
मायानगरी -2 भाग -19
अमर का नाम सुनते ही लीना के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आयी..
लेकिन लीना को वो बात कैसी मालूम चली भुवन इस बात पर सोच में पड़ गया था..
“ज़्यादा सोचिये मत भुवन जी.. मैं भी पुलिस वाली हूँ, जिस किसी के लिए मन में भ्रम आता है, उसकी कुंडली निकालने में फिर मुझे वक्त नहीं लगता..।
ये अमर कुमार का नाम पहले भी सुन रखा था.. बहुत होशियार केडेट रहे हैं ये।
और हमारी बिरादरी में उनका काफी नाम भी है,अपने बलबूते पे उन्होंने ये नाम कमाया है..।
मैंने तो ये भी सुना था कि आज तक उन्हें गुस्से में किसी ने नहीं देखा..
बस इसलिए जब मंत्री जी से कहासुनी वाली बात मालूम चली तो ये विडिओ निकलवाना पड़ा, और मैं ये देख कर स्तब्ध रह गयी कि उन्होंने बड़े कठोर शब्दों में मंत्री जी को धमकी दी थी।
हालाँकि उसके अगले दिन श्रद्धा से मिल कर उन्होंने इस बात की माफ़ी मांग ली थी..
क्यूंकि और जो भी हो लेकिन मंत्री जी उनके भावी श्वसुर थे आखिर !
लेकिन ये सुमित्र और अमर बाबू का क्या एंगल है ये देखना होगा !
अच्छा शंकर उस नए ड्राइवर का क्या मसला है ? उसका पता ठिकाना है तुम्हारे पास ?”
“मैडम जी, उस ड्राइवर को सुमित्र बाबू लाये थे। उसका सारा पता ठिकाना हमारे ऑफिस रजिस्टर में मौजूद है.. हम अपने मोबाइल के फोल्डर में भी सुरक्षित रखते हैं !”
शंकर अपने मोबाइल में उस नए ड्राइवर की जानकारी ढूंढने लगा..। उसने अपने मोबाइल से सारी जानकारी निकाल कर लीना के सामने रख दी..
लीना ने वो पता और मोबाइल नंबर नोट किया और उन लोगो को भेज कर खुद उस ड्राइवर की तलाश में निकल गयी..
भुवन भी शंकर के साथ वापस लौट गया..।
लेकिन शंकर के ऊपर हुए हमले के बाद उसका उसके घर पर अकेले रहना सुरक्षित नहीं था..
शंकर के घर वाले गांव में रहा करते थे, उसने शादी नहीं की थी और माँ बाप बहुत पहले गुज़र चुके थे।
इसलिए करीबी देखा जाए तो कोई नहीं था, और जो थे उन्हें शंकर के पैसों के अलावा ऐसा कोई लेना देना नहीं था..
“हमें लगता है आपका यहाँ अकेले रहना सही नहीं होगा, आप हमारे घर चलिए !”
शंकर ने थोडा नानुकुर करने के बाद सहमति दे दी।
वैसे भी भुवन उसे अकेला छोड़ने को मानने वाला नहीं था…
भुवन शंकर को साथ लिए अपने घर चला आया..
आज का पूरा दिन उसके लिए काफी थकान भरा रहा था.. शंकर को गेस्ट रूम में छोड़ कर वो अपने कमरे में चला आया!
बालकनी का दरवाज़ा खोल वो रेलिंग पर खड़ा हो गया.. ठंडी ठंडी हवा उसे जैसे सहला कर कुछ कहना चाह रही थी..।
अचानक उसे लीना की शैतानी भरी मुस्कान याद आ गयी.
जब उसने श्रद्धा के बारे में शंकर से पूछताछ की थी..
और वो एक बार फिर लजा कर रह गया था।
कैसे बिंदास अपनी बात कह जाती है लीना।
न कोई झिझक न संकोच!
लगता है जैसे एक बार मन में सोच कर वो सीधा बोल ही देती है, और जो मन में आता है वो कर गुजरती है।
दुबारा सोचना जैसे उसकी डिक्शनरी में है ही नहीं..।
और एक वो है, जो हर काम को करने से पहले भी सौ दफा सोचता है और करने के बाद भी..।
पता नहीं उसके दिल से ये संकोच का पर्दा कब हटेगा..
वैसे उसमे और लीना में अंतर भी तो बहुत है।
वो इतनी बड़ी आईपीएस अधिकारी और कहाँ वो एक साधारण सा पार्टी कार्यकर्त्ता..।
कोई मेल ही नहीं !
आज तक उसकी अपनी कोई पहचान भी तो नहीं। वो अपने ताऊ जी के नाम से ही जाना जाता है, बस यही उसकी पहचान है।
भुवन सबरवाल !!.
