आप सिर्फ अच्छे समय के साथी ही रहे। जीवनसाथी तो वहीं बन सकते हैं, जो अच्छे और बुरे दोनों समय को संग मिलकर ऐसे काट ले कि रास्ते की तकलीफों का पता भी ना चले।”

” बड़ी समझदार हो तुम, मुझे तो लगा था उम्र से इतनी छोटी हो तो तुममें समझदारी तो होगी नहीं।”

“मैं ऐसी भी कोई बहुत छोटी नहीं हूं । बीस की हो जाऊंगी। हां सगाई और शादी में गैप जरूर रखा है घर वालों ने, लेकिन मैं सच कहूं, तो मैं हमेशा आपके साथ रहना चाहती हूं।
    मैं चाहती हूं कि सगाई के साथ ही शादी भी हो जाए।”

” अरे पागल लड़की!  तुम्हारी पढ़ाई, तुम्हारी जॉब, सबका क्या होगा?”

” मैं प्राइवेट एग्जाम दे लूंगी। कॉलेज की जगह मैं अब फुल टाइम रूबी मैम का बुटीक ज्वाइन कर लूंगी। वैसे भी उन्होंने ऑफर किया था।
              मुझे अगले दो-तीन साल में अपना खुद का बुटीक बनाना है, अपना खुद का ब्रांड बनाना है..।”

“डिंकी इसमें हमेशा मैं तुम्हारी पूरी मदद करूंगा।”

” माधव जी आपने आज तक जो कुछ मेरे लिए किया है, उसके लिए दिल से थैंक यू..।”

“इसमें थैंक्स की क्या बात है.. ?अभी तो कुणाल और रौशनी के लिए बड़े-बड़े लेक्चर दे रही थी और अब हमारे लिए वह सारे लेक्चर दूर हो गए।”

माधव की बात सुनकर डिंकी धीरे से मुस्कुराने लगी। डिंकी का हाथ टेबल पर ही रखा था, माधव ने धीरे से उसके हाथों पर अपने हाथ रख दिया।
   
      ” डिंकी तुमसे एक बात कहनी थी।”

“कहिए ना, आप इतना सोचते क्यों है? कह दिया कीजिए बस।”

” जानता हूं तुम्हारी जेनरेशन ज्यादा सोचती नहीं, लेकिन तुम अपनी जेनरेशन से बहुत अलग हो।”

” हमारे बीच इतना भी कोई जेनरेशन गैप नहीं है। अपने आपको बुड्ढा समझना छोड़िए।”

माधव डिंकी की बात पर मुस्कुरा उठा।

“डिंकी, वह कुणाल और रौशनी वाली बात थी ना ….।”

” जानती हूं, किसी से नहीं करनी होगी। मैं किसी से कहूंगी भी नहीं।”

” नहीं, मैं यह कहना चाह रहा था कि…

माधव अभी अपनी बात पूरी कर पाता कि उसका फोन बजने लगा। उसने फोन उठा लिया। फोन उसके डॉक्टर का था।

   फोन उठाकर माधव अपनी जगह से उठकर जरा दूर चला गया। डिंकी ने भी सोचा कोई ऑफिस का जरूरी फोन होगा, इसलिए अपनी कॉफी पीने लगी।

” क्या बात है डॉक्टर?”

माधव ने पूछा।

” माधव क्या तुम इसी वक्त अस्पताल आ सकते हो? तुम्हारे कुछ और जरूरी टेस्ट करने है।”

” इस वक्त?”

” हां मतलब, थोड़ा जरूरी है।”

” लेकिन क्यों? क्या कोई सीरियस बात है?”

” हां माधव, कुछ बहुत सीरियस बात है। तुम्हें कुछ ज्यादा ही प्रिकॉशन लेने होंगे। तुम्हारी सर्जरी भी हमें जल्दी ही प्लान करनी पड़ेगी। वरना ..”

“वरना क्या डॉक्टर?”

” साफ शब्दों में कहूं तो, माधव..

डॉक्टर की बात पूरी भी नही हुई कि माधव की आंखों के आगे अंधेरा सा छाने लगा। उसका डॉक्टर क्या कह रहा था,उसे अब कुछ सुनाई नही दे रहा था।

     कुछ देर पहले की खुशियां हवा में काफूर हो गई।

और वो सोचने लगा, क्या उसके पास वाकई समय नहीं बचा है? क्या ऐसे में उसे अपनी मोहब्बत का इजहार करना चाहिए? लेकिन यह सब सोचने से पहले ही उन दोनों के बीच मोहब्बत का इजहार भी हो चुका है, और उनकी शादी भी तय हो चुकी है!

      पशोपेश में पड़े माधव ने फोन अपनी जेब में डाला और भारी कदमों से डिंकी तक चला आया।

” डिंकी मुझे किसी बहुत जरूरी काम से जाना होगा। तुम कहो तो तुम्हें घर छोड़ दूँ?”

