अतिथि -38

अतिथि -38

  डिंकी हाथ मुहं धोने चली गयी…
उसकी जेब से गिरा खत वही ज़मीन पर पड़ा रह गया..
मंजरी इधर उधर देखती अपना वक्त बिता रही थी कि तभी उसकी नजर उस पर्चे पर पड़ी और वह ठिठक गयी..

वो आगे बढ़ कर उस पर्चे को उठाने जा रही थी कि उसका फ़ोन बजने लगा….
फ़ोन भूषण का था..
एक ठंडी सी आह भर कर मंजरी ने फ़ोन का वॉल्यूम बटन दबा दिया, अब फोन की आवाज आनी बंद हो गई थी, लेकिन फोन तो आ रहा था।
कुछ देर तक बैठकर अपने आप को संयत करने की कोशिश करती मंजरी ने आखिर फोन की स्क्रीन ऑन करके फोन उठा लिया..।

“कहां हो? कहीं बिजी हो क्या? बहुत देर में फोन उठाया?”

” हां थोड़ा बिजी थी, तुम बोलो..।”

मंजरी को फिलहाल भूषण के पुलिस द्वारा पकड़े जाने और जमानत पर छूटने के बारे में कोई भी जानकारी नहीं थी। क्योंकि उस दिन रेस्टोरेंट के बाद से उसकी भूषण से कोई बातचीत नहीं हुई थी। वह अपनी तरफ से भूषण से पूरी तरह से पल्ला झाड़ लेना चाहती थी, और इसलिए उसने भूषण को मैसेज करना या कॉल करना अपनी तरफ से पूरी तरह बंद कर दिया था..।

लेकिन भूषण इतना भी सीधा आदमी नहीं था..
वह मंजरी और माधव के साथ डिंकी को देखकर इतना तो समझ गया था कि डिंकी मंजरी से किसी खास तरीके से जुड़ी हुई है। और बस वही जानने के लिए भूषण ने आज मंजरी को फोन किया था। भूषण को भी अब इतना समझ में आने लग गया था कि मंजरी उससे किनारा कर रही है..।

“तुमसे मिलना चाहता हूं मंजरी, बस एक आखिरी बार..।”

“भूषण इस वक्त तो बहुत मुश्किल है, मैं तुम्हें कैसे समझाऊं मैं थोड़ा सा व्यस्त थी..।”

मंजरी भूषण से ब्रेकअप करना तो चाहती थी, लेकिन वह स्पष्ट रूप से उसे यह बात कह नहीं पा रही थी। भूषण भी इसी बात का फायदा उठा रहा था..।
अगर मंजरी एक बार में दोनों का रिश्ता तोड़ देती तो शायद भूषण भी उस पर उतना दबाव नहीं बना पाता क्योंकि भूषण भी अकेले मंजरी से ही तो बस जुड़ा नहीं था।
इसीलिए इन दोनों के बीच चूहा बिल्ली का खेल चल रहा था।
भूषण ने आखिर अपना ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया..।

“तुम बताओ या ना बताओ, मैं इतना तो समझ गया हूं मंजरी कि, अब तुम्हें मुझ में कोई रुचि नहीं है।”

” अरे नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है भूषण! बात बस इतनी है कि मेरी फैमिली हमारे रिश्ते के लिए शायद तैयार नहीं होगी। “

भूषण ने मंजरी की बात आधे में ही काट दी।

” देखो मंजरी इतना तो मैं भी जानता हूं कि अगर तुम चाहो तो पूरी दुनिया को अपने पैरों पर झुका सकती हो। तुम कोई साधारण लड़की नहीं हो। यह जरूर हो सकता है कि अब तुम मुझसे ज्यादा अपने परिवार को महत्व देने लगी हो।
चलो यह भी ठीक है, अच्छी बात है और इस बात के लिए मैं तुम्हें अप्रिशिएट करता हूं। इसलिए कह रहा हूं की बहुत दिन से मैं तुमसे यह बात कह देना चाहता था कि तुम्हारा इतने दिनों का रवैया देखकर मुझे समझ में तो आने लगा था कि अब तुम मुझसे इतना प्यार नहीं करती… मैं …”

“भूषण तुम गलत समझ रहे हो।”

” मेरी बात तो पूरी होने दो मंजरी, मैं बस यही कहना चाहता हूं कि जिंदगी है जिसमें हमें आगे बढ़ना है। हां कुछ समय के लिए हम दोनों साथ जुड़े थे, और वह समय मेरी जिंदगी का बहुत खास समय था।
इसे मैं अपनी आखिरी सांस तक नहीं भूल सकता। हो सकता है तुम्हारे बाद मेरी जिंदगी में कोई दूसरी लड़की आ भी जाए, लेकिन फिर भी जो रिश्ता मैंने तुमसे निभाया है, वह शायद ही किसी और के साथ निभा पाऊंगा।
   मैं चाहता हूं तुम भी अब आगे बढ़ जाओ। लेकिन हमारे पुराने सुनहरे दिनों की याद में एक आखरी बार हम मिल नहीं सकते?
  चिंता मत करो मैं किसी होटल के कमरे की बात नहीं कर रहा, किसी कैफे में साथ बैठकर एक कॉफी पी लेंगे बस..।”

मंजरी खोयी खोयी सी भूषण की बात सुन रही थी.. अचानक इसे क्या हो गया था…?
कल तक तो फोटो वीडियो लीक करने की धमकी दे रहा था, अचानक इसमें इतना सुधार कैसे हो गया..? यही सब सोचते सोचते मंजरी का ध्यान उस खत पर गया और उसने वो ख़त उठा लिया..

