अतिथि-32

अतिथि -32

   अब तक आपने पढ़ा…

  भूषण और डिंकी को एक साथ देख कर सौतिया डाह में जलती योगिता भूषण से बदला लेने के लिए मन ही मन डिंकी को झूठे तथ्यों के साथ फंसाने की चाल चलती है, और रूबी के सामने ये बात उठती है कि उसके लैपटॉप से जो डिज़ाइन्स चोरी हुए हैं, वो डिंकी ने चुराए है।
     और तब रूबी कुछ चौंकाने वाले खुलासे करती है, जिनमे सबसे पहला खुलासा ये होता है डिंकी के पास रूबी के लैपटॉप का एक्सेस ही नहीं है..।

उसके बाद वो अपने सबसे भरोसेमंद उन पांच लोगो के नाम बताती है जिनके पास उसके डिज़ाइन्स चुराने का मौका था.. ।
जिनमे से मिस्टर लाल उसके पिता के मित्र है जो उसके साथ ऐसा धोखेबाजी का खेल नहीं खेल सकते..
अगला नाम वो ज्योतिका का लेती है..

अब आगे….

” मेरी दूसरी सबसे मजबूत एम्पलाई है ज्योतिका !”

योगिता और भूषण दोनों उसकी तरफ देखने लगे.. डिंकी को ठीक से कुछ समझ में नहीं आ रहा था.. लेकिन वो इतना समझ गयी थी कि इस ऑफिस से कुछ बहुत महत्वपूर्ण दस्तावेज चोरी हुए हैं…
वो आंखे फाडे उन सबकी बातें सुन रही थी..
रूबी ने आगे बोलना शुरू किया..

“ज्योतिका से मैं तब मिली थी जब वो अपनी जिंदगी के सबसे ख़राब समय को जी रही थी..।
ज्योतिका को मैं उस मुलाकात के पहले एक बार एक सेमिनार में देख चुकी थी..
इंटरनेशनल डिज़ाइनर्स का एक सेमिनार दिल्ली में हुआ था, जिसमे मैं भी शामिल होने गयी थी। जहाँ दिल्ली के एक डिज़ाइनर स्कूल के कुछ विद्यार्थी भी अपने कॉलेज की तरफ से आये थे..।
ज्योतिका को पहली बार मैंने वहीँ देखा था..।

अपने काम में चुस्त ज्योतिका तीव्र बुद्धि की मलिका भी थी। उस छोटी उम्र में भी उसने अपने टीचर्स और क्लास ही नहीं वहाँ मौजूद लोगो पर भी अपनी छाप छोड़ दी थी..।
वहाँ उपस्थित लोग उससे प्रभावित थे, और मैं भी उनसे अछूती नहीं रह स्की थी..।

   वो दुबली सी लड़की जो हर किसी कि मदद के लिए तत्पर थी, मेरे दिल पर अपनी अमिट छाप छोड़ गयी थी.. ।
मुझे लगा था, ये लड़की एक न एक दिन भारत ही नहीं विश्व के डिज़ाइनर्स के बीच अपनी सफलता का परचम लहरा जाएगी..
उसकी उम्र और मेरी उम्र में कोई खास अंतर नहीं था..
मैं वहाँ रुक कर उससे बात करना चाहती थी, लेकिन वह हवा के झोंके सी आई और वैसे ही अपने ग्रुप के साथ वापस लौट गयी थी..

मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि दुबारा मैं उससे ऐसे मिलूंगी..
इस सेमिनार के लगभग दो तीन साल बाद मुझे कुछ लीगल कारणों से एक बार लखनऊ फेमिली कोर्ट में अपने वकील से मिलने जाना पड़ा…।

वहाँ अचानक मेरी नजर दूर एक बेंच पर बैठी ज्योतिका पर पड़ी और मैं ठिठक कर रह गयी…।

उसका उड़ा उड़ा सा रंग, बिखरे से बाल और बेतरतीब पहनावा देख, पल भर को मुझे मेरी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ कि ये वही ज्योतिका है, जिसके उस समय के कपड़ों और साजसज्जा पर उस सेमिनार में मौजूद हर लड़की फ़िदा हो चली थी..।
उसने तो साड़ी को भी ऐसे पहना था जैसे कोई विदेशी ट्रूसो हो..।

और आज उसी सुघड़ सलोनी लड़की के चेहरे पर मक्खियां भिनक रही थी..
मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसके पास जा बैठी..
लेकिन वो खुद में इतना खोयी थी कि उसने मेरी तरफ देखा तक नहीं…
उसके वकील ने दूर से उसे इशारा किया और वो उठ कर चली गयी.. उसकी सहेली वहाँ बैठी थी, मैं उसके पास खिसक गयी..
  मैंने उसी से ज्योतिका के बारे में पूछ लिया..

