
जीवनसाथी -3 भाग 143
परी का हाथ थामे शोवन बाहर चला आया..
बाहर पूरा राज परिवार एक साथ खड़ा था, सब आंखे फाडे उन दोनों को देखने लगे..
पिया भी रूपा के पास ही खड़ी थी..
वो भी आश्चर्य से उन दोनों को देखने लगी..
“शोवी… ?”
“मॉम आप सबसे कुछ कहना चाहता हूँ !”
शोवन निर्भीकता से खड़ा था लेकिन सदा की निर्भीक परी आज घबराई हुई थी..
उसने नहीं सोचा था कि उसकी कही बात शोवन इतना दिल पर ले लेगा..
“शोवन.. बाद में बात करेंगे !” परी ने उसे रोकना चाहा लेकिन शोवन अब रुकने वालों में से नहीं था..
जया और रूपा दोनों का ही ध्यान उन दोनों के हाथो पर था..
“मैं आप सब से कहना चाहता हूँ कि मैं और परी एक दूसरे को पसंद करते हैं, और हम एक दूसरे के साथ ज़िन्दगी बिताना चाहते हैं..।”
“क्या ? क्या मतलब है तुम्हारा ?”
रूपा ने खीझ कर पूछा..
“हम शादी करना चाहते हैं !” बिना किसी लाग लपेट के शोवन बोल गया…
“ऐसा कैसे संभव है ?” रूपा ने गुस्से से पिया की तरफ देखा..
पिया खुद परेशान सी खड़ी थी..
“शोवन अभी तुम घर चलो, ये सब बातें बाद में होंगी !”
वहीँ खड़े आभास के माता पिता भी उन लोगो के पास चले आये..
“ये सब क्या चल रहा है यहाँ ? कोई बताएगा हमे ?”
आभास की माँ का जलता हुआ सवाल जया का कलेजा जला गया..
“हमे तो उसी दिन शक हो गया था, जब इन दोनों को पहली बार लिफ़्ट में साथ देखा था।लेकिन हमे लगा राजपरिवार की लड़की है, अपनी सीमाएं जानती होगी, लेकिन यहाँ तो मनमानी चल रही है..।
महारानी रूपा आप ही ने हमें इस रिश्ते के बारे में बताया था, और हम लोग चले आये थे..
हम विदेश में बसे जरूर हैं, लेकिन हमें अपनी संस्कृति से प्रेम है..। वहाँ रहने का ये मतलब नहीं कि हम वहाँ के कल्चर को अपना लेंगे..।
हमे अपने इकलौते बेटे के लिए राजपरिवार की कन्या ज़रूर चाहिए, लेकिन उसका ये मतलब नहीं कि किसी भी चरित्रहीन को उठा कर हम अपने घर की बहु बना लेंगे !”
आभास की माँ का ये विषबुझा तीर सुन कर भी न रूपा के मुहं से कुछ निकला, न जया के मुहं से, लेकिन शोवन चुप नहीं रह पाया….
“किस हक़ से आप परी को अपने घर की बहु बनाना चाहते हैं, जब आप उसकी इज्जत तक नहीं कर सकते ?.
आज वो बहु बनी भी नहीं और आपने उसकी इज्जत पर अपना फरमान सुना दिया? उसे चरित्रहीन घोषित कर दिया? वो भी महज एक लड़के के साथ उसे देखने के कारण, तो इस बात की क्या गारंटी कि आप बाद में उसे कुछ नहीं कहेंगे ?”
शोवन ने इतना बोलने के बाद रूपा और जया की तरफ देखा और वापस बोलने लगा..
“वैसे तो परी प्रिंसेस है, लेकिन उसके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय आप लोगो ने बिना उसकी मर्जी जाने ही ले लिया.. कम से कम उससे पूछना तो था कि वो क्या चाहती है ?
परी, तुम क्या चाहती हो ये सबको बता दो !”
शोवन ने पलट कर परी की तरफ देखा, परी इस सबसे जरा घबरा गयी थी..