“चलो ठीक है, मैं उसी कैफे में दस मिनट में पहुँच जाउंगी !”

खत उठा क़र उसने खोला और पहले ही शब्द ने उसका ध्यान अपनी तरफ आकृष्ट कर लिया..

डियर माधव,  इसके आगे वो कुछ पढ़ पाती कि सुलोचना कमरे में चली आई..।

गर्मागर्म सैंडविच की खुशबु से मंजरी का ध्यान दरवाज़े पर गया और उसने वो खत मोड कर अपने पर्स में डाल लिया..

“मौसी परेशान होने की क्य़ा ज़रूरत थी.. ?”

“अपने बच्चो के लिए कुछ करने में कभी माँ परेशान नहीं होती..।
देख तो मुहं कैसा छोटा सा हो गया है.. जानती हूँ परसो सगाई है तो तू अन्न जल त्याग कर बैठी होगी कि तस्वीरों में बिलकुल मॉडल जैसी दुबली सी नजर आये..।
पता नहीं ऐसी सूखी सिकड़ी दिखने में ये आजकल की लड़कियों को क्या मजा आता है? हमारे समय में तो भरे भरे शरीर का चलन था..”

“पर आप तो भरे भरे शरीर की नहीं लगती !”

“हां तो मुझे शादी के बाद सभी टोक रहे थे कितनी दुबली है..।”

“लेकिन आप जैसी भी है बहुत सुंदर लगते हैं मासी। अभी मैं चलती हूं, बाद में आकर आपसे मिलती हूं।”

“अब बाद में कहां लाडो, परसों शाम को तो तुम्हारी सगाई है।”

अपनी मासी के गले से लगकर वह जाने को हुई लेकिन सुलोचना ने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक दिया।

” पहले सैंडविच खा ले उसके बाद जाना।”

लेकिन अब मंजरी का वहां मन नहीं लग रहा था। परसों की प्रस्तावित सगाई को उसे तोड़ना था और इसके लिए उसे अपनी मासी को विश्वास में लेना था, लेकिन फिलहाल भूषण ने उसे मिलने के लिए कैफे में बुला लिया था…
जब से उसकी जिंदगी में माधव आया था उसने भूषण से किनारा कर लिया था। लेकिन अब जब माधव ने उसे स्पष्ट कर दिया था कि वह मंजरी से सगाई नहीं कर सकता क्योंकि वह किसी और से प्यार करता है, तब ना चाहते हुए भी मंजरी के पास सगाई रोकने के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं बचा था ।
ऐसे में भूषण का उसे मिलने के लिए बुलाना उसके दिल में एक नई आहट जगा गया था।
   वह अब भूषण को एक दूसरे नजरिए से भी देखने लगी थी। उसे लगने लगा था कि अगर माधव से नहीं होती तो भूषण भी इतना बुरा भी नहीं था।
   उस पर भूषण उसे आखरी बार मिलने बुला रहा था। और इस बार उसने किसी तरह की कोई धमकी का इस्तेमाल भी नहीं किया था। इसलिए मंजरी यहां से तुरंत निकल कर भागने की फिराक में थी। जैसे तैसे सैंडविच निगल कर उसने फटाफट अपनी चाय खत्म की और अपनी मासी के गले से लगकर वह वहां से निकल गई।

डिंकी जब तक नहा कर बाहर निकली, तब तक मंजरी जा चुकी थी। डिंकी ने कपड़े बदल लिए थे और  फिलहाल खत दिमाग में नहीं था।
इधर मंजरी से मिलने भूषण कैफे में इंतजार कर रहा था.. ।

मंजरी के वहां पहुंचते ही भूषण अपनी जगह पर खड़ा हो गया। भूषण ने एक बेचारी सी मुस्कान अपने चेहरे पर लपेट रखी थी, उसके उस चेहरे को देखकर मंजरी को उर् पर हल्का सा तरस आ गया।

” कैसे हो ?”

“मैं ठीक हूं मंजरी, हम दोनों के बीच जो भी था और जितने समय भी रहा, मैं उस समय को अपनी जिंदगी का सबसे कीमती समय मानता हूं।
और मैं उसे भूलना नहीं चाहता। मानता हूं कि बीच में हम दोनों के बीच थोड़ी खटास पैदा हो गई थी, और तब मैंने तुम्हें तुम्हारे फोटोस और वीडियो के बारे में कुछ गलत कह दिया था। लेकिन यकीन मानो वह सब डिलीट कर दूंगा।
      लेकिन उसके बदले में मुझे तुमसे एक छोटा सा फेवर चाहिए!”