अकेले भुवन को जानता भी कौन है ? और शायद कभी कोई जानेगा भी नहीं।
वो न जाने कब तक अपने विचारो में गुम रहता लेकिन उसकी माँ उसके कमरे में चली आयी…
“ये किसे साथ ले आया है भुवन ? कौन है वो आदमी ?”
“माँ ये शंकर भैया हैं, राणा जी के पार्टी कार्यालय के खास व्यक्ति है.. !”
सज्जन राणा का नाम सुन भुवन की माँ का जी कैसा तो हो गया..
“हम्म.. लेकिन उनका यहाँ क्य़ा काम ?”
“बस ऐसे ही ले आये हमारी प्यारी अम्मा ! उनका वैसे भी कोई नहीं.. आज कहीं बाहर मिल गए तो बातचीत में हमें लगा वो ज़रा दुखी है, तो उन्हें अकेला नहीं छोड़ा गया और हम साथ ले आये.. !”
“वाह बेटा.. बड़ा बढ़िया काम किया। अब दुनिया भर के भूखे नंगो को यही जमा कर लेना।
बस यही तीर्थ बरत करते रहो। कभी इससे आगे बढ़ने की मत सोचना।
अरे हम तो कहते हैं, आग लगा दो इस दुनिया को जो हमारे भुवन को न पहचान पा रही..।
हमारा बस चले तो हम किसी को न छोड़े..। ये सब लोग बस तुम्हारा उपयोग करना जानते हैं, और जब तुम्हारी पारी आती है सब सारे मुहं फेर के खड़े हो जाते हैं..। किसी को नहीं दिखता कि हमारा भुवन कितना काबिल और नेक है.. !”
“मुझे दिखता है आंटी जी !”
अचानक ये खननकती आवाज़ सुन कर माँ बेटे दोनों का ध्यान दरवाज़े की तरफ चला गया। जहाँ अपने यूनिफॉर्म से इतर गहरे मेरून कुर्ते और ग्रे जींस में लीना खड़ी मुस्कुरा रही थी..
रोज़ की तरह उसने कस कर जूड़ा बांधने की जगह बालों को खोल रखा था, कुछ बाल कन्धों पर आकर लहरा रहे थे कुछ माथे पर इधर उधर गिर रहे थे..
आज उसने माथे पर छोटी सी बिंदी भी लगा रखी थी..
“अरे आप ? यहाँ ?”
“हाँ… नहीं आ सकती क्या ?”
“नहीं, हमारा वो मतलब नहीं था.. हम ये कहना चाह रहे थे कि, अगर कोई काम था तो हमें बुला लेती आप ?”
“कैसी बुलाती ? बुलाने के लिए आपका फ़ोन लगना भी तो चाहिए ?”
“क्यों फ़ोन तो हमारा… ” कहते हुए भुवन ने जेब से अपना मोबाइल निकाल कर देखा और माथे पर हाथ मार लिया
“ओह्ह.. बंद पड़ा है ! सॉरी हम अभी इसे चार्ज में लगा देते हैं !”
अब तक उन दोनों की बात सुनती खड़ी भुवन की माँ ने उन दोनों को देखा और बोल पड़ी..
“हम आप लोगो के लिए चाय लेकर आते हैं.. आप बैठिये न !”
“नहीं आंटी जी आप कष्ट मत कीजिये.. हम आपके सुपुत्र को बाहर बढ़िया सी कॉफी पिला देंगे.. अभी जरा ज़रूरी काम है, इसलिए इन्हे लेकर जाना है !”
भुवन एकदम से कुछ बोल नहीं पाया.. उसे बौखलाया सा देख लीना उसके पास आयी और उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ खीँच ले गयी..
भुवन की माँ पीछे खड़ी उन दोनों को वहाँ से जाते देखती रह गयी….
“बड़ी अजीब लड़की है !” उनके मुहं से बेसाख्ता निकल गया..
“लड़की नहीं पुलिस वाली है.. आईपीएस लीना ! ज़बरदस्त हैं ये, काकी .. !”
अब तक अपने कमरे से निकल कर बाहर आयी गौरी भी लीना को जाते देख चुकी थी.. उसी ने अपनी काकी को लीना का परिचय दे दिया..
“ये पुलिसवाली है ? हमे तो लगा कोई मॉडल हैं !”
अपनी काकी सास की बात पर गौरी हंस पड़ी…..
“चलिए अब मैं आपको चाय पिला देती हूँ… आपको चाय की ज़रूरत है !”
गौरी और भुवन की माँ नीचे चले गए..
इधर भुवन को साथ लिए लीना बाहर निकल आयी.. भुवन को लगा लीना अपनी ऑफिस जीप लेकर आयी होगी या अपनी पर्सनल थार, लेकिन जैसे ही लीना अपनी रॉयल एनफील्ड पर सवार होकर उसका स्टैण्ड हटाने लगी, भुवन झिझक गया..
“हम इसमें जायेंगे क्या ?”
