अतिथि -40

अतिथि -40

 
   एक छोटे से विचार के साथ शुरू की थी कहानी अतिथि.. शुरुवात में ही कहा था कि कहानी बमुश्किल बारह तेरह एपिसोड में सिमट जाएगी, लेकिन जैसा मैं हमेशा कहती हूँ, मैं कहानी लिखने बैठती हूँ और हर किरदार अपना चित्रण खुद लिखवाता चला जाता है..।

    बस इसी सब में कहानी लम्बी होती चली गयी, और अब लग रहा है सौ एपिसोड के पहले क्या ही ख़त्म कर पाऊँगी..।

   इस बार मेरा ब्रेक भी कुछ ज़्यादा ही लम्बा हो गया,पर चलिए कोई बात नहीं, एक झटपट रिकैप दे देती हूँ.. फिर कहानी शुरू करते हैं..

अब तक आपने पढ़ा…

माधव की माँ और मंजरी की माँ बचपन की सहेलियां है और इसीलिए दोनों ने मिल कर अपने बच्चों की शादियां तय कर दी है..।
 
लेकिन माधव को ये महसूस होने लगा है कि वो अनुराधा से प्यार करता है, और इसलिए वो मंजरी से मिल कर सगाई से इंकार कर देता है..
मंजरी इसी उधेड़बुन में है, उसी वक्त भूषण उसे मिलने बुलाता है..।

भूषण डिंकी से बदला लेना चाहता है। कहीं ना कहीं भूषण के दिमाग में यह बात बैठी है कि उसे पुलिस केस में फंसाने के पीछे डिंकी और माधव का हाथ है। और इसलिए वह डिंकी का ईमेल आईडी और पासवर्ड, मंजरी से मांगता है। मंजरी शुरुआत में मना कर देती है।
     उसके पास एक खत है जो डिंकी ने माधव को लिखा है। जैसे ही मौका मिलता है मंजरी उस खत को पढ़ लेती है और उसे पढ़ने के बाद उसका दिमाग बिल्कुल खराब हो जाता है।
    वह भूषण की बात मान जाती है और डिंकी का आईडी और पासवर्ड मांग लेती हैं। इसी बीच भूषण योगिता से फोन पर बात कर रहा होता है। योगिता भूषण का मूड ठीक करने के लिए उससे चुहल भरी बातें करती रहती है कि तभी किसी जरूरी काम से वापस लौटा दीपक योगिता के ठीक पीछे खड़ा रहता है।
   योगिता जैसे ही फोन में बात करके पलटती है, सामने दीपक को देखते हैं, और उसके हाथ से फोन छूट के नीचे गिर जाता है

अब आगे….

“अरे…. आप..? आप कब आये ?”

दीपक के चेहरे पर कठोर लकीरें  उभर आयी..

“किससे बात कर रही थी.. ?”

“वो.. मैं.. !”

हड़बड़ी में योगिता कोई जवाब नहीं दे पायी, और तेज़ी से रसोई की तरफ पानी लेने बढ़ गयी..

दीपक भी उसके पीछे रसोई तक चला आया… सुराही से पानी का गिलास भर कर योगिता ने दीपक की तरफ बढ़ा दिया..
हालाँकि योगिता का हाथ कांप रहा था, वो नजरें चुराते हुए दीपक की तरफ देख रही थी..

“किससे बात कर रही थी ?” दीपक का सवाल हथौड़े की तरह योगिता की कनपटी पर पड़ा..

“वो.. मैं..! अरे पहले ये बताओ, अचानक तुम घर कैसे आ गए ?”

“मेरा घर है, जब जी चाहे आऊंगा..। अब क्या घर आने के लिए तुम्हारी परमिशन लगेगी ?”

“अरे नहीं.. कैसी बातें कर रहे हो ? चाय बना दूँ तुम्हारे लिए ?”

“हम्म.. बना दो.. !”

दीपक वहीँ सोफे पर धंस गया…।
योगिता उससे नजर बचाती रसोई की तरफ बढ़ने लगी कि दीपक ने उसे पीछे से आवाज लगा दी..

“सुनो… जरा अपना फ़ोन देकर जाओ !”

योगिता का दिल धक से रह गया..।

उसने अचानक फ़ोन काटा था, ऐसे में भूषण का दुबारा फ़ोन आ सकता था। फ़ोन उसी के हाथ में रहता तो वो तुरंत काट सकती थी, लेकिन दीपक के हाथ में फ़ोन यानि उसकी हर हरकत का मय सबूत दीपक के सामने प्रस्तुत हो जाना था..।

वो रुआंसी सी हो गयी..।
कहीं दीपक ने उसका मेसेज बॉक्स खोल लिया, तब तो आज उसकी मौत तय है..
भूषण के साथ उसकी रंगीन बातों में शर्म लिहाज का कोई पर्दा नहीं था, और अगर वो सारी बातें दीपक के सामने आ गयी तो आज उसका बचना मुश्किल था..।

“क्या सोच रही हो.. दिखाओ अपना फ़ोन !”

