
अतिथि -56
माधव ने डिंकी को फ़ोन तो लगा लिया, लेकिन उस वक्त भी उसके दिमाग में यही चल रहा था की डिंकी को कैसे वो अपनी हालत के बारे में बताएगा..।
खरीदारी के वक्त अपनी होने वाली सास के तानो से दुखी डिंकी खरीदारी के बाद सामान देख कर खुश भी नहीं हो पा रही थी.. ।
उसके दिमाग में रह रह कर माधव की माँ के तीखे बोल गूंज रहे थे।
माधव की माँ हर कदम पर उसकी माँ को नीचा दिखाने की कोशिश में लगी थी..।
जिस चीज पर सुलोचना हाथ रख दे, उसे तो खरीदना ही नहीं बल्कि उसकी इतनी कमियां गिना देना कि सुलोचना अपनी पसंद पर शर्मिंदा हो जाये। यही सब लगातार देख देख कर डिंकी ऊब गयी थी..।
और कहीं न कहीं इसी सब में उसने भी एक ज़िद पाल ली कि, अब जो भी हो जाये अपने और माधव के कपड़े वो ही डिज़ाइन करेगी !
इसी बीच उसने दो एक बार माधव से बात करने की कोशिश की, लेकिन माधव ने फ़ोन नहीं उठाया..।
डिंकी का मन एकदम ही उदास हो गया !
ऊब कर वो अपने पलंग पर निढाल पड़ी अपने मन को तरह तरह से समझाने की कोशिश कर रही थी.. लेकिन उसका मन बार बार सुलक्षणा के व्यव्यहार पर अटक जाता था..
उसने कई बार इस बात पर भी ध्यान दिया था कि माधव अपनी मां के सामने ज्यादा कुछ नहीं बोलता। उसकी मां जो कह दे, वह चुपचाप सर झुकाकर मान लेता है। यहां तक की उसकी मां ने नाश्ते के बाद सबके लिए आइसक्रीम परोसी, माधव को बटरस्कॉच फ्लेवर बिल्कुल भी पसंद नहीं था, और यह डिंकी अच्छे से जानती थी।
छह महीने की मुलाकात में जब वह माधव की पसंद नापसंद जान गई, तो क्या इतने साल अपने साथ रखकर, पाल पोसकर उसकी मां नहीं जान पाई होगी।
उन्होंने आइसक्रीम की कटोरी उठाकर माधव के हाथ में रख दी थी, यह जानते हुए भी कि माधव इसका एक कौर भी नहीं खा पाता, पर माधव चुपचाप पूरी आइसक्रीम निगल गया।
डिंकी को समझ में आ रहा था कि उससे खाया नहीं जा रहा, लेकिन फिर भी वह खाता गया। डिंकी को ये कोई बात बड़ी अजीब लगी थी। आखिर है तो माधव की मां ही, भले ही सौतेली सही। लेकिन ऐसा भी क्या अपनी मां से डरना, और यह बात एक बार नहीं डिकी ने कई बार नोटिस की थी।
कहीं ना कहीं मंजरी से सगाई के लिए तैयार होने के पीछे भी माधव का यही डर था, और अब माधव के उस डर की छूत डिंकी को भी लग गई थी। उसे लगने लगा था कि उसे जिंदगी भर अपनी सास से दब कर, डर कर ही रहना होगा।
ऐसा तो नहीं है कि उन दोनों के बीच समस्याएं नहीं पैदा होंगी, वह अपनी तरफ से कितनी भी कोशिश कर ले लेकिन माधव की मां कोई ना कोई समस्या जरूर खड़ी कर देगी। और तब उसे माधव की तरफ से भी किसी मदद की कोई उम्मीद नहीं थी।
डिंकी अपने छोटे से तकिये को अपने सीने से लगाए, अपनी गले में उमड़ती रुलाई को रोकने की कोशिश कर रही थी। उसके घर में भले ही बहुत पैसे नही थे, लेकिन उसके माता-पिता ने उसे बिल्कुल राजकुमारी की तरह पाला था। उसके घर की हर छोटी से छोटी चीज भी उसकी अनुमति से आया करती थी। हर बात पर उसकी पसंद नापसंद देखी जाती थी। दीवाली पर किसके लिए कैसे कपड़े आएंगे, घर की सजावट का कौन सा सामान आएगा, कौन सी मिठाइयां बनाई जाएगी, सब कुछ वही तो तय करती थी।
छोटा सा चिंटू इस बात पर उससे उलझ जाता था। और बार-बार अपनी मां का आंचल पड़कर वह रूआंसा हो जाता था, कि मम्मी तुम सिर्फ इस डिंकी की बात सुनती हो। मेरी तो कोई बात सुनती ही नहीं।
और प्यार से उसके गालों को चूम कर उसकी मां लाड लड़ा जाती थी।
” बेटा वह तो अपने घर चली जाएगी, उसके बाद तेरी ही तो चलनी है ना। यहां तो अभी उसकी चल लेने दे।”
उन दोनों की बातों को वह हमेशा हंसी में उड़ा जाती थी। लेकिन आज जब सच में वह पराए घर जाने वाली थी, तो उसका सारा उत्साह जाने कहां बहता चला जा रहा था…।
अपने ख्यालों में डिंकी का ध्यान अपने फोन पर था ही नहीं, दो बार पूरी रिंग बज कर फोन कट गया..
