अतिथि -31

अतिथि -31

  योगिता के दिमाग में क्या चल रहा था ये वही जानती थी… इस वक्त उसके अंदर जो कोहराम मचा था, जो दावानल जल रहा था, उससे जूझते हुए वो जली कुढ़ी जा रही थी..

भले ही वो खुद एक नाजायज रिश्ते में बंधी थी, लेकिन अपने और भूषण के रिश्ते को प्रेम की कसौटी पर वो आज तक खरा मानती आई थी, और कहीं न कहीं किसी भी तरीके से वो अपने इस प्रेम को जस्टिफाय भी करती आई थी..!
उसकी नजर में किसी परपुरुष से प्रेम संबंध रखना प्रेम का ही रूप था, लेकिन उसी पुरुष का किसी अन्य स्त्री से प्रेम कर लेना गहन पाप की परिधि में आ जाता था..।
पाप पुण्य का लेखा जोखा पूरी तरह व्यक्तिनिष्ठ तत्व है.. किसी के लिए जो पाप है वो किसी अन्य के लिए पुण्य हो जाता है !

ऑफिस में बैठी योगिता का पूरा ध्यान इस वक्त भूषण और डिंकी पर था..।
डिंकी हमेशा की तरह मुस्तैदी से अपना काम निपटा रही थी…
भूषण इस विचार में था कि, डिंकी माधव की करीबी दोस्त है, इसीलिए वो डिंकी से प्रगाढ़ता बढ़ा कर उसके ज़रिये माधव तक पहुंचना चाहता था..।

डिंकी अपनी टेबल पर सर झुकाये तन्मयता से कोई लिस्ट तैयार कर रही थी, कि भूषण उसके पास पहुँच गया और बड़ी आत्मीयता से उससे कुछ पूछने लगा..। डिंकी के लिए वो उसका सीनियर था, वो भी ऐसा जिसने आज तक तमीज से बात नहीं की, बस आज उसकी विनम्रता देख डिंकी भी उसके पूछे सवालों के जवाब देती जा रही थी..।

दूर बैठी योगिता के सीने में सांप लोट रहे थे..।

उसी समय अपनी सैंडल खटकाती रूबी चली आई.. सभी का अभिवादन स्वीकार करती वो आगे बढ़ते हुए योगिता के सामने ज़रा ठिठक कर रुकी और फिर आगे बढ़ गयी… उसकी आँखों के इशारे को समझ कर योगिता उसके पीछे से उसके केबिन में चली आई..

“बोलो योगिता, क्या बोल रही थी कल ?”

“रूबी, तुम कुछ दिनों से परेशान थी न!”

“हम्म थी तो ! क्यों क्या हुआ ?”

“मुझे मालूम चल गया है कि तुम्हारे साथ धोखा कौन कर रहा है ?”

“कौन ?” रूबी के माथे पर बल पड़ गए..

“भूषण और अनुराधा !”

“व्हाट ?”

“हाँ.. ये इतने मासूम से चेहरे वाली लड़की को कम न समझना.. इसके चेहरे के पीछे क्या छिपा है तुम नहीं जानती !”

“तुम बता दो. क्या छिपा है ?” रूबी को जैसे अब भी डिंकी के नाम पर यक़ीन नहीं हो रहा था..

“बहुत शातिर है ये लड़की.. इसे बस अपना कैरियर बनाना है किसी भी कीमत पर..।
इसे न तुम्हारे इस डिजानर बुटीक से कुछ लेना देना है, और न ही तुमसे..।
ये बस अपने लिए सबकुछ करना चाहती है..।”

“तुम सब कुछ अनुराधा के लिए बोल रही हो, और ये भूषण का क्या सीन है ?”

“भूषण भी उसके साथ मिला हुआ है..।
भूषण तो बस उसका एक मोहरा है, मुझे लगता है अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए अनुराधा भूषण को सीढी के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। भूषण के दिमाग को, उसके कॉन्टेक्ट्स को, इस्तेमाल करके अनुराधा अपना खुद का बुटीक बनाना चाहती है।
तुम्हारे हिडन फोल्डर से जो डिजाइन चोरी हुए हैं वह अनुराधा ने ही चुराए हैं!”