धड़कते दिल के साथ उसने अपना फ़ोन दीपक की तरफ बढ़ा दिया…

दीपक ने फ़ोन लिया और उसे खोल कर वापस योगिता की तरफ बढ़ा दिया..

“लॉक खोल कर दो !”

“क्यों… अब क्या तुम मेरी जासूसी करोगे ?” योगिता ने जबरन मुस्कुराने की कोशिश की..

दीपक ने गहरी आँखों से योगिता की तरफ देखा।

“क्या आज तक कभी मैंने तुम्हारी जासूसी की है?”

योगिता एकदम से कुछ बोल नहीं पाई। दीपक सच ही तो बोल रहा था, उसने आज तक योगिता पर आंख मूंद कर भरोसा किया था।
    योगिता ने गले में अटकती अपनी सांस को निगला और धीरे से फोन लेने के लिए हाथ बढ़ा दिया। दीपक ने योगिता का फोन उसके हाथ में दिया ही था कि तभी दीपक का फोन बजने लगा।
   उसकी दुकान से किसी लड़के का फोन आया था। किसी सामान के मूल्य को लेकर कुछ मोल भाव चल रहा था, जिसके आखिरी लगाए जाने वाले मूल्य के बारे में पूछने के लिए दुकान से लड़के ने दीपक को फोन लगा लिया था।

इस सुनहरे मौके का फायदा उठाकर योगिता ने तुरंत कॉल लॉग से भूषण का नंबर डिलीट करने के साथ साथ उसका नंबर ब्लॉक भी कर दिया..।
अपने चैट बॉक्स को खोल उसने भूषण से हुई सारी बातचीत के साक्ष्य मिटा दिए..।

एक गहरी सी साँस लेकर उसने फ़ोन दीपक की तरफ बढ़ा दिया..।

अब वो निशंक थी कि अब उसके फ़ोन पर भूषण के कोई निशान मौजूद नहीं थे..।
    लेकिन वो भूल गयी थी कि भूषण की कुछ तस्वीरें उसकी गैलरी में अब भी मुस्कुरा रही थी..।

असल में आज के पहले कभी दीपक ने योगिता के फ़ोन को हाथ तक नहीं लगाया था।
   कभी-कभार घर पर उसकी मौजूदगी में योगिता का फ़ोन आये तब भी वो बड़े आराम से योगिता के हाथ में फ़ोन रख देता था..
    न ये देखता था कि किसका कॉल आ रहा है, और न ही ये देखता था कि योगिता किस किस से और कितनी देर बात कर रही है…

इसीलिए योगिता को कभी अपने फोन पर से कुछ भी डिलीट करने की कोई जरूरत ही नहीं महसूस हुई थी। लेकिन आज दीपक के इस तरह फोन अचानक मांग लेने से वह जरा घबरा गई थी। एक गहरी ठंडी सांस भरकर उसने अपने साफ सुथरे मोबाइल को दीपक की तरफ बढ़ा दिया।

    अपने आप को सामान्य दिखाने के लिए उसने फोन दीपक के पास रखा, और “तुम्हारे लिए चाय बना कर लाती हूं” कहकर मटकती हुई रसोई में चली गई।

    वह अपने आप को कितना भी सामान्य दिखाने की कोशिश कर ले, लेकिन दिल में घबराहट जारी थी। दीपक ने दुकान के लड़के को सारी बातें फटाफट समझाईं और फोन एक तरफ रख योगिता का फोन उठा लिया।
   उसने सबसे पहले कॉल लॉग चेक किया, लेकिन उसमें कोई भी ऐसा नंबर नहीं दिख रहा था जिससे योगिता के बात करने पर वह कुछ सोच पाता। उसने धीरे से योगिता का चैट बॉक्स भी खोल लिया।

      मैसेज देखते हुए वो धीरे-धीरे स्क्रोल कर रहा था। लेकिन कोई भी ऐसा नंबर या नाम नजर नहीं आ रहा था, जिसे देखकर वह वहां थम जाए। कुछ देर तक योगिता के मोबाइल को देखने के बाद उसने अपना मोबाइल उठा लिया।

    एक नजर रसोई की तरफ देखा और फिर व्यस्त हो गया।
    लगभग पांच सात मिनट बाद ही योगिता चाय और पानी का गिलास लिए बाहर हाजिर हुई। उसने ट्रे दीपक की तरफ बढ़ा दी।
 
         रोज एक कप चाय के लिए भी जिसकी मिन्नतें करनी पड़ती थी, आज वह बड़े लाड से चाय के साथ नमकीन भी एक कटोरी में निकाल लाई थी।
   दीपक के चेहरे पर हंसी आते आते रह गई।

उसने चाय का कप थाम लिया।

” लगता है किटी का प्लान बना रही थी?”

