
अतिथि -41
भूषण योगिता से बात कर रहा था कि अचानक योगिता ने फ़ोन काट दिया.. ये भूषण के लिए एक सामान्य सी बात थी, क्यूंकि अक्सर बातचीत के दौरान अपनी बेटी, पति या किसी पडोसी के अचानक चले आने पर योगिता फ़ोन काट दिया करती थी..।
आज भी कोई अचानक चला आया होगा यही सोच कर भूषण ने उस तरफ कोई तवज्जो नहीं दी और फ़ोन जेब में डाल कर वापस मंजरी की तरफ चला आया..
“वो एक अर्जेन्ट कॉल आ गया था, इसलिए जाना पड़ गया !”
भूषण ने सफाई सी दी..
“हम्म कोई बात नहीं !”
“तुम्हारी अनुराधा से बात हुई क्या ?”
“बात तो हुई है, देखती हूँ अगर वो मान जाती है तो !”
मंजरी का अब कहीं मन नहीं लग रहा था, वो अपना हैंडबैग पकड़ कर खड़ी हो गयी..
“मैं चलती हूँ भूषण !”
“मंजरी…. ध्यान रखा करो अपना, इधर कुछ दिनों से जरा ज़्यादा ही थकी सी लगने लगी हो !”
भूषण ने सिर्फ एक झूठी सी फ़िक्र दिखाने के लिए ऐसा कहा था, लेकिन उसकी उस बात को मंजरी ने दिल पर ले लिया..
“थकी सी दिख रही हूँ.. ? सच में ?”
और वो वहाँ से तुरंत निकल गयी.. अपनी सुंदरता को लेकर मंजरी कुछ भी नहीं सुन सकती थी, न उसे कुछ सहन होता था..
ये बाल तो सच थी कि उसका वजन जरा ज़्यादा ही कम हो गया था, बस उसी के कारण आँखों के नीचे जरा कालापन आ गया था, लेकिन क्या वो इतना ज़्यादा नजर आने लगा था… ?
सोचती हुई वो तेज़ी से चलती हुई अपने पार्लर की तरफ बढ़ गयी..
अब वहीँ उसे सुकून मिल सकता था !
पार्लर वाली अब उसकी अच्छी दोस्त बन चुकी थी.. मंजरी को देखते ही उसने अपनी लम्बी चौड़ी फेहरिस्त सामने रख दी.. मंजरी ने फेशियल चुना और आराम से पसर गयी..
उसकी पार्लर वाली उसका हालचाल लेती अपने काम में लग गयी…
उसी ने बातचीत में पूछ लिया कि “कुछ विशेष है क्या जो इतना महंगा फेशियल करवा रही हो” और अचानक मंजरी के ध्यान में आ गया कि परसो तो उसकी सगाई है..
अब तक डिंकी से कुढ़ी जली बैठी मंजरी का दिमाग तेजी से दौड़ने लगा….
उसके पीछे उसकी बहन इतना बड़ा षड्यंत्र रच रही और वह बेवकूफ की तरह माधव की बात मान कर सगाई तोड़ने को तैयार हो गयी थी…।
वो इतना तो जानती थी कि माधव कभी खुद से आगे होकर अपनी माँ से बात नहीं कर पायेगा। कोई विशेष बात तो थी..।
बाहर इतना मुखर रहने वाला लड़का अपनी माँ के सामने एकदम से मौन क्यों हो जाता था.. ?
एक माँ सबसे ज़्यादा अपने बेटे की ही बात सुनती है, उसके बावजूद माधव अपनी माँ से सीधे तौर पर नहीं कह पा रहा कि उसे सगाई नहीं करनी.. आखिर माजरा क्या है ?
और माजरा जो भी हो अब वो भी अपनी इस सगाई को नहीं तोड़ेगी..।
डिंकी से बदला लेने का यही सबसे सुनहरा मौका है… डिंकी अगर माधव से उसकी सच्चाई कह देना चाहती थी इसका मतलब यही था कि वो माधव और उसकी सगाई तुड़वाना चाहती थी और अब यही वो होने नहीं देगी..।
“आपने बताया नहीं, क्या ओकेशन है जिसके लिए आप फेशियल करवा रहे हो ?”
