जीवनसाथी -3 भाग -139

जीवनसाथी -3 भाग -139

  शोवन और परी वहाँ से निकल गए..

रास्ते पर गाडी डाल कर शोवन ने परी की तरफ देखा..

“क्या था ये सब ? अब आप कुछ बताएंगी प्रिंसेस ?”

“क्या सब ?”

“यही, पैर में चोट लग गयी, फिसल कर गिर गयी.. ये कैसा प्रैंक था ?”

परी हल्के से मुस्कुरा उठी..

“ये सब यश और धनुष की मिलीभगत थी.. दोनों बहुत बदमाश है…।
मैं अकेले ही तुम्हे सरप्राइज देना चाहती थी, लेकिन ये दोनों कुछ करने दे तब न..।
धनुष, तुम्हारा छोटा भाई हद से ज़्यादा शरारती है.. मुझसे कहता है आप भाभी हो लेकिन आपने अपने दिल की बात बता दी, लेकिन भाई अपना होकर भी नहीं बता रहा..।
भैया से भी उगलवा कर रहूँगा..।”

“और तुम उस बेवकूफ की बात में आ भी गयी.. तुम्हे क्या ज़रूरत थी ये सब करने की.. ?”

“तुम्हारी कसम जो दे रखी थी इन दोनों बदमाशों ने..।
मैंने अकेले सारी पार्टी प्लान कर ली थी.. ।
उस में ये दोनों कूद पड़े। मुझे कसम खिला कर सब पूछ लिया, फिर हर्ष भाई और मीठी को भी इन्वॉल्व कर लिया।

   और फिर यश ने नकली आवाज़ बना कर तुम्हे फोन कर के बुला लिया और मुझे वापस तुम्हारी कसम देकर छिपा दिया..

  ” बस बस अब तुम जाकर छिप जाओ परी !”

यश की इस बात पर परी ने उसे घूर कर देखा

  ‘ वाह बेटा पार्टी तुम सब अकेले अकेले कर लोगे, वो भी मेरे शोवन के साथ !’

‘ तभी तो भाई साहब के मुहं से बोल फूटेंगे कि वो अपनी परी को मिस कर रहे, वरना तो बोलने से रहे !”

  धनुष की इस बात पर परी ने नाराज़गी से उसे देखा

  “तुम सब उसके साथ लंच खाओगे, और मैं क्या करुँगी ?”

“तुम उसका सर खा लेना बाद में ! वैसे भी वो तुम्हारे बिना ज़्यादा देर बैठ तो पायेगा नहीं, और जैसे ही वो निकलेगा, उसे लिफ़्ट में दबोच कर तुम उसे लेकर फरार हो जाओगी !”

धनुष के ऐसा कहने पर परी ने उसे घूर कर देखा और जाते जाते उसे धमकी दे गयी..

“एक बार घर आने दो मुझे, फिर तो मिस्टर धनुष तुमसे गिन गिन कर बदले लूंगी.. !”

सारी बात बताने के बाद परी ने शोवन की तरफ देखा..

“मेरा भी मन कहाँ मान रहा था तुम्हारे बिना बाहर खड़े रहने के लिए, लेकिन क्या करती मज़बूरी थी मेरी.. !”

शोवन ने मुस्कुरा कर परी को अपने पास खींच कर उसका माथा चूम लिया..।

रेडियो पर चलते किसी गीत के साथ गुनगुनाती हुई परी शोवन के साथ मगन थी कि उसके पर्स में पड़ा फ़ोन बजने लगा…
लेकिन उसका फ़ोन साइलेंट मोड पर था इसलिए उसे सुनाई नहीं पड़ा..।

मेरी सौ बिमारियों का तू इलाज है,
तू ही मेरा बीता वक़्त, तू ही आज है,
दिन, महीने, साल, कम पड़ेंगे संग तेरे
ज़िंदगी जो माँगू पूरी, क्या ख़याल है?

माना दिल डरा हुआ है तेरे सामने
दिल को मेरे क्या हुआ है तेरे आने से?
सारी ज़िंदगी मेरी है तेरी नाम ही
सिर्फ़ साल माँगना तो बेतुका सवाल है…

दोनों खुद में खोये आगे बढ़ते चले गए और परी के पर्स में पड़ा फ़ोन थक हार कर शांत पड़ गया..

