
अतिथि -50
इस सहभोज के दौरान दोनों परिवार की औरतों के बीच की बातचीत बहुत सहज नहीं रही..।
वही सुलक्षणा जो कभी अपनी बातों और व्यवहार से उस परिवार का दिल जीत चुकी थी, आज बात बात पर बिजली गिराने पर आमादा थी..।
और सुलोचना जिसका संयम और धैर्य सदा से उसका आभूषण रहा था, आज बात बात पर अपना धैर्य खोकर अधीर हुई जा रही थी..।
इन ढेर सारी बातों के बीच एक अच्छी बात हुई, आखिर शादी की तारीख तय हो गयी !
सुलक्षणा ने कह दिया कि इस बार सगाई का तामझाम नहीं किया जायेगा, वरना पिछली टूटी सगाई की कटु स्मृतियाँ दंश दे जाएंगी…।
“हमें तो बस यही लग रहा है की हम विमला से आंखे कैसे मिलाएंगे.. ? क्यों जी ?”
केदार इस सवाल का जवाब देने मे असमर्थ थे। वो क्या कहते ? बात तो सही थी, मंजरी ने जो किया उसके बाद अब उससे माधव के विवाह का सवाल ही नहीं उठता था?
लेकिन इस सब मे विमला और उसके पति का तो कोई दोष नहीं था !
केदार और विनोद ने यही निष्कर्ष निकाला की वो चारों लोग विम्मो के घर जाकर उससे मिल कर माधव और डिंकी की बात बता देंगे !
लेकिन इस बात से माधव जरा उखड़ा सा गया !
हफ्ते भर बाद की ही तारीख तय कर दी गयी थी, अब दोनों परिवारों को तैयारियों मे जुटना था..
‘”अब भाई गहने कपड़े तो तुम औरतें मिल कर ही ले लेना ! क्यों ठीक है ना ?”
केदार ने सुलक्षणा की तरफ देख कर कहा..
“हाँ उसके लिए हम लोग चले जायेंगे, आप चिंता न करे !”
अगले दिन दुकान पर पहुँचने का समय तय कर दोनों परिवारों ने आपस मे विदा ली..
बड़े भारी मन से सुलोचना घर चली आयी..
घर पर पड़ा ताला भी उससे खोला नहीं जा रहा था। जैसे तैसे ताला खोल वो अंदर गयी और चप्पलें एक तरफ फेंक वो सोफे पर पसर गयी..
उसे लगा जैसे घंटों से उसके दिल पर जो बड़ा पत्थर बांध दिया गया था, वो घर पहुँचते ही किसी ने बड़े यत्न से फेंक दिया है..
उसके बगल वाले सोफे पर विनोद भी फ़ैल गया..।
“सुलोचना, एक कप अच्छी सी चाय मिल जाती तो मजा ही आ जाता !”
“वहाँ से भी तो पीकर आ रहे हैं, मन नहीं भरा क्या ?”
जलती आँखों से सुलोचना ने विनोद को देखा, लेकिन वो सुलोचना के मन में चल रहे हाहाकार से विलग अपनी ही सुखद दुनिया मे मस्त था..।
उसके अनुसार उसका सबसे प्यारा दोस्त उसकी बेटी का ससुर बनाने जा रहा था। इससे बढ़ कर निश्चिंतता की बात क्या हो सकती थी.. ?
केदार का रुतबा और पैसा इतना अधिक था कि वो बिना किसी लेनदेन के ही शादी करने को तैयार था। ये भी विनोद के लिए बहुत सुकून वाली बात थी..
घर बैठे उसकी राजकन्या के लिए बिलकुल राजकुमारों सा वर मिल गया था !
अपने सुख स्वप्न में व्यस्त विनोद का ध्यान सुलोचना के बिगड़े मूड पर था ही नहीं..।
“अरे होटल की चाय भी कोई चाय होती है, ना रंग न स्वाद.. ऐसा लगता गटर का पानी पी रहा हूँ !”
“अच्छा मतलब गटर का पानी भी टेस्ट कर रखा है आपने !”