“मेरी सगाई है !” मंजरी ने मुस्कुरा कर उत्तर दिया और आंखे मूंद कर वापस अपने विचारो में खो गयी..
शाम ढले मंजरी अपने घर लौट आयी..
न उसने माधव को फ़ोन कर के कुछ भी बताया और न ही माधव ने कोई जानकारी जाननी चाही..
माधव इस सोच में था कि मंजरी के मना करते ही मंजरी की माँ ज़रूर उसकी माँ से बात कर लेगी और सगाई टल जाएगी….
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ था..
मंजरी और माधव दोनों की माँ सगाई की तैयारियों में लगी थी.., और देखते ही देखते सगाई वाले दिन की पूर्व संध्या चली आयी..
माधव की माँ उसके पापा और भाई तीनो एक दिन पहले ही माधव के रूम पर आ चुके थे.. माधव का छोटा सा फ़्लैट उनके लाये सामान से पट चुका था..
माधव की समझ से बाहर था कि मंजरी ने घर पर बात की भी है या नहीं.. ?
उसने धीरे से एक खाली कोना पकड़ा और मंजरी को फ़ोन लगा दिया..
मंजरी ने माधव का कॉल आते देखा और देख कर भी अनदेखा कर गयी..
माधव ने दुबारा कॉल नहीं किया, ये उसका स्वभाव नहीं था।
लेकिन बेचैनी उसके अंदर भरती चली जा रही थी..
वो उठा और घर के बाहर निकल गया.. ।
घर से दूर एक टपरी पर पहुँच कर उसने सिगरेट सुलगा ली..
वो अभी गहरे कश भर कर अपने अंदर की बेचैनी को खत्म करने का रास्ता ढूंढ रहा था कि सामने से डिंकी और गरिमा साथ साथ चले आये..
अपने सामने अचानक आयी डिंकी को देख माधव के दिल में हलकी सी ठंडक पहुँच गयी..
उसे लगा अगर डिंकी उसके साथ है, तो उसे कोई नहीं हरा सकता..
वो कोई न कोई उपाय निकाल ही लेगा..।
उसने हाथ की सिगरेट फेंकी और मुस्कुरा कर खड़ा हो गया..
“तुम यहाँ ?” उसने मुस्कुरा कर कहा और डिंकी भी हल्के से मुस्कुरा उठी..
डिंकी के खुद के दिल में हाहाकार मचा था.. वो किसी तरह भी माधव और मंजरी की सगाई नहीं देख सकती थी, लेकिन उसके हाथ में कुछ नहीं था..।
उसका मन मस्तिष्क एक साथ काम नहीं कर रहा था..
दिमाग कुछ सोच रहा था और दिल कुछ और मनमानी कर रहा था..
ऐसे ही उहापोह में उसके मुहं से अनजाने ही निकल गया..
“आप तो बड़े खुश लग रहे हैं… !”
डिंकी ने सोचा उसकी बात सुन कर माधव मुरझा जायेगा और कहेगा वो बिलकुल भी खुश नहीं है.. लेकिन इसके उलट माधव ने मुस्कुरा कर हामी भर दी..
“हम्म खुश तो हूँ !”
( अब तक ज़रूर उदास था लेकिन अब तुम नजर आ गयी और दिल खुश हो गया ) मन ही मन ये सोचते हुए ऊपरी तौर पर माधव ने बस हामी भरी..
लेकिन काश उसने अपने मन की बात कह दी होती..
गरिमा ज़्यादा कुछ नहीं जानती थी.. वो चट से पूछ बैठी..
“आपकी सगाई की ड्रेस रेडी हो गयी ?” उसके इस बचकाने से सवाल पर माधव को हंसी आ गयी और उसने गर्दन हिला कर हामी भर दी
“वाओ क्या पहनने वाले है आप ?”
“कपड़े ही पहनूंगा…. वो भी कायदे वाले !”
