
जीवनसाथी -3 भाग -137
महल में चल रही धूमधाम से विलग बांसुरी का मन अपने बेटे में ही लगा हुआ था !
उसकी शौर्य से बात नहीं हो पा रही थी, और न ही विक्रम अब उसकी कोई खोज खबर दे रहा था.. आखिर चल क्या रहा था..
ये लड़का पहले कभी तो ऐसे गायब नहीं होता था….
शौर्य जहाँ भी रहे, दिन भर में एक बार वो अपनी माँ से बात ज़रूर करता था..
बांसुरी उसी के बारे में सोचती बैठी थी.. आज रह रह कर उसे महल में बिताये अपने शुरुवाती दिन याद आ रहे थे..
जब वो राजा के साथ पहली बार इस महल में आई थी, उस वक्त मेनका उसकी सहायिका नियुक्त की गयी थी.. शुरुवात में उसका स्वभाव जो भी रहा हो लेकिन बाद में वो बांसुरी के प्रति कोमल होती चली गयी थी…
ज़िन्दगी वाकई एक सफर है, जहाँ हम अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक अनवरत चलते रहते हैं। जहाँ कभी किसी मोड पर तो किसी चौराहे पर, कोई न कोई रिश्ता या दोस्त जुड़ता चला जाता है..।
वो कितनी दूर हमारे साथ चलेगा, ये सब हमारा और उसका प्रारब्ध ही तो है..।
जिसका साथ जिस अगले मोड तक है, वो वहीँ तक साथ चलेगा, उसके बाद उसका साथ हमारे न चाहते हुए भी छूट ही जाता है।
लेकिन चाहे किसी का साथ मिलता रहे या छूट जाए हमे तो चलना ही है…
अविश्रान्त अनवरत अव्याघात !!
बांसुरी सामने लगी शौर्य की आदमकद तस्वीर को देखती खुद में खोयी थी कि किसी ने उसके कंधे पर हाथ रख दिया..
वो चौंकी नहीं, हल्के से मुस्कुरा दी… वो समझ गयी साहब आ गए हैं !
” आ गए आप ?”
वो पलट गयी..
राजा पीछे खड़ा मुस्कुरा रहा था, अपनी बांह पर कमीज के कफ का बटन खोलते हुए वो आगे बढ़ कर दूसरी कुर्सी में बैठ गया !
“आपके लिए चाय मंगवा देती हूँ !”
“तुम ही बना कर ले आओ, अपनी वाली चाय ! अब तो तुम्हारी संगत में मुझे भी महल की चाय बेस्वाद लगने लगी है !”
वो मुस्कुरा उठा, वो हंस कर खड़ी हो गयी.. ऐसा लगा शौर्य को सोचते हुए जो एकाकीपन मन में छाया था राजा के आने से धुल पुंछ गया..
वो चहक कर आगे बढ़ गयी..
“अभी लायी !”
“अच्छा सुनो.. तुम बैठो, अपनी खास सहायिका को बता दो, उसे भी तो सीखा दी है न तुमने, अपनी अद्रक इलाइची वाली चाय !”
“मैंने सोचा, साहब बड़े दिनों बाद लौटे हैं उनके लिए मैं ही बना दूँ !”
राजा ने उसका हाथ पकड़ लिया..
“हुकुम !”
बांसुरी की आंखे छलक आई..
“आओ यहाँ बैठो, और बताओ की क्या हुआ है ? क्यों इतनी परेशान लग रही हो ?”
“रुकिए, चाय के लिए बोल दूँ !”
“नहीं, पहले बताओ !”
बांसुरी के बिना कुछ कहे भी राजा हमेशा की तरह उसके चेहरे की उदासी भांप गया..
बांसुरी राजा के पास गयी और उसके सीने से लग गयी..
“शौर्य की कोई खोज खबर नहीं !”
“क्या ?” राजा के माथे पर बल पड़ गए
“उससे पिछले दो तीन दिन से ठीक से बात नहीं हो पायी है, मन घबरा सा रहा ! बस वही विचार मन में चल रहा कि कहाँ है क्या कर रहा है.. बीच में एक दिन तो उसका फ़ोन बंद ही रहा..।”
“विक्रम से भी बात नहीं हुई क्या ?”
“नहीं.. उससे भी उस दिन से बात नहीं हुई, जबसे शौर्य से नहीं हुई !”
राजा के माथे पर चिंता की लकीर उभर आई..
राजा तुरंत अपने मोबाइल पर प्रेम का नंबर निकालने लगा..
“सुनिए साहब !”
“हम्म बोलो !”
“प्रेम भैया को मत परेशान कीजिये !”
“फिर ?”
“मैं खुद लंदन जाना चाहती हूँ.. अगर आपके पास वक्त नहीं है तो कोई बात नहीं, मैं अकेली चली जाउंगी !
राजा ने बांसुरी की तरफ देखा और मोबाइल पर समर के नंबर को देख कर उसे कॉल लगा दिया…
समर को सबसे पहली उपलब्ध लंदन की टिकट्स करने को बोल कर राजा ने बांसुरी की तरफ देखा
“अब ठीक है ?”