  ” ये ज्योतिका है न ?” उसकी सहेली ने मेरी तरफ देखा और गर्दन हिला दी..

“क्या हो गया इसे..ये तो अच्छी खासी थी.. मैं दिल्ली में मिल चुकी हूँ, लेकिन अभी ये मुझे पहचान भी नहीं पायी, ऐसा लग रहा है!”

“आपको ज्योतिका की कहानी नहीं पता है शायद.. !”

“नहीं.. नहीं पता ! क्या हुआ ?”

“ज्योतिका डिज़ाइनर बनना चाहती थी और इसके लिए वो मेहनत भी कर रही थी। उसके जैसी सिलाई कढ़ाई उसके साथ वालो में किसी की नहीं थी.. लेकिन फिर उसके जीवन में एक लड़का आया और वो उसके प्यार में पड़ गयी..
उसके साथ समय बिताने में वो खुद को भूलने लगी.. ज्योतिका उससे शादी करना चाहती थी, लेकिन ज्योतिका और उस लड़के के घर वाले तैयार नहीं थे..।

उन दोनों ने भाग कर शादी करने का निर्णय लिया, और एक दिन दोनों अपना घर छोड़ कर भाग गए…
दोनों के पास जब तक रूपये थे, दोनों वापस नहीं लौटे लेकिन रूपये ख़त्म होने के बाद उन्हें वापस आना पड़ा..।
  दोनों के ही घरवालों ने उन्हें अपनाने से इंकार कर दिया।
   ज्योतिका आज तक ससुराल नहीं गयी थी, न ही प्रकाश के घर वालो से कभी मिली थी ! लेकिन उसे इन बातों कि कोई चिंता नहीं थी..।

लेकिन जब पेट की भूख कलबलाई तब प्यार का भूत उतरने लगा..।
घर चलाने की, पैसे कमाने की जद्दोजहद शुरू हुई, तब ज्योतिका को महसूस हुआ कि उसका पति तो कुछ भी काम नहीं जानता..।
    शुरुवात में उसकी जिन बातों पर, जिन राजसी ठाठों पर वो रीझी जाती थी, अब वो आदतें उसका सरदर्द बनने लगी..।

कोई काम न करना, बस पड़े पड़े आदेश देना ही उसके पति का स्वभाव था..।
आखिर अपने हुनर को ज्योतिका ने जीविकोपार्जन का साधन बना लिया..
वो गली मोहल्ले की औरतों की साड़ियों में फाल लगाना, उनके ब्लॉउज सिलना, जैसे छोटे मोटे काम कर अपने गुजारे के लिए कमाने लगी..।
     लेकिन अभी भी ज़िन्दगी ने इम्तेहान लेना छोड़ा नहीं था..।
  
पहले पहल कभी कभार शराब पीने वाला प्रकाश अब अपनी फ़्रस्ट्रेशन दूर करने रोज पीकर आने लगा था..
पैसो की तंगी से परेशान होकर जहाँ ज्योतिका जीवन को सुधारने में लगी थी, वहीँ प्रकाश जीवन को बर्बाद करने में लग गया..। उनके आये दिन झगडे होने लगे और फिर एक सुबह प्रकाश ज्योतिका को बिना कुछ बताये गायब हो गया..।

ज्योतिका ने जब सुबह पूरे घर में कहीं भी प्रकाश को नहीं देखा तो उसने पूरा घर छान मारा, लेकिन उसे प्रकाश कहीं भी नहीं दिखाई दिया।
    वह घबराकर प्रकाश के फोन पर कॉल करने लगी, लेकिन उसका मोबाइल बंद आ रहा था। परेशान होकर ज्योतिका घर के बाहर इधर-उधर प्रकाश को तलाश करने लगी।
         बाहर चौक पर उसे प्रकाश का एक दोस्त मिल गया, जो अक्सर प्रकाश के साथ दारु पीने जाया करता था।
       ज्योतिका ने उससे पूछताछ शुरू की और उसने जो खुलासा किया वह सुनकर ज्योतिका के होश उड़ गये।
     उस आदमी ने बताया कि ज्योतिका को छोड़कर प्रकाश हमेशा के लिए अपने घर चला गया हैं। ज्योतिका आज तक कभी अपने ससुराल नहीं गई थी, उसने उसे लड़के से प्रकाश के घर का पता पूछा और वहां पहुंच गई।

