
अतिथि -33
अब तक आपने पढ़ा, रूबी अपने भरोसेमंद कुछ खास लोगों के बारे में योगिता भूषण और डिंकी के सामने चर्चा करते हुए बताती है कि क्यों मिस्टर लाल और ज्योतिका उसे धोखा नहीं दे सकते..
उन दोनों के सबसे कठिन समय पर रूबी ने उनका साथ दिया और जिसके कारण वो दोनों ही रूबी से दिल से जुड़े हुए हैं..।
इन खुलासों को सुनते हुए योगिता के चेहरे पर भय झलकने लगता है..।
उसे समझ में आने लगता है कि वो रूबी को जितना सीधा और सरल समझ कर उसे बुद्धू बनाने की कोशिश में लगी है, ये काम इतना भी आसान नहीं है..।
दो लोगो के नाम के बाद रूबी अपनी तीसरी एम्पलॉई के बारे में बताना शुरू करती है..
और वो एम्पलॉई है करुणा..
अब आगे..
“रूबी.. तुम्हे क्या लग रहा, क्या इस सब के पीछे हम है ?” योगिता फट पड़ी..
रूबी ने ठंडी सर्द नज़रों से उसकी तरफ देखा..
“मैंने ऐसा कब कहा योगिता, तुम खुद पर क्यों ले रही हो..।
मेरे लिए तो ये बहुत बड़ा चेलेंज हो गया है.. तुम मेरी जगह खुद को रख कर सोचो, मैंने जिन पर सबसे ज्यादा विश्वास किया उन्हीं लोगों में से कोई एक दगाबाज निकला है।
और उसने भी कोई छोटा-मोटा दगा नहीं दिया है, करोड़ों की डील साइन की है मेरे प्रोडक्ट्स पर मेरे डिजाइंस पर।
सीधे तौर पर अगर कोई मुझसे दुश्मनी निकालना चाहता तो मेरे सामने अपना डिजाइनर बुटीक खोल देता, लेकिन जिसने मुझे धोखा दिया है, उसमें मेरे सामने खड़े होकर यह स्वीकार करने की हिम्मत नहीं है।
यह मैं जानती हूं, और इसीलिए उसने चोरी की। अगर सिर्फ मेरे डिजाइन चोरी हुए होते तो भी मैं शायद इतना नहीं सोचती, लेकिन उसने मेरे ही डिजाइंस के कोड प्राइस को बदलकर मार्केट में लॉन्च किया है, ये धोखेबाजी नहीं गद्दारी है, बहुत बड़ी गद्दारी।
और इसलिए मैं किसी बेगुनाह को इस गद्दारी की सजा नहीं दे सकती।
लेकिन जिसने मेरे साथ गद्दारी की है, धोखा दिया है, उसे मैं छोड़ भी नहीं सकती। मिस्टर लाल और ज्योतिका कभी धोखा नहीं दे सकते मुझे, रही बात करूणा की तो…”
रूबी की बात आधे ही में काट कर अब तक चुप खड़ा भूषण बोल पड़ा..
“करुणा ही गद्दार है.. जब मिस्टर लाल धोखा नहीं दे सकते, ज्योतिका धोखा नहीं दे सकती तो बचा कौन ?
करुणा के अलावा ऐसी जलील हरकत और कोई नहीं कर सकता.. वही है ! मैं सौ प्रतिशत गंभीर हूँ इस मामले में..
करुणा ने ही धोखा किया है.. उसे तुरंत फायर किया जाये !
लैपटॉप से डिज़ाइन्स चुराने तक की बात और थी लेकिन सारे क्लाइंट्स में से कौन डील कर सकता है कौन नहीं ये तय कर पाना, उसके बाद उनके कॉन्टेक्ट्स निकाल कर ड़ोर टू ड़ोर विजिट कर हर किसी के ऑफिस जाकर उन्हें इन डिज़ाइन्स को दिखा कर उन्हें कन्विंस करना इतना भी आसान काम नहीं रहा होगा..।
ये काम कोई शातिर ही कर सकता है..।
ऐसे थोड़े न इतने बड़े बड़े फैशन ब्रांड्स डीलर्स किसी को मिलने का समय दे देते हैं। उसके लिए भी लम्बे चौड़े कॉन्टैक्ट्स की ज़रूरत होती है.. उसके बाद उन फैशन ब्रांड्स को अपने प्रोडक्ट्स के लिए रेडी करना अपने आप में मगजमारी है..।
इस सब के लिए कोई शातिर दिमाग ही प्लान कर सकता है..।
और वो शातिर दिमाग है..।”
भूषण की बात आधी ही काट कर रूबी बोल पड़ी..
“तुम.. वो तुम हो भूषण रॉय !”
रूबी ध्यान से भूषण की तरफ देखने लगी और भूषण हड़बड़ा गया..
“मुझ पर झूठा आरोप लगाने से पहले आपको सोच समझ लेना चाहिए रूबी मैडम..।
मैं अब भी कह रहा हूँ कि करुणा है इस सब के पीछे..