” मैं ? लेकिन क्यों?”
  एकदम से योगिता को दीपक की बात समझ नही आई।

  ” तुम किसी से कह रही थी ना, इस बार होटल तुम बुक करोगी? तुम लोगों की किटी होटल में ही तो होती है ना?”

   योगिता ने एकदम से ठहर कर सांस ली और मुस्कुरा कर दीपक के सामने बैठ गई।

  “हां इस बार मेरी किटी है। तो मैं वही कह रही थी कि मैं अपने हिसाब से होटल बुक करूंगी।”

” कितने की किटी है तुम्हारी?”

“चार हजार की।”

” और कितनी औरतें शामिल हैं?”

दीपक कभी योगिता से ऐसा कोई सवाल नहीं करता था। योगिता जब अपनी किटी के बारे में कहती, वह चुपचाप पैसे निकाल कर दे दिया करता था। लेकिन आज उसकी पूछताछ, योगिता के दिल में घबराहट पैदा कर रही थी।
     क्योंकि असल में तो उसकी कोई किटी थी ही नहीं। वह हर बार दीपक से पैसे लेकर पूरे एक दिन के लिए किटी का बहाना बनाकर भूषण के साथ मौज मस्ती करने निकल जाया करती थी।

” तुमने बताया नहीं कितने की किटी है तुम्हारी? कितनी औरतें हैं?”

” बताया तो था,दस औरतें हैं हम।”

” मुझे तो याद आ रहा था, तुमने शायद बारह बोला था। और ऐसा कुछ कहा था कि महीने में एक बार एक की किटी आएगी।”

“हाँ… दो लोगो ने किटी छोड़ दी है!”

” अच्छा कितने पैसे चाहिए किटी के लिए?”

” वही,चार हजार !”

” ठीक है, कब है ?”

“कल!”

दीपक ने अपनी जेब में हाथ डाला और पांच सौ के आठ नोट निकाल कर योगिता के हाथ में थमा दिए !

” यह लो, यह रखो तुम्हारी किटी के पैसे, और यह अलग से दो हजार और! कुछ जरूरत हो तो!”

” इसकी कोई जरूरत नहीं!”

” क्या बात है, आज बड़ी बदली बदली लग रही हो, वरना तो मैं जब जितने पैसे देता हूं, तुरंत रख लेती हो !”

दीपक की इस बात पर योगिता ने मुस्कुराकर सारे पैसे अपने पास रख लिये…
चाय खत्म करके दीपक उठा और कमरे से निकल गया।

“आज लौटकर आने में जरा देर हो जाएगी…।”

दीपक के ऐसा कहने पर योगिता ने बस गर्दन हिला कर हामी भर दी। दीपक ने गहरी नजर योगिता पर डाली और वापस मुड़ कर जाने लगा।
    जाते-जाते उसके पैर थम गए, वह मुडा लेकिन तब तक योगिता वापस मुड़ चुकी थी। दरवाजा बंद होने वाला था कि दीपक ने दरवाजे को रोक लिया।

    वह दरवाजे को खोल कर वापस अंदर चला आया। योगिता फटी फटी आंखों से उसे देख रही थी। दीपक ने योगिता को अपने सीने से लगा लिया। योगिता एकदम से सकपका गई।

“सुनो मुझसे कुछ छुपा तो नहीं रही हो ना?”

दीपक की लरजती आवाज सुनकर योगिता एकदम से पिघल गई, लेकिन जल्द ही उसने सब कुछ संभाल लिया। दीपक को अपनी बाहों में कसते हुए वह उसके सीने से लगी खड़ी रही।

” नहीं तुमसे कुछ भी छुपा कर मैं कहां जाऊंगी?”