           वहां जाकर उसे पता चला कि प्रकाश पहले ही शादीशुदा था। उसकी एक बीवी मौजूद थी।
    घर पर मौजूद प्रकाश के माता-पिता, बड़े भाई ने ज्योतिका को खूब खरी खोटी सुनाई और घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
        ज्योतिका की तबीयत बहुत खराब थी, उसका चौथा महीना चल रहा था। ज्योतिका की तबीयत बिगड़ गई, वह बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते हुए लखनऊ वापस लौट आई।

उसे जिंदगी में अब तक का सबसे बड़ा धोखा मिला था। वह अपने मायके भी नहीं जाना चाहती थी। रो सिसक कर वह अपने दिन काटने लगी। लेकिन ईश्वर अभी शायद उसे और भी तकलीफ देना चाहते थे। उसके दिन पूरे हुए और उसकी डिलीवरी हो गई।

   उसने एक छोटी सी प्यारी सी बेटी को जन्म दिया था, लेकिन पता नहीं क्यों किस्मत उससे रूठी हुई थी। उसकी बेटी के जन्म होते ही वह उसे लेकर अपने घर चली आई।
    उसका साथ देने के लिए उसके पास उसके चंद नेकदिल पड़ोसियों के अलावा कोई नहीं था..
     लेकिन उसने खुद ही अपने बच्चों को पालने का निर्णय लिया था..
   मुश्किल से महीना भर बीता था कि उसका पति अपनी माँ के साथ उसके घर चला आया!
     वो ज्योतिका के बच्चे को अपने साथ ले जाना चाहता था, उस की यह बात सुनकर ज्योतिका के होश उड़ गए!
..  वह किसी भी हाल में अपनी बेटी को उन्हें नहीं देना चाहती थी..
   
      अपनी सास की बातें सुनकर उसे मालूम चला कि प्रकाश की पहली बीवी के बच्चे नहीं थे और इसीलिए अब ज्योतिका के बच्चे को प्रकाश अपनाना चाहता था!
     लेकिन एक बार धोखा खा चुकी ज्योतिका अब दुबारा प्रकाश से धोखा नहीं खाना चाहती थी !       उसने उनके मुंह पर साफ मना कर दिया कि वह अपने बच्चे को उन्हें नहीं सौंपेगी।
     उस वक्त तो उससे लड़ झगड़ के प्रकाश और उसकी मां चली गई लेकिन हफ्ते भर के अंदर ही एक लीगल नोटिस ज्योतिका के मुंह पर आकर पड़ा।

  प्रकाश और उसके परिवार ने ज्योतिका की खस्ता माली हालत का वर्णन करते हुए बच्चे की कस्टडी खुद लेने की बात रखी थी, उस समय से ही ज्योतिका इस केस में उलझी हुई है..।
 
वह अपनी बच्ची को किसी कीमत पर प्रकाश के हवाले नहीं करना चाहती, वह गांव का वह घर देख चुकी थी जहां प्रकाश और उसकी पहली बीवी अपने परिवार के साथ रहा करते हैं…।

वो किसी भी कीमत पर अपने कलेजे के टुकड़े को प्रकाश के हवाले नहीं करना चाहती थी !”

यह सारी बातें ज्योतिका की सहेली के बताने के बाद   मुझे लगा मुझे ज्योतिका की मदद करनी चाहिए…
ज्योतिका उस वक्त भी फेमिली कोर्ट में अपने केस से जुडी चर्चा के लिए ही आई हुई थी..
मैं उसके पास पहुँच गयी.. वो मुझसे पहले भी मिल चुकी थी इस बात का उसे यक़ीन दिलाने में मुझे मशक्कत करनी पड़ी, क्यूंकि वो अपनी परेशानियों में इस कदर उलझी हुई थी कि मुझसे उसकी दिल्ली में मुलाकात हो चुकी है, वो इस बात को भूल चुकी थी..।

मैंने उसके सामने मदद की पेशकश रख दी..
वैसे भी वकील की फीस, घर के खर्चे के साथ अपनी छोटी सी गुड़िया की देखभाल के लिए उसका सिलाई का रुपया पूरा नहीं पड़ रहा था..
जब मैंने उसके सामने अपने साथ काम करने का प्रस्ताव रखा तो उसे इस बात पर पहले पहल विश्वास नहीं हुआ..
उस वक्त उसे अपना काम निपटाने की हिदायत देकर मैं उसे अपना कार्ड देकर निकल गयी..