बैठे बैठे ही सुलोचना बोल पड़ी..
उसका उठने का बिलकुल मन नहीं था…
उन दोनों को बातों में लगा देख डिंकी रसोई में चली गयी..
कुछ देर में ही वो चाय बना कर ले आयी..।
“अरे वाह, देखो हमारी बिटिया कितनी समझदार हो गयी है.. चाय भी बना लायी !”
बड़े कड़वे मन से सुलोचना ने चाय का प्याला थाम लिया…!
रह रह कर उसके मन में यही बात आ रही थी कि सुलक्षणा के साथ उसकी गाय सी बेटी कैसे निभा पायेगी… ?
उसी बीच सुलक्षणा का फ़ोन आ गया, अगले दिन किस वक्त पर किस दुकान में मिलना है, ये सब हिदायत देकर उसने फ़ोन रख दिया। लेकिन अगला पूरा दिन वापस सुलक्षणा के साथ बिताना होगा, ये सोच कर ही सुलोचना को घबराहट सी होने लगाई..
कैसी अजब सी मनहूसियत फ़ैल जाती थी उन लोगो के साथ रहने पर..।
माधव भी जैसे हंसना बोलना बंद कर देता था।
केदार भाई साहब तो कम ही बोलते थे, लेकिन सुलक्षणा का गर्वदीप्त चेहरा उसके आसपास सभी को जैसे खुद से तुच्छ होने का एहसास करवा देता था !
चाय पीकर सुलोचना अपने कमरे में चली गयी !
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गलती तरीके से झूठे दस्तावेजों के सहारे डिंकी को चोरी के केस में फंसवाने के जुर्म में भूषण वापस सलाखों के पीछे था.. पहले तो उसने सच्चाई कुबूल नहीं की थी, लेकिन जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तब उसे सब स्वीकारना ही पड़ा !
एक एक कर उसने सारा सच उगल दिया।
रूबी और करुणा आश्चर्य से उसे देख रहे थे। किसी ज़माने में रूबी का दाहिना हाथ हुआ करता था भूषण।
उस पर आँख मूंद कर भरोसा करती थी वो, लेकिन उसके भरोसे को चकनाचूर कर दिया था भूषण ने..।
सब कुछ बताते हुए भूषण ने इस चोरी में योगिता का शामिल होना भी बता दिया !
इन दोनों ने मिल कर सारे एक्सक्लूसिव डिज़ाइन्स बड़े ब्रैंड्स को बेच कर करोड़ो कमा लिए थे और आज तक रूबी को इसकी भनक भी नहीं लगी थी..।
लेकिन जब रूबी को मालूम चला, तब इन दोनों ने इस मामले में डिंकी का नाम उलझाने की कोशिश की, और नाकाम साबित होकर अब सलाखों के पीछे था..।
भूषण की गवाही के बाद अब पुलिस योगिता को धर दबोचने निकलने वाली थी।
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रसोई में दीपक का टिफिन पैक करती योगिता कुछ गुनगुना रही थी, उसे अब तक भूषण के बारे में कुछ भी मालूम नहीं था। उसे यही पता था कि इस सब में डिंकी फंस चुकी है ! और जबसे उसे ये मालूम चला था उसकी ख़ुशी का ठिकाना न था..।
उसे भूषण के दिलफेंक रवैये पर कतई भरोसा न था.. उसे ऑफिस की हर सुंदर लड़की से जलन होती थी, और लगता था कहीं भूषण उस पर डोरे न डाल रहा हो।
चाय प्यालों में छान कर वो बाहर ले आयी.. दीपक ने जूते के तस्मे बांधे और चाय के लिए आवाज़ लगाने ही वाला था कि योगिता चाय लिए हाजिर हो गयी..।
“लीजिये आपकी चाय.. आज टिफिन में आपकी पसंदीदा मशरूम मटर की सब्जी और रोटियां रखी है.. पूरा टिफिन ख़त्म कर के आना !”
“हम्म !” एक रुखा सा जवाब देकर दीपक अपनी चाय पीने लगा..।
उसने जब से योगिता की फ़ोन पर की बातें सुनी थी उसका मन अस्थिर हो गया था….
