मायानगरी -2 भाग -13

मायानगरी -2 भाग -13

    सबरवाल परिवार एक दूसरे के साथ एक बार फिर सामान्य हो गया..
परिवार के मुखिया वेदांत के पिता वापस अपने राजनैतिक कार्यों में लग गए..।
टिकट आबंटन के बाद चुनाव का प्रचार प्रसार तेज़ी से शुरू करने का समय आ गया था  ….

भुवन भी उनकी मदद के लिए जुट जाना चाहता था, लेकिन वेदांत उसे जाने नहीं देना चाहता था..
बावजूद भुवन वेदांत को मनाने में लगा था..

“समझा करो वेद.. ताऊ जी को हमारी ज़रूरत है !”

“जाइये, आपको हम कुछ नहीं समझा सकते, या शायद आप समझना ही नहीं चाहते… आपमें और पार्टी दफ्तर के नौकरो में कोई अंतर नहीं है भुवन भाई.. ।
हम आपको इस तरह जूझते नहीं देख सकते.. ।

अरे उन नौकरो की स्थिति भी आपसे कहीं ज्यादा अच्छी है, उन सबको उनके काम के बदले एक मोटी तनख्वाह, चार वक्त का खाना और रहने की जगह तो मिलती है। लेकिन आप तो मुफ्त में बस कोल्हू के बैल की तरह घिसे जा रहे हैं, जिसकी किसी को परवाह नहीं है।

इस घर के लोग भी दो दिन सुबकने के बाद सब कुछ भूल कर बैठ गए लेकिन हम नहीं भूल सकते.. ।”

“अच्छा तो यही कारण है जो तुम पापा जी से बात नहीं कर रहे.. ?”

गौरी भुवन के कमरे के बाहर खड़ी सब कुछ सुन रही थी वह वेदांत को टोकते हुए भीतर चली आई, और वेदांत  चौक कर उसे देखने लगा..

“तुमसे किसने कहा कि हम बाबूजी से बात नहीं कर रहे।”

“किसी के कहने की क्या जरूरत, हमे सब कुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा है..।
       देखो वेद, राजनीति से जुड़ी यह सारी औपचारिकताएँ मैं नहीं समझती ।
   मैं नहीं जानती कि पापा जी ने ऐसा निर्णय क्यों लिया, लेकिन मन के भीतर एक आस है।
      पता नहीं क्यों, लेकिन अब भी ऐसा लग रहा है कि पापा जी जो भी कर रहे हैं, वह भुवन भैया के लिए ही कर रहे हैं.. ।”

“तुम्हारे ससुर है ना, तुम्हारी आंखों पर उनकी अच्छाई का नकली चश्मा चढ़ा हुआ है तुम नहीं जानती कि वह.. “

“जानती हूं! मैं भी बहुत कुछ जानती हूं, और समझती भी हूं कि राजनीति के कीचड़ में अगर उतरेंगे तो खुद पर भी कीचड़ के छींटे आएंगे ही।
       बस इन राजनेताओं में अंतर इतना ही होता है कि किसी की कमीज किसी दूसरे की कमीज से थोड़ी सी ज्यादा सफेद होती है। और बाकी लोगों की तुलना में देखा जाए तो पापा जी की कमीज बहुत बेदाग़ है…।”

“गौरी सही कह रही है, अभी तुम खामख्वाह परेशान हो रहे हो, और सुनो आज नहीं तो कल हमें दफ्तर जाना ही होगा।
       हम वहां के लड़कों पर पूरी तरह से भरोसा नहीं कर सकते। वैसे भी अब ताऊजी की रैलियां शुरू होंगी। ढेर सारे बैनर्स बनवाने हैं, लड़कों को जमा करना है।
जहां-जहां उनके भाषण होंगे वहां पर भीड़ इकट्ठी करनी है।
          इसके अलावा जो सबसे बड़ा काम हमें करना है, वह है फिलहाल पैसे जमा करना। शहर के रईसों के पास जाना है, बड़े-बड़े फर्म्स में जाना है।
    सबसे डोनेशन मांगना है। हमारे पास काम की कमी नहीं है, और इस वक्त तुम हमें बार-बार छुट्टी लेकर घूमने जाने के लिए कह रहे हो, जो हमारे लिए संभव नहीं.. “

भुवन अपने मन की बात कह रहा था कि उसका फोन बजने लगा। उसके ताऊ जी का नंबर उसके मोबाइल पर डिस्प्ले हो रहा था। भुवन ने फोन उठा कर वेदांत की तरफ दिखा दिया, वेदांत ने गुस्से में मुंह फेर लिया और भुवन ने फोन उठा लिया..

“कहाँ हो भुवन? तुरंत ऑफिस पहुंचो, बहुत सारे काम है। बहुत छुट्टी मना ली, आओ वापस.. ।”

“जी ताऊ जी… पहुंच रहे हैं… !”