उसका परिवार सामने खड़ा था, उसके पिता थे, माँ थी बड़ी माँ थी और था वो मेहमान परिवार जिनसे अभी उसके रिश्ते की बात तय हुई थी..।
वो शोवन को पसंद करती थी, प्यार करती थी, लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं था कि वो दिलेरी से अपने परिवार के सामने इस बात को कबूल कर पायेगी..।
शर्म और संकोच से वो गहरे रसातल में धंस गयी..।
उसे कभी नहीं लगा था कि उसके जीवन में ऐसा भी पल आएगा जब वो शोवन के सामने अपने पिता और परिवार को अधिक वजनदार पाएगी..।
आज तक वो ही शोवन के पीछे पागल हुई घूमती थी, और शोवन अपनी जिम्मेदारियों को उसके ऊपर तरजीह देता आया था, लेकिन आज जब आने वाले जीवन के लिए निर्णय लेने का वक्त आया तब उसकी ज़बान पर ताला पड़ गया।
उसके पिता उसके करीब चले आये..
“बोलो परी.. क्या शोवन सच बोल रहा है ?”
उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। बावजूद उनकी आंखे जिस गहराई से परी को देख रही थी, मानो उसके अंतस्तल में झाँक के देखना चाहती हो और मानना चाहती हो कि उनकी छोटी सी प्रिंसेस उनकी लाड़ली कभी उनके ख़िलाफ़ जाकर कोई निर्णय नहीं लेगी..
अपने पिता की आँखों में देखती परी ने न में गर्दन हिला दी..
“नहीं डैड… हम और शोवन अच्छे दोस्त है…। थोड़ा ज़्यादा अच्छे, लेकिन सिर्फ दोस्त.. हम वही करेंगे जो आप सब चाहेंगे !”
रूपा जया और जय ने गहरी सी साँस भरी और शोवन की तरफ देखने लगे..।
जया तुरन्त परी के पास चली आयी… उसने उसके हाथ थाम लिए..
परी ने नजरें झुका ली..
उसे समझ में आ गया कि इन कुछ पलों की घबराहट ने उसके मुहं से बहुत गलत बात निकलवा दी है। और अब शोवन का आत्मसम्मान उसे कभी परी के पास वापस लौटने नहीं देगा..।
शोवन ने परी की तरफ एक बार देखा और दुबारा बिना कुछ पूछे वहाँ से चला गया..
परी भरी भरी आँखों से उसे जाते देखती रही…
पिया ने एक भरी सी नजर से परी को देखा और फिर महलवासियों को प्रणाम कर शोवन के पीछे तेज़ कदमों से निकल गयी..
शोवन गाड़ी में बैठा अपनी माँ का ही इंतज़ार कर रहा था, पिया ने आते ही ड्राइविंग सीट संभाली और गाड़ी वहाँ से निकाल ले गयी..
शोवन चुपचाप बैठा बाहर देखता रहा, उसके मन में जो हाहाकार मचा था उसके शांत चेहरे से नजर नहीं आ रहा था, लेकिन पिया उसकी माँ थी, बचपन से उसे पाला था उसने..।
उसकी एक एक आदत से परिचित थी वो..।
शोवन कभी भी अपनी उद्विग्नता जाहिर नहीं करता था..
उसका सुख भले संसार का हो, लेकिन उसका दुःख उसका अपना था, बेहद निजी..।
और अपने दुःख को वो कभी अपने भाई या माँ किसी के साथ साझा नहीं करता था..
गाड़ी चलाते हुए पिया ने समर को मेसेज भेज दिया..
कुछ देर बाद वो लोग पहाड़ी वाले रास्ते पर थे..
पिया ने सोचा कि शायद शोवन उससे पूछेगा कि वह लोग कहां जा रहे हैं? लेकिन शोवन इस वक्त खुद में इस कदर खोया था कि उसने कोई सवाल नहीं किया। पहाड़ी वाले रास्ते पर दूर एक चाय की गुमटी थी..
वहाँ पहुँच कर पिया ने गाड़ी रोक दी…
शोवन अब भी गुमसुम सा बैठा था..
“आओ शोवी !” पिया ने शोवन की तरफ का दरवाज़ा खोला और उसे बाहर आने कहा..
शोवन चुपचाप बाहर चला आया..
शोवन को साथ ले, पिया उस गुमटी तक चली आयी..
चाय वाले को चाय देने का बोल कर वहीँ ज़रा दूर रखी एक लकड़ी की बेंच की तरफ वो बढ़ गयी, शोवन भी उसके साथ बढ़ गया..