बांसुरी ने राजा की तरफ देखा और वो उसके सीने से लग कर मुस्कुरा उठी.. उसी समय बांसुरी की सहायिका उन दोनों के लिए चाय और जलपान ले आई…
“चाय के लिए कब बोल दिया हुकुम ?”
“जब आप टिकट्स के लिए बोल रहे थे, मेरी वाली मध्यमवर्गीय तेज़ अद्रक वाली चाय लीजिये, पूरे दिन की थकान उतर जाएगी..।
और सुनिए क्या आप भी लंदन जायेंगे ?”
“हाँ.. मैं भी तो कब से नहीं मिला हूँ शौर्य से ! आखिर मेरा भी बेटा है, मुझे भी उसकी चिंता होती है हुकुम।
हाँ ये और बात है कि मैं दिखा नहीं पाता और वो समझ नहीं पाता !”
बांसुरी ने चाय का प्याला राजा की तरफ बढ़ा दिया. …
दोनों साथ साथ चाय पी रहे थे कि समर का फ़ोन आ गया।
उसने रात की ही दोनों की टिकट्स करवा दी थी..
समर से बात कर के राजा के चेहरे पर मुस्कान चली आई..
“क्या हुआ, हो गयी टिकट्स ?”
“जी हुकुम.. जैसा आप चाहती थी, आज रात ही निकलना है !”
“आज रात की ही ?” बांसुरी चौंक कर उसे देखने लगी..
“हाँ फिर ? समर को कुछ बोलूं और वो न कर पाए क्या ये सम्भव है ? चलने की तैयारी कर लो, मैं ज़रा भाभी साहब और भाई सा से मिल कर आता हूँ !”
“ठीक है !”
बांसुरी के चेहरे पर संतुष्टि के भाव चले आये, वो अपनी सहायिका को साथ लिए अंदर के कमरे में चली गयी…
****
शोवन अपने केबिन में बैठा किसी मरीज़ की फाइल को बड़े ध्यान से पढ़ रहा था उसी समय उसका मोबाइल बजने लगा..
उसने देखा किसी अनजान नंबर से कॉल आ रहा था..
“डॉक्टर साहब जल्दी आ जाइये !”
“व्हाट.. ? कौन बोल रहा है ?”
आवाज़ की घबराहट को भांप कर शोवन ने नरमी से पूछा.. उसके सवाल पर वो आवाज़ और कांपने लगी..
“सर प्लीज आप कैसे भी यहाँ तुरंत पहुंचिए.. किसी की ज़िन्दगी और मौत का सवाल है !”
“देखिये मैं डॉक्टर हूँ भगवान नहीं.. आप मरीज़ को यहाँ लेकर आइये.. अस्पताल में जितनी सुविधाएं हैं वह सारी सुविधाएं लेकर मैं वहां इमरजेंसी केस हैंडल करने नहीं आ सकता..।”
“वह सब मैं समझ रही हूं डॉक्टर साहब, लेकिन इस वक्त इस मरीज की हालत ऐसी नहीं है कि मैं वहां लेकर आ सकूं।
आप प्लीज किसी भी तरीके से बस यहां आ जाइए। इतना कर दीजिए कि इन्हें अस्पताल ले जाया जा सके..।”
“आप कहां से बोल रही हो और कौन बोल रही हैं..?”
“मैं इसी शहर में नयी हूं। आज मेरे दादाजी का 86वां बर्थडे है, और उसे सेलिब्रेट करने के लिए हम याना आए हुए थे।
बस इस रेस्टोरेंट में हम सेलिब्रेशन शुरू करने वाले थे कि दादाजी को बेचैनी सी लगी और वह बेहोश हो गए हैं..।”
“तो आप बाकी लोगों की मदद से उन्हें गाड़ी में डालिए और इस अस्पताल तक ले आइए.”
“डॉक्टर साहब इनकी हालत अस्पताल पहुंचने लायक नहीं है। मैं अकेली इन्हे लेकर नहीं आ सकती। यहां मौजूद कोई भी मेरी मदद करने को तैयार नहीं है।
दादाजी की उम्र और उनकी हालत देखकर कोई मदद के लिए आगे नहीं आ रहा। यहां तक कि मुझसे टैक्सी भी बुक नहीं हो रही, वरना मैं आपको कॉल नहीं करती।
यहां मौजूद लोगों के सामने में बहुत गिङगिङाई तब किसी ने आपका नंबर दिया है कि आप बहुत अच्छे डॉक्टर हैं और आप किसी भी क्रिटिकल मरीज़ को बचा लेते हैं!