“लेकिन अनुराधा के पास कोई एक्सेस ही नहीं है..।
    वो तो मेरे अलावा सिर्फ भूषण और चार लोगो के पास ही है.. तो क्या तुम ये कहना चाहती हो कि मेरे सारे प्रीमियम डिजाइंस बिना पूछे भूषण ने चुराये है..।”

योगिता अपनी ही बात में फंस गई थी, उससे अब अपनी बात से पीछे हटते नहीं बन सकता था। वह सर झुका कर खड़ी हो गई। रूबी के दिमाग में खलबली मच गई थी।
टेबल पर जोर से हाथ मार कर वह अपनी जगह पर खड़ी हो गई..।

” मैंने कितना विश्वास किया था सब पर, और लोग ऐसे धोखेबाज निकलेंगे मैंने सोचा भी नहीं था। इस भूषण  को तो मैं कहीं का नहीं छोडूंगी…।”

” भूषण सिर्फ एक मोहरा है, असली चाल तो अनुराधा चल रही है!”

” एक 19-20 साल की लड़की अगर तीस साल के आदमी को अपनी उंगलियों पर नचा रही है तो उसमें उसे लड़की की ताकत है, और उस लड़के की बेवकूफी।
    कहीं ना कहीं भूषण भी इस सब में शामिल है। तुम उसकी दोस्त हो, उसने झूठ कहा है। लेकिन इसी बहाने कम से कम से ये बात मुझ तक पहुंची तो सही। भूषण कोई इतना भी मासूम नहीं है कि अनुराधा उसे अपनी उंगलियों पर नचा ले। मुझे समझ में आ गया है, इस सब के पीछे अनुराधा नहीं बल्कि भूषण है..।”

“अरे नहीं रुबी तुम गलत समझ रही हो भूषण की कोई गलती नहीं है..।”

“अगर भूषण की गलती नहीं है तो फिर उसने अनुराधा का साथ ही क्यों दिया…?”

योगिता का पासा उल्टा पड़ गया था। कहां तो वह पूरी तरह से डिंकी को फंसाना चाहती थी, और यह दिखाना चाहती थी कि डिजाइन चोरी होने के पीछे डिंकी है, लेकिन रूबी के दिमाग ने चुटकियों में हथेलियों पर चलती जूं सा सच्चाई को पकड़ लिया था..।

उसने खटाक से अपनी टेबल पर मौजूद बेल को बजा दिया.. उसके केबिन के बाहर तैनात चपरासी दौड़ता हुआ भीतर चला आया..

“भूषण और अनुराधा को अंदर भेजो !”

“जी !”

अगले ही पल डिंकी और भूषण रूबी कमरे में मौजूद थे। डिंकी का चेहरा हमेशा की तरह प्रफुल्लित था, उसके चेहरे पर किसी तरह का भय और आशंका नजर नहीं आ रही थी। जिसे देखकर रूबी को पल भर के लिए लगा भी की क्या यह निर्दोष चेहरा किसी बड़ी चोरी में शामिल हो भी सकता है? लेकिन दूसरी तरफ भूषण के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी। वह योगिता के सुबह से चल रहे तेवर देखकर समझ गया था कि योगिता उससे बदला लेने का कोई उपाय कर रही है। रूबी के केबिन के अंदर भूषण ने योगिता की तरफ देखा और आंखों की आंखों में माफी सी मांगने लगा। योगिता की आंखों से अंगारे बरस रहे थे। उसने हाव भाव से स्पष्ट कर दिया कि भूषण की गलती माफी के लायक नहीं है।
    और उन दोनों की इस आंख मिचौली को देखती बैठी रूबी ने एक गहरी सी सांस भरी और टेबल पर जोर से हाथ मार दिया।
    उसके इस व्यवहार से तीनों के तीनों खड़े रह गए। अनुराधा ने हीं आगे बढ़कर पूछ लिया

“क्या हुआ मैम… ? आपने याद किया ?”