मेरे दिमाग में पहले क्यों नहीं आया कि भूषण जैसा मतलबी लड़का अपने किसी स्वार्थ के लिए ही मुझे यहां बुला सकता है!

  मन ही मन यह सोचती मंजरी कुछ देर पहले भूषण पर आए तरस को एक तरफ रख पूरी तरह प्रैक्टिकल होकर उसके सामने बैठ गयी..

” ठीक है बताओ क्या फेवर चाहिए तुम्हें?”

” मंजरी मैं यह जानना चाहता था कि तुम्हारी वह जो कजन है अनुराधा, वह कैसी लड़की है?”

” कैसी लड़की है मतलब? बहुत अच्छी लड़की है, मेरी मौसी की बेटी है, और…”

” हां और जानता हूं उसकी और माधव की सगाई होने वाली है!”

” हां उन दोनों की सगाई होने वाली है..!” मंजरी ने फिर झूठ बोल दिया..

“मंजरी तुम मेरी एक छोटी सी मदद कर सकती हो?”

” बोलो भी क्या मदद चाहिए ?”

मंजरी को अब इस परिचर्चा में जरा भी मजा नहीं आ रहा था, उसे लगा था भूषण शायद उस से पुरानी बातों के लिए माफी मांग कर एक बार फिर उसे अपने जीवन में लाने के लिए गुजारिश करेगा!
   लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था।

वो सोचने लगी थी की आखिर ये बन्दा उससे चाहता क्या है.. ?
इसके साथ ही उसके दिमाग में ख़त पर लिखा डियर माधव भी कुलबुलाने लगा था..
वो वहाँ से उठ कर भागने को मचल उठी लेकिन भूषण किसी पैसेंजर ट्रेन की गति से धीमे धीमे आगे बढ़ रहा था..
भूषण ने आगे कहना शुरू किया..

क्रमशः

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उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
11 months ago

डॉक्टर साहिबा अपने रचना को चूहा बिल्ली के खेल की तरह कर दिया है कभी खत बीच में आ रहा है कभी भूषण और दिल की धड़कन बढ़ा रहे हैं यह। 😯😯😯
अगर भूषण और मंजरी मिल गए तो फिर डिकी के पीछे पड़ जाएंगे यह दोनों ही पर माधव कभी भी अपनी रिंकी के साथ कुछ भी गलत नहीं होने देगा यह भी मुझे यकीन है और उससे पहले यह पता लगना जरूरी है कि आखिर मंजरी और भूषण चाहते क्या है अगर मंजरी भूषण के साथ मिलकर कुछ भी उल्टा सीधा करती है तो बेचारी डिकी क्या करेगी। 🤔🤔🤔😟😟😟
भाग बेहद मनोरंजक था और पढ़कर बहुत मजा आया इतनी सुंदर बाग के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया डॉक्टर साहिबा 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

ये मुआ भूषण बहुत ही ज्यादा स्वार्थी और चालबाज़ इंसान है, वो कैसे भी मंजरी को इस्तेमाल करेगा और मंजरी भी खत पढ़ने से पहले तो डिंकी मंजरी की बहन है पर जब खत पढ़ लिया तो मंजरी और भूषण एक हो जायेंगे और डिंकी को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोडेंगे।
कहानी हर मोड़ पर रोचक होती जा रही है, बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌👌🙏।

Jagriti
Jagriti
1 year ago

Good one एपिसोड

Ashok Garg
Ashok Garg
1 year ago

Very nice part 👌 👍 👏
Kya ye itna bhi easy है
Pyar ke पंछी इतनी जल्दी aur आसानी से मुकाम पर?
अभी परिक्षा की कई घाटियां par करने है

Sushila kumawat
Sushila kumawat
1 year ago

भूषण और मंजरी की ये मुलाकात डिंकी और भूषण के लिए परेशानियां खड़ी करने वाली है

Geeta Prasad
Geeta Prasad
1 year ago

Bhushan bht hi chalak or swarthi insan h.wo Manjri ko Dinki khilaf use krna chahta h..phle to syd Manjri uske jhanse m aati bhi nhi,lekin letter pdhne k bd , apni burai pdhne k bd wo bhi Dinki ko nuksaan phunchana chahegi…
Thmku ma’am part dene k liye…
Mind blowing kahani👌👌

Deepa verma
Deepa verma
1 year ago

भयंकर ट्विस्ट है भाई कहानी में।👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻 मज़ा आ रहा है अपर्णा जी।

Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Bhushan chlak,Matlabi,dhokhaybaaj larka hai wo sidhi shadhi Anuradha (Dinky ) ke pichaya para hai hai,Ab Manjari ko se faver chahta hai,Ab aagya kya hoga seeing in the next part.

Meenakshi Sharma
Meenakshi Sharma
1 year ago

बेहतरीन पार्ट 👌👍
प्लीज मंजरी ये लेटर न पढ़ पाए वरना दोनों बहनों के बीच में दरार आ जाएगी। हो सकता है मंजरी अपनी शादी टूटने का सर इल्ज़ाम डिंकी पर डाल दे।

Nishu
Nishu
1 year ago

Nice part , 👌 👍 👏🏼 👌 👍 👏🏼