उस लड़की पर मुझे कभी ट्रस्ट नहीं रहा.. वो सबसे कटी सी रहने वाली खुद में ही खोयी सी चुपचाप सी लड़की के दिल दिमाग में क्या बवंडर चल रहा आपको क्या मालूम.. ?”
“मुझे नहीं तो फिर किसे मालूम होगा.. करुणा मेरी सगी बहन जो है !”
योगिता की आंखे फटी रह गयी..
भूषण खुद भी फ़टी फटी आँखों से योगिता को देख रहा था.. कॉलेज में साथ पढ़ने के बावजूद कैसे वो कभी रूबी की बहन के बारे में नहीं जान पायी… हाँ रूबी की एक बहन तो थी जो विदेश में रह कर पढ़ रही थी, लेकिन ये करुणा वही है ये कोई सोच भी नही सकता था….
“करुणा और मैं सगी बहने हैं, ये बिज़नेस आईडिया उसी का था.. मैं तो बस छोटा सा बुटीक चलाना चाहती थी, लेकिन उसी ने मुझमे उत्साह भरा और मेरे छोटे से सपने को इतना वृहत रूप दिया..।
वो मुझे क्या धोखा देगी, मुझसे ज़्यादा तो इस कम्पनी में उसके शेयर्स है, वो फर्स्ट सीईओ है आर वी एथनिक की.. !
मैं आर वी एथनिक के नाम में भी उसका नाम शामिल करना चाहती थी, लेकिन उसने मना कर दिया…।
जिसे बचपन से ही कभी किसी चीज का लालच नहीं रहा, जो अपने हिस्से की चीजे भी मेरे सुपुर्द कर दिया करती थी, वो आज मेरे डिज़ाइन्स चुरा कर मुझे ही धोखा देगी, ये दुनिया की सबसे अविश्वसनीय बात है.. !”
रूबी की बात पूरी हुई ही थी कि कमरे का दरवाज़ा खोल कर करुणा भीतर चली आई..
“रूबी, तुम्हे किसी से मिलवाना है !”
रूबी ने सवालिया नज़रों से करुणा की तरफ देखा….
“तुमसे मैंने कहा था न कुछ दिन पहले मुझे एक मेल आया था, जिसमे ये लिखा था कि कोई हमे धोखा दे रहा है.. !”
“हाँ.. !”
“उसी आदमी ने आज सारे सबूत मुझे मेल कर दिए है, और अब उन पक्के सबूतों के साथ हम इस धोखेबाज इंसान को पुलिस के हवाले कर सकते हैं !”
करुणा ने वहाँ मौजूद किसी की तरफ नजर नहीं घुमाई, वो सिर्फ रूबी से बात कर रही थी..
करुणा ने ऑफिस केबिन का दरवाज़ा खोला और पुलिस के दो आदमी अंदर चले आये, उन्होंने आते ही करुणा के इशारे पर भूषण को अपनी गिरफ्त में ले लिया..
“चलिए मिस्टर भूषण रॉय.. आपका खेल ख़त्म हो चुका है !”
भूषण सकपकाया सा चारों तरफ देख रहा था..
“कौन से सबूत है मेरे ख़िलाफ़.. आप लोग ऐसे मुझे अरेस्ट नहीं कर सकते.. रूबी मैं तुझे छोडूंगा नहीं.. मैं तेरे ख़िलाफ़ कोर्ट तक जाऊंगा !” भूषण चीख पड़ा
“मैंने क्या किया है भूषण…मेरे पास तो योगिता खुद चल कर आई थी, और उसी ने मुझे ये जानकारी दी कि कोई मेरे डिज़ाइन्स चुरा रहा। हालाँकि उसने मुझे थोडा देर से ये जानकारी दी, क्यूंकि बेचारी खुद पहले नहीं जानती थी…।
जैसे ही उसे पता चला उसने मुझे बता दिया..
लेकिन कोई तो ऐसा था जिसने पहली चोरी के बाद ही करुणा और मुझे मेल द्वारा सूचित कर दिया था, और मजे की बात ये हैं कि ये मेल्स हमें किसी भी ऑफिस के एम्प्लॉयी ने नहीं किया है !”
भूषण योगिता को खा जाने वाली नज़रों से घूर रहा था, उसे लग रहा था इस सब के पीछे योगिता ही है..