“क्यों क्या बुराई है इसमें ?”
“नहीं मतलब.. बुराई तो नहीं लेकिन.. अच्छा फिर.. “
वो कुछ बोल पाता उसके पहले लीना बोल पड़ी..
‘”नो वेज़.. सोचना भी मत, कि मैं अपनी गाडी तुम्हे चलाने दे दूंगी.. लड़के हो इसका ये मतलब नहीं कि तुम ही गाड़ी चलाओगे, और मैं पीछे बैठूंगी.. ।
इस स्टीरिओटाइप से बाहर निकलिए मिस्टर भुवन.. “
“हम गाड़ी खुद चलाएंगे ऐसा हमने कहाँ ही नहीं.. ।
हम तो कह रहे थे कि हमें डस्ट की बहुत एलर्जी है, तो हम नाक में रुमाल बांध कर पीछे बैठेंगे.. आपको दिक़्क़त तो नहीं होगी न ?”
लीना उसकी बात सुन ज़ोर से हंस पड़ी..
“बहुत ज़ोर की दिक़्क़त होगी..इतनी कि तुम्हारी नाक में घूंसा मार कर उस दिक़्क़त को सही कर लेंगे.. !”
हँसते हुए लीना ने गाडी भुवन को बैठा कर आगे बढ़ा दी..
वो दोनों वहाँ से निकल गए..।
अपने कमरे की खिड़की पर खड़े सबरवाल जी उन दोनों को वहाँ से जाते हुए देख रहे थे.. उनके माथे पर बल पड़ गए..
उन्होंने अपने पीए को तुरंत तलब किया, वो तुरंत हाथ बांधे उनके सामने आ खड़ा हुआ..
“ये लड़की तो पुलिस वाली है न ? ये यहाँ क्या कर रही ?”
“सज्जन राणा की मौत की छानबीन कर रही है ये !”
“लेकिन वो तो अपनी मौत मरा है.. उसकी गाडी का तो ज़बरदस्त एक्सीडेंट हुआ था न ?”
“हम्म, लेकिन इसे लग रहा उस दुर्घटना के पीछे किसी का हाथ है !”
“और ये भुवन इसके साथ क्या कर रहा ?”
“छोटे साहब उसकी मदद कर रहे हैं.. !”
“भुवन क्या मदद कर सकता है इसमें ?”
“सज्जन राणा के दफ्तर के फुटेज भुवन भैया ही लेकर आये थे, यहाँ तक कि शंकर से भी उन्होंने ही पूछताछ की थी.. !”
“शंकर से ? वो इस सब में कैसे आ गया ?”
“वो सज्जन का खास आदमी रहा है न.. बहुत कुछ जानता होगा !”
“हम्म.. !” सबरवाल जी गहरी सोच में थे कि उनके पीए ने अगली बात बोल दी..
“शंकर पर हमला भी हो चुका है, और उसकी सुटक्षा के लिए भुवन भैया उसे घर पर ले आये हैं !”
“क्या ?” सबरवाल जी चौंक कर पीए को देखने लगे..
“शंकर यहाँ मौजूद है ?”
“जी… आप आदेश करे, आगे क्या करना है ?”
“हम्म.. अभी तो कुछ नहीं.. देखते हैं, क्या चल रहा ?”
सबरवाल जी ने वही रखा पानी का गिलास उठा क़र पिया और वापस खिड़की से बाहर देखने लगे..
क्रमशः

मायानगरी को लिखना छोड़ दिया क्या मार्च के बाद कोई पार्ट नहीं आया
Lina kuch jayada hi khul rahi hai bhuwan se kahin wo bhi bhuwan ko pasand toh nahi karne lagi kyunki bhuwan hai hi bahut achha.dono ki nazdikiyan kisi ko khatkne na lage
आगे के पार्ट नहीं मिल रहे हैं और जीवन साथी के पार्ट तो फरवरी के बाद से मिले ही नहीं ????
I like your writing 😍 but now the story was not like you started this where is mayanagari college & its characters. other wise the story was good 😊
Plz ma’am atithi ka part dijiye bahut time ho gaya….
And jeevansaathi bhi…
Buwan aur lina dono bilkul alag hain ek dusre se phir bhi ek dusre ke sath comfortable hain.lina toh kuch jayada hi.mana ki bhuwan uski madad kar raha hai par sidhe ghar aakar uska hath pakad ke le jana sabke samne gajab hai.police wali hai phir bhi
Aaj kal kaha gayab he aap Aparna?? Ham bhi bahot busy the ..isliye Aaj puch rahe he…aap thik he na??
Kahi is hatya me sabarval ji ka hath to nahi he na?….
Aaj to Leena ko dekh kar ham khush ho gaye…
Ma’am ap Jeevansathi kyo nhi de rahe.kya apne Jeevansathi likhana chod diya h
👌👌👌👌👌