भुवन ने वेदांत की तरफ देखा, वेदांत की आँखों में अब भी नाराजगी झलक रही थी…
गौरी ने वेदांत के कंधे पर हाथ धर दिया….

“जाने दो उन्हें, वो बिना काम किये मानेंगे नहीं ! उनकी तकलीफ को भी समझो वेद..
तुम्हारी ज़िद अपनी जगह सही है, तो वो भी अपनी जगह गलत नहीं !”

वेदांत सर झुकाये चुपचाप बैठा रहा..

“भुवन भाई आप ही हमें अस्पताल छोड़ देंगे क्या ?”

“हाँ चलो.. !” उन दोनों ने वेदांत की तरफ देखा..

“अरे अब मुस्कुरा भी दो छोटे नवाब !” भुवन ने वेदांत का चेहरा अपनी तरफ घुमा कर कहा..
वेदांत भुवन के गले से लग गया..

“पता नहीं आप किस मिट्टी के बने हैं भुवन भाई !”

“उसी मिट्टी के जिसके तुम बने हो.. पागल लड़के !”

भुवन और गौरी निकलने लगे और वेदांत भी उन लोगो के साथ हो गया..
गौरी को अस्पताल में उतार कर वो दोनों दफ्तर की तरफ निकलने लगे कि  वेदांत का कोई दोस्त दूर से हाथ हिलाता दिख गया और भुवन को बता कर वेदांत उससे मिलने चला गया..
भुवन ने गौरी को रोक कर अपने मन की बात कह दी..

“कुछ देर में हम वापस लौट कर आएंगे !” भुवन ने गौरी से कहा

“ठीक है.. मेरे लायक कोई काम ?”

“मढ़रिया का अपॉइंटमेंट लेकर रखना, अगर हो सके तो !”

“हो जायेगा, आप चिंता न करे !” गौरी ने मुस्कुरा कर कहा और वहाँ से सीधे मढ़रिया के केबिन की तरफ बढ़ गयी..
उतनी देर में वेदांत भी चला आया..
आते ही वो गाड़ी में बैठा और भुवन ने गाड़ी आगे बढ़ा दी..

दफ्तर में हर जगह आज सीसीटीवी कैमेरा का काम फैला पड़ा था..
वेदांत ने एक लड़के को रोक कर पूछ लिया..

“कैमेरा तो पहले ही लगे हुए थे, फिर वापस इनकी क्या ज़रूरत पड़ गयी ?”

” मंत्री जी कहिन है कोनो स्थान खाली न छूटे, चप्पा चप्पा पर सीसीटीवी नजर रखा रहे !”

“हम्म.. ये बाबूजी के दिमाग में भी जाने क्या तिकड़म चलती रहती है.. !”

भुवन अंदर अपने केबिन में पहुँच चुका था.. उसके लड़के उसी का इंतज़ार कर रहे थे..!
उन्हें थोडा बहुत बता कर वो तुरंत अपने ताऊ जी के ऑफिस पहुँच गया ..
उन्होंने बड़े उद्योगपतियों व्यापारियों की लिस्ट उसके हाथ में रख दी…

“इन सभी से जाकर मिल लो .. ये लोग हमेशा से हमारी पार्टी को तगड़ा डोनेशन देते रहे हैं, इस बार भी देंगे !”

“जी ताऊ जी ! और कुछ ?”

“ये बैनर की लिस्ट है इसे भी निकलवा लो.. हर क्षेत्र में लगभग पांच छह सौ बैनर लगेंगे… ध्यान रखना इस बात का !”

“जी अच्छी बात !”

भुवन पलट कर निकलने लगा कि मंत्री जी ने उसे टोक दिया..

“भुवन मन में कोई बात न रखना….
तुम्हारी जगह उन नेता जी को टिकट देने के पीछे का एकमात्र कारण यही था कि वो राजनीति में अनुभवी व्यक्ति रहे हैं..।
     इतने सालो की सेवा का परिणाम उन्हें मिलना ही चाहिए, फिर ये भी समझ लो कि ये उनका अंतिम ही अवसर है, पचास पार कर चुके हैं.. ।
अगले चुनाव तक उनका जोश, कार्यक्षमता सभी कुछ तो प्रभावित हो चुका होगा…।
तुम तो तीस के भी नहीं हुए हो…।
युवा हो अभी तुम्हारे सामने सारा जीवन पड़ा है..।
इन पांच सालो में थोडा और मंज जाओगे, तब अगली दफा तुम्हे पूरे बाहुबल के साथ टिकट दिलवाएंगे..।
हमारी गद्दी के हक़दार तुम्ही हो, लेकिन अभी थोडा सा धैर्य रखने का समय है…।

लम्बा जीवन पड़ा है तुम्हारे सामने, अभी जी तोड़ मेहनत कर लो, बाद में सब मलाई ही मलाई है !”