****

शाम बीते परी घर पहुँच गयी…
वो कुछ गुनगुनाते हुए अपने कमरे में दाखिल हुई ही थी कि उसकी सहायिका उसे बुलाने चली आई..

“बाई सा हुकुम आपको मंझली रानी सा नीचे बुला रही है !”

“मॉम बुला रही है, लेकिन क्यों ?”

“कुछ खास मेहमान आये हुए है, उन्ही से मिलवाना चाहती हैं आपको !”

सहायिका झुक कर प्रणाम करती हुई बाहर निकल गयी..

परी ने एक नजर आईने पर डाली और वो भी कमरे से बाहर निकल गयी..

नीचे दीवानखाने में वो पहुंची और मेहमानों को देख कर पल भर के लिए ठिठक गयी..

उसे लगा जैसे इन्हे कहीं तो देखा है, लेकिन कहाँ ये उसे याद नहीं आया..
वो याददाश्त पर ज़ोर डालती हुई अंदर दाखिल हो गयी… ।
अंदर उसका लगभग सारा परिवार मौजूद था, सिर्फ बांसुरी काकी सा और काका साहब को छोड़ कर..।
उसे मालूम था वो दोनों लंदन निकल चुके हैं..।

आज उसका दिन बहुत प्यारा बीता था, वो अब भी अपनी सांसो में घुली शोवन की सांसो को महसूस कर पा रही थी..।
उसके चेहरे बालों हाथों गर्दन पर शोवन के स्पर्श के ताजा ताजा निशान बाकी थे..।

वो शोवन की खुशबु महसूस करती मगन थी.. ।

वो सबका अभिवादन कर अपनी माँ के पास बैठने ही जा रही थी की सामने बैठी पृथुलकाय महिला बोल पड़ी..

“हमे तो राजकुमारी पर्णिका बहुत पसंद आई, क्यों आभास, आपका क्या विचार है ?”

महिला ने आभास से पूछने की बस औपचारिकता निभाई थी, उसके सवाल में दिख रहे शब्द ही सवाल कर रहे थे, बाकी आवाज की गंभीरता में आदेश छिपा था कि उनके आदेश को यहाँ मौजूद हर व्यक्ति को स्वीकारना ही होगा..

अपने नाम पर पसंदगी की मुहर लगती देख परी आंखे फाडे अपनी माँ की तरफ देखने लगी..

उसकी माँ ने मुस्कुरा कर उसे देखा और उसकी नजर उतार ली..

“ये भाभी साहब के परिचित है, और वैसे इनका नाम किसी परिचय का मुहताज नहीं..।
यूरोप के पास इन्होने अपना खुद का एक छोटा शहर बसा लिया है.. “परिहार सिटी”..
इनके पूर्वजों को वहाँ की रानी ने खुद अपने हाथो से एक शहर तोहफे में दे दिया था, तब से ये वहीँ बस गए..।

   सारा व्यापार सब कुछ वहीँ हैं, लेकिन संस्कर ऐसे कि अपने बेटों के लिए लड़की भारत से ही चुनना है..।

वहाँ बसने के बाद ये इनकी सांतवी पीढ़ी है..।
और अब अपने बेटे के लिए भी ये हिन्दुस्तानी लड़की ही चाहते हैं। और ये हमारे लिए कितने सौभाग्य की बात है कि इन्होने सबसे पहले रूपा भाभी सा से ही बात की, और देखो रूपा भाभी सा ने तुम्हारे बारे में बात की और तुम इन्हें पसंद भी आ गयीं…।”

“पसंद आ गयी, किस लिए पसंद आ गयी !”

परी धीमे से पूछ बैठी..

“शादी के लिए प्रिंसेस, और किस लिए !”

जया ने धीमे से जवाब दिया और सामने बैठी मिसेस परिहार से कुछ पूछने लगी..
लेकिन परी के चेहरे का रंग उड़ गया..

ये अचानक क्या हो गया था, उसने तो ऐसा सोचा ही नहीं था। वो तो अब तक शोवन में खोयी खुद को भूली बैठी थी। उसे तो ये तक ध्यान नहीं रहा था कि उसे शोवन के बारे में कम से कम अपनी माँ से बात कर लेनी चाहिए थी..
उसने आंखे उठा कर सामने बैठे लड़के को देखने की कोशिश की तभी वो महिला बोल पड़ी..