उसे लगा था योगिता उससे खुद ही सब कह देगी, लेकिन इतने इंतज़ार के बाद भी योगिता ने कुछ नहीं बताया था। बल्कि ये सोच कर कि दीपक ने शायद कुछ नहीं सुना वो और आश्वस्त हो गयी थी..।
उसके रूखे सूखे से व्यवहार का भी योगिता पर कोई असर नहीं था..।
वो अपने और भूषण में ही मगन थी !
वो अपनी चाय पीते हुए भूषण को संदेश भेजने में व्यस्त थी, तभी उसकी बेटी अपने कमरे से बाहर निकल आयी…
“मम्मा, आज मेरे स्कूल पीटीएम के लिए हमे जाना है, आपको याद है ना ?”
बेटी अपनी माँ से अलग, पढ़ने लिखने वाली होशियार लड़की थी !
“हाँ याद है, लेकिन मेरा ऑफिस रहेगा शैली.. तुम पापा से क्यों नहीं कहती ?”
दीपक ने रूखी नजर से योगिता को देखा और अपनी बेटी को अपने पास बुला लिया..
“मैं चलूँगा शैली, तुम्हारे साथ ! तुम्हारी माँ को हमसे ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट काम है !”
“हाँ डैडी, वो तो मैं भी नोटिस कर रही हूँ, आजकल मम्मा अपने में ही बिज़ी रहती है..।
इन्हे हम लोगो से कुछ लेना देना नहीं है !”
“कोई बात नहीं, मैं तो हूँ ना तुम्हारे साथ !”
शैली ने अपनी माँ की तरफ देखा और उसके पास आकर बैठ गयी.. शैली के बैठते ही चौंक कर योगिता ने अपना मोबाइल एक तरफ रख दिया..
“बोलो क्या हुआ ?” चौंक कर योगिता ने पूछा..
शैली कुछ देर तक अपनी माँ की तरफ देखती रही, फिर धीमे से उसने कहना शुरू किया..
“मम्मा, गरी दी बता रही थी, उनकी फ्रेंड अनुराधा जो आपके ऑफिस में काम करती है, उन्हें किसी झूठे केस में पुलिस पकड़ कर ले गयी !”
“तुम गरिमा से कब मिली ? उससे दूर रहा करो, वो और उसकी सहेलियां अच्छी लड़कियाँ नहीं हैं ! कितनी बार कहा है गरिमा से दोस्ती ख़त्म करो अब..
पिछली कॉलोनी की बात अलग थी, अब वहाँ से हमें यहाँ शिफ्ट हुए लगभग चार साल हो गए और तुम अब भी वहाँ के दोस्तों के कॉन्टेक्ट में हो ? ये फ्रेन्डबुक, स्नैपग्रुप ये सब बकवास एप है.. ! मेरा बस चले तो तेरे फ़ोन से सब हटा दूँ !”
बड़बड़ाती हुई योगिता उठी और अपने कमरे में अपना पर्स लेने चली गयी..।
उसे ऑफिस निकलना था,उसी वक्त दरवाज़े पर घंटी बजी..
“इतनी सुबह कौन हो सकता है ?” कह कर दीपक दरवाज़ा खोलने चला गया..
दरवाज़ा खोलते ही वो आश्चर्य से सामने खड़ी पुलिस को देखने लगा..
“जी कहिये ?”
“योगिता शर्मा का घर यही है ?”
“हाँ जी.. क्या हुआ ?”
“उन्हें थाने लेकर जाने का आदेश है !”
एक लेडी पुलिस वाली ने कहा.. अब तक में अपना पर्स टांगे योगिता भी बाहर निकल आयी थी.. सामने खड़ी पुलिस को देख वो सकते में आ गयी..
“क्या हुआ ?” उसने दीपक को देख कर पूछा और दीपक दरवाज़े से एक ओर हो गया..
“चलिए, आपको हमारे साथ चलना है !”
“व्हाट ? लेकिन मैं क्यों चलूंगी.. नो नेवर !”