असल में इस सोच के पीछे एक गहरी बात छिपी थी…
किसी भी अमर्यादित और अनैतिक रिश्ते में शुरुवात कितनी भी मीठी क्यों न हो, रिश्ता ख़त्म हमेशा एक ज़हरीली कड़वाहट के साथ ही होता है..।
योगिता और भूषण के मामले में भी ऐसा ही कुछ था.. जब तक दोनों अपनी लालसाओं को एक दूसरे में पा नहीं गए थे, तब तक एक दूसरे के प्रति जो चाह जो समर्पण था वो एक दूसरे को पूरी तरह से पा लेने के बाद ज़रा कम होने लगा था..।
योगिता भूषण का किसी लड़की से बात करना सहन नहीं कर पाती थी, उस पर बात बात पर शक करती, झगड़ा करती।
वहीँ भूषण का असली मकसद रूबी के पास पहुंचना था, और उसके लिए उसने योगिता की ज़रूरतों को बखूबी पूरा कर दिया था।
और इसलिए वो सदा इस अकड़ में रहता कि योगिता उसे कभी नहीं छोड़ सकती..।
योगिता भले ही शारीरिक रूप रंग में अपने पति को भूषण से कमतर पाती थी, लेकिन नैतिकता, स्वभाव और आचरण में योगिता का पति दीपक भूषण से कहीं ज़्यादा सुयोग्य था..
और अब जैसे जैसी भूषण का ध्यान योगिता से हट कर दूसरी लड़कियॉं पर टिकने लगा था, योगिता को भूषण में कमियां ही कमियां नजर आने लगी थी…।
वो बात बात पर भूषण को ताना मार जाया करती, कभी उसकी तुलना दीपक से कर उसे कमतर बताया करती और इसी सब में उन दोनों के रिश्ते में कड़वाहट बढ़ती चली जा रही थी।
बीच में योगिता ने रिश्ता सुधारने की सोची भी, लेकिन पिछली शाम जो हुआ वो उनके कफ़न में आखिरी कील थी जो ठुक गयी थी..
योगिता को लगा भूषण उसे धोखा देकर डिंकी के साथ मौजमस्ती कर रहा है, और भूषण को अब लग रहा था योगिता रूबी के सामने भूषण का नाम फंसा कर उसे नौकरी से निकाल कर अपने नाजायज रिश्ते से मुक्त हो जाना चाहती है..
दोनों अपनी अपनी अटकले लगा रहे थे, लेकिन दोनों में से कोई नहीं जानता था कि इस सारे मामले के पीछे किसका हाथ है..
रूबी की बहन करुणा वापस बोल पड़ी..
“रूबी.. इनसे मिलों, इन्होने ही मुझे हमारे ऑफिस में चल रहे घोटालों के बारे में सबूत के साथ सब कुछ बताया.. !”
करुणा पलटी और दरवाज़े की तरफ देख कर आवाज लगा दी।
“अंदर आ जाइये.. !”
क्रमशः

भूषण का सच सबके सामने आ ही गया। योगिता जहां dinki को फसाना चाहती थी। वहां खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।
शानदार लेखन 👏👏👏👏👏
बहुत खूब, बहुत बढ़िया भाग👌👌👌चोर करे चोरी और पकड़ी ऐसे जाए 😂। करुणा को गद्दार कह रहा था उसे क्या पता वो रूबी की बहन निकली और चोर कैसे शोर मचा रहा है खुद को बेकसूर कह रहा।
योगिता को भी तो अब समझ आ ही गया होगा ना झूठ और फरेब की नीव पर टिका था इन दोनों का रिश्ता। योगिता अपने पति को धोखा दे रही थी और भूषण उसे, शुरू से झूठ और अंत तक झूठ, फरेब ही था इनके रिश्ते मे।ऐसे रिश्तो का कोई ठोर ठिकाना नहीं होता,,चलो आज योगिता भी समझ जायगी और भूषण का झूठ सामने आ गया।
आइये… माधव जी 😊माधव ही हैना… 🤔।
Koun hai ye?
Lagta Mr.hero aa gaye hain.
Superb fantastic part
Very very nice part 👌👌
बुरे का नतीजा हमेशा ही बुरा होता है कोई कितनी भी कोशिश कर ले झूठा को छुपाने की पर वह खुद आकर अपनी चुगली कर ही जाता है किस तरीके से योग्यता के मुंह से ही भूषण की सारी सच्चाई रूबी के सामने आ गई और रूबी ने अपना दिमाग चलाते हुए भूषण को पकड़ा है वह काबिले तारीफ है पर मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि ऑफिस में कोई और नहीं माधव ही आया है क्योंकि भूषण माधव के पीछे पड़ा था और उसे एक फाइल साइन करवानी थी तो शायद कुछ कनेक्शन हो माधव का इस ऑफिस से भी।
और डिकी की सच्चाई भी तो सामने लानी थी उसे कि वह लड़की मासूम है और उसके ही डिजाइंस चुराकर किसी ने रूबी के सामने पेश किए थे
अच्छा अपर्णा जी, pahle to aap mujhe ye bataiye ki aap kese ho. aajkal kahi busy ho kya aap mai aapse baat karna miss karti hu.pratilipi par to mai aapke touch me hi rahti thi khair khabar le leti thi but idhar mai samjh nahi pati ki aapse haal chal,kahani me deri ke liye mithe ulahne kaha kis platform par du.kahani me bada maza aaya Aaj,I m so sure ki ye mail apne Madhav babu ne hi bheja hai.
Nice part
बहुत सुन्दर रचना