माधव ने यूँ ही कह दिया लेकिन उसकी ये बात डिंकी को पसंद नहीं आयी..
वो कुढ़ कर रह गयी..
“आप तो अपनी सगाई से वाकई बहुत खुश लग रहे, चलिए अच्छा है!”
माधव हल्का सा मुस्कुरा कर रह गया। उसी समय मंजरी का कॉल आने लगा। माधव ने फोन देखा और उठा लिया।
उसने मंजरी से पूछ लिया
“कैसी हो? मेरा काम किया?”
मंजरी ने एक गहरी सी सांस भरी और धीमे से कह दिया ।
“कर दिया है आपका काम, लेकिन फिलहाल कल सगाई वाली जगह पर मौजूद रहिएगा। सब कुछ वही सेट हो जाएगा। आपको घबराने की जरूरत नहीं है। आप जैसा चाहते हैं, वैसा ही होगा, लेकिन मेरे तरीके से।”
” मतलब?”
माधव उसकी बात समझ नहीं पाया।
वह सीधा सरल लड़का था और उसके अनुसार सगाई तोड़ने के लिए आपस में बातचीत कर लेना ही काफी था, लेकिन मंजरी की बात से उसे समझ में आ गया कि मंजरी ने सगाई तोड़ने का कोई और रास्ता अपनाया है।
उसके दिल में मंजरी के लिए आदर थोड़ा और बढ़ गया।
वह हल्का सा मुस्कुराने लगा, लेकिन उसके ठीक सामने खड़ी डिंकी के दिल में सांप लोटने लगे।
उसने देख लिया था कि मंजरी का कॉल आया है, और माधव मंजरी से बहुत प्यार से बात कर रहा है।
यह बात डिंकी को अच्छी नहीं लगी और वह वहां से जाने को तैयार हो गई।
उसने गरिमा की तरफ देखा और “चल घर चलते हैं।” कहकर वापस मुड़ने लगी कि तभी माधव ने डिंकी का हाथ पकड़ लिया…
“क्या हुआ.. तुम्हारा मूड ऑफ़ लग रहा है !”
“नहीं ऐसा तो कुछ नहीं !”
“तो फिर कल अच्छे से आना सगाई में.. वैसे क्या पहन कर आने वाली हो.. !” माधव का मन मंजरी से बात करने के बाद शांत हो गया था।
उसे लगा कल होने वाली सगाई मंजरी किसी भी तरीके से रुकवा कर ही मानेगी और इसलिए अब उसका मन फूल सा हल्का हो गया था और वह डिंकी को छेड़ने में लगा था..
“कपड़े ही पहन कर आऊंगी और वह भी कायदे वाले..।”
डिंकी के जवाब को सुनकर माधव को हंसी आ गई उसने गरिमा की तरफ देखा और उसे भी अपनी सगाई के लिए इनवाइट कर लिया।
” कल आपको भी आना है और आप दोनों की वह तीसरी सहेली है ना उन्हें भी लेकर आइएगा..।”
गरिमा ने जल्दी से गर्दन हिला दी
” हां जरूर आएंगे..।”
लेकिन इन सब बातों से डिंकी का दिल एकदम दुख गया। वह वापस मुड़कर अपने घर की तरफ चली गई माधव उन दोनों को देर तक देखता खड़ा रहा।
उसके चेहरे पर आई मुस्कान अब जा नहीं रही थी। हल्के हल्के कदम बढ़ाते हुए वह भी अपने घर की तरफ बढ़ गया..
फ़्लैट का दरवाज़ा खोलते ही उसकी माँ चहक उठी..
“कहाँ था? चल खाने बैठ, तेरी पसंदीदा मटर की सब्जी बनायीं है !”
“आप जो बनाती है, मुझे सब पसंद आता है !”
माधव ने अपनी माँ की तरफ देख कर कहा और कपड़े बदलने अपने कमरे में चला गया..
उस रात सभी ने साथ बैठ कर खाना खाया और बातचीत करते समय सरकता चला गया..