अगले ही दिन वो मेरे ऑफिस चली आई.. मैंने उसे काम समझाया और बहुत जल्दी ही वो काम सीख गयी..
वो बहुत मेहनती और ज़िम्मेदार लड़की है.. पिछले दो सालों से वो मेरे साथ है और इसी बीच उसे जब भी रुपयों की ज़रूरत पड़ी, मैंने हमेशा उसका साथ दिया है।
  इसलिए मैं जानती हूँ वो मुझे कभी धोखा नहीं दे सकती..

अब बची करुणा…

कहानी का अगला चौंकाने वाला खुलासा अगले भाग में..


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कांति
कांति
2 months ago

मिस्टर लाल और ज्योतिका दोनों की मदद रूबी ने तब की जब वो सबसे मुश्किल वक्त से जूझ रहे थे। ऐसे में मदद करने वालों को शायद ही कोई धोखा दे।
रूबी योगिता के कारण शायद जान चुकीं हैं किसने उसे धोखा दिया।

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

रूबी एक business woman है, आए दिन हजारों लोगों से मिलना जुलना होता होगा उसका, कुछ अच्छे, कुछ बुरे लोगों से सामना होता होगा उसका और उसको भी अच्छे बुरे की पहचान तो हो ही गई होगी।
रूबी ने ज्योतिका को उसके सबसे बुरे दौर मे उसको सहारा दिया था और मुसीबत मे साथ देने वाला भगवान ही होता और ज्योतिका तो खुद बेचारी हालातों की मेरी है और रूबी ने सही कहा वो उससे दग़ा नहीं कर सकती।

मुझे तो योगिता पर हंसी आ रही अब तो वो बुरी तरह से फंसी।
लाजवाब भाग 👌👌👌🙏

Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Story is very critical n Imotional n typical condition in this part, waiting for the next part eagerly.

Alisha Goyal
Alisha Goyal
1 year ago

Aap story kyo nhi daal rahe

Rajendra Shakya
Rajendra Shakya
1 year ago

अतिथि पांच या छः भाग में ही खत्म होने वाली थी ऐसा आपने बताया था लेकिन ऐसा लगता है कि आपने मायानगरी और जीवनसाथी को लिखना बन्द कर दिया है हमें इनका भी बेसब्री से इंतजार है। कृपया इनको भी आगे बढ़ाए .…….
धन्यवाद …
🙏🙏🙏

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

लोगों को पहचानने का हुनर और हमारा सिक्स सेंस बहुत समय से हमारे साथ है और बाकी का उन्हें हम देखकर पहचान जाते हैं कि वह किस हद तक जा सकते हैं कौन कहां गिर सकता है और कौन कितना ऊपर उठ सकता है इसका अंदाजा भी हम लगा सकते हैं।
रूबी एक कामकाजी और अपने खुद के पैरों पर खड़े रहने वाली महिला है वह जानती है कि उसके एम्पलाइज में कौन कितना क**** है और कौन कितना अच्छा और बेचारी उसे डिकी को फसाने के चक्कर में योगिता ने जो प्लान रचा था वह कभी सफल नहीं हो पाएगा क्योंकि रूबी जानती है कि मुसीबत के समय में काम आने वाले लोगों के साथ कभी कोई धोखा नहीं करता और उसने अपने दो एम्पलाइज को खुद ही अपनी बातों से साफ कर दिया है कि वह दोनों ऐसे नहीं है अब बची करुणा ना उसके बारे में कोई एक अलग कहानी जरूर सुनने को मिलेगी

Arun Kumar
Arun Kumar
1 year ago

👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

Geeta Prasad
Geeta Prasad
1 year ago

Nice part👌👌

Poonam Aggarwal
Poonam Aggarwal
1 year ago

🥺🥺🥺👏👏👏👏

जागृति
जागृति
1 year ago

Very emotional and interesting part