  डिंकी आश्चर्य से माधव का चेहरा देखने लगी। उसकी तो कॉफी भी अभी तक खत्म नहीं हुई थी।

   उसने कप की तरफ देखा,

” कॉफी खत्म कर लूँ? उसने पूछा।

“नहीं मेरे पास इतना वक्त नहीं है। तुम चलोगी तो तुम्हें छोड़ देता हूं, वरना मुझे जाना होगा। माधव पहली बार इतनी कठोरता से डिंकी से बात कर रहा था।
      डिंकी अपनी जगह पर खड़ी हो गई।

” चलिए कॉफी पिलाने आप ही लेकर आए थे, जब आप ही पीने नहीं दे रहे तो मैं क्या कह सकती हूं।”

“हर बात पर इतना गहरा लेक्चर देना जरूरी नहीं है। चुपचाप चलो।”

अपने चेहरे पर कठोरता बनाए हुए माधव आगे बढ़ गया।
    डिंकी को अचानक समझ में नहीं आया कि इन कुछ ही सेकंड्स में हो क्या गया।
एक फोन आया और माधव का मिजाज एकदम से बदल गया।
अब तक उसे इतने प्यार से दुलारता बैठा माधव अचानक इतना कठोर क्यों हो गया? अपने दिमाग पर ज्यादा जोर न देते हुए डिंकी चुपचाप माधव के साथ घर के लिए निकल गई। उसे उसके घर पर उतारकर माधव ने एक बार मुड़ कर उसकी तरफ देखा भी नहीं, और वहां से निकल गया।

    माधव के व्यवहार के कारण डिंकी कुछ देर तक सोचती खड़ी रह गई।
          सोचती हुई डिंकी भारी कदमों से सीढ़ियां चढ़कर ऊपर चली गई।

उसे चुपचाप मुंह लटकाए अपने कमरे में जाते देख सुलोचना ने आवाज लगा दी ।

“चाय चढ़ा रही हूं पिएगी या बाहर से पीकर आई है?”

“मुझे कुछ नहीं खाना पीना।”

कहकर डिंकी ने अपने कमरे का दरवाजा बंद किया और पलंग पर निढाल हो गयी..।

क्रमशः 

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Sushila kumawat
Sushila kumawat
8 months ago

Beautiful part,👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

Umita kushwaha
Umita kushwaha
8 months ago

परिस्थितियों कभी-कभी बहुत विपरीत हो जाती है हमारे जीवन के पर उन्हीं में संमजस्य बिठाना ही एक सही इंसान का कार्य होता है माधव ने भले ही डिकी को पता नहीं पाया हो पर डिकी का जवाब तो उसे मिल ही गया है तो फिर नहीं बताने का तो कोई सवाल ही नहीं उठाता इतनी कठोरता से बात करने की वजह अगर वह रास्ते में ही डिकी को सारी बात समझा देता तो यह नौबत नहीं आती और दिनकी का दिल इस तरीके से नहीं दुखता भले ही उस पर दुखों के पहाड़ टूट जाते लेकिन वह साथ माधव का ही देती बहुत बुरा लग रहा है दोनों के लिए ही की कहां तो अपने जीवन के सुनहरे सपनों को सजाने का समय था और कहां आप दवाइयां डॉक्टर और जिंदगी और मौत के बीच में आकर लटक गए हैं पर फिर भी मन में एक उम्मीद है कि सब कुछ सही होगा

Last edited 8 months ago by Umita kushwaha
Nisha
Nisha
9 months ago

Madhav kah nahi paya.ye galat hai itna waqt bhi nahi lagta sach bolne me upar se dinki ki soch positive hai tab bhi.madhav ka aisa waywhar use tod dega

Ganeshi chauhan
Ganeshi chauhan
9 months ago

बहुत दिन के बाद सारे पार्ट एक साथ पढ़े
सिर्फ इतना ही कहना है कि माधव को ठीक कर दीजिए

Savita Agarwal
Savita Agarwal
9 months ago

Dr ki baat sun kar Madhav ka dimag ghum gya,wah jaldi me Dr ke pass nikal gya,Ab aagya kya hoga seeing in the next part.

Geeta Prasad
Geeta Prasad
9 months ago

Madhav ko kunaal ki kahani na kh kar apni hi bt sidhe Dinki ko bta deni chahiye thi…is tarah apne behaviour se to wo Dinki ko hurt hi kr rha h…Dinki ko bta kr wo kuch sukoon pa sakta tha…..ab uske dimag me ek tension ye bhi rhegi ki Dinki ko btaun ya na bataun…..

Waise ye kya ho gya Madhav ko ..khushi k pal aae to sath me dukh k badl bhi aa gye…
Sab sahi ho jae bas🙏🏻

Aruna
Aruna
9 months ago

👌👌🙏👌👌👏👏👏👏

Shanu singla
Shanu singla
9 months ago

☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️

Ritu Jain
Ritu Jain
9 months ago

No aisa kuch serious nhi hona chahiye pls pls 🙏❤️♥️❤️♥️❤️♥️♥️❤️❤️♥️♥️❤️❤️♥️

Hetal shah
Hetal shah
9 months ago

😰😰 Madhav chah kar bhi kuchh nahi bata paya Dinki ko….Dr.ke call ne usse aur jyada tension mae daal diya hai…..Dinki usake badalate mood ko samajh he nahi payi…….toh kya Madhav Dinki ki life ka ATITHI he ban kar rah jayega ?? Jo aata hai aur chala jata hai…😟