” जानता हूं। तुमने मुझ जैसे पागल को संभाल रखा है। वरना कोई और औरत होती तो मुझ जैसे इंसान के साथ दो दिन निभा नहीं सकती थी। वह तो तुम हो जो…”

” इतनी तारीफ करने की जरूरत नहीं है। जाओ दुकान पर लेट हो रहे हो।”

दीपक ने योगिता को खुद से दूर किया और हल्के से मुस्करा उठा।

” कल सुबह कानपुर जाना है, दुकान के लिए कुछ नया सामान लाना है। रात हो जाएगी वापस लौटने में।”

योगिता ने हामी भर दी। जाते-जाते दीपक फिर ठहर गया।

” तुम साथ चलोगी?  कार लेकर चलेंगे।”

” मैं वहाँ क्या करूंगी। और फिर मेरा ऑफिस भी है। और अभी अभी तो बताया कि किटी भी है।”

” अच्छा हम्म, सॉरी भूल गया था। वैसे ऑफिस की तो छुट्टी ली जा सकती है। और किटी तुम्हारी है तो एक आध दिन पोस्टपोन भी कर सकती हो।”

“छोड़ो ना, मैं क्या करूंगी, तुम्हारे साथ जाकर। थक और जाऊंगी। और फिर मुझे घर भी तो देखना है। एक दिन के लिए घर छोड़ो तो क्या हालत हो जाती है घर की।”

” समझ सकता हूं।” चेहरे पर मुस्कान लिए दीपक वहां से निकल गया।

    योगिता ने उसकी जाते ही एक गहरी सी सांस भरी और दरवाजा बंद करके अपने कमरे में पहुंच गई। कटे हुए पेड़ की तरह वह अपने बिस्तर पर ढह गई।

   आज तो उसका पकड़ा जाना तय था और कहीं दीपक समझ जाता तो पता नहीं क्या हो जाता? उसने अपने फोन की तरफ देखा और भूषण का नंबर अनब्लॉक कर दिया।

क्रमशः



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Nisha
Nisha
11 months ago

Dipak bahut achha hai.wo bahut galat kar rahi hai apne pati ke sath 😡😡

Kanchan Choudhary
Kanchan Choudhary
11 months ago

Deepak ko lagta hai dout ho gaya hai yogita par wo jaroor kuch plan kar raha hai

Jagruti
Jagruti
11 months ago

Nice part 👌

Jagriti
Jagriti
11 months ago

सुधर जाए लेकिन वो योगिता नहीं

Manu Verma
Manu Verma
11 months ago

ऐसा क्यों होता है जहाँ पत्नी ईमानदार हो तो पति धोखेबाज निकलता या फिर पति ईमानदार हो तो पत्नी योगिता जैसी मिलती पर कहते हैना.. झूठ के पाँव नहीं होते वो डगमगाता ही रहता आज तो योगिता बच गई पर कब तक इस झूठे, बेबुनियाद रिश्ते को छुपाकर रखेगी और हो सकता हैं जिस तरह से आज दीपक ने उसका फ़ोन चैक किया उसे शक हो गया हो और ये भी हो सकता हैं दीपक को पता चल गया हो और वो उसे मौका दे रहा हो सुधरने का पर योगिता तो अपनी गलती छुपाकर इतरा रही कुत्ते की दूम।
पलकें बिछाये बैठी थी आपके इंतजार में 😊वेलकम बैक 😘।

Geeta sidpara
Geeta sidpara
11 months ago

Very very nice part 👌👌

Shanu singla
Shanu singla
11 months ago

😡😡😡😡😡😡😡😡😡😡😡😡😡

Rekhapradeepsrivastava,
Rekhapradeepsrivastava,
11 months ago

बहुत अच्छी बात है अपर्णा कि ये कहानी सौ भाग तक जाएगी हम तो चाहते है और भी आगे तक जाए,
योगिता जैसी औरते जल्दी सुधर नहीं सकती अपने ही पति को धोखा देने में इसको इस बात का अहसास नहीं है कि दीपक को इस पर शक नहीं पूरा यकीन हो गया कि योगिता झूठ बोल रही अब वो रंगे हाथों पकड़ेगा इसको
बेहतरीन पार्ट 👌👌👌👌👌

Ashok Garg
Ashok Garg
11 months ago

After a long time
Very nice part of the story and very interesting
Very nice 👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍 very interesting 😊💯😊💯😊💯😊💯😊💯😊💯😊💯😊💯😊💯😊💯🤔🤔🤔

Gouri sarwa
Gouri sarwa
11 months ago

Dipak ke itna kuch kehene ke baad bhi use ye ehsaas nhi ho raha ke main uske saath galat kr rahi hu, kahi na kahi dipak ko andaja ho gaya hai ki yogita use dhokha de rahi hai, lekin … Ye sudharna hi nahi chahti….h 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
Ab story ke part roj dene ki koshish kriyega….🤞🏻🤞🏻🤞🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 Bahot late latifi ho gayi….. Ab to daya kijiye lekhika ji 🤩🤩🤩