“हम्म… वैसे मेरी कंपनी के रूल्स में है कि मेरा कोई भी एम्पलाई मुझे तीन महीने का नोटिस दिए बिना काम नहीं छोड़ सकता। अगर कोई काम छोड़ता है, तो उसे तीन महीने की अपनी सैलरी मुझे पे करनी होगी। इसके अलावा मैं खुद भी अपने किसी एंप्लॉय को बिना नोटिस दिए नहीं निकाल सकती।
अगर मैंने बिना किसी पुख्ता कारण के अपने किसी एंप्लॉय को नौकरी से अचानक निकाला तो मुझे उसका हर्जाना देना होगा। लेकिन मेरे पास कोई स्ट्रांग रीजन है तो मैं अपने एम्पलाइज को निकाल सकती हूं। और इस वक्त मेरे पास पूरे सबूत है कि मेरे प्रीमियम डिजाइंस मेरे लैपटॉप से चोरी हुए हैं, और सिर्फ चोरी ही नहीं हुए, उन डिजाइंस को तैयार करके मार्केट में क्लाइंट्स से बातचीत करके भेजा भी गया है। मैने डिजाइंस का जो रेट तय किया था, उसे दुगुने दामों पर मेरे ही क्लाइंट्स को मेरी अनुमति के बिना बेचा गया है.. !”

रूबी की यह बात सुनते ही वह तीनों चौंक पर उसे देखने लगे। योगिता अब तक इस बारे में कुछ भी नहीं जानती थी। उसे बस भूषण ने इतना बताया था कि भूषण ने रूबी के लैपटॉप से उसके डिजाइंस चुराए हैं, लेकिन यह नहीं बताया था कि रूबी के ही क्लाइंट्स से वह डील भी कर चुका है। योगिता चौंक पर भूषण की तरफ देखने लगी। भूषण ने अपनी जेब से रुमाल निकाला और अपने माथे पर छलक आया पसीना पोंछ लिया।
रूबी भूषण को देखते हुए वापस कहने लगी…

“मेरे डिजाइंस चुरा कर बेचने वाले को लगा था कि मेरे क्लाइंट्स सिर्फ अच्छे डिजाइंस और पैसों के भूखे हैं।लेकिन ऐसा नहीं है।
     हो सकता है मैंने ईमानदार एम्पलाइज नहीं कमाए हैं, लेकिन ईमानदार क्लाइंट्स जरूर कमाए हैं।
        जैसे ही मेरे डिजाइन मेरे रेट्स से अलग रेट्स पर मार्किट में लांच हुए मेरे क्लाइंट्स ने मुझे तुरंत इत्तला कर दी थी…।
क्लाइंट्स के बताने पर मेरे होश उड़ गए थे, मुझे लगा इतने सारे भरोसेमंद एम्पलाइज के होते मेरे डिजाइंस चोरी कैसे हो सकते हैं। मेरे लैपटॉप का एक्सेस मेरे ऑफिस में कुल पांच लोगों के पास था, भूषण योगिता मिस्टर लाल ज्योतिका और करुणा..।

मैं सोच में पड़ गई कि इन पांचो में से किसने मेरे डिजाइंस चुरा कर बेचे हैं। लेकिन मेरे लिए भी सोचना और इसकी तह तक पहुंच पाना बेहद मुश्किल था। और मैं यही सोच रही थी कि कैसे इस सच्चाई का पता लगाऊं… ।

    क्यूंकि इन पाँचो पर मैं खुद से ज्यादा विश्वास करती थी। मिस्टर लाल मेरे पिता के पुराने और गहरे दोस्त रहे हैं।
      इस बुटीक को खोलते समय उन्होंने ही मुझे फंड दिया था, और उनके साथ ही जुड़कर मैंने काम शुरू किया था। मुझे काम सीखाने वाले मेरे अग्रणी गुरु रहे हैं वह..।
यह बात और है कि अपने बिजनेस से रिटायरमेंट लेने के बाद जब उनके बेटों ने उन्हें घर से बेदखल कर दिया और वह पाई-पाई के मोहताज हो गए, तब मैंने उन्हें अपने साथ काम में जोड़ लिया था।
      मैंने उस वक्त उनकी मदद की थी, जब वह हर तरफ से हताश हो चुके थे। वैसे तो मैं हर महीने एकमुश्त रकम उन्हें भेज सकती थी, लेकिन उनका  स्वाभिमान इस बात के लिए उन्हें इजाजत नहीं देता और इसीलिए मैंने उन्हें अपने साथ काम करने के लिए जोड़ लिया…