ये पहाड़ी पर चढ़ाई वाला रास्ता था, इस बेंच पर बैठने पर नीचे सारा शहर दिखाई देता था। पिया को ये जगह बड़ी पसंद थी। पहले भी वह जब कभी परेशान होती थी, अक्सर यही चली आती थी। आज भी उसने वही किया।
शोवन उस बेंच पर बैठा सामने सारे शहर को देख रहा था। उसकी निगाहें वहीं टिकी हुई थी। इतनी दूर से महल नजर तो नहीं आता था, लेकिन एक धूमिल सी परछाई दिखती थी। वहां जाकर शोवन की आंखें अटक गई।
पता नहीं इस वक्त परी क्या कर रही होगी? लेकिन इसके कुछ देर पहले परी ने जो भी किया वह बहुत गलत था। वह अपने ख्यालों में गुम था कि तभी किसी ने उसके कंधे पर हाथ रख दिया। उसने मुड़ कर देखा, सामने समर खड़ा था।
समर की आंखें शोवन पर टिकी हुई थी। शोवन ने समर को देखा और अपनी जगह से खड़ा हो गया। समर ने आगे बढ़कर शोवन को अपने गले से लगा लिया…
अब तक इतने धैर्य से खुद को संयत रखे शोवन का धैर्य चूक गया, अपने पिता की पनाह में अपनी भावनाओ को बहने से रोक नहीं पाया वह, और सिसक उठा..
पिया जानती थी बचपन से ही शोवन उसके ज्यादा करीब था। समर से उसकी कम बातचीत होती थी, बावजूद जब कभी शोवन स्कूल की किसी प्रतियोगिता में दूसरे नंबर पर आ जाता या किसी खेल में किसी से हार जाता, तब वह अपने टूटे हुए मन को समर के पास पहुँच कर ही समेट पाता था..।
इसलिए आज भी पिया ने वहाँ से निकलते वक्त समर को यहाँ पहुँचने का संदेश भेज दिया था..
शोवन को यूँ रोता देख समर भी अपनी भावनाओ को काबू नहीं कर पाया और अपने बेटे के साथ वो भी रो पड़ा..।
दूर खड़ी पिया बाप बेटे की इस निराली जोड़ी को देखती चुपचाप खड़ी रही..
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शौर्य के कमरे में बैठे राजा और बांसुरी के सामने कॉफी के कप रखे थे। उनसे उड़ती भाप को कुछ देर देखने के बाद बांसुरी ने वापस वही सवाल पूछ लिया जो वो पहले भी दो बार पूछ चुकी थी…
“मुझे समझ में नहीं आ रहा, तुम इण्डिया क्यों नहीं चलना चाहते ?”
“मॉम…. !”
“हाँ बोलो.. कारण बताओ !”
“आप कॉफी लीजिये न !” शौर्य ने अपनी जगह से उठकर कॉफी बांसुरी के हाथ में पकड़ा दी, बांसुरी ने तड़प कर राजा की तरफ देखा। राजा चुपचाप अपनी कॉफी पी रहा था…।
“आप कुछ बोलते क्यों नहीं..? बहुत हो गया काम..।
अब वापस चलो। सब मान चुके हैं कि तुम कामकाजी हो।
शौर्य! बेटा तुमसे कोई नहीं कहेगा कि तुम…
मैं तुम्हें कैसे समझाऊं, अच्छा कम से कम अपने हर्ष भाई के लिए तो चलो। उनकी शादी होने वाली है, और ऐसे में तुम यहां हो।”
” मॉम शादी में अभी बहुत वक्त है। मैं तब तक पहुंच जाऊंगा।”
” नहीं, शादी की तैयारियाँ शुरू हो गई है, और मुझे तुम्हारे बिना अच्छा नहीं लगता। आज तक मैंने, ना तुमसे और ना तुम्हारे पिता से कभी किसी बात के लिए जबरदस्ती की है।
लेकिन आज मैं तुम्हें आदेश दे रही हूं कि तुम्हें हमारे साथ चलना ही होगा।”
बांसुरी अपनी जगह से खड़ी हुई और उस कमरे से बाहर निकल गई।
शौर्य ने राजा की तरफ देखा, राजा ने कंधे उचका दिये।
” वैसे तुम्हारी मां सच कह रही है। वह वाकई कभी किसी बात की जिद नहीं करती। अगर कह रही है, तो मान जाओ।”
शौर्य ने चुपचाप गर्दन हाँ में हिला दी। वही एक तरफ खड़े विक्रम के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी।
वह सोच रहा था कि यह लड़का पागल हो गया है? इसे कैसे समझाया जाए.. ?