भुवन ने “जी ताऊ जी” के अलावा एक शब्द नहीं कहा और वहाँ से बाहर निकल गया…

उसके पास वाकई काम की कमी न थी..
वो अपने लड़को को अलग अलग काम बताता चला गया.. वेदांत उसकी फुर्ती और तुरंत निर्णय लेने की क्षमता से चकित था..।

कब शहर के किस क्षेत्र में मंत्री जी का कार्यक्रम रखा जायेगा, कहाँ रैली का आयोजन होगा, कहाँ भीड़ इकट्ठी करनी है..?
कहाँ से बैनर तैयार होंगे?  कब किस नव निर्माण की नींव धरने मंत्री जी का फीता काटने का प्रोग्राम होगा, सब कुछ उसने चट पट तैयार कर के रख दिया..।

अलग अलग दिशाओँ में लड़को को दौड़ा कर वो कुछ दो चार गणमान्य लोगो से मिलने निकलने लगा..

वेदांत भी उसके साथ हो लिया..

“जानते हो हम सबसे पहले कहा जा रहे हैं वेद ?”

“कहाँ ?”

“तुम्हारे ससुराल !”

“मतलब ?”

“मतलब मायानगरी के सीईओ डॉक्टर मढ़रिया से मिलने !”

“उनसे क्यों ?”

“मालदार आदमी है.. खूब रुपया कमाया है उसने.. ताऊ जी से पहले ही वादा कर रखा था कि पार्टी फंड के लिए मोटा चंदा देगा..
उसके बदले में उसे कुछ इक्विपमेंट्स के लिए पास चाहिए ! वो ताऊजी दिलवा देंगे…”

“हम्म, बाबूजी भी कोई काम सीधा कर लें, ये संभव ही नहीं !”

भुवन हल्के से मुस्कुरा उठा..

“सुना है आज मढ़रिया की शादी भी है !”

इस बात को सुन वेदांत चौंक कर भुवन को देखने लगा..

“इतना यंग है कि अभी शादी कर रहा !”

“दूसरी शादी है !”

“ओह्ह.. पहली वाइफ ?”

“सुना है किसी असाध्य रोग की भेंट चढ़ गयी थी.. !” 
उन दोनों को अस्पताल परिसर में देख गौरी उनके पास चली आई..।

उसके हाथो में खाने का पैकेट था..
उसी ने उन दोनों की बात सुन अपना जवाब दिया था, जिसे सुन वेदांत सवालिया नजरो से उसे देखने लगा..

“क्या हुआ मढ़रिया सर की कहानी जाननी है ?”

.”हम्म.. !”

“ठीक है बताती हूँ.. पहले मेरे साथ आओ !”

गौरी उन लोगो को साथ लिए मेडिकल जनरल वार्ड की तरफ बढ़ गयी..

क्रमशः

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Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Verynice and Fantastic n Fabulous part Bhuvan saf dil ka Vanda hai,lekin Vedant ye sub bardast nahi kar pa raha hai,Waiting for the next part.

Geeta sidpara
Geeta sidpara
1 year ago

Very very nice part 👌👌

Preeti Gupta
Preeti Gupta
1 year ago

As always superb… 〽️〽️👏

seema Kawatra
seema Kawatra
1 year ago

वेदांत के मन में भुवन के लिए प्यार सम्मान सुकांत भैया से कम नही है
और भुवन ने उस बिगड़े नबाब को सही रहा दिखाई
ताऊ जी खुद राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी है हर दांव पेंच वह ज़्यादा समझते है…
भुवन को राजनीति में उतारने का अभी सही वक़्त उन्हें नहीं लगा होगा
और हर जगह जो केमरा फिट हो रहा है हो सकता है यह भुवन को उसके सुनहरे भविष्य की ओर ले जाए

Dhara kundaliya
Dhara kundaliya
1 year ago

Bahut bahut bahut bahut hi badhiya story 😍 awesome part 💓 superb story 😍

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

अपना वेदांत तो बेचारा सबकी फ़िक्र करता तो अपने भाई का दुख कैसे नहीं समझता पर भुवन तो भुवन है अपना दुख,नाराजगी साइड रख चल पड़ा अपने ताया जी के पार्टी ऑफिस मे काम करने।गोरी का कहना भी सही है राजनीति एक कीचड है और कीचड मे उतरेंगे तो छींटे आप पर भी पड़ेंगी।सच मे राजनीति बहुत गंदा खेल है।चलो अब भुवन निकल पड़ा अब डोनेशन इकठ्ठी करने और अब हम भी देंगे राजनीति के अनोखे खेल आपकी कलम के जादू से 🙏।
ये भाग भी बहुत बेहतरीन 👌👌👌🙏।

Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Very interesting and Fantastic n Fabulous n Excellent part.

Nisha
Nisha
1 year ago

Super part mam 👌👌

Seema garg
Seema garg
1 year ago

वेदांत अपने पापा को समझ नहीं पा रहा ठीक से लेकिन उन्होंने भुवन को सब अच्छे से समझा दिया।

Meenakshi Sharma
Meenakshi Sharma
1 year ago

Nice part 👍❤️😍