माधव मंजरी से बात होने के बाद जहाँ बिलकुल चिंता मुक्त हो चला था, वही माधव से मिल कर जाने के बाद से डिंकी के होश गुम थे..
उसका कहीं मन नहीं लग रहा था..
सुलक्षणा के लाख बुलाने पर भी वो खाना खाने नहीं आयी..
सूखे मुहं अपने कमरे में पलंग पर पड़ी पड़ी वो खुली खिडकी से बाहर आसमान पर चमकता चाँद देखती रही….
इधर अपने कमरे में मौजूद मंजरी के दिमाग में डिंकी से बदला लेने की आग तेज़ी से धधक रही थी..
और उसने ठान लिया था कि अब वो माधव से सगाई कर के रहेगी…
अगली सुबह इन तीनो के जीवन में क्या नया रंग बिखेरनी वाली थी इससे अनजान तीनो ही अपने ख़यालो में गुम अगली सुबह का इंतज़ार करते करते सो गए..
क्रमशः

Lagta hai sagayi ho hi jayegi 😓😓😓😓
माधव ने मंजरी पर भरोसा करके पहले ही गलती कर दी, हो सकता है मंजरी सगाई के लिए मना भी कर देती पर रही सही कसर उस खत ने पूरी कर दी। मंजरी गुस्से में डिंकी के लिए कुछ सही तो सोचेगी नहीं।
माधव को लग रहा है कि मंजरी इस रिश्ते के लिए मना कर देगी पर मंजरी तो फुल तैयारियों में है सगाई के लिए। चलो ये सब तो माधव संभाल ही लेगा पर डिंकी ने जो मंजरी को अपनी id दी है मंजरी ने अगर वो भूषण को दे दी तो भूषण डिंकी. को फंसा ही देगा।
देखते है आगे क्या होता है 😊बहुत बेहतरीन भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
Madav manjri ki chalvaji ko sajh nahi raha wo Dinki se badla lene ke liye Madav ka dil todh degi.
Nice part 👌👌
आज का जमाना है तो मंजरी भूषण और योगिता जैसों का। लेकिन कहानी में भी यदि ऐसे लोग जीत जाते हैं तो फिर क्या फायदा कहानी पढ़ने का उसके लिए तो जिंदगी ही बहुत है। अभी देखते हैं इन सभी में कौन जीतता है माधव के लिए मंजरी और डिंगी और योगिता भूषण और दीपक में कौन विजेता होगा।
मंजरी ज्यादा होशियारी दिखा रही है पर वो माधव को अच्छे से जानती नहीं है तभी इतनी चतुर बन रही है ☺️☺️☺️
पर माधव कभी भी इतनी बड़ी बात के लिए सिर्फ मंजरी पर ही निर्भर नहीं रह सकता कुछ न कुछ तो चल ही रहा होगा उसके भी दिमाग में 🙄🙄🙄🙄🙄
डिकी का दिल दुखाकर माधव भी हंस रहा है पर वह ये नहीं जानता कि मंजरी क्या प्लानिंग किए बैठी है।🥺🥺🥺🥺
रचनाबेहद मनोरंजक है हमेशा की तरह और आपसे उम्मीद करते हैं कि ये छोटी तो बिल्कुल नहीं होनी चाहिए क्योंकि इतने से हम पाठकों का मन तो बिल्कुल भी नहीं भरने वाला 😌😌😌🙂🙂🙂🙂
सो प्लीज प्लीज प्लीज प्लीज प्लीज प्लीज प्लीज प्लीज प्लीज प्लीज
डॉक्टर साहिबा इस गुजारिश को ध्यान में रखिएगा 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
एक बार फिर आपका बहुत-बहुत शुक्रिया 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
Manjari badi shatir hai par madhav bhi kam nahi kuch n kuch accha hi hoga I m sure 🥰
Bahot din baad story padhi… Ekdm apki style wali kahani👌🏻👌🏻👌🏻
Ab kya hoga,kya Madhav ki saggi Majari,ya Dinky ke sath hogi,waiting for next part.
बहुत ही अच्छा भाग👌🏻👌🏻