राजा अपनी जगह से उठकर शौर्य तक चला आया। उसके कंधे थपथपा कर वह भी बांसुरी के पीछे उस कमरे से निकल गया।
राजा के वहां से जाते ही विक्रम तुरंत शौर्य के सामने चला आया।
” तुम पागल हो गए हो क्या मिस्टर मुरली? तुम क्या सच में खुद को लिटिल मास्टर समझने लग गये हो?”
शौर्य ने विक्रम की तरफ देखा और धीरे से उसके गाल थपथपा दियामे।
” मॉम डैड के साथ इंडिया चलने की तैयारी करो।”
शौर्य वहां से लंबे-लंबे डग भरता बाहर निकल गया।
” यह लड़का थोड़ा नहीं पूरा पागल है..।”
अपने बालों पर हाथ फेरते हुए विक्रम शौर्य की पैकिंग करने में लग गया..
क्रमशः

Hello mam plz upload next part…..🙏
Jeevansathi ka 142 part read kiye hue one month ho gya ha but ma’am apne next parts upload hi nhi kiye hn…please ma’am apne followers ki feelings aur interest ko dhyan mei rkhein aur episodes jldi upload karein
कहानी हमेशा की तरह बहुत अच्छी है लेकिन आपसे एक अनुरोध है आप प्रतिलिपि पर लौट आई प्लीज 🙏🏻🙏🏻
144 wa part mam plz mam jara jaldi den 🤟🤟🤟🤟😘😘😘😀😀😀🤗🤗🤗🤗
Very interesting and Imotional part ,Sivan ko bahut bura laga hai,Hamesha bold rahanaya Wali Pari Pita ke samnaya kamjor par gyi,Waiting for the next part eagerly
Very nice next part kb ayega
अरे..ये क्या हो गया 🤦🏻♀️शोवन ने बहुत जल्दबाजी कर दी, लड़कियां कितनी भी दबँग हो पर अपने पापा के सामने अपने प्यार की बात जाहिर करना बहुत मुश्किल है शायद परी इसके लिए तैयार नहीं थी और हो गया काण्ड।
समझ नहीं आ रहा अब क्या होगा, शोवन कितना दुखी हो गया आज 😢और परी, परी भी तो दुखी होगी ना बेचारी किससे अपना मन बाँटेगी। हाय दोनों बच्चों के लिए आज बहुत बुरा लग रहा कोई चक्कर चलाओ ना आप डॉक्टर साहिबा कि सब सही हो जाए 😊।
भाग तो बहुत अच्छा था पर शोवन को रोते हुए देखना जरा भी अच्छा नहीं लगा।
लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻।
Nice
Waise kaisa Rajpariwar hai ye bacche der raat doston k saath party kar sakte hai bhale apne group mein kare opp gender me bhi khub dosti chalti hai lekin shadi tay karne se pahle ek baar bhi puchhna jaruri nahi samajhte hai had hai double standard ki
Aaj pari par bahut gussa aaya rone lagti samne se bhag jaati bahut kamzor kirdar nikli uske ghar main ek generation pahle doo luv marriage hui hai Ratan sa to bilkul neechi jaati k the fir Pari itni kamjor kyo ho gayi jo itna bada jhuth bol gayi
अपने माता पिता के सामने अपने प्यार को चुनना किसी भी लड़की के लिए आसान नहीं है
परी से भी वही हुआ जो नहीं होना चाहिए था
पर ये बात अब जय जया और रूपा को समझनी चाहिए
जो पहले ही परी के लिए अपशब्द बोल चुकी है उनमे क्या संस्कार हैं
और इन तीनो ने परी के लिए सुन कैसे लिया
क्या अपनी बेटी पर भरोसा नहीं
विक्रम बाबू ये तुम्हारा मुरली नहीं हमारा शौर्य है