तब माधव ने तय किया कि उसे डिंकी से जाकर मिल लेना चाहिए, और वो डिंकी के घर की तरफ बढ़ा गया..।
डिंकी के घर पर वो ऊपर जाने ही वाला था कि डिंकी उसे फ़ोन करने लगी..
फ़ोन न उठा पाने का कारण वो बता पाती उसके पहले ही माधव ने उसे नीचे बुला लिया..।
उदास मन और थके हुए कदमो से डिंकी नीचे चली आयी..
माधव ने कितना कुछ सोच रखा था, लेकिन उसके इजहार के पहले ही दोनों की शादी तय हो गयी थी, और अब जब उन दोनों की ज़िन्दगी का सबसे सुनहरा समय शुरू होने वाला था, ये भारी मुसीबत उसके गले पड़ गयी…।
वो खुद भी बोझिल क़दमों के साथ वहीँ पेड़ के नीचे रखी बेंच पर बैठ गया, डिंकी सीढ़ियां उतर कर तेज़ी से उस तक चली आयी..
माधव तक पहुँच कर उसका माधव से गले लगने का उत्साह, संकोच में सिमट गया और हाथ बांधे एक तरफ खड़ी हो गयी..
“आप ऊपर क्यों नहीं आये ?”
“सिर्फ तुमसे मिलना था डिंकी!”
डिंकी का चेहरा गुलाबी हो गया..
दिन भर का गुस्सा, नाराज़गी जैसे सब उड़न छू हो गए..।
उसे लगा माधव अपने अंदाज़ में उसे प्रोपोज करेगा !
“क्यों ?” लरज कर उसने पूछ लिया..
डिंकी के चेहरे पर छाया उजाला देख माधव का कुछ भी गलत कह कर इन पलों के स्वर्गीय सुख को समाप्त करने की मंशा चूक गयी..।
वो डिंकी के मासूम चेहरे के सामने हार गया, वो खड़ा हुआ और उसने पहली बार डिंकी को खीँच कर अपने गले से लगा लिया !
एक गहरे सुकून में उसने आंखे मूंद ली…
क्रमशः

कोई अच्छा नहीं लग रहा दिल पर एक बड़ा बोझ सा लग गया है की पता नहीं अब आगे क्या होगा एक तो वैसे ही dinki सुलक्षणा की हरकतों की वजह से परेशान है उसका रोकना टोकन नnukur और तने कसना किसी भी लड़की को हताश कर सकता है पर यह सब को झेल भी ले लेकिन माधव की बीमारी की बात वह नहीं झेल पाएगी सच कहा है कि यह सुनहरा अवसर था उन दोनों के बीच में पर ab to भी पता नहीं इस मनहूस घड़ी में कहां खो गया है
जब से माधव की बीमारी के बारे में पता चला है ऐसा लग रहा है कि सब कुछ खत्म हो गया है पता नहीं सुलोचना इस बात पर कैसे रिएक्ट करेंगे
Madhav ko sach bata dena chahiye warna sab uljh jayega
बेहतरीन भाग मैं समझती हूं कि dinki इस समस्या से माधव को उबार लेगी।ओर कहीं न कहीं इस परेशानी के पीछे माधव की मां ही तो जिम्मेदार नहीं।😒
समझ नहीं आ रहा माधव अपनी माँ से प्यार करता है इसलिए उनकी हर बात मानता है या फिर कोई डर है उसके मन में जो गलत देखकर भी कुछ नहीं कहता उनसे पर डिंकी के लिए तो सियापा ही है बेचारी ये सब सोच रही अपनी होने वाली सास के बारे में कि कैसे निभेगी उनकी।
डिंकी को आज लग रहा वो परायी होने वाली है,जिस घर में जन्म हुआ, बड़ी हुई इतने साल बिताए,सब कुछ अपनी मर्ज़ी से किया और बस एक शादी का नाम आते ही वो घर पराया हो जाता ये कैसा नियम बनाया है बनाने वाले ने शायद इसीलिए बेटियों को पराया धन कहते है।
मै खुद सोच रही थी माधव चला तो गया डिंकी को अपनी बीमारी के बारे में बताने पर क्या वो डिंकी का मासूम चेहरा देखकर कुछ कह पाएगा और देखो बस गले से लगा लिया शायद यही तो सुकून झप्पी चाहिए थी उसे 😊बेहद खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻।
Dr sahiba ye kya bum phuta,aisa nahi bardast ho raha,Dono kitnaya piyary hai,sub sahi ho.
😟😟 Dinki hone wali saas ke behavior se pateshan hai.Madhav apani maa se darata hai ye wo samajh gayi hai.wahi Madhav apani bimari sun kar chinta mae hai.wo Dinki ko bata nahi paa raha…..Madhav ko kuchh naa ho 🙏
Superb part. Madhav ko koi bimari nahi honi chahiye woh bilkul thik rhe ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️
Beautiful part लेकिन भावुक भी क्योंकि सारा कुछ ऐसा है कि न तो मना कर सके डिकी और न कबूल सास ने फंदा ही ऐसा लगाया कि डिकी की खुशी बह गई है। और अब माधव को ऐसी बीमारी से ग्रस्त कर दिया कि वो भी परेशान हैं
So beautiful ❤️❤️❤️❤️❤️
Nice ji