मेरे दादाजी हार्ट पेशेंट है और मैंने सुना है आप भी कार्डियक सर्जन है…।।
प्लीज डॉक्टर साहब! इस वक्त मुझे और मेरे दादाजी को आपकी बहुत जरूरत है। प्लीज आ जाइए, आप जितनी फीस कहेंगे, मैं देने के लिए तैयार हूं..।”
“बात फीस की नहीं एथिक्स की है।
मैं कभी भी किसी भी मरीज के घर या उनकी जगह पर जाकर पेशेंट अटेंड नहीं करता हूं। लेकिन चलिए ठीक है, आपने क्या एड्रेस बताया, फिर से बताइए।
मैं वहां पहुंच जाता हूं…”
“याना रेस्टोरेंट व्हाइट टावर के पास 36 लेन!”
“ओके आई एम कमिंग !”
शोवन जितना ही अच्छा डॉक्टर था, उतना ही भावुक इंसान भी।
उसने तुरंत अपने जरूरी सामान समेटे और उस लड़की के बताएं पते की तरफ अपनी गाड़ी भगा दी।
कुछ देर बाद ही वह 36 लेन पहुंच चुका था। वहां व्हाइट टावर के पास मौजूद याना रेस्टोरेंट ढूंढने में उसे ज्यादा वक्त नहीं लगा।
वहां पहुंचकर उसने कार पार्किंग में डाली और तुरंत रेस्टोरेंट की तरफ बढ़ गया। दरवाजे से अंदर जाते ही सूट बूट में याना का मैनेजर उससे टकरा गया।
मैनेजर से वह पूछताछ करने लगा..
” एक्सक्यूज मी, यहां कोई ओल्ड एज पेशेंट है जिसे अचानक स्ट्रोक आया और वह बेहोश हो गए..!”
” यस सर, आप यहां से ऊपर फर्स्ट फ्लोर में चले जाइए, वहां सेकंड टेबल पर वह लोग मौजूद हैं!”
“ओके थैंक्स !”
शोवन तेज़ी से सीढियों की तरफ बढ़ रहा था कि उस मैनेजर ने शोवन को टोक दिया।
” सर आप इधर लेफ्ट से चले जाइए..।”
“लेकिन एक ही फ्लोर तो है..।”
“सर आपको हुई असुविधा के लिए खेद है, लेकिन सीढियों पर अभी ही क्लीनिंग का काम हुआ है। सो प्लीज आप लिफ्ट यूज़ कर लीजिए।”
इतना कहकर मैनेजर शोवन को अपने साथ लिफ्ट तक ले गया।
लिफ्ट का बटन दबाकर मैनेजर विनम्रता से दुहरा होता एक तरफ खड़ा हो गया।
शोवन जो अक्सर सीढ़ियां उपयोग में लाया करता था, बिल्कुल ही बेमन से लिफ्ट में दाखिल हो गया।
उसने पहले फ्लोर का बटन दबाया और चुपचाप खड़ा हो गया। लिफ्ट का दरवाजा बंद हुआ और लिफ्ट ऊपर की तरफ निकल गई।
कुछ सेकंड्स में ही वो पहली मंजिल पर पहुँच चुका था..
लिफ़्ट का दरवाज़ा खुला और…
क्रमशः

Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
Very very nice part 👌👌
Hello ma’am
Please athithi ke parts bhi daliye
Mujhe aapki kahaniyo ki aadat lg chuki h…bahut dino se aapne aatithi ki kahani aage nhi bdhayi…mm rojana yaha aake check krti hu ki aaj to atithi ka part aaya hoga..pr rojana mayushi hath lgti h..
Please ma’am aapki chhoti Behan ki baat maan lijiye … Aatishi ke parts bhi dala kijiye alternative days me 😊😅🤞🏻
Sach me shaurya ki chinta toh hogi hi na.achha hai raja aur basuri ja rahe hain wahan.showan ko ager kisi ne galat maksad se bulaya ho toh.thik nahi hai uska aise jana
Wow superb episode
आज बहुत दिनों बाद बांसुरी और उनके राजा साहब को साथ देखकर बहुत अच्छा लगा और दुगना मज़ा तो तब आए ज़ब अदरक वाली चाय की चुस्कीयों के साथ कुछ दिल दियाँ गल्लाँ करा तेरे नाल.. तू होवे सामने मै होवा तेरे तेरे नाल 😊,। चलो अच्छा है बांसुरी और राजा दोनों ही लंदन जा रहे शौर्य से मिलने, अब सारे राज पर पर्दा हट जायगा..अगर ये मुरली सच मे शौर्य है तो बांसुरी एक मिनट मे अपने बच्चे को पहचान जायगी 😊माँ.. जो है।
दूसरी तरह हैं… 🤔 लिफ्ट का दरवाजा खुला और सामने..कौन था.. ये कोई और नहीं अपनी परी ही होगी वही ये सब खुराफ़ात कर सकती है।
बेहद खूबसूरत भाग 👌👌👌
और सामने परी का इंतजाम कही डॉ साहब गुस्सा न हो जाए। बेहतरीन भाग
Very nice
Very nice n interesting and Bahtareen n Lajabab part
जाने क्यों लेकिन ये पारी का प्रैंक लग रहा है😎😍
राजा साहब अपनी रानी साहिबा को लेकर लंदन चले💕💕अब लंदन कैसे ठुमकेगा देखते हैं😉😎