“बच्चे आपस में बातचीत कर लेते तो अच्छा रहता न ?”

“जी बिलकुल… जाओ परी, आभास जी को अपना गार्डन घुमा दो !”

“गार्डन माय..

बोलते बोलते परी रुक गयी.. आभास अपनी जगह पर खड़ा हो गया और फिर न चाहते हुए भी परी को उसके साथ जाना पड़ा..

“हमने आपको पहले कहीं देखा है !”

परी को गहरी नजर से देखते हुए आभास बोल पड़ा..

परी ने उसकी तरफ देखा, पहचान तो वो भी गयी थी कि लिफ़्ट में उसके और शोवन के साथ जो तिकड़ी शामिल थी, ये वही लोग थे पर उसने कुछ कहा नहीं..।

भेद भरी नजर से परी को देखते हुए आभास एक बार फिर बोल पड़ा..

“लिफ़्ट में आपके साथ जो लड़का था, आशा करते हैं वो आपका बॉयफ्रेंड नहीं था.. !”

परी कोई जवाब दे पाती उसके पहले उसका फ़ोन बजने लगा, उसने देखा “ज़िंदगी कालिंग” लिखा आ रहा था..

***

शौर्य और विक्रम लंदन पहुँच कर अपने होटल में दाखिल हुए ही थे कि सामने खड़े राजा साहब और रानी बांसुरी पर उनकी नजर पड़ी और शौर्य की आंखे ख़ुशी से चमक उठी..
वो भाग कर अपनी माँ के पास पहुँच गया और उनके गले से लग गया!

माँ बेटे दोनों की आँखे छलक आई..

बांसुरी ने शौर्य को भींच लिया, जैसे बहुत देर बाद मिलने पर गाय अपने बछड़े को प्यार से चूमती चाटती है, ऐसे ही बांसुरी का भी शौर्य को छोड़ने का मन नहीं कर रहा था, शौर्य खुद ही बांसुरी से अलग हट कर उसके पैरों में झुक गया..।

बांसुरी के पैरों से उठ कर उसने राजा की तरफ नजर उठायी और आगे बढ़ कर उसके पैरों में झुकने लगा कि राजा ने उसे खीँच कर खुद के सीने से लगा लिया..

एक पिता के सीने में धड़कती अपने बेटे क़ी खैरियत क़ी  चिंता बेटे ने महसूस की या नहीं, लेकिन इस बार भी शौर्य की आंखे भर आई..

उनसे जरा हट कर खड़े विक्रम को शौर्य के चेहरे और स्वभाव के पल पल बदलते रंग समझ में नहीं आ रहे थे! वो अचरज से उस पिता पुत्र की जोड़ी के नैसर्गिक भावनात्मक उतार चढाव देखता सोच में पड़ गया था !

क्रमशः

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Archana Singh
Archana Singh
3 months ago

Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

Neha
Neha
10 months ago

Ma’am kitne ya shayad mahine ho gaye hai aapne next part nahi dala. Itna late post karengi to log aapki story ko bhool jayenge aur story padhne me bhi maza nahi aayega.

Varsha
Varsha
10 months ago

क्या बात है लेखिका जी अधूरी कहानी बंद कर दी क्या या कहीं और आ रही है

Sonam
Sonam
10 months ago

Aap agla part kyu nahi de rahi hai

aparna
Admin
10 months ago
Reply to  Sonam

जी जल्दी ही अगला भाग आएगा

Varsha
Varsha
10 months ago
Reply to  aparna

बहुत बहुत धन्यवाद

Alpa Singhal
Alpa Singhal
10 months ago

Hello mam
Kya aap next parts kis aur platforms per upload kar rahe pls bataye
Because it’s a long time to waiting for the next parts

Kalpana
Kalpana
10 months ago

Mem pls jivansathi ke bhi part post kijiyega I am waiting

Ritu V
Ritu V
10 months ago

Next part kb aayega ma’am 2months ho gye h

Ritu
Ritu
11 months ago

Next part

Vandana attri
Vandana attri
11 months ago

Hlo mam…..parts kb aayenge ……we are waiting

Nisha
Nisha
11 months ago

Behad khoobsurat part, ab jaldi dusara part bhi digiye bahut wait karna padta hai, mujhe jeevansathi behad pasand hai 👌👌👌👌