“ज़्यादा तेवर न दिखाइए आपकी सारी सच्चाई सामने आ चुकी है.. आपके दोस्त भूषण ने पुलिस के सामने सब कबूल कर लिया है।
और सिर्फ अभी की चोरी नहीं, आप लोग पिछले जितने समय से जो जालसाजियां कर रहे हैं, वो सब आपका दोस्त वहाँ बता चुका है.. अब आपके पास कोई ऑप्शन नहीं बचा है.. !”
पुलिस वाली के ठसकेदार जवाब के बाद अब योगिता के पास कुछ नहीं बचा था, कहने को..
उसे खीँच कर उस पुलिसवाली ने आगे किया और साथ लेकर निकल पड़ी…
दीपक ने तुरंत अपनी दुकान के लड़को को फ़ोन कर के दुकान संभालने की हिदायत दी और अपने वकील मित्र के घर की तरफ बढ़ गया..
क्रमशः

सुलोचना के मन पर रखा वह बड़ा सा बोझ जब तक नहीं है जाएगा जब तक की सुलक्षणा का व्यवहार को vo अपनी बेटी को लेकर उसकी बेटी के लिए सही है सुलोचना की चिंता अपनी जगह जायज है अपनी मासूम बेटी को कैसे हो एक ऐसी तेज तर्रार औरत के हाथों में थमा दे जो उसे कतई पसंद नहीं करती सास बहू का रिश्ता जीवन भर का साथ होता है और अगर शुरुआत में ही उसमें कोई खटास आ जाती है तो वह जीवन पर्यंत ऐसे ही बनी रहती है सुलोचना की समझदारी उसे हाथ पीछे खींचने के लिए मजबूर कर रही है पर अपनी बेटी की खुशी के खातिर वह कुछ नहीं बोल पा रही है
बुरे कर्मों के नतीजे हमेशा ही बुरे निकलते हैं वह चाहे देर से हो या जल्दी योग्यता के बुरे कर्मों का नतीजा आज उसके सामने आने वाला है अपनी बेटी के जीवन को नजरअंदाज करके और अपने पति के साथ छ ल करके वह कभी भी खुश नहीं रहेगी एक न एक दिन भंडा फूटता है और सभी कर्म अपने आंखों के आगे किसी चलचित्र की तरह घूम जाते हैं
Ye sahi hua
ये तो बहुत अच्छी खबर है..माधव और डिंकी की सगाई होने वाली है पर सुलक्षणा का व्यवहार मुझे जरा भी अच्छा नहीं लगा घमंडी औरत। सुलोचना माँ है वो तो चिंता करेगी ही अपनी बेटी की।
ये बहुत बढ़िया हुआ जो साले चोरो की रेलगाड़ी पकड़ी गई 😂मज़ा ही आ गया कसम से मै तो कहती हूँ चोरनी मतलब योगिता को एक दो थप्पड़ पड़ ही जाए तो अक्ल ठिकाने आ जाए। कुछ भी कहो दीपक बहुत नेक दिल बंदा है।
लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻
Buraai ki hamesha haar hoti hai ye aaj Yogita aur Bhushan ko samjh aa jana chiye.
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Ye sulakshna ke asar theek nahi .. hai to khurafati
Jaisi karni,vaisi bharni. Maza aa gya aj ka part padh kar.Madhav or Dinki ki shadi ki tarikh fix ho gyi h,to whin Bhushan or Yogita Hawalaat phunch gye…
👌👌👌👌👌👌👌👌
Manjri ko bhi saza milni chahiye.
👌👌👌👌👌👌👌
Nice part. akhir sachai samane aahi gayi.
🤗👍 good part.Sulakshana ke lakshan jara bhi achchhe nahi hain.Sulochana ko hamesha nicha dikhayegi yaa sudhar aauega ??? Dinki sidhi sadi hai,abhi umar bhi kam hai.maa ko toh tension hogi he.phir bhi shadi ki tarikh toh tay ho gayi. Bhushan toh duba Yogita ko bhi le duba…Dipak ko dhokha dene ki saja hai ye Yogita ko bechara phir bhi advocate ke liye doud gaya……