    अब ऐसे में मैं सच में पड़ गई कि जिस इंसान के बुढ़ापे के वक्त मैंने उनकी मदद की थी, क्या वह मुझे धोखा दे सकता है ?
   मेरा मन मानने को तैयार नहीं था कि मिस्टर लाल मुझे धोखा देंगे, और आज मैं सही साबित हुई..
     उन्होंने मुझे धोखा नहीं दिया!
दूसरी मेरी सबसे मजबूत एम्प्लोयी है ज्योतिका…

बाकी के राज अगले एपिसोड में… 

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कांति
कांति
2 months ago

योगिता का प्लान पूरी तरह फेल हो गया। कहां वो बस अनुराधा को फसाना चाहती थी। कहां भूषण का राज खुल गया।
अब नौकरी से किसे निकाला जायेगा। भूषण या अनुराधा

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

झूठ कितना भी सफाई से बोला गया हो पर सच सौ फेर डालकर भी सामने आ ही जाता, योगिता..ने सोचा भी नहीं होगा कि वो क्या कर गई और डिंकी को फंसाते फंसाते भूषण के लिए गड्डा खोद लिया उसने और वो चोर..भूषण..अब तो गया काम से।
रूबी की बातों से लग रहा रूबी बहुत सच्चे और साफ मन की है और हो सकता है वो योगिता और भूषण की साजिशों को समझ जाए।
बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌👌👌👌

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

बिल्कुल सही कहावत है यह कि झूठ के पांव ज्यादा बड़े नहीं होते और यह बात भी बिल्कुल सही है कि अब ज्यादा समय तक भूषण और योग्यता की हरकतें चुप नहीं पाएंगे रूबी से रूबी इतनी बेवकूफ नहीं है जो ऐसे ही इतना बड़ा कारोबार चल रही है कुछ तो दिमाग होगा उसके अंदर और वह पहले से ही इन सब चीजों का पता लग रही थी अब तो हिंट मिलने के बाद उसके दिमाग में सारी कहानी साफ हो ही गई होगी।
बेचारी डिकी को फसाने का इरादा लिया योगिता को अब पता चल जाएगा कि किसी भी मासूम को ऐसे फसाने से कुछ नहीं होता उसका खुद का पास आओ उल्टा पड़ गया है और अब वह अपनी ही बिछाई जाल में फंस जाएगी अपने प्रेमी के साथ।
अब आगे यह देखना है की कहानी योग्यता कुछ ऐसा ना कर दे जिस दिन की को किसी तरीके का नुकसान हो

Rashmi Hasija
Rashmi Hasija
1 year ago

Yogita bhi fasegi or bhushan to fas hi gaya

Poonam Aggarwal
Poonam Aggarwal
1 year ago

😬😬😬😬🧐🧐🧐🧐👍👍👍

Raniya Memon
Raniya Memon
1 year ago

Sahi huva…. Yogita ki chal ulti pad gayi…. Ab aage ke parts ka besabri se intezar karte ham pathak aapse iltija karte he ki jaldi se bataiye ki aage kya huva…. Camr wait

Kalpana
Kalpana
1 year ago

Nice part next part waiting mem

Aruna
Aruna
1 year ago

👌👌👌👌👏👏👏👏👏 please next part jaldi send kijiyega Dr. Sahiba

Deepa verma
Deepa verma
1 year ago

अरे मन ही नहीं भरा और भाग खत्म हो गया।आज तो भूषण और योगिता अच्छे फंसे।अच्छा हुआ रूबी का दिमाग इतना तेज़ है।

Nisha
Nisha
1 year ago

Achha hua isi bahane dono ki chori pakdi gayi aur dinki sahi hai uska kuch nahi bigdega